SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF ROSE FESTIVAL AT CHANDIGARH ON FEBRUARY 20, 2026.

‘रोज़ फेस्टिवल’ के अवसर पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 20.02.2026,  शुक्रवारसमयः सुबह 11:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

नमस्कार!

आज चंडीगढ़ के इस 20 से 22 फरवरी तक आयोजित किये जा रहे तीन दिवसीय रोज़ फेस्टिवल के 54वें संस्करण के शुभारंभ पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अपार हर्ष हो रहा है। 

आप सभी जानते हैं कि रोज फेस्टिवल चंडीगढ़ का ही नहीं बल्कि देश का एक प्रसिद्ध कार्यक्रम है जो हर साल फरवरी के महीने में आयोजित किया जाता है जब यहां गार्डन में गुलाब पूरी तरह खिल जाते हैं।

हर्ष का विषय है कि इस बार भी पिछले साल की तरह ही चंडीगढ़ नगर निगम ने न केवल यह महोत्सव जीरो बजट में आयोजित करवाया है बल्कि पिछले वर्ष की तुलना में आय में भी वृद्धि अर्जित की है।

इस वर्ष गुलाबों के इस महोत्सव में शहरवासियों के लिए विविध प्रतियोगिताओं के साथ-साथ आकर्षक पुष्प प्रदर्शनियाँ, रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ तथा अनेक मनोरंजक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जो उत्सव को और अधिक जीवंत व यादगार बनाएंगे।

मुझे बताया गया है कि इस तीन दिनवसीय फेस्टिवल में स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के अंतर्गत खास तौर पर स्टाल लगाए गए हैं जिसमें लोगों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया जाएगा। इसमें घर-घर से कचरा अलग-अलग करने, किचन वेस्ट से घर पर ही कम्पोस्ट बनाने, प्लास्टिक का उपयोग न करने एवं अन्य पहलुओं पर लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसमें कई प्रकार के जागरूकता वाले वीडियो भी लोगों को दिखाए जाएंगे जिससे कि हमारा शहर स्वच्छता के क्षेत्र में अव्वल रह सके।

इसके साथ ही चंडीगढ़ के सेल्फ हेल्प ग्रुपों द्वारा हाथ से बने हुए रिसाइकिल्ड मटेरियल की मनमोहक वस्तुएं भी आकर्षण का केंद्र होंगी। मेले में इस बार इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के सहयोग से पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत चंडीगढ़ के कारीगरों और शिल्पकारों की विरासत की प्रदर्शनी लगाई गई है।

निगम द्वारा संचालित विभिन्न प्रोजेक्टों की प्रदर्शनियों के साथ-साथ ‘एम सी वन पास’ योजना का भी इस महोत्सव के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। मैं यह बताना चाहूंगा कि मात्र एक माह में निगम करीब 6 हजार पास रजिस्टर करने में सफल रहा है। 

मुझे इस बात की खुशी है कि चंडीगढ़ के लोगों का बहुमूल्य सहयोग निगम को हमेशा से ही मिलता रहा है और हम आशा करते हैं कि निगम की इस पहल ‘एम सी वन पास’ को भी जनता का भरपूर सहयोग मिलेगा जिससे हम पार्किंग स्थलों को और अधिक सुव्यवस्थित तरीके से संभाल पाएंगे।

इस साल मुख्य स्टेज पर जाने-माने कलाकारों के अलावा शहर के उभरते कलाकारों को भी शामिल कर तीनों दिन सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया जा रहा है।

स्टेज पर एवं ग्राउंड पर तीनों दिन सुबह से शाम तक नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर एवं चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से देश भर से आए विभिन्न कलाकारों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां पेश की जाएंगी।

बच्चों के लिए झूले, खाने-पीने के स्टॉलों के अलावा निगम के अंतर्गत आते सेल्फ हेल्प ग्रुपों की प्रदर्शनियां भी उल्लेखनीय रहेंगी।

देवियो और सज्जनो,

चंडीगढ़ पार्कों और बगीचों का एक सुंदर शहर है, जहाँ लगभग 1900 पार्क और उद्यान हैं। रोज़ गार्डन, जापानी गार्डन, लेज़र वैली, बटरफ्लाई पार्क और बर्ड पार्क जैसे स्थल न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि इसे एक विशिष्ट पहचान भी प्रदान करते हैं।

इनमें ज़ाकिर हुसैन रोज़ गार्डन शहर की शान है, जिसकी स्थापना वर्ष 1967 में की गई थी। एशिया के सबसे बड़े इस रोज़ गार्डन की परिकल्पना चंडीगढ़ के प्रथम मुख्य आयुक्त डॉ. एम.एस. रंधावा ने की थी। 40 एकड़ में फैला यह उद्यान 800 से अधिक देशी-विदेशी गुलाब की किस्मों के लिए विश्व-प्रसिद्ध है।

गुलाबों की अनुपम सुंदरता के साथ-साथ यह उद्यान औषधीय वृक्षों, हरियाली और शांत वातावरण के लिए भी जाना जाता है, जहाँ लोग शुद्ध हवा और स्वास्थ्य लाभ के लिए आते हैं। हम सभी का दायित्व है कि इस उद्यान की स्वच्छता और सुंदरता बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की गंदगी न फैलाएँ।

देवियो और सज्जनो,

रोज़ फेस्टिवल की यह परंपरा केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की सांस्कृतिक विरासत बन चुकी है। 54 वर्षों की यह निरंतर यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यह उत्सव जन-जन से जुड़ा हुआ है। इसमें बच्चों की उत्सुकता है, युवाओं की ऊर्जा है, कलाकारों की सृजनशीलता है और वरिष्ठ नागरिकों की स्मृतियों की सुगंध है।

रोज़ फेस्टिवल केवल पुष्प प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। यह संगीत, नृत्य, कला, शिल्प, खान-पान और पारिवारिक आनंद का भी उत्सव है। यहाँ प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम हमारी विविधता में एकता को दर्शाते हैं और यह संदेश देते हैं कि संस्कृति तभी जीवंत रहती है, जब वह समाज के हर वर्ग की भागीदारी से आगे बढ़ती है।

इस रोज़ फेस्टिवल में बड़ी संख्या में पुष्प प्रेमी, पर्यावरण प्रेमी और कला-संस्कृति से जुड़े लोग शामिल होते हैं। हर साल, देश भर से हजारों पर्यटक और बागवानी के शौकीन इस उत्सव का हिस्सा बनने के लिए यहां आते हैं।

इस प्रकार के पुष्प उत्सव न केवल फूलों की सुंदरता का आनंद देते हैं, बल्कि वे हमें प्रकृति के महत्व का एहसास भी कराते हैं कि प्रकृति के साथ हमारा संबंध केवल उपयोग का नहीं, बल्कि संरक्षण और संवर्धन का है। आज जब विश्व जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे आयोजनों के माध्यम से हम हरियाली, जैव विविधता और सतत जीवन-शैली के महत्व को जन-जन तक पहुँचाते हैं।

ये उत्सव हमें प्रेरित करते हैं कि हम पर्यावरण का संरक्षण करें ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस धरती की समृद्धि और हरी-भरी सुंदरता का अनुभव कर सकें। यह हमें यह भी सिखाते हैं कि छोटे-छोटे कदम, जैसे जल संरक्षण और प्रदूषण को कम करना, प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

महात्मा गांधी जी का यह कथन कि ‘‘प्रकृति में हर इंसान की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन हर इंसान की लालच को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है’’, प्राकृतिक संसाधनों और मानव लालच के बीच संतुलन बनाए रखने की गहरी समझ को दर्शाता है।

यदि हम अपने प्राकृतिक संसाधनों की देखभाल नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसलिए, जल संरक्षण, वायु प्रदूषण नियंत्रण, वृक्षारोपण और सतत विकास की दिशा में सार्थक प्रयास करना अनिवार्य है ताकि प्रकृति की अनमोल धरोहर सुरक्षित रह सके।

मैं आज इस अवसर पर आपसे आह्वान करता हूं कि आप अपनी आवश्यकता से अधिक संसाधनों का उपयोग करने से बचें, अपनी खपत को संतुलित करें और पुनः उपयोग एवं पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) को अपनाने की आदत डालें। 

देवियो और सज्जनो,

अब जब हम इस तीन दिवसीय पुष्प उत्सव का आनंद लेने जा रहे हैं, तो हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि फूल केवल प्रकृति की सुंदर रचनाएँ ही नहीं हैं, बल्कि वे जीवन में सकारात्मकता, उल्लास और आशा का संचार करते हैं। उनकी कोमलता, विविध रंग और मनमोहक सुगंध न केवल हमारी आँखों को सुकून देती हैं, बल्कि मन और हृदय को भी आनंद, शांति और नई ऊर्जा से भर देती हैं।

फूल मानवीय भावनाओं की अभिव्यक्ति का सबसे सुंदर और सहज माध्यम हैं। प्रेम, प्रसन्नता, संवेदना, करुणा अथवा सम्मान, हर भावना को व्यक्त करने के लिए प्रकृति ने एक उपयुक्त फूल प्रदान किया है। जहाँ गुलाब प्रेम और आत्मीयता का प्रतीक है, वहीं कमल आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता है और गेंदा शुभता, मंगल एवं समृद्धि का संकेत माना जाता है।

फूलों की उपस्थिति मन को शांत और संतुलित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन्हें देखकर न केवल दृष्टि को ताजगी मिलती है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है। यही कारण है कि आज चिकित्सा क्षेत्र में फ्लोरल थेरेपी का उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाता है।

अस्पतालों, ध्यान केंद्रों और घरों में फूलों की सजावट इसी उद्देश्य से की जाती है कि वातावरण में सौम्यता, प्रसन्नता और सकारात्मकता बनी रहे। अनेक शोध यह प्रमाणित करते हैं कि फूलों की उपस्थिति तनाव को कम करने, खुशी बढ़ाने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है।

इसके अलावा, फूलों का उपयोग पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक गतिविधियों में भी विशेष स्थान रखता है। वे न केवल धार्मिक आस्था को प्रगाढ़ करते हैं, बल्कि मन को एकाग्र करने और आंतरिक शांति प्राप्त करने में भी सहायक होते हैं। भारत में तुलसी, कमल और बेलपत्र जैसे पुष्प हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं।

मैं यह भी मानता हूँ कि फूल केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वे परागण की प्रक्रिया में सहायक होते हैं तथा मधुमक्खियों, तितलियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए आहार का स्रोत प्रदान करते हैं, जिससे जैव विविधता का संरक्षण होता है।

फूलों का उपहार देना सद्भावना, प्रेम और मित्रता का प्रतीक माना जाता है। वे रिश्तों में आत्मीयता और मधुरता का संचार करते हैं। किसी के घर आगमन पर फूलों का गुलदस्ता भेंट करना हमारी प्राचीन परंपरा है, जो स्नेह, सम्मान और सौहार्द का भाव व्यक्त करती है।

प्रिय नागरिको,

यह उत्सव हमें सकारात्मकता और सौहार्द का संदेश देता है। गुलाब की तरह ही जीवन में भी रंग, सुगंध और कोमलता आवश्यक है। यह हमें सिखाता है कि सौंदर्य केवल देखने की वस्तु नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी है।

मैं विशेष रूप से चंडीगढ़ प्रशासन, नगर निगम, बागवानी विभाग, कलाकारों, स्वयंसेवकों और उन सभी कर्मठ हाथों को बधाई देता हूँ, जिन्होंने इस विशाल आयोजन को साकार करने में अपना योगदान दिया है। उनकी मेहनत और समर्पण के बिना इस उत्सव की कल्पना संभव नहीं थी।

मैं नागरिकों और आगंतुकों से भी आग्रह करता हूँ कि वे इस उत्सव का आनंद लेते हुए स्वच्छता, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखें। फूलों की इस नगरी में हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि हम इसे और अधिक सुंदर और स्वच्छ बनाए रखें।

अंत में, मैं कामना करता हूँ कि रोज़ फेस्टिवल 2026 का यह 54वाँ संस्करण सभी के जीवन में नई ऊर्जा, नई आशा और नई प्रेरणा का संचार करे। जैसे ये गुलाब हर वर्ष नई कोंपलों के साथ खिलते हैं, वैसे ही हमारा शहर और हमारा समाज भी निरंतर प्रगति, सौहार्द और सौंदर्य की ओर अग्रसर होता रहे।

इन्हीं शब्दों के साथ, मैं रोज़ फेस्टिवल 2026 की अपार सफलता की शुभकामनाएँ देता हूँ और आप सभी से आग्रह करता हूँ कि इस उत्सव के रंग, सुगंध और आनंद को अपने हृदय में संजोकर ले जाएँ।

धन्यवाद,

जय हिंद!