SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF ULLAS MELA FOR DECLARATION OF CHANDIGARH AS FULLY LITERATE UNDER NAV BHARAT SAAKSHARTA KARYAKRAM AT CHANDIGARH ON MARCH 10, 2026

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  • 2026-03-10 13:40

‘उल्लास मेला’ के अवसर पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 10.03.2026, मंगलवार

समयःसुबह 11:00 बजे

स्थानः चंडीगढ़

नमस्कार!

आज का दिन चंडीगढ़ के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होने वाला है। आज हम सब मिलकर एक ऐसी उपलब्धि का साक्षी बन रहे हैं जो न केवल हमारे केंद्र शासित प्रदेश के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। आज मुझे अत्यंत हर्ष एवं गर्व के साथ यह साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है कि चंडीगढ़ ने 99.93 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल करते हुए पूर्ण रूप से साक्षर केंद्र शासित प्रदेश का गौरवशाली दर्जा प्राप्त कर लिया है।

चंडीगढ़ ने यह उल्लेखनीय सफलता ‘‘उल्लास - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’’ के अंतर्गत प्राप्त की है। चंडीगढ़ का साक्षरता प्रदर्शन न केवल कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से बेहतर है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में निर्धारित लक्ष्य, पूर्ण साक्षरता के 95 प्रतिशत मानक से भी कहीं अधिक है। 

‘’उल्लास - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’’ के अंतर्गत हमने जो यात्रा प्रारंभ की थी, आज वह अपने सुनहरे पड़ाव पर पहुंच गई है। जब हमने यह अभियान शुरू किया था, तब चंडीगढ़ की साक्षरता दर 93.7 प्रतिशत थी। आज हम 99.93 प्रतिशत के आंकड़े पर खड़े हैं। यह केवल संख्याओं का खेल नहीं है, यह 15 हजार 556 नागरिकों की आकांक्षाओं की कहानी है, जिन्होंने शिक्षा का दीप जलाने का साहस किया। इनमें से 14 हजार 711 ने परीक्षा उत्तीर्ण कर यह सिद्ध कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

मुझे विशेष रूप से यह बताते हुए असीम प्रसन्नता है कि हमारी महिला साक्षरता दर 90.7 प्रतिशत से बढ़कर 99.89 प्रतिशत हो गई है। यह 9 प्रतिशत की वृद्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि हजारों माताओं, बहनों और बेटियों के सशक्तिकरण की गाथा है। यह उपलब्धि लैंगिक समानता की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।

यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं, बल्कि पूरे चंडीगढ़ की सामूहिक चेतना और संकल्प का परिणाम है। 

मैं साधुवाद देता हूं, शिक्षा विभाग के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों को, जिन्होंने दिन-रात परिश्रम कर इस अभियान को सफल बनाया। उन समर्पित शिक्षकों और स्वयंसेवकों को, जिन्होंने अपना अमूल्य समय और ऊर्जा इस महायज्ञ में अर्पित की। गैर-सरकारी संगठनों एवं सामाजिक संस्थाओं का, जिन्होंने जमीनी स्तर पर काम करते हुए निरक्षरों तक पहुंचने में मदद की और सबसे महत्वपूर्ण, उन 15 हजार 556 साहसी नागरिकों का, जिन्होंने उम्र और परिस्थितियों की परवाह किए बिना शिक्षा प्राप्त करने का निर्णय लिया।

यह उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में निहित ‘‘सर्वजन साक्षरता एवं आजीवन अधिगम’’ के उद्देश्यों के अनुरूप है। हमने केवल अक्षर ज्ञान नहीं कराया, बल्कि हमारे नागरिकों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया है। आज जो 845 नागरिक अभी भी इस यात्रा में शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें भी हम जल्द ही साक्षर बनाने का संकल्प लेते हैं। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक चंडीगढ़ का अंतिम नागरिक भी शिक्षित नहीं हो जाता।

मैं आपको बताना चाहता हूं कि सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ‘उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’’ (ULLAS - Understanding of Lifelong Learning for All in Society) नामक एक केंद्र प्रायोजित योजना प्रारंभ की गई है। यह कार्यक्रम, जिसे पहले वयस्क शिक्षा कहा जाता था, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप वित्त वर्ष 2022 से 2027 तक लागू किया जा रहा है।

इस योजना के पाँच प्रमुख घटक हैं, मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता, महत्वपूर्ण जीवन कौशल, बुनियादी शिक्षा, व्यावसायिक कौशल और सतत शिक्षा। इसका उद्देश्य नागरिकों को केवल पढ़ना-लिखना सिखाना ही नहीं, बल्कि उन्हें जीवनोपयोगी ज्ञान और कौशल से भी सशक्त बनाना है।

मेरा मानना है कि साक्षरता यात्रा का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि नवसाक्षर नागरिक निरंतर सीखते रहें और अपने कौशल को विकसित करें। वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता और जीवन कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाए। आजीवन अधिगम की संस्कृति को समाज में स्थापित किया जाए और आने वाली पीढ़ियों में शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाया जाए।

देवियो और सज्जनो,

शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं है; यह व्यक्ति के जीवन को दिशा देने वाली वह शक्ति है जो समाज और राष्ट्र के विकास की आधारशिला बनती है। शिक्षा व्यक्ति को जागरूक बनाती है, उसे आत्मनिर्भर बनाती है और उसे अपने अधिकारों तथा कर्तव्यों के प्रति सजग बनाती है। यही कारण है कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण आधार उसकी शिक्षित और जागरूक जनसंख्या होती है।

भारत की प्राचीन परंपरा में भी शिक्षा को अत्यंत उच्च स्थान प्राप्त रहा है। हमारे प्राचीन गुरुकुल प्रणाली में शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं थी, बल्कि जीवन मूल्यों, नैतिकता, अनुशासन और समग्र व्यक्तित्व विकास पर आधारित थी। तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालय उस समय ज्ञान के वैश्विक केंद्र हुआ करते थे, जहाँ विश्व के विभिन्न देशों से विद्यार्थी अध्ययन करने आते थे। यह हमारी उस महान परंपरा का प्रमाण है, जहाँ शिक्षा को केवल रोजगार का साधन नहीं बल्कि जीवन को समृद्ध बनाने का माध्यम माना गया।

आज स्वतंत्र भारत में भी शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला मानते हुए उसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दृष्टि से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक ऐतिहासिक, व्यापक और दूरदर्शी पहल के रूप में सामने आई है। इस नीति का उद्देश्य भारत की शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, लचीली, आधुनिक, कौशल-आधारित और भविष्य उन्मुख बनाना है, ताकि प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सके।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 केवल शिक्षा की संरचना में बदलाव का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह भारत की ज्ञान परंपरा और आधुनिक आवश्यकताओं के समन्वय का एक सशक्त प्रयास भी है। यह नीति विद्यार्थियों के समग्र विकास, रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच, नवाचार और व्यावहारिक कौशल को बढ़ावा देने पर विशेष बल देती है, ताकि वे केवल परीक्षा पास करने तक सीमित न रहें, बल्कि जीवन की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें।

इस नीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण लक्ष्य सभी नागरिकों के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता सुनिश्चित करना है। यह माना गया है कि पढ़ने, लिखने और गणना करने की मूलभूत क्षमता किसी भी व्यक्ति की शिक्षा यात्रा की मजबूत नींव होती है। यदि प्रारंभिक स्तर पर ही यह आधार सुदृढ़ हो जाए, तो आगे की शिक्षा अधिक प्रभावी और सार्थक बन जाती है।

इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा विद्यालयी शिक्षा से लेकर वयस्क शिक्षा तक अनेक पहलें की जा रही हैं, ताकि समाज का कोई भी वर्ग शिक्षा से वंचित न रहे। यह प्रयास केवल ज्ञान के प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक जागरूक, सशक्त और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है, जो भारत को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

देवियो और सज्जनो,

आज जब हम चंडीगढ़ को पूर्ण साक्षरता तक पहुँचने की इस उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, तब हमें यह भी याद रखना चाहिए कि साक्षरता केवल पढ़ना और लिखना सीख लेने तक सीमित नहीं है। सच्ची साक्षरता वह है जो व्यक्ति को सोचने, समझने और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करे।

शिक्षा व्यक्ति को आत्मसम्मान देती है, उसे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाती है और उसे समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है। एक शिक्षित समाज ही लोकतंत्र को मजबूत बना सकता है और समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

आज भारत ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। जब हम स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेंगे, तब हमारा लक्ष्य एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो आर्थिक रूप से समृद्ध, सामाजिक रूप से समावेशी और ज्ञान के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी हो।

इस लक्ष्य की प्राप्ति में शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक शिक्षित और कुशल जनशक्ति ही भारत को नवाचार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के क्षेत्र में अग्रणी बना सकती है।

चंडीगढ़ ली कॉर्बूज़ियर के सपनों का शहर रहा है। एक आधुनिक, नियोजित और समृद्ध नगर। आज हमने इसे ‘‘पूर्ण साक्षर नगर’’ बना दिया है। अब हमारा लक्ष्य इसे ‘‘ज्ञान नगर’’ बनाना है, जहां हर नागरिक सीखने और सिखाने की परंपरा का वाहक हो।

मुझे विश्वास है कि चंडीगढ़ की यह उपलब्धि देश के अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए प्रेरणा बनेगी। हम अपने अनुभव साझा करेंगे और दूसरों को भी इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग करेंगे।

आज जब हम यहां इस ऐतिहासिक क्षण को साझा कर रहे हैं, तो मुझे महात्मा गांधी जी के शब्द याद आते हैं, उन्होंने कहा था, ‘‘शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक और मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा के सर्वांगीण एवं सर्वोत्कृष्ट विकास से है।‘’ चंडीगढ़ ने आज यह सिद्ध कर दिया है कि जब संकल्प दृढ़ हो और प्रयास सामूहिक हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

आज की इस उपलब्धि के लिए मैं शिक्षा विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन, सभी शिक्षकगण, स्वयंसेवक, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को हार्दिक बधाई देता हूँ। आपके सामूहिक प्रयासों ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

और सबसे बड़ी बधाई उन सभी नागरिकों को, जिन्होंने उम्र के इस पड़ाव में भी सीखने का जज्बा दिखाया और परीक्षा पास की। आपने साबित कर दिया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

‘’शिक्षित भारत - सशक्त भारत’’ के संकल्प के साथ, मैं चंडीगढ़ के इन नव साक्षर शिक्षार्थियों से आग्रह करता हूं कि वे ज्ञान अर्जित करने की इस यात्रा को जारी रखें और समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण बनें।

आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि चंडीगढ़ में जो यह ज्ञान का दीपक पूरी तरह से प्रज्वलित हुआ है, वह कभी बुझने न पाए। हम न केवल साक्षर बनें, बल्कि जागरूक, कुशल और एक जिम्मेदार नागरिक बनकर भारत के नवनिर्माण में अपना योगदान दें।

इसी आशा और विश्वास के साथ, मैं चंडीगढ़ को पूर्ण साक्षरता की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए एक बार फिर से बधाई देता हूँ और इस अभियान से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएँ देता हूँ।

धन्यवाद,

जय हिंद!