SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INTERACTION WITH SOCIO POLITICAL ECONOMIC STUDY TOUR 66TH NDC COURSE AT LOK BHAVAN, PUNJAB ON FEBRUARY 2, 2026.
- by Admin
- 2026-02-02 19:15
नेशनल डिफेंस कॉलेज के 66वें कोर्स के प्रतिनिधिगण के साथ भेंट पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 02.02.2026, सोमवार समयः शाम 5:00 बजे स्थानः लोकभवन
नमस्कार!
मैं आज नेशनल डिफेंस कॉलेज के 66वें कोर्स के सम्मानित आप सभी प्रतिनिधिगणों का लोक भवन पंजाब में हार्दिक स्वागत करता हूँ। आप सभी का यहाँ आगमन हमारे लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है।
नई दिल्ली में नेशनल डिफेंस कॉलेज का 66वाँ कोर्स एक प्रतिष्ठित 47 सप्ताह का कार्यक्रम है, जिसे वरिष्ठ अधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा प्रबंधन, सामरिक नेतृत्व और सार्वजनिक नीति निर्माण में उच्चतर दायित्वों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है।
इस कोर्स का पाठ्यक्रम अत्यंत व्यापक है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा, सुशासन, संघवाद, वैश्विक एवं क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य तथा सामरिक निर्णय-प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण विषयों का समावेश है।
अनुभवात्मक कौशल के अंतर्गत इस कोर्स में एक सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक अध्ययन दौरा भी शामिल है। इस दौरान कोर्स सदस्य विभिन्न राज्यों में वरिष्ठ राज्य नेतृत्व, प्रमुख विभागों और जिला प्रशासन के साथ संवाद कर शासन की व्यावहारिक पद्धतियों, विकास संबंधी चुनौतियों और जमीनी वास्तविकताओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करते हैं।
इसी अध्ययन दौरे के अन्तर्गत आप पंजाब के 5 दिवसीय अध्ययन यात्रा पर आए हैं जो 2 फरवरी से आरंभ होकर 6 फरवरी को समाप्त होगी।
मुझे बताया गया है कि पंजाब के दौरे पर आए 66वें एनडीसी कोर्स के इस प्रतिनिधिमंडल में कुल 17 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जिनमें 5 विदेशी कोर्स सदस्य भी हैं।
मुझे विश्वास है कि पंजाब की धरती पर आपका यह आगमन आपको शासन, विकास और सुरक्षा के व्यावहारिक आयामों को निकट से समझने का अवसर प्रदान करेगा, और यह संवाद हम सभी के लिए समान रूप से समृद्धिदायक सिद्ध होगा।
आप केवल एक अध्ययन-दौरे पर आए अधिकारी नहीं हैं; आप वे नेता हैं जो भारत की सामरिक सोच, प्रशासनिक क्षमता और आंतरिक सुरक्षा की दिशा तय करेंगे। आपसे संवाद करना मेरे लिए विशेष सम्मान का विषय है।
हम जानते हैं कि नेशनल डिफेंस कॉलेज भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह संस्थान सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं, पुलिस सेवाओं और मित्र देशों के अधिकारियों को एक साझा मंच प्रदान कर सामरिक चिंतन, सिविल-मिलिट्री समन्वय और अंतर-एजेंसी समझ को सुदृढ़ करता है।
इस संस्थान के स्थापना की बात करें तो भारत की स्वतंत्रता के बाद, भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी रणनीतिक शिक्षा के लिए यूनाइटेड किंगडम के इम्पीरियल डिफेंस कॉलेज (IDC) भेजे जाते थे। परंतु वहां सीमित सीटों के कारण, भारत में एक समकक्ष संस्थान की आवश्यकता महसूस की गई। इसी आवश्यकता के परिणामस्वरूप, 1959 में भारत सरकार ने एनडीसी की स्थापना की घोषणा की और 27 अप्रैल 1960 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने एनडीसी का उद्घाटन किया।
साथियो,
पंजाब भारत की संवैधानिक और सामरिक संरचना में एक अत्यंत विशिष्ट स्थान रखता है। यह केवल एक सीमावर्ती राज्य भर नहीं है, बल्कि वीरता, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा की जीवंत परंपरा से ओतप्रोत एक ऐसी भूमि है, जिसने देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता में सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है।
यहाँ का समाज लोकतांत्रिक मूल्यों, सहकारी संघवाद और विविधता में एकता की भावना में गहराई से रचा-बसा है। सीमाओं की रक्षा से लेकर लोकतांत्रिक चेतना के संरक्षण तक, पंजाब का योगदान राष्ट्रीय जीवन के हर महत्वपूर्ण आयाम में दृष्टिगोचर होता है।
पंजाब का अनुभव हमें यह महत्वपूर्ण सीख देता है कि आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक समरसता केवल प्रशासनिक उपायों या शक्ति-प्रयोग से सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इसके लिए आवश्यक है, संवैधानिक शासन, विधि का शासन और संस्थागत ईमानदारी।
डॉ. बी. आर. अंबेडकर जी ने कहा था, “संविधान केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति है।” पंजाब ने इस सत्य को व्यवहार में जीकर दिखाया है।
जब शासन संविधान की मर्यादाओं के भीतर कार्य करता है, जब कानून सब पर समान रूप से लागू होता है, और जब संस्थाएँ निष्पक्ष, पारदर्शी और उत्तरदायी रहती हैं, तभी समाज में विश्वास, स्थिरता और शांति का वातावरण बनता है।
पंजाब ने समय-समय पर अनेक चुनौतियों का सामना किया है, किंतु हर बार लोकतांत्रिक मूल्यों, न्यायिक प्रक्रिया, प्रशासनिक दृढ़ता और जनसहभागिता के माध्यम से संतुलन और शांति की स्थापना की है।
यह अनुभव इस सत्य को रेखांकित करता है कि सुरक्षा केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि संस्थाओं की विश्वसनीयता और समाज के विश्वास पर भी निर्भर करती है। यही कारण है कि पंजाब आज संवैधानिक शासन और सामाजिक सौहार्द का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरता है।
साथियो,
भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी सहकारी संघीय व्यवस्था में निहित है, जहाँ केंद्र और राज्य परस्पर साझेदारी की भावना से जटिल प्रशासनिक, विकासात्मक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का समाधान करते हैं। हमारे संविधान ने शक्तियों का ऐसा संतुलित वितरण किया है, जो न केवल शासन को प्रभावी बनाता है, बल्कि विविधताओं से भरे इस देश को एक सूत्र में बाँधकर रखने में भी सहायक होता है।
जब केंद्र और राज्य संवाद, समन्वय और सहयोग के साथ कार्य करते हैं, तो नीतियाँ अधिक व्यावहारिक बनती हैं, संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और नागरिकों तक सेवाओं की पहुँच अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित होती है। विशेषकर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, सीमा प्रबंधन, आंतरिक शांति, और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में यह साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होती है।
नेशनल डिफेंस कॉलेज जैसे मंच भविष्य के राष्ट्रीय नेताओं में इसी साझा समझ को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहाँ विभिन्न सेवाओं और राज्यों से आए अधिकारी एक साथ बैठकर विचार-विमर्श करते हैं, अनुभव साझा करते हैं और राष्ट्रीय चुनौतियों को समग्र दृष्टि से समझते हैं। यह मंच उन्हें यह सिखाता है कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में सफलता का मार्ग सहयोग, संवाद और साझी जिम्मेदारी से होकर ही जाता है।
प्रिय अधिकारियों,
आप केवल नीति-निर्माता नहीं, बल्कि दृष्टि-निर्माता हैं। नीतियाँ समय के साथ बदल सकती हैं, परंतु दृष्टि ही वह स्थायी आधार होती है जो किसी राष्ट्र की दिशा तय करती है। आपके निर्णय आने वाले वर्षों में लाखों नागरिकों के जीवन, उनकी सुरक्षा, उनके अवसरों और उनके विश्वास को प्रभावित करेंगे। इसलिए आपके सामने केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व भी है।
हमारे पूर्व राष्ट्रपति श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी ने कहा था, “नेतृत्व का अर्थ है कठिन परिस्थितियों में भी आशा का मार्ग दिखाना।” यही नेतृत्व की असली परीक्षा है, जब परिस्थितियाँ जटिल हों, संसाधन सीमित हों, और चुनौतियाँ बहुआयामी हों, तब संतुलन, विवेक और दूरदर्शिता के साथ निर्णय लेना।
नेशनल डिफेंस कॉलेज में आपका प्रशिक्षण आपको यही क्षमता प्रदान करता है, समस्या को अनेक दृष्टिकोणों से देखने की, तथ्यों और संवेदनशीलताओं के बीच संतुलन स्थापित करने की, और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लेने की। यही गुण आपको एक प्रभावी प्रशासक से आगे बढ़ाकर एक प्रेरक नेता बनाते हैं।
प्रिय अधिकारियों,
पंजाब का राज्यपाल होने के नाते मैं आप सभी से यह अपेक्षा करता हूँ कि अपने इस प्रवास के दौरान आप यहाँ के शासन-तंत्र, विकास मॉडल, सामाजिक संरचना और सुरक्षा व्यवस्था के विविध आयामों को निकट से समझने का प्रयास करें। पंजाब केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक चेतना, सामुदायिक सहभागिता और संस्थागत सुदृढ़ता का जीवंत उदाहरण भी है।
मैं चाहूँगा कि आप यहाँ के जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों, पुलिस और सिविल प्रशासन के समन्वय, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की चुनौतियों, युवाओं की आकांक्षाओं, और सामाजिक समरसता के प्रयासों को प्रत्यक्ष रूप से देखें। यह अनुभव आपको यह समझने में सहायता करेगा कि नीतियाँ जमीनी स्तर पर किस प्रकार कार्यान्वित होती हैं, और किस प्रकार प्रशासन, समाज और संस्थाएँ मिलकर स्थिरता और विकास सुनिश्चित करते हैं।
आपका यह अध्ययन केवल अवलोकन तक सीमित न रहे, बल्कि संवाद, प्रश्न और विचार-विमर्श के माध्यम से एक गहन समझ विकसित करे। मुझे विश्वास है कि पंजाब में आपका यह अनुभव आपकी सामरिक और प्रशासनिक दृष्टि को और व्यापक बनाएगा, और भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर आपके निर्णयों को अधिक संवेदनशील, संतुलित और व्यावहारिक दिशा प्रदान करेगा।
साथ ही, मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि अपने इस प्रवास के दौरान पंजाब की सांस्कृतिक समृद्धि, यहाँ की आत्मीयता से भरे आतिथ्य-सत्कार और प्रसिद्ध व्यंजनों का भी अनुभव अवश्य करें। पंजाब की पहचान केवल उसकी भौगोलिक या सामरिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसकी जीवंत लोकसंस्कृति, उत्सवधर्मिता, संगीत, नृत्य और मिलनसार स्वभाव से भी होती है।
यहाँ के गुरुद्वारों की परंपरा, लंगर की सेवा-भावना, भांगड़ा और गिद्धा की ऊर्जा, सूफी और लोकधुनों की मिठास, तथा मेलों-त्योहारों की रंगत, ये सब मिलकर पंजाब की आत्मा का परिचय कराते हैं। इसी प्रकार, यहाँ के पारंपरिक व्यंजन केवल भोजन नहीं, बल्कि संस्कृति का अनुभव हैं।
मुझे विश्वास है कि पंजाब की यह आत्मीयता, विविधता और जीवन्तता आपके इस अध्ययन दौरे को और अधिक स्मरणीय बना देगी तथा आपको इस भूमि की मानवीय संवेदनाओं से भी परिचित कराएगी।
मुझे विश्वास है कि पंजाब में आपके संवाद और अनुभव आपको शासन, विकास और सुरक्षा के व्यावहारिक आयामों की गहन समझ प्रदान करेंगे। यह अध्ययन-दौरा आपके बौद्धिक और व्यावसायिक जीवन को और समृद्ध करेगा।
मैं आपके उज्ज्वल भविष्य और सफल नेतृत्व की कामना करता हूँ।
धन्यवाद,
जय हिन्द!