SPEECH OF HON’BLE GOVERNOR PUNJAB AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF 20TH ADMINISTRATOR’S CHALLENGE CUP ALL INDIA FOOTBALL TOURNAMENT (u-17 BOYS) AT CHANDIGARH ON JANUARY 28, 2026.

‘20वें प्रशासक चैलेंज कप अखिल भारतीय फुटबॉल टूर्नामेंट’ के समापन समारोह के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 28.01.2026,  बुधवारसमयः शाम 4:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

         

नमस्कार!

आज मुझे 20वें प्रशासक चैलेंज कप अखिल भारतीय फुटबॉल टूर्नामेंट (अंडर-17 बालक वर्ग) के समापन समारोह में उपस्थित होकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता चंडीगढ़ प्रशासन के खेल विभाग द्वारा 20 जनवरी से 28 जनवरी, 2026 तक अत्यंत सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक आयोजित की गई, जिसके लिए मैं आयोजकों को हार्दिक बधाई देता हूँ।

मुझे ज्ञात हुआ है कि इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की परिकल्पना वर्ष 2002 में पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक स्वर्गीय लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जे.एफ.आर. जैकब द्वारा की गई थी। उनका दूरदर्शी दृष्टिकोण था कि देशभर की उभरती हुई फुटबॉल प्रतिभाओं को एक ऐसा राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराया जाए, जहाँ वे उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धा के माध्यम से निखर सकें। 

आज, जब यह टूर्नामेंट अपने 20वें संस्करण में प्रवेश कर चुका है, तो यह गर्व का विषय है कि स्वर्गीय जैकब साहब की संकल्पना आज भी उतनी ही प्रासंगिक, प्रेरणादायी और प्रभावशाली बनी हुई है। यह प्रतियोगिता उनके खेलों के प्रति समर्पण और युवाओं के भविष्य में उनके अटूट विश्वास की जीवंत स्मृति है।

प्रशासक चैलेंज कप का उद्देश्य देशभर के 17 वर्ष से कम आयु वर्ग के उभरते हुए फुटबॉल खिलाड़ियों को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करना, जमीनी स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण एवं आवासीय खेल अकादमियों की ओर मार्गदर्शन देना है। यह प्रतियोगिता स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, खेल भावना और अंतर-राज्यीय खेल संबंधों को सुदृढ़ करती है तथा चंडीगढ़ सहित पूरे देश में फुटबॉल के प्रचार-प्रसार में योगदान देती है।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि इस टूर्नामेंट में देशभर से 17 टीमों ने भाग लिया है जिनमें क्षेत्रीय स्तर की चंडीगढ़ फुटबॉल अकादमी और मिनर्वा अकादमी फुटबॉल क्लब मोहाली के साथ-साथ राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, मेघालय, महाराष्ट्र, तेलंगाना आदि राज्यों की टीमें शामिल हैं।

इस टूर्नामेंट के पुरस्कार की बात करें तो इसमें प्रथम पुरस्कार 3 लाख रुपये, दूसरा 2 लाख रुपये, तीसरा 1 लाख रुपये तथा चौथा 50 हजार रुपये निर्धारित है। यह प्रतियोगिता लीग-कम-नॉकआउट आधार पर आयोजित की गई तथा प्रत्येक मैच 90 मिनट का रहा।

मैं इस अवसर पर विजेता टीम को हार्दिक बधाई देता हूँ, उपविजेता टीमों की सराहना करता हूँ और सभी प्रतिभागी टीमों को उनके उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन एवं अनुकरणीय खेल भावना के लिए बधाई देता हूँ। आपने यह सिद्ध किया है कि खेल केवल जीत-हार का नाम नहीं, बल्कि सम्मान, अनुशासन और आपसी भाईचारे का उत्सव है। 

देवियो और सज्जनो,

भारत में फुटबॉल का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और प्रेरणादायी रहा है। उन्नीसवीं सदी के अंत में यह खेल भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान आया, लेकिन शीघ्र ही भारतीय युवाओं ने इसे अपनी प्रतिभा, जुनून और आत्मसम्मान से जोड़ लिया।

भारत में फुटबॉल के प्रसार का श्रेय भारतीय शिक्षाविद नागेन्द्र प्रसाद सर्वाधिकारी को जाता है, जिन्हें ‘भारतीय फुटबॉल का जनक’ कहा जाता है। उन्होंने न केवल कलकत्ता में पहले संगठित फुटबॉल क्लबों की स्थापना की, बल्कि विद्यालयों और कॉलेजों में फुटबॉल को लोकप्रिय बनाने के लिए अथक प्रयास किए। उनके प्रयत्नों से फुटबॉल भारत में केवल एक विदेशी खेल नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे एक जन-आंदोलन का रूप लेने लगा और भारतीय खेल संस्कृति का अभिन्न अंग बन गया।

वर्ष 1889 में स्थापित मोहन बागान क्लब द्वारा साल 1911 में ब्रिटिश आर्मी के ईस्ट यॉर्कशायर रेजिमेंट को हराकर आई.ए.फए. शील्ड जीतना भारतीय फुटबॉल के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय माना जाता है। यह केवल एक खेल जीत नहीं थी, बल्कि औपनिवेशिक मानसिकता को चुनौती देने वाला एक राष्ट्रीय आत्मगौरव का क्षण था।

स्वतंत्रता के बाद का काल भारतीय फुटबॉल का स्वर्ण युग माना जाता है। 1950 और 1960 के दशकों में भारत एशिया की शीर्ष फुटबॉल शक्तियों में शामिल था। भारत ने 1951 में नई दिल्ली और 1962 में जकार्ता इंडोनेशिया में हुए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीते, 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में सेमीफाइनल तक पहुँचा और विश्व मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। 

इस दौर में सैयद अब्दुल रहीम जैसे महान कोच और पी.के. बनर्जी, चुन्नी गोस्वामी, तुलसीदास बलराम जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने भारतीय फुटबॉल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

हालाँकि बाद के दशकों में भारतीय फुटबॉल को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, किंतु आज पुनः एक सकारात्मक परिवर्तन का दौर दिखाई दे रहा है। इंडियन सुपर लीग, आई-लीग, युवा विकास कार्यक्रमों, अकादमियों और जमीनी स्तर पर बढ़ती संरचनात्मक पहलों के माध्यम से फुटबॉल को नई ऊर्जा मिली है। 

आज देश के कोने-कोने से उभरती प्रतिभाएँ यह संकेत दे रही हैं कि भारतीय फुटबॉल एक बार फिर आत्मविश्वास, संगठन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा की दिशा में सशक्त कदम बढ़ा रहा है।

हमें गर्व है कि वर्तमान में हमारी राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कप्तान भी  चंडीगढ़ के गुरप्रीत सिंह संधु हैं। उनकी यह उपलब्धि चंडीगढ़ और ट्राइसिटी के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।

साथियो,

खेलों को केवल जीत और हार की प्रतियोगिता भर नहीं कहा जा सकता। खेल केवल पदकों और आँकड़ों तक सीमित नहीं होते। खेल एक वैश्विक गतिविधियां हैं। किसी देश की महानता केवल उसकी आर्थिक या सामरिक शक्ति से ही नहीं आँकी जाती। 

एक वैज्ञानिक अपने छोटे से नवाचार से विश्व को दिशा दे सकता है, एक कलाकार अपनी कला से देश की पहचान बना सकता है और एक खिलाड़ी अपने खेल से पूरे राष्ट्र को गौरव और आत्मविश्वास प्रदान कर सकता है।

विश्व के अनेक ऐसे छोटे देश हैं, जिन्होंने अपनी सीमित भौगोलिक या आर्थिक क्षमता के बावजूद खेलों के माध्यम से विश्व मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। जमैका ने एथलेटिक्स में, केन्या और इथियोपिया ने लंबी दूरी की दौड़ में, क्रोएशिया ने फुटबॉल में, और न्यूजीलैंड ने रग्बी में विश्व को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

खेल पूरे राष्ट्र को प्रेरित करते हैं, एकजुट करते हैं और ऊर्जा से भर देते हैं। सुव्यवस्थित और संगठित रूप से विकसित खेल किसी भी देश की छवि, सॉफ्ट पावर और वैश्विक प्रभाव को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं।

मेरे युवा साथियो,

खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त करना आसान नहीं होता। इसके लिए घंटों की अथक साधना, अनुशासित जीवन-शैली, सूक्ष्म रणनीति, निरंतर अभ्यास और असफलताओं से जूझने का साहस आवश्यक होता है।

एक श्रेष्ठ खिलाड़ी बनने के लिए केवल मजबूत शरीर ही नहीं, बल्कि मजबूत मन, सकारात्मक सोच और अदम्य इच्छाशक्ति भी चाहिए।

महान धावक मिल्खा सिंह जी कहा करते थे, “कठिन परिश्रम के बिना सफलता केवल एक सपना है।” और स्वामी विवेकानंद जी का यह कथन आप सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत होना चाहिए, “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।”

मैं दृढ़ विश्वास के साथ कहता हूँ कि खेल और क्रीड़ा हमारे जीवन का अभिन्न अंग होने चाहिए। ये न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को मज़बूत करते हैं, बल्कि हमारी एकाग्रता, निर्णय-क्षमता और मानसिक संतुलन को भी विकसित करते हैं। टीम खेल हमें सहयोग, नेतृत्व, विश्वास और उत्तरदायित्व का पाठ पढ़ाते हैं।

खेलों में सहभागिता व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ाती है, टीमवर्क की भावना विकसित करती है और समभाव का दृष्टिकोण पैदा करती है।

महात्मा गांधी ने कहा था, “जीवन में नैतिकता और अनुशासन वही भूमिका निभाते हैं, जो खेल के मैदान में नियम निभाते हैं।” जब हम खेल के मैदान में उतरते हैं, तो यह केवल प्रतिस्पर्धा नहीं होती, बल्कि आत्मविजय का यज्ञ होता है। 

यही हमें विजय में विनम्र और पराजय में संयमी बनाता है। यही वह गुण है जिसे हम ‘खेल भावना’ कहते हैं, जो हमें असफलताओं को बिना कटुता, द्वेष या निराशा के स्वीकार करना सिखाता है और जीवन में आगे बढ़ते रहने की शक्ति देता है।

मैं यह भी मानता हूँ कि एक उत्कृष्ट खिलाड़ी एक उत्कृष्ट नागरिक और श्रेष्ठ नेतृत्वकर्ता भी बन सकता है, क्योंकि खेल चरित्र निर्माण की सबसे सशक्त प्रयोगशाला होते हैं।

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नेल्सन मंडेला ने कहा था, “खेल में दुनिया को बदलने की शक्ति है। इसमें प्रेरित करने की शक्ति है। इसमें लोगों को उस रूप में एकजुट करने की शक्ति है, जैसा बहुत कम चीजें कर पाती हैं। खेल युवाओं से उनकी भाषा में बात करता है। खेल वहाँ आशा पैदा कर सकता है, जहाँ पहले केवल निराशा थी।”

साथियो,

भारत एक युवा राष्ट्र है, जहाँ की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यह तथ्य अपने आप में भारत को विश्व का सबसे बड़ा युवा देश बनाता है और हमारी खेल क्षमता, ऊर्जा और भविष्य की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।

युवाशक्ति और खेलों के महत्व को समझते हुए, पिछले तकरीबन एक दशक में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक कदम उठाये गये हैं। साल 2014 के मुकाबले देश का खेल बजट लगभग 3 गुना बढ़ाया गया है। 

खेलो इंडिया जैसी योजनाओं के तहत युवा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। पूरे देश में आधुनिक खेल बुनियादे ढांचे तैयार किए जा रहे हैं, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें। 

खेलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पाठ्यक्रम का अनिवार्य अंग बनाया गया है। खेल को उसी श्रेणी में रखा गया है जैसे विज्ञान, कॉमर्स, गणित या दूसरी पढ़ाई; अब वह अतिरिक्त गतिविधि नहीं माने जाएंगे बल्कि खेलों का उतना ही महत्व होगा जितना बाकी विषयों का।

इसके अलावा, ‘खेलो भारत नीति 2025’ भारत सरकार की एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर से खेल संस्कृति को सुदृढ़ करना, प्रतिभाओं की पहचान व पोषण करना और भारत को एक वैश्विक खेल शक्ति के रूप में स्थापित करना है। यह नीति आधुनिक प्रशिक्षण, खेल अवसंरचना और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के माध्यम से एक स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी युवा पीढ़ी के निर्माण का राष्ट्रीय संकल्प है।

चंडीगढ़ प्रशासन ने भी खेलों के प्रति सराहनीय कदम उठाए हैं जिसके तहत एक प्रगतिशील खेल नीति शुरू की है। इस खेल नीति के अनुसार, ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता को 6 करोड़ रूपए का नकद पुरस्कार, रजत पदक विजेताओं को 4 करोड़ रुपए और कांस्य पदक विजेताओं को 2.5 करोड़ रुपए मिलेंगे। 

चंडीगढ़ प्रशासन सदैव खेलों और शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। इस प्रकार की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवा खिलाड़ियों को बेहतर अवसर और मंच प्रदान करने के हमारे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

प्रिय खिलाड़ियों,

आप सभी केवल टूर्नामेंट के प्रतिभागी नहीं हैं, आप भारत के भविष्य के प्रतिनिधि हैं। आपके जज़्बे, अनुशासन और संकल्प में आने वाले कल की संभावनाएँ छिपी हैं। हार आपको तोड़ने के लिए नहीं, निखारने के लिए आती है। जीत आपको ठहरने के लिए नहीं, और ऊँचा लक्ष्य निर्धारित करने के लिए मिलती है।

मैं इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। मुझे विश्वास है कि देशभर से आए खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा, आपसी संपर्क और अनुभव-साझाकरण ने आप सभी को आत्ममूल्यांकन, आत्मचिंतन और अपनी क्षमताओं को और निखारने का बहुमूल्य अवसर प्रदान किया होगा।

मैं खेल विभाग, चंडीगढ़ तथा इस प्रतियोगिता को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी आयोजकों, प्रशिक्षकों, अधिकारियों और स्वयंसेवकों को भी हार्दिक बधाई देता हूँ।

मुझे आशा है कि आप सभी का ‘सिटी ब्यूटीफुल’ चंडीगढ़ में प्रवास सुखद, प्रेरणादायी और स्मरणीय रहा होगा।

अंत में, मैं आप सभी युवाओं से यही कहना चाहूँगा, बड़े सपने देखिए, ऊँचा लक्ष्य रखिए और उससे भी ऊँचा परिश्रम कीजिए।

आप सभी को आपके उज्ज्वल भविष्य, श्रेष्ठ खेल जीवन और राष्ट्र के गौरव बनने की दिशा में मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।

धन्यवाद,जय हिन्द!