SPEECH OF HON’BLE GOVERNOR PUNJAB AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INVESTITURE CEREMONY OF BSF ATLAKHNAUR BSF CAMPUS, SAS NAGAR ON JANUARY 7, 2026.

बी.एस.एफ. के ‘पदक अलंकरण समारोह’ के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 07.01.2026,  बुधवारसमयः शाम 4:00 बजेस्थानः मोहाली

      

नमस्कार!

सर्वप्रथम मैं, श्री सतीश एस खंडारे जी, अपर महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल, पश्चिमी कमान, चंडीगढ़ तथा समस्त प्रहरी परिवार का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मुझे सीमा सुरक्षा बल के वीर प्रहरियों के इस गरिमामय अलंकरण समारोह में आमंत्रित किया।

आज इस गरिमामय अवसर पर, मैं पदक से अलंकृत होने वाले सीमा सुरक्षा बल के सभी 24 कार्मिकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रदान करता हूँ। यह सम्मान आपके अदम्य साहस, उत्कृष्ट कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी भविष्य में भी इसी समर्पण भाव से राष्ट्र सेवा करते हुए सीमा सुरक्षा बल की गौरवशाली परंपराओं को और अधिक सुदृढ़ करेंगे तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे।

साथियो,

हम सभी जानते हैं कि सीमा सुरक्षा बल की स्थापना 1 दिसंबर 1965 को हुई थी, और तब से यह बल भारत की सीमाओं की सुरक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

जैसा कि सर्वज्ञात है कि 1965 तक पाकिस्तान के साथ भारत की सीमाओं की सुरक्षा ‘राज्य सशस्त्र पुलिस बटालियन’ द्वारा की जाती थी। लेकिन जब 9 अप्रैल 1965 को पाकिस्तान ने कच्छ में सरदार पोस्ट, चार बेट एवं बरिया बेट पर हमला कर दिया, तो इस हमले से यह बात सामने आई कि राज्य सशस्त्र पुलिस बटालियन सशस्त्र आक्रमण का सामना करने में अपर्याप्त है।

इसी कारण भारत सरकार को केंद्र के अधीन एक विशेष सीमा सुरक्षा बल की आवश्यकता महसूस हुई, एक ऐसा बल जो उपयुक्त रूप से सशस्त्र और प्रशिक्षित बल हो और जो पाकिस्तान सीमा के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर निगरानी करे। 

इसके लिए सचिवों की एक गठित समिति की सिफारिशों के परिणामस्वरूप, 1 दिसंबर 1965 को ‘सीमा सुरक्षा बल’ अस्तित्व में आया और श्री के एफ रूस्तमजी, आईपी इसके पहले प्रमुख और संस्थापक थे।

साथियो,

सीमा सुरक्षा बल, जिसे पूरे विश्व में "India's First Line of Defence"  के रूप में जाना जाता है, आज दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सक्षम सीमा सुरक्षा बल है। भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश जैसी संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा का दायित्व जिस दक्षता, अनुशासन और साहस के साथ बी.एस.एफ. निभा रहा है, वह अपने आप में अद्वितीय है।

चाहे युद्धकाल में भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दुश्मन का सामना करना हो, या शांतिकाल में घुसपैठ, तस्करी, आतंकवाद और सीमा अपराधों पर अंकुश लगाना हो, बी.एस.एफ. के जवानों ने हर परिस्थिति में अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, समर्पण और सर्वोच्च बलिदान की भावना के साथ किया है।

सीमा प्रबंधन जैसे प्राथमिक दायित्वों के साथ-साथ, आतंकवाद-विरोधी अभियानों, आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी, चुनाव सुरक्षा, आपदा प्रबंधन तथा विशेष अभियानों में भी सीमा सुरक्षा बल की भूमिका सदैव प्रशंसनीय रही है।

अभी श्री सतीश एस खण्डारे जी ने अपने स्वागत भाषण के दौरान सीमा सुरक्षा बल के गौरवमय इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि बल के कार्मिकों को 01 महावीर चक्र, 15 वीर चक्र, 06 कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र, 47 सेना मेडल, 234 वीरता के लिए राष्ट्रपति पदक, 1028 वीरता पदक सहित 1300 से अधिक वीरता पदकों से सम्मानित किया जा चुका है। पदकों से सम्मानित बल के इस गौरवमयी इतिहास को कायम रखने के लिए बल के कार्मिकों ने आवश्यकता पड़ने पर बलिदान दिया है। 

यही नहीं, इस दौरान सैकड़ों सीमा प्रहरी, राष्ट्र रक्षा में विभिन्न चुनौतियों से जूझते हुए घायल भी हुए हैं। यह बल की कर्तव्य निर्वहन की क्षमता एवं युद्ध-भूमि में प्रहरियों के अद्भुत शौर्य का उत्कृष्ट प्रमाण है। आज इस अलंकरण समारोह के शुभ अवसर पर मैं अपनी ओर से सीमा सुरक्षा बल के वीर प्रहरियों को देश की सुरक्षा हेतु सर्वोच्च बलिदान के लिए श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ। 

मित्रो,

इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि सुरक्षित सीमाएँ ही एक समृद्ध राष्ट्र की बुनियाद होती हैं। जब हमारी सीमाएँ सुरक्षित हैं तो देश में शाँति होगी, विकास के नए अवसर बनेंगे और देश समृद्ध होगा। 

मुझे इस बात की जानकारी है कि भारत-पाकिस्तान बॉर्डर, सीमा पार से होने वाली घुसपैठ एवं मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी के लिहाज से काफी संवेदनशील है। असामाजिक तत्व अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए नित नए तरीके अपना रहे हैं। 

पंजाब प्रांत में ड्रोन से मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी सीमा सुरक्षा बल और पंजाब पुलिस के लिए एक नई चुनौती के रूप में सामने आया है, लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि पश्चिमी कमान के अंतर्गत सीमा सुरक्षा बल के जवान और सीमावर्ती जिलों में तैनात पंजाब पुलिस के कार्मिक ड्रोन द्वारा मादक पदार्थों एवं हथियारों की तस्करी को विफल करने में काफी हद तक कामयाब हुए हैं। 

हाल ही में बी.एस.एफ. ने पश्चिमी फ्रंट पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने शौर्य व पराक्रम से एकबार फिर यह साबित कर दिया है कि सीमा सुरक्षा बल देश की सीमाओं की रक्षा करने में पूर्णतः समर्थ व सक्षम है। 

साथ ही इसी वर्ष सीमा सुरक्षा बल ने जम्मू के अखनूर व काना चक तथा पंजाब के गुरदासपुर, फिरोजपुर और पठानकोट आदि इलाकों में भारी बारिश के कारण आई भीषण बाढ़ से हुए नुकसान में बचाव अभियान कार्य किया। इस दौरान बी.एस.एफ. ने चिकित्सा व पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर स्वास्थ्य जांच कर मुफ्त दवाइयां उपलब्ध करायीं और प्रभावित गांवों में भोजन सामग्री व पीने हेतु साफ पानी एवं आवश्यक वस्तुओं का वितरण कर तत्काल सहायता सुनिश्चित की। 

इसके अलावा, सीमा सुरक्षा बल द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में सद्भावना व समन्वय को बनाए रखने के लिए किए गए अनेक प्रयास जैसे सिविक एक्शन प्रोग्राम, निःशुल्क मेडीकल कैंप, जागरूकता अभियान इत्यादि न केवल सीमा-प्रबंधन बल्कि सीमावर्ती लोगों के सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भी अनिवार्य हैं। 

इसके अलावा ‘बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम’ के अंतर्गत चलाए जा रहे प्रोग्राम में सीमा सुरक्षा बल की सहभागिता से सीमा पर रहने वाले लोगों की सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान अवश्यमेव हुआ है। जिसके लिए समस्त प्रहरीगण बधाई के पात्र हैं। 

मित्रों,

आज भारत जिस आत्मविश्वास के साथ विश्व मंच पर खड़ा है, उसके पीछे हमारे सशस्त्र एवं अर्धसैनिक बलों का शौर्य, अनुशासन और बलिदान निहित है। सीमा सुरक्षा बल और अन्य अर्धसैनिक बलों के शहीदों द्वारा दिए गए बलिदानों के कारण ही भारत ने विश्व मानचित्र पर अपनी गौरवशाली, सशक्त और निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराई है।

यह कहना गलत नहीं होगी कि बी.एस.एफ. का नाम मात्र ही शत्रु तत्वों में भय उत्पन्न कर देता है। यही कारण है कि हमारा लोकतंत्र सुरक्षित है, हमारी सीमाएँ सुदृढ़ हैं और राष्ट्र विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर है। 

सीमा सुरक्षा बल ने सर्वोच्च बलिदान की एक स्वर्णिम परंपरा स्थापित की है। यदि हम इतिहास की ओर दृष्टि डालें, तो देखते हैं कि बल की स्थापना के मात्र छह वर्ष बाद, जब तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन, अत्याचार और अमानवीयता चरम पर थी, तब भारत ने हस्तक्षेप का निर्णय लिया। उस निर्णायक घड़ी में बी.एस.एफ. के जवानों ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप आज बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में विश्व मानचित्र पर स्थापित है।

युद्ध हो या शांति, बी.एस.एफ. ने कभी अपने कर्तव्य से समझौता नहीं किया। इसी का परिणाम है कि बल को अनेक महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र, शौर्य चक्र, सेना मेडल सहित हजारों वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

मित्रों, 

आज का भारत कमज़ोर प्रतिक्रिया या मौन सहनशीलता में नहीं, बल्कि समयबद्ध, सटीक और निर्णायक कार्रवाई में विश्वास करता है। ऑपरेशन सिंदूर इसका ताज़ा और सशक्त उदाहरण है, जिसने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी संप्रभुता, नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करता। 

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने सीमाओं पर आधारभूत ढांचे, सड़क, संचार, निगरानी प्रणाली और आवास सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री जी का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि सशक्त सीमाएँ ही सशक्त भारत की नींव होती हैं। निर्जन और उपेक्षित सीमाएँ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं, इस सच्चाई को सरकार भली-भांति समझती है।

जिस देश की सीमाएँ सुरक्षित नहीं होतीं, वह राष्ट्र न तो समृद्ध हो सकता है और न ही आत्मनिर्भर। आज हमारे सामने ड्रोन आधारित तस्करी, अत्याधुनिक घुसपैठ, हथियार एवं नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और साइबर-तकनीकी चुनौतियाँ हैं। लेकिन मुझे पूर्ण विश्वास है कि बीएसएफ और अन्य सुरक्षा बलों की सतर्कता, तकनीकी दक्षता और बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता के कारण हम इन सभी चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपट रहे हैं।

मैं स्वयं नियमित रूप से बी.एस.एफ., अन्य सुरक्षा एजेंसियों तथा सीमावर्ती गांवों के प्रतिनिधियों से संवाद करता हूँ। ड्रोन के माध्यम से तस्करी आज एक गंभीर चुनौती बन चुकी है, और मुझे प्रसन्नता है कि डीआरडीओ तथा अन्य एजेंसियाँ स्वदेशी ड्रोन-रोधी तकनीकों के विकास में तीव्र गति से कार्य कर रही हैं।

आप केवल सीमा की रक्षा नहीं कर रहे, बल्कि भारत को एक सुरक्षित, स्थिर और विश्वसनीय राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि भारत सरकार सीमा सुरक्षा बल को विश्व-स्तरीय तकनीक, उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

साथियो,

आज का भारत केवल सीमाओं की निगरानी करने वाला राष्ट्र नहीं, बल्कि रक्षा क्षमताओं के निर्माण, नवाचार और आत्मनिर्भरता में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हाल के वर्षों में रक्षा उत्पादन, रक्षा निर्यात और रक्षा बजट में हुई ऐतिहासिक वृद्धि है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचकर 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह न केवल पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है, बल्कि वर्ष 2019-20 की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत की अभूतपूर्व छलांग भी है। 

यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि भारत अब आयातक से निर्माता और निर्यातक राष्ट्र की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा विनिर्माण को 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इसी प्रकार भारत के रक्षा निर्यात ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 23 हजार 622 करोड़ रुपये का सर्वकालिक उच्च स्तर छू लिया है। यह आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2023-24 के 21 हजार 83 करोड़ रुपये की तुलना में 2 हजार 539 करोड़ रुपये अथवा 12.04 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

इन सभी प्रयासों को सुदृढ़ आधार प्रदान करता है रिकॉर्ड रक्षा बजट। विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने तथा तकनीकी रूप से उन्नत एवं आत्मनिर्भर सशस्त्र बलों के निर्माण के उद्देश्य से, केंद्रीय बजट 2025-26 में रक्षा मंत्रालय को 6.81 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह आवंटन वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजटीय अनुमान से 9.53 प्रतिशत अधिक है तथा कुल केंद्रीय बजट का 13.45 प्रतिशत है, जो सभी मंत्रालयों में सर्वाधिक है।

इन सभी उपलब्धियों का समग्र संदेश स्पष्ट है कि भारत अब अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए किसी पर निर्भर नहीं है। आज का भारत आत्मनिर्भर, सक्षम और निर्णायक है। जब हमारे रक्षा उत्पादन, निर्यात और बजट मजबूत होते हैं, तब सीमा सुरक्षा बल जैसे संगठन और अधिक प्रभावी, आत्मविश्वासी और तकनीकी रूप से सक्षम बनते हैं, और यही राष्ट्र की सुरक्षा की सबसे मजबूत गारंटी है।

मेरे वीर प्रहरियो,

इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि सुरक्षित सीमाएँ ही एक समृद्ध राष्ट्र की बुनियाद होती हैं। जब हमारी सीमाएँ सुरक्षित हैं तो देश में अमन और शाँति होगी, विकास के नए अवसर बनेंगे और देश समृद्ध होगा।

 जवानों के समर्पण और बहादुरी के बिना प्रधानमंत्री मोदी जी के 2047 तक एक पूर्ण विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना असंभव है और सिर्फ हमारे जवानों की वीरता, समर्पण, त्याग और बलिदान ही इसे संभव बना सकते हैं।

देश के 140 करोड़ लोगों के मन में जो ‘अजय भारत’ का विश्वास है, वह किसी कल्पना या कोरे आदर्श का परिणाम नहीं है। चाहे बर्फीले सियाचिन के ग्लेशियर हों या थार के तपते रेगिस्तान, समुद्र की अथाह लहरें हों या पूर्वोत्तर के घने जंगल, हमारे जवान हर मौसम और हर परिस्थिति में अडिग रहते हैं। उनका यह दृढ़ संकल्प न केवल सीमाओं को सुरक्षित करता है, बल्कि देशवासियों को यह विश्वास दिलाता है कि उनका भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

जवानों ने समय-समय पर अपने प्राणों की आहुति देकर यह साबित किया है कि राष्ट्र उनके लिए सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण है। कारगिल, 1971 का युद्ध, पुलवामा हमला जैसे कई उदाहरण इस बात के प्रमाण हैं कि जवानों का साहस अजय है।

देवियो और सज्जनो,

आज इस अवसर पर मैं हमारे देश के समस्त वीर जवानों के प्रति अपना आभार प्रकट करना चाहता हूं क्योंकि हमारे जवान अपने जीवन का स्वर्णिम काल अपने परिवार, बच्चों और प्रियजनों से दूर, कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बिताते हैं। 

जवानों की यह त्यागमयी जीवनशैली केवल एक कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह उनकी अटूट देशभक्ति और अदम्य साहस का प्रतीक है। वे अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं और सुख-सुविधाओं को त्यागकर पूरे देश को अपना परिवार मानते हैं और उसके भविष्य की रक्षा के लिए हर कठिनाई को सहर्ष स्वीकार करते हैं।

हम सभी का यह कर्तव्य बनता है कि हम अपने जवानों के बलिदान और समर्पण को समझें और उनके प्रति अपने सम्मान को न केवल शब्दों में, बल्कि कर्मों में भी प्रदर्शित करें।

आज इस अलंकरण समारोह के पावन अवसर पर, मैं सीमा सुरक्षा बल के सभी वीर प्रहरियों और अमर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ। मेरा मानना है कि वीरता को कोई पदक पूर्णतः परिभाषित नहीं कर सकता। आपकी वीरता ही पूरे राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

अंत में, मैं, सीमा सुरक्षा बल के अपर महानिदेशक श्री सतीश एस खण्डारे, भारतीय पुलिस सेवा एवं उनकी टीम को समारोह के सफल आयोजन के लिए बधाई देता हूँ। 

साथ ही, आज के समारोह में Police Medal for Meritorious Service पदक से सम्मानित हुए 24 कार्मिकों व उनके परिजनों को पदक प्राप्ति के लिए बधाई देता हूँ एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए कामना करता हूँ। 

मैं आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास करता हूँ कि सीमा सुरक्षा बल आने वाले समय में भी इसी शौर्य, समर्पण और राष्ट्रभक्ति के साथ भारत माता की सीमाओं की रक्षा करता रहेगा।

धन्यवाद,

जय हिन्द!

जय भारत!