SPEECH OF HON’BLE GOVERNOR PUNJAB AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF PRIZE DISTRIBUTION FUNCTION FOR RUN FOR VIKSIT BHARAT MARATHON AT CHANDIGARH ON JANUARY 24, 2026.

एबीवीपी द्वारा अयोजित "Run for Viksit Bharat" के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 24.01.2026,  शनिवारसमयः सुबह 9:00 बजेस्थानः सुखना लेक चंडीगढ़

 

नमस्कार!

आज "Run for Viksit Bharat" जैसे अत्यंत प्रेरणादायी आयोजन में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और गर्व का अनुभव हो रहा है। यह केवल एक दौड़ नहीं है, यह एक संकल्प है, स्वस्थ भारत का, समर्थ भारत का और विकसित भारत का।

मैं इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को हृदय से बधाई देता हूँ। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से परिषद युवाओं में शारीरिक सुदृढ़ता, मानसिक दृढ़ता और नैतिक प्रतिबद्धता का संचार कर रही है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। 

साथियो,

हम सभी जानते हैं कि वर्ष 1949 में स्थापित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है, जिसने अपनी स्थापना के बाद से देश की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

एबीवीपी केवल एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की चेतना से प्रेरित एक व्यापक युवा आंदोलन है। यह संगठन देशभर के शैक्षणिक परिसरों में विद्यार्थियों को संगठनात्मक कौशल देने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक सरोकारों से जोड़ता है, आपदा के समय सेवा के लिए प्रेरित करता है, शिक्षा की गुणवत्ता पर विमर्श करता है और राष्ट्रहित के प्रश्नों पर जागरूकता फैलाता है। संगठन का मूलमंत्र-‘‘छात्र शक्ति, राष्ट्र शक्ति’’ यह स्पष्ट करता है कि यह संगठन छात्रों की शक्ति को राष्ट्रीय शक्ति में बदलने का कार्य करता है।

आज एबीवीपी भारत का सबसे बड़ा छात्र संगठन है। शिक्षा में भारतीयता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी की भावना, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर परिषद द्वारा किए जा रहे प्रयास युवाओं को एक सकारात्मक, रचनात्मक और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में अग्रसर करते हैं।

भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहाँ अनेक भाषाएँ, धर्म और संस्कृतियां सह-अस्तित्व में हैं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने “कश्मीर हो या गुवाहाटी, अपना देश, अपनी माटी” के भाव के साथ अपने कार्यों और पहलों के माध्यम से युवाओं को एकता के सूत्र में पिरोने का निरंतर प्रयास किया है।

इसके साथ ही संगठन छात्रों के बीच संवाद, सह-अस्तित्व और आपसी समझ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सम्मेलन व संगोष्ठियाँ, सांस्कृतिक एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम, तथा सीमावर्ती और दूरदराज क्षेत्रों में विविध गतिविधियों का नियमित आयोजन करता रहा है। 

ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से एबीवीपी ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रत्येक छात्र भारतीय संस्कृति और विविधता को आत्मसात कर देश की एकता को सशक्त बनाए, इस दिशा में संगठन का यह सतत प्रयास वास्तव में सराहनीय है।

साथियो,

वर्ष 2047 में जब हमारा राष्ट्र अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब भारत को एक सम्पूर्ण विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना हम सभी का सामूहिक लक्ष्य है। “विकसित भारत” का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि ऐसा भारत है जो सामाजिक रूप से समावेशी हो, तकनीकी रूप से सशक्त हो, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो और वैश्विक मंच पर नेतृत्वकारी भूमिका निभाने में सक्षम हो।

आज भारत संरचनात्मक सुधारों, डिजिटल क्रांति, स्टार्टअप संस्कृति, बुनियादी ढांचे के अभूतपूर्व विस्तार और नवाचार के माध्यम से तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। परंतु इस राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए आवश्यक है जन-भागीदारी, जहां प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से हमारी युवा पीढ़ी, स्वयं को इस परिवर्तन यात्रा का सक्रिय भागीदार माने।

देवियो और सज्जनो,

आज का भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा उत्पादन, स्टार्टअप और नवाचार, हर क्षेत्र में भारत अपनी क्षमता का परिचय दे रहा है। “आत्मनिर्भर भारत” का संकल्प आज हमारी आर्थिक और रणनीतिक नीतियों की धुरी बन चुका है।

राष्ट्र-निर्माण के लिए केवल संसाधन पर्याप्त नहीं होते, बल्कि अनुशासित, दक्ष और चरित्रवान मानव संसाधन सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश यानी हमारी युवा शक्ति ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यदि यह शक्ति सही दिशा में संगठित और प्रेरित हो जाए, तो विकसित भारत का लक्ष्य कोई दूर का सपना नहीं रहेगा।

मेरे युवा साथियों,

विकसित भारत के वास्तविक शिल्पकार आप हैं। आप केवल विकास के लाभार्थी नहीं, बल्कि उसके प्रेरक, नियंता और संवाहक हैं। आपकी भूमिका केवल रोजगार पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार सृजन, नवाचार, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने तक विस्तृत है।

आज का युवा निरंतर कौशल-विकास, तकनीकी दक्षता, स्टार्टअप संस्कृति, शोध, खेल और सेवा, हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। परंतु इसके साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि हमारे भीतर राष्ट्र प्रथम की भावना, सामाजिक संवेदनशीलता और नैतिक प्रतिबद्धता सदैव जीवित रहे। एक अनुशासित, जिम्मेदार और जागरूक युवा पीढ़ी ही राष्ट्र के दीर्घकालीन विकास और स्थिरता की गारंटी बनती है।

जब हम युवाओं की बात करते हैं, तो स्वामी विवेकानंद जी का स्मरण होता है। वे ऐसे युवाओं का सपना देखते थे जिनमें “लोहे जैसी मांसपेशियाँ और इस्पात जैसी नसें” हों। उनका विश्वास था कि शक्तिशाली शरीर में ही शक्तिशाली मस्तिष्क और महान चरित्र का विकास संभव है।

स्वामी विवेकानंद जी कर्म, साहस और नेतृत्व के प्रबल समर्थक थे। वे कहते थे कि राष्ट्र का निर्माण पुस्तकों से नहीं, बल्कि चरित्र, आत्मविश्वास और सेवा-भाव से होता है। आज के भारत में, जब हम विकसित भारत का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं, तब उनके विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।

देवियो और सज्जनो,

शारीरिक स्वास्थ्य किसी भी राष्ट्र की बुनियाद होता है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। शारीरिक सुदृढ़ता न केवल व्यक्तिगत क्षमता बढ़ाती है, बल्कि राष्ट्रीय उत्पादकता, कार्यकुशलता और नेतृत्व क्षमता को भी सुदृढ़ करती है।

एक स्वस्थ समाज स्वास्थ्य-व्यवस्था पर बोझ को कम करता है, कार्यबल की दक्षता बढ़ाता है और आपदाओं तथा चुनौतियों के प्रति राष्ट्र की सहनशीलता को मजबूत करता है। फिटनेस अनुशासन, एकाग्रता, आत्मनियंत्रण और टीम भावना को विकसित करती है, जो किसी भी नेतृत्वकर्ता के अनिवार्य गुण हैं।

यही कारण है कि "Run for Viksit Bharat" जैसे आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये आयोजन यह संदेश देते हैं कि राष्ट्र निर्माण केवल विचारों से नहीं, बल्कि कर्म, पसीने और संकल्प से होता है।

साथियो,

मेरा मानना है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सेनाओं, संसाधनों या अर्थव्यवस्था में ही नहीं, बल्कि उसके युवाओं के चरित्र, चेतना और संकल्प में बसती है। इतिहास साक्षी है कि जब-जब किसी राष्ट्र के युवा जागृत हुए हैं, तब-तब उस राष्ट्र ने नई दिशा पाई है, नए शिखर छुए हैं और अपनी नई पहचान गढ़ी है।

आज भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है। यह हमारे लिए केवल एक जनसांख्यिकीय तथ्य नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक अवसर है। यह अवसर है भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने का। भारत का भविष्य आज के युवाओं के विचारों, आचरण और कर्मों में आकार ले रहा है।

युवाओं के चरित्र का निर्माण किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी होता है। ज्ञान, तकनीक और कौशल अत्यंत आवश्यक हैं, किंतु उनसे भी अधिक आवश्यक है चरित्र। डिग्रियाँ रोजगार दिला सकती हैं, प्रतिभा ऊँचाई दे सकती है, परंतु चरित्र ही विश्वास, स्थायित्व और नेतृत्व प्रदान करता है। भारत को आज केवल कुशल युवा नहीं, बल्कि सदाचारी, संवेदनशील और उत्तरदायी युवा चाहिए।

विकसित भारत 2047 का सपना केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है। इसका अर्थ है नैतिक शासन, समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, पर्यावरण संतुलन और अवसरों की समानता। यह तभी संभव है जब भारत का युवा करियर के साथ-साथ कर्तव्य को भी अपने जीवन का ध्येय बनाए और व्यक्तिगत सफलता को राष्ट्र निर्माण से जोड़े।

साथियो,

आज का युग ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का युग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप्स, अंतरिक्ष विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत का युवा वैश्विक नेतृत्व की क्षमता रखता है। आत्मनिर्भर भारत का निर्माण तभी होगा जब युवा नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजन करने वाले बनेंगे, उपभोक्ता नहीं, नवप्रवर्तक बनेंगे और समस्याओं के दर्शक नहीं, समाधान के वाहक बनेंगे।

एक महान राष्ट्र अपनी उपलब्धियों से ही नहीं, अपनी संवेदनशीलता से भी पहचाना जाता है। समाज में शिक्षा से वंचित बच्चे, अकेले बुजुर्ग, नशे की गिरफ्त में युवा और संकटग्रस्त प्रकृति, ये सभी युवाओं से उत्तरदायित्व की अपेक्षा करते हैं। सेवा केवल संस्थाओं का कार्य नहीं, बल्कि युवा चरित्र की पहचान होनी चाहिए। विवेकानंद जी का संदेश यही है कि आत्मविश्वास के साथ सेवा का भाव जुड़ जाए तो व्यक्ति महान बनता है और राष्ट्र सशक्त।

आज के युवा केवल वर्तमान के नागरिक नहीं हैं, वे भविष्य के संरक्षक भी हैं। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जल संकट और जैव-विविधता की क्षति आने वाली पीढ़ियों की चेतावनी हैं। यदि आज युवा प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें, तो भारत सतत विकास और पर्यावरण नेतृत्व का वैश्विक उदाहरण बन सकता है।

मेरा मानना है कि राष्ट्रप्रेम केवल नारों या प्रतीकों से नहीं, बल्कि आचरण से सिद्ध होता है। ईमानदारी, अनुशासन, कानून का सम्मान, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और कर्तव्यों के निर्वहन में निष्ठा, यही सच्चे राष्ट्रप्रेम के स्वरूप हैं। चरित्रवान युवा ही सच्चा राष्ट्रनिर्माता बनता है।

स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तित्वों ने युवावस्था में ही यह सिद्ध कर दिया था कि जब साहस, करुणा और संकल्प एक साथ आते हैं, तब इतिहास की दिशा बदल जाती है।

मेरे युवा साथियो, भारत आपसे केवल सफलता नहीं, संस्कार, संवेदना और संकल्प चाहता है। अपने जीवन को केवल “मैं क्या बनूँ?” तक सीमित न रखें, यह भी पूछें, “मेरे होने से भारत को क्या लाभ होगा?” यदि आपका चरित्र ऊँचा होगा, तो भारत का मस्तक अपने-आप ऊँचा होगा।

मेरे युवा साथियों,

आज जब हम "Run for Viksit Bharat" में दौड़ रहे हैं, तो यह केवल एक शारीरिक गतिविधि नहीं है, बल्कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने हेतु एक स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर युवा पीढ़ी के निर्माण की दिशा में हमारा सामूहिक प्रयास है।

एक फिट युवा ही शैक्षणिक, व्यावसायिक और सामाजिक दायित्वों का पूरी तरह से निर्वहन कर सकता है। शारीरिक अनुशासन जीवन में निरंतरता, सहनशीलता और सामूहिकता का संस्कार भरता है। फिटनेस हमें सक्रिय नागरिक बनाती है, जो समाज और राष्ट्र के लिए दीर्घकाल तक योगदान दे सकता है।

अंत में, मैं आप सभी से आह्वान करता हूँ कि हम "Run for Viksit Bharat" को केवल एक कार्यक्रम न मानें, बल्कि इसे स्वस्थ शरीर, जागरूक मन, कुशल हाथ और राष्ट्र के प्रति समर्पित हृदय जैसे संकल्प  के साथ अपने जीवन की कार्यशैली बनाएं।

आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम स्वयं को सक्षम बनाकर, समाज को सशक्त बनाकर और राष्ट्र को समर्पित होकर विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करेंगे।

इन्हीं शब्दों के साथ, मैं इस आयोजन की सफलता की कामना करता हूँ और आप सभी को उज्ज्वल, स्वस्थ और राष्ट्रनिष्ठ भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ।

धन्यवाद,

जय हिंद!