SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF 9TH CONVOCATION OF RAYAT BAHRA UNIVERSITY AT MOHALI ON DECEMBER 4, 2025.
- by Admin
- 2025-12-04 16:30
रयात-बाहरा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 04.12.2025, गुरूवार समयः सुबह 11:00 बजे स्थानः मोहाली
नमस्कार!
आज रयात-बाहरा विश्वविद्यालय, मोहाली के 9वें दीक्षांत समारोह के इस गर्वपूर्ण अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मैं अत्यंत प्रसन्नता और गौरव का अनुभव कर रहा हूँ। किसी भी विश्वविद्यालय का दीक्षांत दिवस केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं होता, बल्कि यह उस यात्रा का जश्न होता है जिसमें छात्र, शिक्षक और समाज, तीनों मिलकर ज्ञान, शोध और चरित्र निर्माण की राह पर आगे बढ़ते हैं।
सबसे पहले, मैं आज डिग्री प्राप्त कर रहे सभी, लगभग 1 हजार विद्यार्थियों को हृदय से बधाई देता हूँ। यह उपलब्धि आपकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास का परिणाम है। आपके माता-पिता, परिवार और शिक्षकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, वे सभी समान रूप से बधाई और सम्मान के पात्र हैं।
मुझे ज्ञात हुआ है कि रयात-बाहरा समूह की स्थापना 2001 में हुई थी। आज यह समूह तीन विश्वविद्यालयों, एक अत्याधुनिक अस्पताल, तथा पंजाब और हिमाचल प्रदेश में चार अंतरराष्ट्रीय विद्यालयों का सफलतापूर्वक संचालन कर रहा है। लगभग 35 हजार विद्यार्थियों का विशाल शैक्षिक परिवार इस समूह की प्रतिबद्धता और विश्वसनीयता का प्रमाण है। यह समूह समाज के प्रत्येक वर्ग को नर्सरी से लेकर पीएच.डी. स्तर तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के सिद्धांत पर निरंतर कार्यरत है।
यह सब दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता श्री गुरविंदर सिंह बाहरा के प्रयासों का परिणाम है, जिन्होंने अपने साहस और दृढ़ संकल्प के बल पर एक विशाल शैक्षणिक साम्राज्य खड़ा किया। अपने साहस, दृढ़ संकल्प और नवाचार की भावना के बल पर उन्होंने न केवल एक विशाल शैक्षणिक साम्राज्य खड़ा किया, बल्कि ऐसी शैक्षिक परंपरा विकसित की, जो गुणवत्ता, अनुशासन और उत्कृष्टता के मूल्यों पर आधारित है।
मोहाली के इस प्रतिष्ठित रयात बाहरा विश्वविद्यालय, जिसका आज हम 9वां दीक्षांत समारोह मना रहे हैं, की बात करें तो इसकी स्थापना 2014 में हुई थी और इतने कम समय में यह शिक्षा के एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में उभरा है।
वर्तमान में यहां 15 हजार से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिनमें 50 से अधिक देशों के 500 से अधिक विद्यार्थी भी शामिल हैं। यहां इंजीनियरिंग, संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान, फार्मास्युटिकल विज्ञान, जीवन विज्ञान, क्लिनिकल भ्रूण विज्ञान, दंत चिकित्सा, प्रबंधन, आतिथ्य, कृषि, नर्सिंग, फैशन प्रबंधन और लॉ स्कूल ऑफ एक्सीलेंस हैं।
यह एक विकल्प-आधारित लचीली शिक्षण प्रणाली प्रदान करता है जो शिक्षार्थियों को अपनी गति से सीखने और अन्य उपलब्ध पाठ्यक्रमों में से ऐच्छिक पाठ्यक्रम चुनने की सुविधा देती है। यह व्यवस्था उन्हें अतिरिक्त पाठ्यक्रम लेकर अपने कौशल और रोजगार क्षमता बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करती है।
यह अत्यंत ही हर्ष और गर्व का विषय है कि रयात-बाहरा समूह द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के अन्तर्गत विभिन्न पहलें की गई हैं। इसने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी छात्रों के लिए शैक्षणिक वर्ष 2026-27 हेतु 25 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति की घोषणा की है।
इसके अतिरिक्त, रयात-बाहरा समूह द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविर, मुफ़्त स्वास्थ्य जाँच शिविर, दंत स्वास्थ्य जाँच शिविर, कानूनी जागरूकता शिविर और ग्रामीण बच्चों के लिए कौशल आधारित कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। साथ ही, इसके द्वारा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं। ये सभी पहलें समाज कल्याण के प्रति समूह की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
साथ ही, सबसे महत्वपूर्ण और गर्व का विषय यह है कि रयात-बाहरा समूह ने 50 से अधिक गाँवों को गोद लिया है। इन गाँवों के बच्चों को संस्थान द्वारा शिक्षा से संबंधित विभिन्न व्ययों में विशेष रियायतें प्रदान की जाती हैं, ताकि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी बच्चे को अपनी पढ़ाई से समझौता न करना पड़े। यह पहल न केवल सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक अतुलनीय योगदान भी है।
प्रिय विद्यार्थियों,
आज आप सभी के जीवन का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। इस शिक्षा ने आपको ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास से सशक्त बनाया है। अब समय आ गया है कि आप अपनी शिक्षा का उपयोग अपने व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए भी करें।
आपकी सफलता में आपके माता-पिता, शिक्षकगण और मित्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके समर्थन और मार्गदर्शन के लिए हम सभी उनके आभारी हैं। इस अवसर पर, हम उन सभी का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने आपकी इस यात्रा में सहयोग दिया है।
मैं कहना चाहूंगा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा उपकरण है जो समाज के समग्र विकास और उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षा को सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में देखना आज के समय की आवश्यकता है।
आज का दिन आपके जीवन की एक महत्वपूर्ण सीढ़ी है। लेकिन याद रखें, डिग्री किसी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक नई और महत्वपूर्ण शुरुआत है।
कुछ बातें हैं, जिन्हें मैं चाहता हूँ कि आप हमेशा अपने साथ लेकर चलें। सबसे पहली बात, कभी सीखना बंद न करें। सीखना जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है, और जो व्यक्ति सीखते रहने की क्षमता रखता है, वही समय के साथ आगे बढ़ता है।
दूसरी बात, असफलता से न डरें। असफलता ही सफलता की सबसे बड़ी शिक्षक होती है। गिरना कोई हार नहीं, लेकिन गिरकर फिर न उठना ही हार है।
तीसरी बात, आपकी नैतिकता, ईमानदारी और मानवता ही आपकी असली पहचान बनाते हैं। ज्ञान और कौशल तभी सार्थक होते हैं, जब वे अच्छे मूल्यों के साथ जुड़े हों।
चौथी बात, देश और समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को हमेशा याद रखें। आपकी शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान भी है।
और पाँचवीं, सबसे महत्वपूर्ण बात, अपने सपनों का पीछा पूरे साहस और आत्मविश्वास के साथ करें। बड़े सपने देखें, और उन्हें पूरा करने का संकल्प भी उतना ही बड़ा रखें।
आज नए अवसर, नई तकनीकें और नए विचार दुनिया को पुनर्परिभाषित कर रहे हैं। इसलिए, ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को अपनाइए। सफलता के साथ मानवता और सेवा को जोड़िए। प्रतिस्पर्धा के साथ करुणा और सहानुभूति को संजोइए। और सबसे बढ़कर, अपने काम में ईमानदारी और उत्कृष्टता को कभी कम न होने दीजिए।
आज आप केवल किसी नौकरी की तलाश में निकलने वाले युवा नहीं हैं, बल्कि रोज़गार के नए अवसर पैदा करने वाले भावी उद्यमी, ज्ञान और शोध के अग्रदूत, और समाज की जटिल समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करने वाले नवप्रवर्तक हैं। आप वह पीढ़ी हैं जो अपने कौशल, अपने विचारों और अपने संकल्प के बल पर नई तकनीकों का निर्माण करेगी, नए उद्योगों का विकास करेगी और भारत की प्रगति में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
महात्मा गांधी ने कहा था कि, ‘‘सच्ची शिक्षा वही है जो समाज और मानवता की सेवा करने की भावना उत्पन्न करे।’’ गांधीजी ने शिक्षा को समाज सेवा का माध्यम माना और इसे मनुष्य के सामाजिक दायित्वों से जोड़ा। इसलिए शिक्षा के माध्यम से आपको केवल अपने भविष्य का निर्माण नहीं करना है, बल्कि समाज को भी बेहतर बनाना है।
मुझे यहां डॉ. भीमराव अंबेडकर के दृष्टिकोण की याद आती है जिन्होंने कहा था कि ‘‘शिक्षा वह शस्त्र है जिससे आप दुनिया को बदल सकते हैं।’’
हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ‘विकसित भारत 2047’ का जो सपना देखा है, उसे साकार करने में युवाओं की भूमिका सबसे अधिक है। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, और स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाएँ आपके लिए अनगिनत अवसर लेकर आई हैं।
आपसे अपेक्षा है कि आप केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी प्रतिभा और अपनी शिक्षा का उपयोग राष्ट्र निर्माण के लिए करें। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य आपकी सक्रिय भागीदारी के बिना पूरा नहीं हो सकता।
आप ही वे युवा हैं जिनके हाथों में भारत का भविष्य सुरक्षित है। आपकी उपलब्धियाँ आने वाले समय में न केवल आपके परिवार और समाज को गौरवान्वित करेंगी, बल्कि नए भारत की दिशा और दशा भी तय करेंगी।
देवियो और सज्जनो,
आज भारत एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जिसमें शिक्षा के हर आयाम में अभूतपूर्व परिवर्तन दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा प्रणाली को एक नई दिशा, नई गति और नए लक्ष्य प्रदान किए हैं। यह नीति शिक्षा को बहुविषयक, लचीला, कौशल-आधारित और समानतापूर्ण तथा समावेशी बनाने पर विशेष जोर देती है। इसका उद्देश्य यह है कि हर शिक्षार्थी को अपनी रुचि, क्षमता और गति के अनुसार सीखने का अवसर मिले।
उच्च शिक्षा में Academic Bank of Credits, Multiple Entry–Exit प्रणाली, Skill Development, Internships और Research & Innovation पर विशेष बल दिया जा रहा है। यह बदलाव केवल पाठ्यक्रमों में सुधार भर नहीं है, बल्कि शिक्षा की मूलभूत सोच में परिवर्तन है, जहाँ केंद्र में केवल डिग्री नहीं, बल्कि विद्यार्थी का सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास, विचारशीलता, नवाचार क्षमता और वास्तविक जीवन की चुनौतियों को हल करने की योग्यता है।
यदि हम नई प्रवृत्तियों की बात करें, तो आज का समय वास्तव में एआई और डिजिटल युग के रूप में पहचाना जा सकता है। वर्तमान उच्च शिक्षा पर ए.आई., साइबर सिक्योरिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मशीन लर्निंग, बायोटेक्नोलॉजी, डिजिटल ह्यूमैनिटीज, वर्चुअल एवं ऑगमेंटेड रियलिटी, ई-लर्निंग और हाइब्रिड क्लासरूम जैसी उभरती तकनीकें गहरा प्रभाव डाल रही हैं। ये तकनीकें न केवल शिक्षण के तरीकों को बदल रही हैं, बल्कि सीखने के अनुभव को अधिक रोचक, व्यावहारिक और प्रभावी बना रही हैं।
भारत सरकार भी इस दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहलें कर रही है, जैसे Digital India, Skill India, PM e-VIDYA, SWAYAM, National Digital Library, PM Kaushal Vikas Yojana, Startup Indiaऔर Atal Innovation Mission। इन सभी अभियानों का एक ही उद्देश्य है, भारत के युवा को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना, जहाँ वह सीखे, सोचे, सृजन करे और नेतृत्व करे।
इन पहलों और नई तकनीकों के माध्यम से भारत एक ज्ञान-प्रधान, नवाचार-उन्मुख और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा व्यवस्था का निर्माण कर रहा है, जहाँ हर विद्यार्थी केवल सीखने वाला नहीं, बल्कि परिवर्तन का वाहक बनकर उभरता है।
प्रिय विद्यार्थियो,
आज आप जीवन के एक नए पड़ाव पर पहुँच रहे हैं। रयात-बाहरा विश्वविद्यालय से मिली शिक्षा, मूल्य और अनुभव अब आपके मार्गदर्शक बनेंगे। यहाँ सीखी गई हर बात आने वाले जीवन में आपकी सबसे बड़ी पूँजी होगी। आज से आपकी यात्रा और व्यापक हो रही है। अब आप ज्ञान के दूत, समाज के निर्माता, और राष्ट्र के भविष्य के रूप में एक नई ज़िम्मेदारी लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
मुझे विश्वास है कि आप जहाँ भी जाएँगे, न केवल अपने माता-पिता और शिक्षकों का नाम रोशन करेंगे, बल्कि रयात-बाहरा विश्वविद्यालय और हमारे महान देश भारत की प्रतिष्ठा को भी ऊँचाइयों तक ले जाएँगे।
यह डिग्री केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है। यह आपकी मेहनत, आपकी प्रतिबद्धता, और आपके सपनों का प्रतीक है। इसे सार्थक बनाइए।
इस दीक्षांत समारोह से जो प्रेरणा आपको मिली है, उसे अपने जीवन में उतारिए और एक ऐसा जीवन बनाइए जो दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हो। मुझे विश्वास है कि आप सभी अपने कार्यक्षेत्र में न केवल सफलता प्राप्त करेंगे, बल्कि समाज और देश को भी गौरवान्वित करेंगे।
अंत में, मैं संस्थान के प्रबंधन, शिक्षकों और कर्मचारियों को उनकी कड़ी मेहनत और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति समर्पण के लिए बधाई देता हूँ। आप सभी ने मिलकर इस संस्थान को एक उत्कृष्ट शिक्षा केंद्र बनाया है।
एक बार फिर से, सभी स्नातकों को बधाई और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ। आप सभी के प्रयास हमारे देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
धन्यवाद,
जय हिंद!