SPEECH OF HON’BLE GOVERNOR PUNJAB AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI BANWARI LAL PUROHIT ON THE OCCASION OF FOUNDATION DAY OF ODISHA AT PUNJAB RAJ BHAVAN CHANDIGARH ON APRIL 1, 2024.

ओडिशा स्थापना दिवस (01 अप्रैल 2024)

 ओडिशा स्थापना दिवस पर सभी को बहुत-बहुत बधाई।

 पिछले सप्ताह ही हमने बिहार (22 मार्च) और राजस्थान (30 मार्च) के स्थापना दिवस मनाये हैं।

 देश के सभी राज्यों के स्थापना दिवस मनाने का यह क्रम पंजाब राजभवन में निरंतर जारी है।

 चाहे हमारे देश में राज्य अनेक हैं, परन्तु पूरा देश एक है। यही हमारे देश की खासियत है और यही हमारी पहचान है। (मोती भिन्न-भिन्न पर माला एक।) (फूल अनेक किंतु माला एक।)

 ओडिशा राज्य का गठन 1 अप्रैल 1936 को ब्रिटिश राज के दौरान, बंगाल और बिहार से अलग करके हुआ और राज्य को एक नई दिशा मिली।

 हालाँकि भारत में आज़ादी के बाद भाषा के आधार पर राज्यों का गठन और पुनर्गठन किया गया है, लेकिन ओडिशा भारत का पहला राज्य है जो आज़ादी से बहुत पहले भाषा के आधार पर बनाया गया था।

 ओडिशा ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों, पारंपरिक कलाओं, मूर्तिकला, नृत्य और संगीत के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का गढ़ है।

 ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर को मंदिरों का शहर कहा जाता है क्योंकि प्राचीन काल में यहां 700 मंदिर हुआ करते थे।

 पुरी का भव्य भगवान जगन्नाथ मंदिर दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है।

 भगवान त्रिभुवनेश्वर का स्थान, भुवनेश्वर भी यहां है।

 भारत के वास्तुशिल्प स्थलों में से एक, कोणार्क का सूर्य मंदिर भी यहां है।

 उड़ीसा के प्रमुख त्यौहारों में भगवान जगन्नाथ की यात्रा, कलिंग महोत्सव, चंदन यात्रा, दुर्गा पूजा, कोणार्क नृत्य आदि महोत्सव शामिल हैं।

 सोने चांदी पर की जाने वाली तार की खूबसूरत कारीगरी उड़ीसा को अलग ही पहचान दिलाती है और यह filigree के नाम से प्रसिद्ध है।

 गणतंत्र दिवस की झांकी में भी उड़ीसा की इस खूबसूरत कारीगिरी को शामिल किया गया था।

 9 नवंबर 2010 को भारत की संसद ने उड़ीसा का नाम बदलकर ओडिशा कर दिया।

 ओडिशा कभी सम्राट अशोक द्वारा शासित कलिंग साम्राज्य का हिस्सा था।

 प्राचीन काल में ओडिशा को कलिंग साम्राज्य के नाम से जाना जाता था। ‘उत्कल’ नाम कलिंग साम्राज्य के उत्तरी भाग को दिया गया था जिसे ‘उत कलिंग’ कहा जाता है।

 इस क्षेत्र का नाम भारत के राष्ट्रगान ‘‘जन गण मन’’ में भी लिया जाता है। आपने राष्ट्रगान में सुना होगा ‘उत्कल’ इस क्षेत्र को उत्कल नाम से भी जाना जाता है।

 चिल्का, जोकि एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झीलों में से एक है, यहां है।

 पाइक संग्राम, गंजाम आंदोलन, और लारजा कोल्ह आंदोलन से लेकर सम्बलपुर संग्राम तक, ओडीशा की धरती ने विदेशी हुकूमत के खिलाफ क्रांति की ज्वाला को हमेशा नई ऊर्जा दी।

 संबलपुर संग्राम के वीर क्रांतिकारी सुरेंद्र साय, हमारे लिए आज भी बहुत बड़ी प्रेरणा हैं।

 असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा ये ऐसे आंदोलन थे जहां से लेकर नमक सत्याग्रह तक पंडित गोपबंधु, आचार्य हरिहर और हरेकृष्ण महताब जैसे नायक ओडिशा को नेतृत्व दे रहे थे।

 रमा देवी, मालती देवी, कोकिला देवी, रानी भाग्यवती, ऐसी कितनी ही माताएँ-बहनें थीं जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी थी।

 ओडिशा तो हमारी सांस्कृतिक विविधता का एक सम्पूर्ण चित्र, complete picture है। यहाँ की कला, यहाँ का आध्यात्म, यहाँ की आदिवासी संस्कृति देश की धरोहर है।

 पूरे देश को इससे परिचित होना चाहिए, जुड़ना चाहिए। और नई पीढ़ी को पता होना चाहिए।

 कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर के शब्दों में कहें तो, ‘‘यहाँ पत्थर की भाषा मनुष्य की भाषा से बढ़कर है।’’

 मैं ओडिशा की अनूठी संस्कृति को नमन करता हूं।

 मेरा विश्वास है कि भगवान जगन्नाथ के विशेष आर्शीवाद से समृद्ध इस पावन भूमि के निवासी-गण सुख, समृद्धि और विकास की नई ऊंचाइयों तक अवश्य पहुंचेंगे।

 ओडिशा स्थापना दिवस की आप सबको एक बार फिर बहुत-बहुत बधाई!

धन्यवाद,

जय हिन्द!