SPEECH OF HON’BLE GOVERNOR PUNJAB AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF BHARAT GAURAV SAMMAN SAMAROH AT CHANDIGARH ON 16.01.2026.

‘भारत गौरव पुरस्कार सम्मान समारोह’ के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 16.01.2026,  शुक्रवारसमयः शाम 4:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

 

नमस्कार!

आज “भारत गौरव पुरस्कार सम्मान समारोह” जैसे अत्यंत प्रेरणास्रोत आयोजन में आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए परम सौभाग्य, गर्व और आत्मिक प्रसन्नता का विषय है। 

मैं भारत गौरव अवार्ड फाउंडेशन को इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। साथ ही, सम्पूर्ण भारत से चयनित सभी 20 प्रतिभाओं को उनकी उपलब्धियों के प्रति हार्दिक बधाई देता हूं।

यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि राष्ट्र निर्माण और समाज उत्थान में कार्यरत प्रत्येक नायक को प्रोत्साहित और सम्मनित करने हेतु वर्ष 2017 में भारत गौरव अवार्ड फाउंडेशन की स्थापना हुई। तब से अब तक फाउंडेशन द्वारा प्रति वर्ष 20 व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाता है, जो राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, समाजेवा, खेल आदि क्षेत्र से संबंधित होते हैं। यह पहली बार है जब यह आयोजन दिल्ली से बाहर चंडीगढ़ शहर में अयोजित किया जा रहा है।

भारत गौरव अवार्ड फाउंडेशन संपूर्ण भारत में सामाजिक कल्याण और राष्ट्र-निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है। यह फाउंडेशन ऐसे गुमनाम नायकों की पहचान कर उन्हें सम्मानित करता है, जिनके असाधारण योगदान अक्सर प्रकाश में नहीं आ पाते, और साथ ही आने वाली पीढ़ी को सेवा, समर्पण और उत्कृष्टता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

मेरा मानना है कि इस मंच से प्रदान किया जाने वाला प्रत्येक सम्मान केवल एक उपलब्धि की पहचान नहीं, बल्कि एक राष्ट्रव्यापी प्रेरणा-आंदोलन को गति देता है, जहाँ सामान्य नागरिक भी असाधारण कार्य करने के लिए प्रेरित होते हैं, ताकि समाज के उत्थान और ‘नए भारत’ के निर्माण के संकल्प को साकार किया जा सके।

यह अत्यंत ही हर्ष और गर्व का विषय है कि फाउंडेशन द्वारा भारत गौरव पुरस्कार से सम्मानित अनेक पूर्व व्यक्तित्वों को भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है, जो भारत गौरव पुरस्कार की महत्ता, विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा को और अधिक सुदृढ़ करता है।

आज जिन महान व्यक्तित्वों को “भारत गौरव पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है, वे अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता, नवाचार, सेवा और समर्पण के जीवंत प्रतीक हैं। आप सभी ने यह सिद्ध किया है कि सच्ची राष्ट्रसेवा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा, तकनीक, उद्योग, कृषि, कला, संस्कृति, समाजसेवा और उद्यमिता, हर क्षेत्र में श्रेष्ठ योगदान देकर भी राष्ट्र को महान बनाया जाता है।

एक मशाल स्वयं जलती है, परंतु वह हजारों रास्तों को आलोकित करती है। आप सभी विजेताओं ने भी यही किया है। आपने व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर सामूहिक उत्थान को प्राथमिकता दी है। आपने परिस्थितियों की प्रतीक्षा नहीं की, बल्कि स्वयं परिवर्तन की मशाल बने। यह भाव इस सत्य को रेखांकित करता है कि सफलता के मार्ग में चुनौतियाँ सदैव रहेंगी, परंतु सच्चा विजेता वही होता है जो अंधेरे को कोसने के बजाय दीपक जलाने का साहस रखता है।

आपके नवाचारों, प्रयासों और सेवाभाव ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आँखों में आशा की किरण जगाई है। आपने यह सिद्ध किया है कि जब उद्देश्य सेवा हो और संकल्प राष्ट्र हो, तब व्यक्तिगत उपलब्धियाँ सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन जाती हैं।

देवियो और सज्जनो,

अक्सर ‘राष्ट्रसेवा’ शब्द सुनते ही हमारे मानस-पटल पर वर्दी पहने सीमा पर तैनात सैनिकों का चित्र उभरता है और निस्संदेह वे हमारे गौरव हैं; लेकिन आज के ये सम्मानित व्यक्तित्व हमें यह भी सिखाते हैं कि देशभक्ति एक बहुआयामी संकल्प है। 

जब एक शिक्षक सुदूर गाँव में ज्ञान की मशाल जलाता है या कोई वैज्ञानिक प्रयोगशाला में रातों की नींद त्यागकर नए अनुसंधान में संलग्न होता है, तब वह राष्ट्र की बौद्धिक शक्ति को मजबूत करता है।

जब कोई चिकित्सक महामारी हो या सामान्य समय, निस्वार्थ भाव से सेवा करता है और कोई इंजीनियर नवाचार के माध्यम से समाधान प्रस्तुत करता है, तब वे करोड़ों भारतीयों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सरल और सक्षम बनाते हैं।

इसी प्रकार अन्नदाता किसान और दूरदर्शी उद्यमी मिलकर देश की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करते हैं, रोजगार सृजित करते हैं और भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ाते हैं।

महात्मा गांधी जी कहा करते थे, “आप वही परिवर्तन बनिए, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।” आज के पुरस्कार विजेता इसी विचार के साकार रूप हैं। आपने परिस्थितियों की प्रतीक्षा नहीं की, बल्कि स्वयं परिवर्तन की मशाल बनकर समाज को दिशा दी।

देवियो और सज्जनो,

आज पूरे देश के हर कोने में ‘विकसित भारत’ की गूंज स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है। यह केवल भविष्य की ओर छलांग लगाने का आह्वान नहीं है, बल्कि यह एक सुदृढ़ संकल्प है, एक सुनिश्चित वचन है कि वर्ष 2047 में भारत एक विकसित राष्ट्र होगा, जहाँ कोई भी पीछे नहीं छूटेगा।

हाल के वर्ष इस बात के साक्षी हैं कि भारत विश्व की ‘फ्रेजाइल फाइव’ अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी से निकलकर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ते हुए। 

अब वह समय दूर नहीं जब भारत विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में सम्मिलित होगा। यही हमारा ‘अमृत काल’ है, जो वास्तव में हमारे लिए ‘गौरव काल’ है, क्योंकि इसी कालखंड में विकसित भारत 2047 की मजबूत नींव रखी जा रही है।

आज देश का राष्ट्रीय वातावरण आशा, विश्वास और संभावनाओं से परिपूर्ण है। हमने अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति देखी है। जिन लोगों ने कभी यह अनुमान लगाया था कि विकास दर 5.5 प्रतिशत से आगे नहीं जाएगी, वे तब मौन हो गए जब यह 7.5 प्रतिशत से भी अधिक पहुँची।

आज हमारा बुनियादी ढांचा विश्व के लिए ईर्ष्या का विषय बन चुका है। भारत मंडपम, यशोभूमि, संसद का नया भवन, अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे, प्रगति अधीन बुलेट ट्रेन ये सब इस बात के प्रतीक हैं कि वैश्विक मानकों पर भी भारत अब अग्रिम पंक्ति में खड़ा है।

डिजिटल विस्तार आज शहरों से लेकर गाँवों तक समान रूप से पहुँच चुका है। डीबीटी, यूपीआई, टेलीमेडिसिन और डिजिटल दस्तावेज़ीकरण जैसी पहलों ने सेवाओं को सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाया है। इससे नागरिक उन अवसरों का लाभ उठा रहे हैं, जिनकी उन्होंने पहले कल्पना भी नहीं की थी, और एक तकनीक-सक्षम, समावेशी नए भारत का निर्माण हो रहा है।

आज युवाओं के लिए एक मजबूत और समर्थ पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध है। स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, मुद्रा योजना, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों ने युवाओं को पूंजी, कौशल, प्लेटफ़ॉर्म और मार्गदर्शन प्रदान किया है। अटल इनोवेशन मिशन, पीएम-रिसर्च फेलोशिप, ड्रोन दीदी, आईटीआई और स्किल हब्स जैसे प्रयास युवाओं को भविष्य की तकनीकों और उद्योगों के लिए तैयार कर रहे हैं। सकारात्मक और दूरदर्शी शासन ने यह संभव बनाया है।

साथियो,

भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ लोकतंत्र संवैधानिक रूप से हर स्तर पर सुदृढ़ है, चाहे वह ग्राम स्तर हो, नगर पालिक स्तर हो, राज्य स्तर हो या फिर केन्द्र स्तर हो। हमारी न्याय व्यवस्था मजबूत है। भारत आज वैश्विक शांति व सद्भाव का अग्रदूत बन चुका है। 

लोकतांत्रिक मूल्य वहीं पुष्पित-पल्लवित होते हैं, जहाँ कानून के समक्ष समानता हो, शासन पारदर्शी और जवाबदेह हो, और पक्षपात, भाई-भतीजावाद तथा कृपा पात्रता के लिए कोई स्थान न हो। एक समय था जब ये विकृत प्रवृत्तियाँ व्यवस्था पर हावी थीं, किंतु आज वे अतीत की बात बन चुकी हैं। 

वंशवाद और विशेषाधिकार की मानसिकता समाप्त हो रही है। कानून के समक्ष समानता अब एक सशक्त वास्तविकता बन रही है। इससे हमारे युवाओं का मनोबल बढ़ा है और लोकतंत्र में उनका विश्वास सुदृढ़ हुआ है।

कभी वैश्विक संस्थाएँ भारत को उसी दृष्टि से देखती थीं, जैसी वे हमारे पड़ोसी देशों को देखती थीं। आज लगभग सभी वैश्विक संस्थाएँ भारत की प्रगति की सराहना कर रही हैं, हमारी उपलब्धियों को मान्यता दे रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) ने भारत को निवेश और अवसरों का उज्ज्वल केंद्र बताया है, वहीं विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यु.ई.एफ.) भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने को लेकर आश्वस्त है।

भारत आज अपार संभावनाओं के द्वार पर खड़ा है। अब वह केवल ‘संभावनाओं वाला देश’ या ‘सोया हुआ देश’ नहीं है। भारत जाग चुका है, भारत आगे बढ़ चुका है और यह प्रगति अविराम है। भारत की विकास गाथा दूरदर्शी नेतृत्व, समावेशी विकास और अटूट संकल्प का जीवंत उदाहरण है।

कल्पना कीजिए, यदि ये कदम न उठाए गए होते तो आज हम कहाँ होते। जन-धन से लेकर डिजिटल सेवाओं तक, बैंकिंग समावेशन से लेकर सामाजिक सुरक्षा तक, आज परिवर्तन स्पष्ट दिखाई देता है। आज लोगों को बिजली का बिल भरने, पासपोर्ट आवेदन करने या अन्य सेवाओं के लिए छुट्टी लेने की आवश्यकता नहीं रही। तकनीक ने सेवा को सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाया है।

भारत आज उन अग्रणी राष्ट्रों में है, जो उभरती और विघटनकारी प्रौद्योगिकियों की शक्ति को पहचानते हैं। क्वांटम कंप्यूटिंग मिशन, ग्रीन हाइड्रोजन पहल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन, इन सभी क्षेत्रों में भारत अग्रसर है। वे दिन गए जब हम प्रतीक्षा करते थे कि तकनीक पश्चिम में विकसित होगी और हमें कतार में खड़ा होना पड़ेगा। आज भारत स्वयं नवाचार का केंद्र बन रहा है।

देवियो और सज्जनो,

कोई भी राष्ट्र तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक उसमें अपनी संस्कृति और राष्ट्रभाव के प्रति अडिग प्रतिबद्धता न हो। राष्ट्रवाद की भावना हमारे चिंतन में गहराई से अंतर्निहित होनी चाहिए। आर्थिक राष्ट्रवाद विकास की मूल आधारशिला है। यदि भारत आर्थिक राष्ट्रवाद को आत्मसात करे, तो हम अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं, देश में रोजगार सृजन होगा, उद्यमिता फले-फूलेगी और कच्चे माल का मूल्यवर्धन हमारे देश में ही होगा।

आज भारत केवल उभरती शक्ति नहीं, बल्कि एक उत्तरदायी वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है, जो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण के लिए सोचता है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के साथ भारत आज विश्व को समाधान दे रहा है।

लेकिन यह यात्रा केवल नीतियों और योजनाओं से नहीं, बल्कि भारत के नागरिकों के संकल्प, परिश्रम और चरित्र से पूरी होगी। एक सशक्त राष्ट्र वही होता है, जहाँ प्रत्येक नागरिक स्वयं को राष्ट्र निर्माण का सहभागी माने, और आज भारत उसी चेतना के साथ आगे बढ़ रहा है।

देवियो और सज्जनो,

आज सम्मानित होने वाले आप सभी महानुभाव देश की उस चेतना के प्रतिनिधि हैं, जो भारत को केवल आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि नैतिक, बौद्धिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और मानवीय दृष्टि से भी विश्व-गुरु बनाना चाहती है। आपने यह सिद्ध किया है कि जब एक भारतीय उत्कृष्टता का संकल्प लेता है, तो उसका प्रभाव केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राष्ट्र की छवि, विश्व की दिशा और भविष्य की पीढ़ियों की प्रेरणा बन जाता है।

रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था, “जहाँ मन भय से मुक्त हो और मस्तक ऊँचा हो, वहीं सच्चा स्वराज है।” आज के पुरस्कार विजेता उस निर्भीक, सृजनशील और राष्ट्रनिष्ठ भारत का प्रतीक हैं।

मैं भारत गौरव अवार्ड फाउंडेशन को इस पुनीत पहल के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ, जो गुमनाम कर्मयोगियों को पहचान देकर समाज के सामने आदर्श के रूप में प्रस्तुत कर रही है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को यह संदेश देते हैं कि सच्ची सफलता वही है, जो राष्ट्र और समाज के काम आए।

अंत में, मैं सभी सम्मानित विभूतियों को हृदय से बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ। ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि आप सभी इसी प्रकार राष्ट्रसेवा के पथ पर निरंतर अग्रसर रहें, और आपका जीवन भारत को ज्ञान, करुणा, नवाचार और नेतृत्व की वैश्विक शक्ति बनाने में निरंतर योगदान देता रहे।

आइए, हम सभी संकल्प लें कि जहाँ भी हों, जैसे भी हों, जिस क्षेत्र में हों, हम भारत को और श्रेष्ठ, और सशक्त, और समृद्ध बनाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे।

धन्यवाद,

जय हिंद!