SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INTERACTION WITH PARTICIPANTS, NETRITVA SADHNA xVII EDITION AT LOK BHAVAN, PUNJAB AT CHANDIGARH ON FEBRUARY 2, 2026.
- by Admin
- 2026-02-02 14:15
आई.आई.पी.जी. के ‘नेतृत्व साधना- XVII’ के प्रतिभागियों से भेंट पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 02.02.2026, सोमवार समयः दोपहर 12:00 बजे स्थानः लोकभवन
नमस्कार!
आज Institute for Inclusive Policy and Governance (इंस्टीट्यूट फॉर इंक्लूसिव पॉलिसी एंड गवर्नेंस) द्वारा आयोजित “नेतृत्व साधना” कार्यक्रम के 17वें संस्करण के आप सभी 40 प्रतिभागियों से मिलना मेरे लिए अत्यंत हर्ष, गर्व और संतोष का विषय है।
मुझे ज्ञात हुआ है कि “नेतृत्व साधना” का यह आयोजन 29 जनवरी से 03 फरवरी 2026 तक National Institute of Technical Teachers Training and Research (NITTTR), चंडीगढ़ में किया जा रहा है। यह छह दिवसीय आवासीय नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम आप सभी के लिए एक अनूठा अवसर है।
मुझे विश्वास है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से आप न केवल अपने व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता को निखारेंगे, बल्कि भविष्य में अपने-अपने क्षेत्रों में संवेदनशील, दूरदर्शी और प्रभावी परिवर्तनकारी नेतृत्व का उदाहरण भी प्रस्तुत करेंगे।
रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी द्वारा वर्ष 2011 से “नेतृत्व साधना” कार्यक्रम का निरंतर आयोजन किया जा रहा है, जिसमें समाज के विविध क्षेत्रों से आए पेशेवर सहभागी होते हैं। इस पहल में डॉक्टर, इंजीनियर, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और अन्य विशेषज्ञ शामिल होकर समावेशी नेतृत्व, नीति-दृष्टि और जनसेवा के मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं।
यह मंच केवल एक प्रशिक्षण पहल नहीं, बल्कि नेतृत्व के मूल्यों, संवेदनशीलता, उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा की भावना को आत्मसात करने की एक सशक्त साधना है। यहाँ विचार-विमर्श, संवाद, अनुभव-साझाकरण और अभ्यास के माध्यम से ऐसे नेतृत्व का निर्माण होता है, जो समाज के प्रत्येक वर्ग की आवश्यकताओं को समझते हुए समाधान उन्मुख सोच विकसित करता है।
देवियो और सज्जनो,
हम सभी जानते हैं कि रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसकी स्थापना स्वर्गीय रामभाऊ म्हालगी की स्मृति में की गई थी। वर्ष 1982 में स्थापित यह संस्था भारत में शासन-नेतृत्व की आकांक्षा रखने वालों तथा वर्तमान जन-प्रतिनिधियों और प्रशासकों के लिए एक प्रमुख शिक्षण और शोध केंद्र के रूप में कार्य कर रही है।
इस संस्था को United Nations Economic and Social Council द्वारा विशेष परामर्शदात्री (Special Consultative)दर्जा भी प्रदान किया गया है, जो इसकी विश्वसनीयता और वैश्विक मान्यता को दर्शाता है।
यह संगठन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली, पुणे, मुंबई तथा अपने मुख्यालय ठाणे के माध्यम से अपनी गतिविधियों का संचालन करता है। वर्ष 1982 से अब तक, इसने अनेक जन-प्रतिनिधियों, प्रशासकों और नेतृत्वकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान कर राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मैं इस बात की गहराई से सराहना करता हूं कि रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी पूरे देश में लीडरशिप और नागरिक भागीदारी को कैसे मज़बूत करने के लिए सहरानीय कार्य कर रहा है। राष्ट्र निर्माण और समावेशी विकास के प्रति इसकी प्रतिबद्धता सच में प्रेरणादायक है।
यह अति प्रशंसनीय है की रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी एक सम्मानित पॉलिसी थिंक टैंक और एक्शन रिसर्च प्लेटफॉर्म बन गया है जो समुदायों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को प्रभावी ढंग से जोड़ता है।
पिछले वर्षों में रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी ने राष्ट्रीय स्तर पर अनेक नेतृत्व कार्यक्रम, सम्मेलन, नीति-संवाद और आवासीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए हैं, जिनका केंद्रबिंदु सुशासन, लोकतंत्र, सार्वजनिक नीति, सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ और राष्ट्र-निर्माण रहा है। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें संस्थागत प्रक्रियाओं, लोकतांत्रिक उत्तरदायित्वों और समाधान-केंद्रित शासन की व्यावहारिक समझ प्रदान करना है।
जैसा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर जी ने कहा था, “शिक्षा वह शस्त्र है जिससे समाज को बदला जा सकता है।” ऐसे कार्यक्रम इसी शिक्षा को नेतृत्व में रूपांतरित करने का माध्यम बनते हैं।
रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी ने उत्तर भारत में राष्ट्र-निर्माण की भावना को सुदृढ़ और व्यापक बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2024 में चंडीगढ़ में इंस्टीट्यूट फॉर इंक्लूसिव पॉलिसी एंड गवर्नेंस (IIPG) की स्थापना की।
मेरा मानना है कि यह पहल केवल एक संस्थागत विस्तार नहीं, बल्कि समावेशी नीति-चिंतन, नेतृत्व विकास और सुशासन के मूल्यों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने की दूरदर्शी पहल है।
चंडीगढ़ में इसकी स्थापना उत्तर भारत के राज्यों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र विविध सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों और अपार संभावनाओं का संगम है। यह संस्थान इन चुनौतियों को समझने, समाधान-उन्मुख दृष्टि विकसित करने और राष्ट्र-निर्माण की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक प्रेरक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण, ग्रामीण विकास और सामाजिक समानता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में IIPG के काम की विशेष सराहना की जानी चाहिए। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सार्थक संवाद और वास्तविक दुनिया में कार्यान्वयन के माध्यम से, यह संस्थान ऐसे समाधान बना रहा है जो लोगों पर केंद्रित, व्यावहारिक और भविष्य के लिए तैयार हैं।
साथियो,
भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है, और यह युवाशक्ति केवल जनसंख्या का आँकड़ा नहीं, बल्कि परिवर्तन, नवाचार और प्रगति की जीवंत ऊर्जा है। आप केवल भविष्य की आशा नहीं, बल्कि वर्तमान की सक्रिय शक्ति हैं, जो अपने विचार, कर्म और संकल्प से समाज और राष्ट्र की दिशा तय कर रहे हैं।
लोकतंत्र केवल मतदान की एक प्रक्रिया भर नहीं है। यह निरंतर संवाद, उत्तरदायित्व, सहभागिता और जागरूकता का जीवंत तंत्र है, जिसमें प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। जब युवा वर्ग नीति, समाज, पर्यावरण, शिक्षा, तकनीक और शासन से जुड़े मुद्दों पर सजग होकर विचार करता है, प्रश्न पूछता है और रचनात्मक योगदान देता है, तभी लोकतंत्र सशक्त और सार्थक बनता है।
आपकी भागीदारी केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक दायित्व भी है। समावेशी सोच, संवेदनशील नेतृत्व और जनहित की प्रतिबद्धता के साथ राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय रहना ही सच्चे लोकतांत्रिक नागरिक की पहचान है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने कहा था, “आप वह बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।” यही इस कार्यक्रम का मूल भाव है, युवाओं को परिवर्तन का सक्रिय वाहक बनाना।
आज के समय में नीति-निर्माण केवल विचारधारा या सैद्धांतिक दृष्टिकोण पर आधारित नहीं रह सकता। प्रभावी और परिणामकारी नीतियाँ वही होती हैं, जो ठोस साक्ष्यों, गहन शोध, विश्वसनीय आँकड़ों और जमीनी अनुभवों से समर्थित हों। जब निर्णय वास्तविक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं और नागरिकों के जीवन से जुड़े तथ्यों पर आधारित होते हैं, तभी वे समाज में ठोस और दीर्घकालिक परिवर्तन ला पाते हैं।
इसी संदर्भ में IIPG का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है कि नीति-चिंतन को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ा जाए। यह पहल प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक विमर्श तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें समाज के विविध वर्गों, क्षेत्रीय चुनौतियों और व्यवहारिक समाधानों से जोड़ती है।
ऐसा दृष्टिकोण नीतियों को अधिक संवेदनशील, समावेशी और प्रभावी बनाता है, जहाँ निर्णय कागज़ों तक सीमित न रहकर वास्तविक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनते हैं।
देश के पूर्व राष्ट्रपति श्री ए.जी.जे. अब्दुल कलाम जी ने कहा था, “नेतृत्व का अर्थ है समस्याओं को अवसर में बदलना।” यह प्रशिक्षण उसी क्षमता का विकास करता है।
साथियो,
लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती तब बढ़ती है, जब नागरिक समाज, युवा वर्ग, प्रशासन और नीति-निर्माता परस्पर संवाद की साझा प्रक्रिया में जुड़ते हैं। जब विचार केवल मंचों तक सीमित न रहकर अनुभव, अपेक्षाओं और सुझावों के रूप में एक-दूसरे तक पहुँचते हैं, तब शासन अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनता है।
ऐसी सहभागिता से नीतियाँ केवल दस्तावेज़ नहीं रहतीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवश्यकताओं और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बनती हैं। युवा ऊर्जा, नागरिक अनुभव, प्रशासनिक दृष्टि और नीति-निर्माताओं की दूरदर्शिता का यह समन्वय लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त आधार प्रदान करता है।
यह कार्यक्रम उसी सहभागितापूर्ण शासन और सूचित जन-चर्चा की भावना को प्रोत्साहित करता है, जहाँ संवाद के माध्यम से समझ विकसित होती है, विचार परिपक्व होते हैं और सामूहिक समाधान की दिशा में सार्थक कदम बढ़ते हैं।
साथियो,
राष्ट्रनिर्माण कोई एक घटना नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली सामूहिक साधना है, जहाँ हर नागरिक, हर पेशेवर, हर युवा और हर संस्था अपनी भूमिका निभाती है।
राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमाओं से नहीं बनता; वह बनता है नागरिकों के चरित्र, कर्तव्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और सहभागिता से। जब समाज का प्रत्येक वर्ग अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने दायित्वों को भी समझता है, तब राष्ट्र प्रगति के पथ पर दृढ़ता से आगे बढ़ता है।
डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वकील, वैज्ञानिक, प्रशासक, उद्यमी, ये सभी राष्ट्र निर्माण के स्तंभ हैं।
डॉक्टर स्वास्थ्य के माध्यम से मानव पूंजी को सशक्त करते हैं। शिक्षक ज्ञान के माध्यम से चरित्र और क्षमता का निर्माण करते हैं। इंजीनियर और वैज्ञानिक अवसंरचना, तकनीक और नवाचार के जरिए विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उद्यमी रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि के वाहक बनते हैं। प्रशासक नीतियों को धरातल पर उतारकर जनहित सुनिश्चित करते हैं।
जब पेशेवर अपने कार्य को केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा मानते हैं, तब उनका योगदान राष्ट्र के लिए अमूल्य हो जाता है।
साथियो,
हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा प्रस्तुत विकसित भारत 2047 का संकल्प केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षाओं का घोष है। यह दृष्टि भारत को आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, शैक्षिक, सांस्कृतिक और नैतिक दृष्टि से विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में स्थापित करने की परिकल्पना करती है। इस महत्त्वाकांक्षी यात्रा में आप जैसे पेशेवर, जागरूक और ऊर्जावान युवाओं की भागीदारी अत्यंत निर्णायक है।
विकसित भारत का अर्थ केवल ऊँची जीडीपी या आधुनिक अवसंरचना नहीं है; इसका वास्तविक अर्थ है, समावेशी विकास, नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा, सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था, पर्यावरण संतुलन, सामाजिक समरसता और अवसरों की समान उपलब्धता। इन सभी आयामों को साकार करने के लिए देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है, जो अपने कौशल, ज्ञान और पेशेवर दक्षता को राष्ट्रहित से जोड़ सकें।
आप, जो विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े हैं, केवल अपने पेशे के प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र की संभावनाओं के वाहक हैं। जब आपकी विशेषज्ञता जनहित, नवाचार और समाधान उन्मुख सोच के साथ जुड़ती है, तब वह देश की प्रगति को कई गुना गति देती है।
आज भारत स्टार्टअप्स, डिजिटल परिवर्तन, हरित ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा आत्मनिर्भरता और विनिर्माण के क्षेत्रों में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में नेतृत्व और योगदान देने के लिए वही युवा सक्षम होंगे, जिनमें सीखने की ललक, परिवर्तन को स्वीकारने का साहस और समाज के प्रति संवेदनशीलता हो।
विकसित भारत 2047 की यात्रा में आपकी भूमिका केवल भागीदारी तक सीमित नहीं है; आपको इस परिवर्तन का नेतृत्व करना है। आपको अपने कार्यस्थल, समुदाय और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनना है। आपको यह सुनिश्चित करना है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।
मैं आशा करता हूं कि आप सभी अपने ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों के साथ इस राष्ट्रीय संकल्प में सक्रिय योगदान देंगे और विकसित भारत के सपने को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाएँगे।
मुझे विश्वास है कि “नेत्रित्व साधना” का यह संस्करण आप सभी युवाओं को केवल ज्ञान नहीं, बल्कि दृष्टि, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व भी प्रदान करेगा। आप यहाँ से केवल प्रशिक्षित होकर नहीं, बल्कि प्रेरित होकर लौटेंगे।
अंत में मैं RMP और IIPG दोनों के समर्पण, दूरदर्शिता और प्रभाव की सराहना करता हूं। आपके प्रयास नेताओं की एक ऐसी पीढ़ी को आकार दे रहे हैं जो सक्षम, दयालु और राष्ट्र की प्रगति के लिए प्रतिबद्ध हैं।
मैं आपकी निरंतर सफलता के लिए हार्दिक आभार और शुभकामनाएं देता हूं। आप पूरे भारत में लोगों को प्रेरित करते रहें, सशक्त बनाते रहें और उनके जीवन में बदलाव लाते रहें।
आप सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
धन्यवाद,
जय हिन्द!