SPEECH OF HON’BLE GOVERNOR PUNJAB AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CONVOCATION OF DR BR AMBEDKAR NIT JALANDHAR ON 16.01.2026.
- by Admin
- 2026-01-16 14:30
डॉ. बी.आर. अंबेडकर, एनआईटी, जालंधर के 21वें दीक्षांत समारोह पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 16.01.2026, शुक्रवार समयः सुबह 11:00 बजे स्थानः जालंधर
नमस्कार!
मुझे डॉ. बी. आर. अंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर के इस 21वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर आपकी खुशियों में सम्मिलित होकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह दूसरी बार है जब मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान में आया हूं। मुझे देश के इस अग्रणी संस्थान में आने और आप सभी को संबोधित करने का अवसर देने के लिए मैं हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।
मैं आज उपाधि प्राप्त करने वाले सभी 1,452 विद्यार्थियों, उनके गौरवान्वित अभिभावकों तथा संस्थान के समर्पित शिक्षकों को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।
मुझे अवगत कराया गया है कि इस अवसर पर बी.टेक. के 1,011, एम.टेक. के 238, एम.एससी. के 90, एम.बी.ए. के 21 तथा पीएच.डी. के 92 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गई हैं, जो इस संस्थान की बहुविषयक शैक्षणिक उत्कृष्टता और सशक्त अकादमिक परंपरा का सजीव प्रमाण है।
आज जब हम इस प्रतिष्ठित संस्थान के दीक्षांत समारोह के लिए एकत्रित हुए हैं, तो इसके गौरवशाली अतीत को याद करना अत्यंत प्रासंगिक है। डॉ. बी. आर. अंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर की यह यात्रा विकास, नवाचार और राष्ट्र सेवा की एक अद्भुत कहानी है।
इस संस्थान की नींव वर्ष 1987 में एक ‘क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज’ (REC) के रूप में रखी गई थी। शुरुआत में इसे पंजाब सरकार और भारत सरकार के एक संयुक्त उपक्रम के रूप में स्थापित किया गया था।
यह यात्रा वर्ष 1989 में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर से संबद्ध तीन शाखाओं-इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग और टेक्सटाईल टेक्नोलॉजी में 100 छात्रों के प्रवेश के साथ शुरू हुई।
संस्थान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब 17 अक्टूबर, 2002 को भारत सरकार ने इसे ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा दिया और इसका नाम बदलकर डॉ. बी. आर. अंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) कर दिया गया।
वर्ष 2007 में, संसद के एक अधिनियम (NIT Act) के माध्यम से इसे ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित किया गया। इसने संस्थान को वैश्विक मानकों के अनुरूप अनुसंधान और शिक्षा प्रदान करने की शक्ति दी।
मात्र कुछ शाखाओं से शुरू हुआ यह सफर आज B-Tech, M-Tech, MBA, M-Sc और Ph.d कार्यक्रमों के एक विशाल केंद्र में बदल चुका है। आज यह संस्थान न केवल पंजाब, बल्कि पूरे देश के औद्योगिक विकास के लिए ‘टैलेंट हब’ के रूप में उभरा है।
साथियो,
यह अत्यंत गर्व का विषय है कि डॉ. बी. आर. अंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर निरंतर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। वर्ष 2026 में एनआईटी जालंधर को टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में 1001-1200 बैंड में स्थान प्राप्त हुआ है। इसी प्रकार, वर्ष 2025 में एनआईटी जालंधर ने राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) रैंकिंग में इंजीनियरिंग श्रेणी में 55वाँ स्थान, तथा इंडियन इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (IIRF) रैंकिंग 2024 में 39वाँ स्थान प्राप्त किया।
इसके अतिरिक्त, टाइम्स हायर एजुकेशन एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2025 में 351-400 बैंड, इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी श्रेणी में 801-1000 बैंड, तथा क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2025 में एशिया में 661-680 बैंड और दक्षिण एशिया में 202वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। यह संस्थान को एशिया एजुकेशन रिव्यू 2025 द्वारा एशियाई विद्यार्थियों के लिए भारत के शीर्ष 10 इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी शामिल किया गया है।
वर्ष 2024 में क्यूएस एशिया रैंकिंग में इसे सभी एनआईटी में छठा स्थान प्राप्त हुआ। वर्ष 2023 में संस्थान ने मार्केंटिंग एंड डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएट्स (MDRA) द्वारा भारत के श्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेजों में 29वाँ स्थान प्राप्त किया। साथ ही, शोध गुणवत्ता के आधार पर संस्थान को भारत के सभी विश्वविद्यालयों में कुल एच-इंडेक्स के अनुसार 45वाँ स्थान भी मिला।
इससे पहले के वर्षों में भी संस्थान का प्रदर्शन निरंतर सुदृढ़ रहा है। वर्ष 2020 में संस्थान Atal Ranking of Institutions on Innovation Achievements (ARIIA) में 11-25 बैंड, तथा भारत के शीर्ष तकनीक-सक्षम संस्थानों में अग्रणी स्थानों पर रहा। वर्ष 2019 में इंडिया टुडे-एमडीआरए द्वारा इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में 22वाँ स्थान तथा THE WEEK-Hansa Research Survey में 34वाँ स्थान प्राप्त हुआ।
ये सभी उपलब्धियाँ इस बात का सशक्त प्रमाण हैं कि एनआईटी जालंधर शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक मानकों की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है और उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।
मैं समझता हूं कि बाबा साहेब डॉ. बी. आर. अंबेडकर के नाम पर स्थापित यह संस्थान उनके उस विजन को साकार कर रहा है, जहाँ शिक्षा के माध्यम से समाज के हर वर्ग का उत्थान सुनिश्चित किया जा सके।
बाबासाहेब आंबेडकर के जीवन में जितना संघर्ष था, उतनी ही उनकी उपलब्धियां भी थी। बचपन से ही मेधावी छात्र रहे, डॉक्टर आंबेडकर ने अनेक चुनौतियों और बाधाओं का सामना करते हुए, देश-विदेश में श्रेष्ठ शिक्षा हासिल की। एक प्रसिद्ध विद्वान, मानवाधिकार कार्यकर्ता और कुशल वकील होने के साथ-साथ, वे स्वतंत्र भारत के संविधान-निर्माता और देश के पहले कानून मंत्री भी थे।
अपनी दूरदर्शिता के द्वारा उन्होंने अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों का इस्तेमाल समाज-कल्याण हेतु व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं को सुधारने के लिए किया। उनका जीवन मूल्यों और सिद्धान्तों पर आधारित था। उनके आदर्श और मूल्यों से प्रेरणा लेकर, आप सब कठिन से कठिन लक्ष्य को भी साध सकते हैं।
मेरे प्रिय युवाओं,
आज जब आप इस प्रतिष्ठित संस्थान से अपनी डिग्री लेकर बाहर निकलेंगे, तो याद रखिएगा कि आपके पीछे एनआईटी जालंधर की साढ़े तीन दशकों की गौरवशाली विरासत है। आप इस संस्थान के 'Ambassadors' हैं। आपकी सफलता ही इस संस्थान की असली रैंकिंग होगी।
ग्रेजुएट होना जीवन के एक चरण का समापन और दूसरे नए चरण का आरंभ है। जीवन के इस नए पड़ाव में, आप पर बड़ी जिम्मेदारियां होंगी और आप स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगे।
इस अवसर पर मैं आपको भगवान बुद्ध के शब्द ‘अत्त दीपो भव’ जिसका अर्थ है ‘‘अपना दीपक स्वयं बनें’’, की याद दिलाना चाहता हूँ। अपने ज्ञान और विवेक से आत्मनिर्भर बनें। आपकी बौद्धिक क्षमता और नैतिक चरित्र राष्ट्र निर्माण और समाज के कल्याण में प्रभावी योगदान देने के लिए आपके आधार स्तंभ सिद्ध होंगे। यहाँ से प्राप्त ज्ञान और संस्कार आपके भविष्य के मार्ग को आलोकित करेंगे।
आप एक ऐसे समय में ग्रेजुएट हो रहे हैं जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और डिजिटल बुनियादी ढांचे से लेकर अंतरिक्ष कार्यक्रमों तक, तकनीकी समाधानों का केंद्र बन चुका है। आर्थिक लचीलापन और सशक्तिकरण की पहल हमारे स्नातक युवाओं के लिए अपार अवसर प्रदान कर रही है।
आज विश्व की दृष्टि में भारत के प्रति सोच में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। भारत दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र है और हमारा युवा ही हमारी अर्थव्यवस्था और विकास का सारथी है। मैं ग्रेजुएट छात्रों से उद्यमी (entrepreneur) बनने का आग्रह करता हूँ। भारत को ‘सुपरपावर’ बनने के लिए ‘थॉट-लीडर्स’ (वैचारिक नेतृत्व) की आवश्यकता है।
‘विकसित भारत’ मिशन में शैक्षणिक संस्थानों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। हमारे युवाओं को उनकी पूर्ण क्षमता और एक संपूर्ण व्यक्तित्व में ढालना शैक्षणिक संस्थानों का सर्वोच्च उत्तरदायित्व है। देश को किसी भी संकट से बचाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
हमारे युवाओं के पास उत्तम ज्ञान, सुदृढ़ चरित्र और बौद्धिक बल होना चाहिए। संस्थानों को केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित न रहकर सहानुभूति, दृढ़ता, अनुशासन और सहयोग की भावना विकसित करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना चाहिए। हमारे युवाओं में सही और गलत के बीच अंतर करने की नैतिक तर्कशक्ति होनी चाहिए।
शिक्षकों को शैक्षणिक जानकारी के साथ-साथ छात्रों में चुनौतियों का सामना करने के लिए लचीलापन और धैर्य विकसित करना चाहिए। शिक्षकों का स्वयं का व्यवहार छात्रों के लिए एक आदर्श होना चाहिए। साथ ही, संस्थानों को छात्रों को सामुदायिक सेवाओं में सक्रिय रूप से शामिल करना चाहिए ताकि उनमें राष्ट्रीय और सामाजिक सेवा की भावना पैदा हो सके।
मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि एनआईटी जालंधर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, प्रभावशाली अनुसंधान और प्रभावी नेतृत्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्टता प्रदान कर रहा है। तकनीकी परिवर्तनों, उभरते बाजार की जरूरतों और पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति संस्थान की संवेदनशीलता सराहनीय है। आपकी क्षमताओं को देखते हुए, मुझे विश्वास है कि यह संस्थान पंजाब की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
मुझे हार्दिक प्रसन्नता होगी यदि हमारे शिक्षण संस्थान देश और प्रदेश में, नयी क्रांति और सामाजिक सम्पन्नता और समता के संदेशवाहक भी बनें। आज भारत, विश्व का तीसरा सबसे बड़ा Start-up ecosystemवाला देश है। सभी शिक्षण संस्थानों, विशेष रूप से तकनीकी शिक्षण संस्थानों, से यह अपेक्षा है कि वे इस ecosystem का भरपूर लाभ उठाएँ और अपने विद्यार्थियों को अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करें। उनका यह प्रयास भारत को नवाचार और टेक्नोलॉजी में एक सशक्त राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण योगदान होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी अनुसंधान और नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। कौशल-आधारित शिक्षा, लचीले पाठ्यक्रम और बहु-विषयक दृष्टिकोण पर बल देते हुए भारत को Knowledge Superpower बनाना ही इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर एनआईटी जालंधर को इस शिक्षा नीति को लागू करने में तत्परता दिखाने के लिए, मैं बधाई देता हूँ।
पंजाब में “Light Engineering”और “Textile Sector”बहुत मजबूत है। लुधियाना साइकिल, सिलाई मशीन, ऑटो-पार्ट्स और होजरी का केंद्र है, जबकि जालंधर खेल सामग्री का केंद्र है। इन क्षेत्रों को नए उपकरणों के डिजाइन और कार्यकुशलता में सुधार के माध्यम से और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।
एक कृषि प्रधान राज्य होने के नाते, पंजाब घटते जल स्तर की चुनौती से निपटने के लिए उच्च दक्षता वाली सिंचाई प्रणालियों और जल संरक्षण तकनीकों से लाभान्वित हो सकता है।
पंजाब एक सीमावर्ती राज्य भी है। सीमावर्ती क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की समान पहुंच की नितांत आवश्यकता है। मुझे अपेक्षा है कि एनआईटी जालंधर जैसा प्रतिष्ठित संस्थान इन क्षेत्रों के कॉलेजों को अकादमिक उन्नयन, संकाय विकास और समकालीन पाठ्यक्रम शुरू करने में मदद कर मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
इन क्षेत्रों में बाढ़ की चेतावनी के लिए ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम’ डिजाइन करने की भी काफी संभावनाएं हैं। नदी घाटियों के विस्तृत टोपोग्राफिक मानचित्र, जो भू-आकृति, ऊँचाई और ढाल को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं, बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की वैज्ञानिक पहचान में अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इसके माध्यम से न केवल जोखिम का सटीक आकलन संभव होगा, बल्कि समय रहते आवश्यक, प्रभावी और दूरगामी निवारक उपाय सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। संस्थान को पंजाब के सतत आर्थिक विकास के लिए सार्वजनिक नीतियां और कार्ययोजनाएं बनाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।
साथियो,
आज आप ऐसे युग में अपने पेशेवर जीवन में प्रवेश कर रहे हैं, जिसे तकनीकी क्रांति का स्वर्ण युग कहा जा सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव-प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डेटा विज्ञान जैसे क्षेत्र न केवल उद्योगों का स्वरूप बदल रहे हैं, बल्कि मानव जीवन की संपूर्ण कार्य-प्रणाली को नई दिशा दे रहे हैं।
आज तकनीक हमारे जीवन के हर पहलू से जुड़ चुकी है, स्वास्थ्य में टेलीमेडिसिन और रोबोटिक सर्जरी, शिक्षा में डिजिटल क्लासरूम और वर्चुअल लैब, कृषि में ड्रोन और स्मार्ट सिंचाई, शासन में ई-गवर्नेंस और डिजिटल इंडिया, और संचार में 5जी तथा भविष्य की 6जी प्रौद्योगिकियाँ। तकनीक ने न केवल दूरी घटाई है, बल्कि संभावनाओं का आकाश विस्तृत किया है।
किसी महानुभाव ने सत्य ही कहा है, कि विज्ञान की गति यदि चरित्र की गति से आगे निकल जाए, तो विनाश निश्चित है। इसलिए मैं आप सभी से कहना चाहूँगा कि तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाइए।
आज विश्व-मानचित्र पर वही राष्ट्र सशक्त और प्रभावशाली हैं, जिनकी जनसंख्या तकनीकी रूप से सक्षम, नवाचार-उन्मुख और अनुसंधान-संवेदनशील है। तकनीकी रूप से मजबूत जनसंख्या केवल उद्योगों को नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, कूटनीति और आत्मनिर्भरता को भी सुदृढ़ करती है।
मुझे विश्वास है कि इस संस्थान ने आपको हर चुनौती का सामना करने और देश की सेवा करने के लिए सक्षम बनाया है। आप अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करें और देश को विकास के पथ पर आगे लेकर जाने का संकल्प लें। आप सब शिक्षा और ज्ञान के बल पर जीवन में खूब उन्नति करेंगे, ऐसा मुझे विश्वास है। लेकिन इसके साथ-साथ अपने संस्कारों और संस्कृति से जुड़े रहना बहुत ज़रूरी है। तभी आप एक सार्थक और संतोषजनक जीवन जी सकते हैं, जो दूसरों के लिए भी प्रेरणादायक हो।
अंत में, मैं यह कहना चाहूंगा कि हमारे इंजीनियर और वैज्ञानिक उस परिवर्तन के योद्धा हैं जिसकी आकांक्षा भारत अपने ‘विकसित भारत’ मिशन में कर रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि एनआईटी जालंधर और इसके सभी छात्र-छात्राएं भारत की प्रगति के लिए सर्वोत्तम इकोसिस्टम बनाने में अपना योगदान देते रहेंगे।
मैं एक बार फिर आपको दीक्षांत समारोह की बधाई देता हूँ और आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
धन्यवाद,
जय हिन्द!