SPEECH OF HON’BLE GOVERNOR PUNJAB AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CPR TRAINING CAMP ORGANISED BY SUDESH BHANDARI CHARITABLETRUST AT MOGA ON JANUARY 18, 2026.

सुदेश भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट के ‘सीपीआर ट्रेनिंग कैंप’ के अवसर पर
राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन
दिनांकः 18.01.2026, रविवार समयः दोपहर 12:00 बजे स्थानः मोगा, पंजाब

नमस्कार!
आज मुझे अत्यंत हर्ष हो रहा है कि सुदेश भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट पंजाब में अपना पहला CPR (कार्डियो पल्मोनरी रेसुसिटेशन) प्रशिक्षण कैंप आयोजित कर रहा है और यह आयोजन न केवल एक स्वास्थ्य पहल है, बल्कि जीवन की रक्षा के प्रति एक जागरूकता क्रांति की शुरुआत भी है।
मैं मानव जीवन से जुड़े इस अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन के लिए सुदेश भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट को हृदय से बधाई देता हूँ और आभार प्रकट करता हूँ, क्योंकि इस प्रकार के आयोजन न केवल लोगों को जीवनरक्षक कौशल से सुसज्जित करते हैं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता, उत्तरदायित्व और सेवा-भाव की संस्कृति को भी सुदृढ़ करते हैं। 
मैं ट्रस्ट के प्रत्येक सदस्य, विशेषकर श्री तरुण भंडारी जी के निस्वार्थ समर्पण को दिल से सलाम करता हूँ, जिन्होंने देशभर में 500 से अधिक CPR जागरूकता कैंपों के माध्यम से लोगों को प्रशिक्षित किया है और उनके इन प्रयासों के चलते अब तक 50 से अधिक व्यक्तियों की जान बची है। 
मुझे ज्ञात हुआ है कि सुदेश भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना श्री तरुण भंडारी जी द्वारा वर्ष 2022 में अपने पूज्य पिता जी के स्वर्गवास के उपरांत समाजकल्याण के उद्देश्य से की गई थी। यह ट्रस्ट सेवा, करुणा और मानवीय मूल्यों को समर्पित एक प्रेरणादायी पहल है, जो निरंतर जनहित और मानव सेवा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहा है। 
यह हर्ष और गर्व का विषय है कि ट्रस्ट द्वारा 5 मई 2025 को हरियाणा के विभिन्न स्थानों पर 115 रक्तदान शिविरों के माध्यम से एक ही दिन में खून के 15 हजार से अधिक यूनिट एकत्रित किये गये जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
इसके अलावा, ट्रस्ट ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए वर्ष 2025 में पाँच लाख से अधिक पौधे लगाकर एक अनुकरणीय पहल की है। 
साथ ही, सुदेश भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा मई 2025 में बागेश्वर बाबा जी ( पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री) की कथा का भी आयोजन किया गया, जिसने समाज में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ किया। 
यह अत्यंत गर्व का विषय है कि यह ट्रस्ट 25 जनवरी 2026 को श्री नाडा साहिब में एक चैरिटेबल लैब की स्थापना करने जा रहा है, जहाँ चिकित्सा से जुड़ी सभी प्रकार की आवश्यक जांच और परीक्षण बहुत ही रियायती दरों पर ज़रूरतमंद लोगों को उपलब्ध कराए जाएंगे। 
साथ ही, यह भी अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि आगामी 2-3 महीनों में ट्रस्ट द्वारा एक मीमोग्राफी बस सेवा प्रारंभ करने की योजना है, जिसके माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की समय पर जांच एवं जागरूकता की सुविधा प्रदान की जाएगी।
मैं ट्रस्ट द्वारा समाज कल्याण के लिए किए जा रहे इन विविध, निरंतर एवं सराहनीय प्रयासों की प्रशंसा करता हूँ तथा इस जनसेवा अभियान को और अधिक व्यापक व प्रभावी बनाने के लिए ट्रस्ट को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। 
देवियो और सज्जनो,
आज जब हम CPR (कार्डियो पल्मोनरी रेसुसिटेशन) प्रशिक्षण कैंप के इस अयोजन में एकत्रित हुए हैं तो हमें समझना होगा कि CPR का मूल उद्देश्य क्या है और यह क्यों हर नागरिक को जानना चाहिए। 
जब किसी व्यक्ति का दिल अचानक रुक जाता है, जिसे हम कार्डियक अरेस्ट कहते हैं, तो मस्तिष्क केवल कुछ ही मिनटों में ऑक्सीजन की कमी से क्षति का शिकार हो सकता है। सही समय पर और सही तरीके से दिया गया CPR रक्त को मस्तिष्क और हृदय तक पहुँचाने में मदद करता है, जिससे पेशेंट के जीवित रहने और गंभीर न्यूरोलॉजिकल नुकसान से बचने की संभावना बढ़ जाती है। अगर CPR तुरंत शुरू हो जाता है तो आउट-ऑफ-हॉस्पिटल कार्डियक अरेस्ट में जीवित रहने की संभावना दोगुनी या तीन गुना तक बढ़ सकती है। 
सीपीआर संबंधित जानकारी सुनने में सरल लगती है, पर अभ्यास और आत्मविश्वास के बिना वास्तविक आपात स्थिति में लोग हिचकिचाते हैं। इसलिए सुदेश भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट जैसे संगठन इन जागरूकता कैंपों के माध्यम से न केवल तकनीक सीखा रहे हैं बल्कि लोगों का भय दूर कर, उन्हें तुरंत कार्रवाई करने के लिए सक्षम बना रहे हैं, और यही हमारे समाज को मजबूत बनाता है। 
ट्रस्ट द्वारा देशभर में जो 500 से अधिक कैंप लगाए गए हैं और जिनसे 50 से अधिक जीवन बचे हैं, यह दर्शाता है कि प्रशिक्षित आम नागरिक वास्तविक जीवन में फर्क डाल सकते हैं। 
मैं हर स्कूल, कॉलेज, उद्योगिक इकाई, पंचायत, धार्मिक संस्थान और विभागों से आग्रह करता हूँ कि वे इन प्रशिक्षण सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लें या स्वयं अपने स्टाफ में CPR प्रशिक्षण करवाएं। इससे हमारा पूरा सामजिक ढाँचा अचानक दिल रुकने की घटनाओं के प्रति अधिक उत्तरदायी बन जाएगा। व्यक्तिगत रूप से हर जिले में कम-से-कम कुछ लोगों के CPR प्रशिक्षित होने से ही काफी फर्क पड़ सकता है। 
देवियो और सज्जनो, 
आज के समय में अचानक हृदयगति रुकना, दुर्घटनाएँ या आपातकालीन स्थितियाँ आम होती जा रही हैं। ऐसे क्षणों में अस्पताल पहुँचने से पहले के पाँच से सात मिनट अत्यंत निर्णायक होते हैं। यदि उस समय कोई सामान्य नागरिक भी सीपीआर देना जानता हो, तो वह किसी के जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन सकता है। 
सीपीआर का ज्ञान किसी डॉक्टर तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह ज्ञान छात्रों, शिक्षकों, पुलिसकर्मियों, ड्राइवरों, उद्योगों के कर्मचारियों और आम नागरिकों तक पहुँचना चाहिए। आज आवश्यकता है कि ऐसे सीपीआर शिविरों का विस्तार विद्यालयों, महाविद्यालयों, औद्योगिक संस्थानों और ग्रामीण क्षेत्रों तक किया जाए। 
महात्मा गांधी जी ने कहा था, “स्वास्थ्य ही वास्तविक संपदा है, सोना-चाँदी नहीं।” और स्वामी विवेकानंद जी का वाक्य है, “जब तक शरीर स्वस्थ नहीं, तब तक मन भी अपने सर्वोच्च लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकता।”
ये वचन हमें स्मरण कराते हैं कि राष्ट्र की प्रगति का आधार स्वस्थ नागरिक हैं। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति प्राथमिक चिकित्सा और सीपीआर जैसी तकनीकों से परिचित होगा, तब हम एक ऐसे समाज की रचना करेंगे जहाँ लोग केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन के लिए भी सजग और सक्षम होंगे।
स्वास्थ्य केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक संतुलन की अवस्था है। आज हमें “इलाज” के साथ-साथ “रोकथाम” और “जागरूकता” पर भी समान बल देना होगा। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग-प्राणायाम, स्वच्छता, तनाव-प्रबंधन और सकारात्मक जीवन-दृष्टि, ये सभी स्वस्थ जीवन के अनिवार्य स्तंभ हैं। सीपीआर प्रशिक्षण इसी व्यापक स्वास्थ्य दृष्टिकोण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, क्योंकि यह आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन की पहली ढाल बनता है।
अक्सर कहा जाता है कि इलाज से बेहतर रोकथाम है। हमारे गुरू श्री गुरू नानक देव जी ने प्रकृति को सर्वोच्च दर्जा देते हुए पवन गुरू पानी पिता माता धरत महत का संदेश दिया था। मैं आप सभी से अनुरोध करना चाहूंगा कि हमें लोगों को बिमारियों से बचाने के लिए हवा, पानी और मिट्टी को दूषित होने से बचाने के लिए संगठित रूप से कार्य करने चाहिए।
देवियो और सज्जनो,
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी के हृदय में कहीं न कहीं मानवता की सेवा का भाव अवश्य विद्यमान है। आवश्यकता इस बात की है कि हम इस सेवा-भाव को सशक्त बनाएं, विकसित करें और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाएं। यही भावना चिकित्सा जैसे महान पेशे की आत्मा है।
हमारे देश में चिकित्सा को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि परोपकार, करुणा और तपस्या का पवित्र माध्यम माना गया है। भारतीय परंपरा में ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ की भावना ने चिकित्सकों को सदैव समाज का मार्गदर्शक बनाया है। 
आज हमारे भारतीय डॉक्टरों ने अपने ज्ञान, कौशल, मानवीय संवेदना और अथक परिश्रम के बल पर विश्व स्तर पर एक विशिष्ट और सम्मानित पहचान स्थापित की है। जटिल से जटिल शल्य-चिकित्सा हो या अत्याधुनिक अनुसंधान, भारतीय चिकित्सा जगत ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध की है।
उच्च गुणवत्ता वाली, विश्वस्तरीय तथा अपेक्षाकृत सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं के कारण आज भारत मेडिकल टूरिज़्म का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनकर उभरा है। दुनिया के अनेक देशों से लोग उपचार के लिए भारत आ रहे हैं, जो न केवल हमारी चिकित्सकीय दक्षता का प्रमाण है, बल्कि हमारे सेवा-संस्कारों पर वैश्विक विश्वास की भी अभिव्यक्ति है।
पूरे विश्व को सु-स्वस्थ तथा रोग-मुक्त बनाना हमारा धर्म, यानी आदर्श है। पूरे विश्व का आरोग्य सुनिश्चित करने के मूल में ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का विचार निहित है। मैं यह आशा करता हूं कि आप सभी इस विचार को अपने निजी जीवन में अपना आदर्श वाक्य बनाएंगे।
देवियो और सज्जनो,
हमारी भारतीय परंपरा में कहा गया है, ‘‘जीवनदान से बड़ा कोई दान नहीं।’’ सीपीआर का प्रशिक्षण वास्तव में जीवनदान देने की क्षमता प्रदान करता है। यह हमें सिखाता है कि संकट के क्षण में डरने के बजाय कैसे साहस, समझ और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए। 
आज जब हम “विकसित भारत’’ की बात करते हैं, तो एक विकसित राष्ट्र वही होता है जहाँ नागरिक केवल अधिकारों के प्रति नहीं, बल्कि कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक हों। सीपीआर जैसे प्रशिक्षण नागरिक कर्तव्य का सशक्त उदाहरण हैं। 
मैं विशेष रूप से युवाओं से आग्रह करता हूँ कि वे इस प्रकार के प्रशिक्षण को गंभीरता से लें और इसे केवल प्रमाण पत्र तक सीमित न रखें, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर निःसंकोच इसका प्रयोग करें। आपका एक सही कदम किसी परिवार की पूरी दुनिया बचा सकता है।
आज के इस शिविर के माध्यम से आप सब न केवल एक तकनीक सीख रहे हैं, बल्कि समाज और मानवता के प्रति एक जिम्मेदारी भी स्वीकार कर रहे हैं। एक प्रशिक्षित हाथ, एक जागरूक मन और एक संवेदनशील हृदय, इन तीनों का मेल ही सच्चा स्वास्थ्य-सेवक बनाता है।
मैं खास तौर पर श्री तरुण भंडारी जी का उल्लेख करना चाहूँगा जिनका निःस्वार्थ समर्पण और समाज के प्रति सेवा भाव प्रेरणादायी है। ऐसे व्यक्तित्व की वजह से ही हमारा देश मानवीय मूल्यों की सबसे ऊँची मिसाल बनता है। सरकार, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र मिलकर जब ऐसे प्रयासों का समर्थन करते हैं, तभी परिणाम गुणात्मक रूप से बड़े और स्थायी होते हैं। 
सुदेश भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट ने इस प्रथम शिविर का आयोजन कर पंजाब के लिए एक नई दिशा स्थापित की है। यह पहल बताती है कि समाजसेवा केवल दान तक सीमित नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल और चेतना के प्रसार का भी नाम है। आज यदि हम एक जीवन भी बचा पाते हैं, तो यह किसी भी भौतिक उपलब्धि से कहीं बड़ा कार्य होगा। 
मैं कामना करता हूँ कि यह पहला शिविर अनेक शिविरों की श्रृंखला बने और पंजाब को “सीपीआर-साक्षर राज्य” बनाने की दिशा में एक सशक्त अभियान प्रारंभ हो। जब हमारा समाज स्वास्थ्य के प्रति सजग होगा, तभी हमारा विकास समावेशी, टिकाऊ और मानवीय होगा।
अंत में, मैं एक बार पुनः सुदेश भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट को इस प्रेरणादायी पहल के लिए बधाई देता हूँ, सभी प्रशिक्षकों और स्वयंसेवकों के सेवा-भाव को नमन करता हूँ और आप सभी से आग्रह करता हूँ कि आज सीखे गए इस ज्ञान को केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि इसे समाज के हर वर्ग तक पहुँचाएँ।
ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि वह आप सभी को स्वस्थ, सशक्त और सेवा-भाव से परिपूर्ण जीवन प्रदान करे। 
धन्यवाद,
जय हिन्द!