SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF PASSING OUT PARADE OF BSF WOMEN RECRUITS AT HOSHIARPUR ON FEBRUARY 7, 2026.
- by Admin
- 2026-02-07 12:05
बी.एस.एफ. के महिला नवआरक्षकों के दीक्षांत परेड के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 07.02.2026, शनिवार समयः सुबह 9:30 बजे स्थानः होशियारपुर
नमस्कार!
मुझे आज सीमा सुरक्षा बल (बी.एस.एफ.) के इस दीक्षांत परेड समारोह में बैच संख्या 275 एवं 276 के 448 महिला नवआरक्षकों द्वारा प्रस्तुत शानदार परेड की सलामी लेते हुए अपार गर्व एवं हर्ष की अनुभूति हो रही है।
इस शानदार दीक्षांत परेड के साथ ही आज आप औपचारिक रूप से सीमा सुरक्षा बल यानी भारत की प्रथम रक्षा पंक्ति के महत्वपूर्ण सदस्य बन कर राष्ट्र सेवा में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए प्रथम कदम रखने जा रही हैं।
शानदार परेड एवं आपकी इस उपलब्धि के लिए मैं आपको बधाई देता हूँ, साथ ही आपके माता-पिता एवं परिजनों को भी इस अवसर पर बधाई देते हुए सीमा सुरक्षा बल की ओर से धन्यवाद देता हूँ कि आपने अपनी बहादुर बेटियों को सीमा सुरक्षा बल में भेजकर देश-सेवा के कार्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
देवियो और सज्जनो,
आज सीमा सुरक्षा बल देश की प्रथम रक्षा पंक्ति के रूप में उत्कृष्ट कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा कर रहा है। आपका कार्य अत्यंत प्रशंसनीय और वंदनीय है। तपती धूप, कठोर मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी आपकी सतर्कता और धैर्य अद्वितीय है, यह मैंने स्वयं देखा है।
हिमालय की ऊँची चोटियों से लेकर थार के तपते रेगिस्तान, पूर्वोत्तर के घने जंगलों और रण-कच्छ के दलदली क्षेत्रों तक, आपके जवान हर परिस्थिति में मुस्तैदी से तैनात हैं। आपका ध्येय वाक्य “जीवन पर्यन्त कर्तव्य” आपके प्रत्येक कर्म में स्पष्ट झलकता है। मैं उन माताओं और बहनों को भी नमन करता हूँ, जिन्होंने ऐसी वीर बेटियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया।
विश्व की सबसे संवेदनशील सीमाओं पर तैनात यह बल पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ 6 हजार 386 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करता है। 1965 में स्थापना के बाद से, विशेषकर 1971 के युद्ध में, आपकी भूमिका ऐतिहासिक और अविस्मरणीय रही है।
आप सभी वीर जवान सीमा पर तैनात हैं, इसी कारण देशवासी सुरक्षित वातावरण में निश्चिंत होकर जीवन यापन कर पाते हैं। आपका धैर्य, सतर्कता और पराक्रम ही वह आधार है, जिसके कारण प्रत्येक भारतीय निर्भय होकर राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में अपना योगदान दे रहा है।
देश में हो रही प्रगति की मजबूत नींव आप ही हैं। आपकी निरंतर जागरूकता और समर्पण के कारण विकास का लाभ देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है।
घुसपैठ, तस्करी और अस्थिरता फैलाने के प्रयासों को जिस दृढ़ता से आप विफल कर रहे हैं तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण सुदृढ़ कर रहे हैं, उसके लिए मैं सभी सीमा प्रहरियों का हृदय से आभार और अभिनंदन करता हूँ।
आपका राष्ट्र के प्रति समर्पण वंदनीय, प्रेरणादायक और अनुकरणीय है। प्रत्येक भारतीय का यह राष्ट्रधर्म है कि वह हर परिस्थिति में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे और अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करे।
आज हम सभी उस संकल्प-यात्रा का हिस्सा हैं, जो वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। इस महायात्रा में आपकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सुरक्षित सीमाएँ ही समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की मजबूत नींव बनाती हैं।
प्रिय महिला नवआरक्षको,
मैं समझता हूं कि नारी शक्ति केवल करुणा और संवेदना की प्रतीक नहीं, बल्कि साहस, नेतृत्व और दृढ़ता की जीवंत प्रतिमूर्ति है। इतिहास साक्षी है कि जब-जब राष्ट्र को आवश्यकता हुई, महिलाओं ने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। आज आप उसी परंपरा की आधुनिक प्रतिनिधि हैं।
हमारी वीरांगनाओं की परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। रानी लक्ष्मीबाई ने अद्वितीय साहस के साथ स्वतंत्रता संग्राम में नेतृत्व किया। रानी दुर्गावती ने विपरीत परिस्थितियों में शौर्य का परिचय दिया, जबकि अहिल्याबाई होल्कर ने सुशासन और लोककल्याण का आदर्श प्रस्तुत किया।
आधुनिक भारत में भी महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध की है। कल्पना चावला ने अंतरिक्ष में भारत का नाम रोशन किया। किरण बेदी ने प्रशासनिक सेवा में नई मिसाल कायम की। खेल जगत में मैरी कॉम और पी.वी. सिंधु ने विश्व स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया।
इसी प्रकार आज सशस्त्र सेनाओं और अर्धसैनिक बलों में महिलाएँ सीमा पर तैनात होकर राष्ट्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ये सभी उदाहरण इस बात के प्रमाण हैं कि अवसर मिलने पर नारी शक्ति किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व और साहस का परिचय दे सकती है।
स्वामी विवेकानंद जी ने महिलाओं की गरिमा और उनकी निर्णायक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा था, “जब तक महिलाओं की स्थिति में सुधार नहीं होता, तब तक विश्व के कल्याण की कोई संभावना नहीं है। एक पक्षी एक ही पंख से नहीं उड़ सकता।”
यह कथन केवल एक सामाजिक टिप्पणी नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के संतुलित विकास का मूल सिद्धांत है। स्वामी विवेकानंद स्पष्ट करना चाहते थे कि समाज, राष्ट्र और विश्व, तीनों की प्रगति स्त्री और पुरुष, दोनों की समान भागीदारी से ही संभव है। यदि समाज का आधा हिस्सा उपेक्षित, असुरक्षित या अवसरों से वंचित रहेगा, तो समग्र विकास की कल्पना अधूरी ही रहेगी।
प्रिय महिला नवआरक्षकों,
जैसा कि आप जानते हैं कि सीमा सुरक्षा बल भारत-पाकिस्तान एवं भारत-बांग्लादेश की सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ देश की आंतरिक सुरक्षा में भी काफी अहम भूमिका निभाती है। सीमा सुरक्षा बल में बुनियादी प्रशिक्षण के उपरान्त आप हमेशा सीमा सुरक्षा बल के साथ आत्मीयता और लगन से सीमा प्रबंधन का अदभुत उदाहरण पेश करेंगी, ऐसा मेरा विश्वास है।
सीमा सुरक्षा बल में आपकी तैनाती देश के विभिन्न क्षेत्रों में होगी, जहाँ आए दिन आपको नई चुनौतियों का सामना करना पडेगा। आज की इस शानदार परेड में आपकी योग्यता एवं कार्यकुशलता देखने के उपरांत मुझे पूरा यकीन है कि आप अपनी सैनिक क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए आने वाली किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम एवं सफल होंगी।
देश में कई प्रकार की चुनौतियां हैं, इसलिए जहाँ कही भी आपकी तैनाती होगी, आपको अपने कर्तव्यों का पालन कानून के दायरे में रहकर बिना किसी पक्षपात एवं पूर्ण ईमानदारी व निष्ठा के साथ करना है। साथ ही, कठिन ईलाकों में निर्भयता एवं विश्वास का माहौल बनाना है ताकि उस क्षेत्र के नागरिक बिना किसी भय या दबाव में रह सकें।
इन सभी कार्यों के निष्पादन में आपसे मानव अधिकारों की सुरक्षा एवं सभी वर्गो के साथ अच्छा व्यवहार करने की भी अपेक्षा की जाती है, जिसके लिए आपको यहाँ प्रशिक्षण दिया गया है।
आज भारत महिला सशक्तिकरण के नए युग में प्रवेश कर चुका है। शिक्षा, सेना, विज्ञान, खेल, प्रशासन, हर क्षेत्र में महिलाएँ अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। आप उसी परिवर्तन की अग्रदूत हैं। आपका यह कदम देश की लाखों बेटियों को प्रेरित करेगा कि वे बड़े सपने देखें और उन्हें साकार करें।
याद रखिए, आप केवल अपने परिवार या राज्य का नहीं, पूरे भारतवर्ष का प्रतिनिधित्व करती हैं। आपकी वर्दी में देश का विश्वास निहित है। आपका हर कदम, हर निर्णय और हर आचरण आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण बनेगा।
मैं आपको यह भी स्मरण कराना चाहता हूँ कि सशक्तिकरण केवल अधिकार प्राप्त करने से नहीं, बल्कि कर्तव्यों के उत्कृष्ट निर्वहन से सिद्ध होता है। आप जब सीमा पर तैनात होंगी, तब आपकी सतर्कता, ईमानदारी और अनुशासन ही राष्ट्र की सुरक्षा का कवच बनेंगे।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस उत्कृष्ट संस्थान से जो बहु-आयामी प्रशिक्षण आपने ग्रहण किया है, उससे आपके व्यक्तित्व एवं कार्यकुशलता में आशातीत वृद्धि होगी। आप अपने सेवा-काल के दौरान सीमा सुरक्षा बल की प्रतिष्ठा एवं गरिमा के अनुरूप योगदान तो देंगे ही साथ ही सीमा सुरक्षा बल को सफलता के नए शिखर पर ले जाने में भी सफल रहेंगे।
आज आपके उत्साह और जोश को देखकर मेरा विश्वास और भी मजबूत हुआ है। मुझे आशा ही नही बल्कि पूर्ण विश्वास है कि, आज देश के समक्ष जो चुनौतियाँ हैं, उनके सफल समाधान में आप हर पल अपनी नई उर्जा से संचरित होकर अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे और आप अपने उत्साह, लगन एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करते हुए सीमा सुरक्षा बल में अपनी विशिष्ट पहचान भी स्थापित करेंगे।
मैं सभी अभिभावकों से कहना चाहूंगा कि आपकी बेटियों ने आज जो उपलब्धि हासिल की है, वह आपके संस्कार, विश्वास और समर्थन का परिणाम है। आपने समाज को यह संदेश दिया है कि बेटियाँ अवसर मिलने पर किसी भी ऊँचाई को छू सकती हैं।
अंत में, मैं आप सभी महिला नवआरक्षकों से कहना चाहूँगा कि अपने आत्मविश्वास को कभी कम मत होने दीजिए। चुनौतियाँ आएँगी, परिस्थितियाँ कठिन होंगी, पर आपका प्रशिक्षण, आपका साहस और आपका संकल्प आपको हर बाधा से पार ले जाएगा।
आप राष्ट्र की प्रहरी हैं, नारी शक्ति की प्रतीक हैं, और भारत के उज्ज्वल भविष्य की आशा हैं।
इन्हीं शब्दों के साथ, मैं दीक्षांत परेड के सफलतापूर्वक आयोजन के लिए एवं इस दीक्षांत परेड में आपकी शानदार प्रस्तुति के लिए आपके प्रशिक्षकों एवं आप सभी को एक बार पुनः बधाई देता हूं और आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
धन्यवाद,
जय हिन्द!