SPEECH OF HON’BLE GOVERNOR PUNJAB AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FOUNDATION DAY OF IIT, ROPAT ON FEBRUARY 24, 2026.
- by Admin
- 2026-02-24 19:05
आई.आई.टी. रोपड़ के स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर
राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन
दिनांकः 24.02.2026, मंगलवार
समयः शाम 5:00 बजे
स्थानः रोपड़
नमस्कार!
आज वर्ष 2008 में स्थापित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़ के इस 18वें स्थापना दिवस के महत्वपूर्ण और गौरवशाली अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत सम्मान की बात है। यह संस्थान, अपने अपेक्षाकृत कम समय में ही, उत्कृष्टता, नवाचार और राष्ट्रीय आकांक्षाओं का प्रतीक बनकर उभरा है।
इस अवसर पर मैं संस्थान के संस्थापकों, अधिकारीगणों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देता हूँ जिन्होंने इस संस्थान को इस मुकाम तक पहुँचाने में अपना योगदान दिया है।
इन्हीं प्रयासों का प्रतिफल है कि राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क ;छप्त्थ्द्ध से लेकर वैश्विक स्तर तक इस संस्थान ने अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। यह संस्थान उन सपनों, आकांक्षाओं और नवाचारों की प्रयोगशाला है जो 21वीं सदी के भारत का निर्माण कर रहे हैं।
इसके 501 एकड़ के पर्यावरण-अनुकूल परिसर में विश्व स्तरीय प्रयोगशालाएँ, उन्नत शोध केंद्र, आधुनिक शैक्षणिक खंड, डिजिटल पुस्तकालय और खेल सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यहां इंजीनियरिंग, विज्ञान और मानविकी के विभिन्न विषयों में अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट और डॉक्टरल कार्यक्रम संचालित होते हैं।
आपके संस्थान का ध्येय वाक्य है, ‘‘धियो यो नः प्रचोदयात्’’ यानी हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें। मुझे यह देखकर असीम प्रसन्नता होती है कि आप सब इस श्लोक को चरितार्थ करते हुए अपने ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण के लिए कर रहे हैं।
देवियो और सज्जनो,
विगत पाँच वर्षों में आईआईटी रोपड़ ने जो प्रगति की है, वह न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि अनुकरणीय भी है। मैं संस्थान की कुछ प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालना चाहूँगाः
आईआईटी रोपड़ ने देश के अग्रणी इंजीनियरिंग संस्थानों में अपनी एक सुदृढ़ स्थिति बनाई है और शिक्षण तथा शोध, दोनों ही क्षेत्रों में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
प्राध्यापकों और छात्रों ने उच्च प्रभाव वाले शोध पत्र, पेटेंट और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संस्थान ने अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों का विस्तार करते हुए अंतरविषयक पाठ्यक्रमों को अपनाया है, जो वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप हैं।
आईआईटी रोपड़ का नवाचार परितंत्र भी तेज़ी से विकसित हुआ है। यहाँ के इन्क्यूबेटर और एक्सेलेरेटर ऐसे गहन-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को पोषित कर रहे हैं जो वास्तविक जीवन की चुनौतियों का समाधान करते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य, कृषि, रक्षा और सतत विकास के क्षेत्रों में छात्रों के नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रशंसा मिली है। स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास पर संस्थान का जो ध्यान है, वह आत्मनिर्भर भारत की भावना को साकार करता है।
मुझे प्रसन्नता है कि आईआईटी रोपड़ ने उद्योग जगत, सरकारी संस्थाओं और वैश्विक संस्थानों के साथ अपने सहयोग को और गहरा किया है।
अत्यंत हर्ष का विषय है कि इस संस्थान के स्नातक आज विश्व के शीर्ष विश्वविद्यालयों, अग्रणी कंपनियों और उद्यमशीलता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। करियर विकास और प्लेसमेंट सेल ने प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और उद्योग जगत के साथ जुड़ाव को सुदृढ़ किया है, जिससे छात्र विविध कैरियर मार्गों के लिए भलीभाँति तैयार होते हैं।
यह सफलता कोई संयोग नहीं है। यह सभी हितधारकों की दूरदृष्टि, कुशल नेतृत्व और सामूहिक समर्पण का प्रतिफल है।
मैं प्रोफेसर राजीव आहूजा के गतिशील नेतृत्व की सराहना करना चाहता हूँ, जिनके मार्गदर्शन में आईआईटी रोपड़ ने त्वरित विकास के एक नए चरण में प्रवेश किया है। शोध उत्कृष्टता, वैश्विक भागीदारी और नवाचार आधारित विकास पर उनके बल ने इन परिवर्तनकारी वर्षों में संस्थान की पहचान को नई ऊँचाइयाँ दी हैं।
आईआईटी रोपड़ की तकनीकी आत्मनिर्भरता, विश्व स्तरीय शोध परितंत्र, डिजिटल सशक्तिकरण, सतत विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता जैसी पहलें विकसित भारत 2047 की आकांक्षाओं के साथ गहराई से जुड़ी हैं। उन्नत सामग्री, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा, कृषि, रक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्थान के शोध कार्य सीधे इन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में योगदान करते हैं।
जन-जागरूकता, ग्रामीण जुड़ाव और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से सामाजिक प्रभाव के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता समावेशी विकास की भावना को मूर्त रूप देती है।
जब मैं आईआईटी रोपड़ के भविष्य की ओर देखता हूँ, तो मुझे कई संभावनाशील मार्ग दिखाई देते हैं। इनमें मुख्य रूप से जटिल वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरविषयक शोध को और गहरा करना; भारत में वैश्विक श्रेष्ठ प्रथाओं को लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना; नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देना ताकि छात्र नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोज़गार देने वाले बनें; अगली पीढ़ी की शिक्षा और शोध को सहारा देने के लिए डिजिटल और भौतिक अवसंरचना को और सशक्त करना; तथा ऐसी संस्कृति का निर्माण करना जहाँ प्रौद्योगिकी मानवता की सेवा में हो, आदि शामिल हैं।
अपनी सुदृढ़ नींव और दूरदर्शी सोच के साथ आईआईटी रोपड़ देश के सबसे प्रभावशाली संस्थानों में से एक बनने की पूरी क्षमता रखता है।
साथियो,
हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ विज्ञान, तकनीक और मानवता का समन्वय भविष्य की दिशा तय कर रहा है। ऐसे समय में प्रौद्योगिकी संस्थानों की भूमिका केवल स्किल-डेवलपमेंट तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि सामाजिक चुनौतियों के समाधान, राष्ट्रनिर्माण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में योगदान देना भी उनकी जिम्मेदारी बन जाती है।
मेरा मानना है कि हमारे आई.आई.टीज़ देश की ‘नॉलेज-कैपिटल’ का अत्यंत महत्वपूर्ण आधार हैं। ये संस्थान केवल डिग्री प्रदान करने वाले शैक्षणिक केंद्र नहीं, बल्कि भारत की बौद्धिक शक्ति, नवाचार क्षमता और तकनीकी नेतृत्व के प्रमुख स्तंभ हैं।
आज जब भारत ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है, तब आईआईटी जैसी संस्थाएँ ‘विचार से नवाचार’ और ‘अनुसंधान से विकास’ की यात्रा का नेतृत्व कर रही हैं। ये संस्थान भारत को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में भी केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए मेरा संदेश स्पष्ट है कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह समाज के काम आए। स्वास्थ्य, कृषि, स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन, स्मार्ट खेती, जलवायु-सहिष्णुता, जैवप्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विज्ञान जैसे क्षेत्र ऐसे हैं, जहाँ शोध के परिणाम सीधे जन-जीवन को बेहतर बना सकते हैं। संस्थान की शोध नीतियाँ इस प्रकार विकसित हों कि संस्थान-उद्योग सहयोग स्थायी नवाचारों में बदले और ‘लैब से बाजार’ तक की यात्रा सहज हो। यही वास्तविक देश-निर्माण है।
आज भारत की विकास यात्रा में युवा स्टार्टअप्स और नवप्रवर्तन निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। आईआईटी रोपड़ जैसे संस्थानों का दायित्व है कि वे छात्रों को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ उद्यमिता, नैतिक नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व से भी जोड़ें। शिक्षा अब केवल डिग्री प्राप्ति नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, समस्या-समाधान क्षमता और उद्यमशीलता का समेकित विकास होनी चाहिए।
वैश्विक स्तर पर भारतीय शिक्षा और अनुसंधान की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है, किंतु इसमें आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होने चाहिए। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सिद्धांतों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ते हुए घरेलू विनिर्माण क्षमता, मूल्य-श्रृंखला और स्थानीय आपूर्ति-तंत्र को सशक्त बनाना होगा, जिसके लिए अनुसंधान के साथ-साथ कौशल विकास, गुणवत्ता मानक और प्रमाणन पर भी ध्यान आवश्यक है।
तकनीकी शिक्षा में नैतिकता, मानविकी और सामाजिक विज्ञान का समन्वय अनिवार्य है, ताकि तकनीकी प्रगति मानवीय मूल्यों से युक्त रहे। तकनीक साधन है और इसका मूल्यांकन नैतिकता, सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय संवेदनशीलता के आधार पर होना चाहिए। नई तकनीकों के विकास के साथ उनके संभावित दुष्प्रभावों और नियंत्रण उपायों पर भी समान रूप से विचार आवश्यक है।
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी चुनौती है। आईआईटी रोपड़ को ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड, जल-संरक्षण और हरित निर्माण जैसे क्षेत्रों में सतत अनुसंधान को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि इन समाधानों का लाभ स्थानीय समुदायों और उद्योगों तक पहुँच सके।
रक्षा और तकनीक का समन्वय भी आज अत्यंत आवश्यक हो गया है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन, ड्रोन तकनीक, सेंसर, साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अनुसंधान राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है, किंतु इसमें नैतिक मानदंडों और स्पष्ट नियंत्रणों का पालन भी उतना ही आवश्यक है।
किसी भी शैक्षणि संस्थान की सबसे बड़ी शक्ति शिक्षक-छात्र संबंध होता है। प्रेरित संकाय, अकादमिक स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय सह-शोध, छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य, समावेशी शिक्षा और लैंगिक समानता, ये सभी आधुनिक शिक्षा के अनिवार्य तत्व हैं। आज के विद्यार्थी केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि सुरक्षित, समान और सशक्त वातावरण भी चाहते हैं।
समाज-उन्मुख शिक्षा का अर्थ है आसपास के ग्रामीण और कृषक समुदायों से जुड़ाव। कृषि-प्रौद्योगिकी, मिट्टी और जल प्रबंधन तथा किसान-उद्यमिता में तकनीकी हस्तक्षेप से आईआईटी रोपड़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
महिला सशक्तिकरण के लिए छात्रवृत्तियाँ, नेतृत्व विकास, सुरक्षित परिसर और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे प्रयास आवश्यक हैं, क्योंकि जब महिला प्रतिभा को समान अवसर मिलते हैं, तब विज्ञान और उद्यमिता दोनों और समृद्ध होते हैं।
डिजिटल युग में डेटा, एआई और मशीन लर्निंग से जुड़ी जिम्मेदारियाँ भी बढ़ी हैं। पारदर्शिता, साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता और डीप-फेक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए संस्थानों को नीति-निर्माताओं, उद्योग और समाज के साथ मिलकर प्रभावी ढाँचे विकसित करने होंगे।
मैं समझता हूं कि एक आधुनिक शैक्षणिक संस्थान का दायरा केवल परिसर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सार्वजनिक नीति, उद्योग और नागरिक जीवन तक विस्तृत होना चाहिए। शोध को ओपन-सोर्स, नीति-समर्थन और स्टार्टअप्स के माध्यम से समाज तक पहुँचाना, पायलट परियोजनाओं के जरिए गांवों और छोटे शहरों में लागू करना तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुनिश्चित करना, यही संस्थान का वास्तविक सामाजिक दायित्व है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अपनाई गई तकनीकी और औद्योगिक नीतियों की सफलता में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पंजाब की मेहनती जनशक्ति और समृद्ध विरासत को ध्यान में रखते हुए, आईआईटी रोपड़ जैसे संस्थान स्थानीय विकास के सच्चे भागीदार बन सकते हैं।
प्रिय छात्रों,
आप इस संस्थान की आत्मा हैं। जिस दुनिया में आप कदम रखने वाले हैं, वह निरंतर बदल रही है, चुनौतियों से भरी है और अनंत अवसरों से भी। मेरा आप सभी से आग्रह है कि आप जिज्ञासु बने रहें, चुनौतियों का सामना करें, निडरता से नवाचार करें, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को अपना मूल्य बनाएँ और याद रखें कि आपकी शिक्षा केवल आपकी व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज की समग्र प्रगति के लिए है।
और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप स्वयं नशों से दूर रहें, अपने परिसर को नशामुक्त बनाएँ, और जो लोग नशे की गिरफ्त में हैं, उन्हें सहयोग, संवेदना और सही मार्गदर्शन देकर इस दलदल से बाहर निकालने में सहायता करें। आपके विचार, आपकी ऊर्जा और आपकी संवेदनशीलता ही आने वाले कल के भारत को गढ़ेगी।
प्रिय प्राध्यापकगण,
मेरा मानना है कि आप इस निरंतर बढ़ते ज्ञान के केंद्र के स्तंभ हैं। आपका समर्पण आईआईटी रोपड़ की सफलता की आधारशिला है। आप केवल शिक्षक नहीं हैं, आप मार्गदर्शक हैं, शोधकर्ता हैं और राष्ट्र-निर्माता हैं। अपने छात्रों को निरंतर प्रेरित करते रहें, उन्हें चुनौती देते रहें और उन्हें सशक्त बनाते रहें। आपका कार्य कक्षा की चारदीवारी से कहीं आगे जाकर समाज पर गहरा और दूरगामी प्रभाव डालता है।
प्रिय कर्मचारीगण,
आपका योगदान अक्सर पर्दे के पीछे रहता है, लेकिन यही योगदान संस्थान के सुचारू और कुशल संचालन को सुनिश्चित करता है। आपकी निष्ठा और प्रतिबद्धता अत्यंत मूल्यवान है और संस्थान की प्रगति में अपरिहार्य है। इसी तरह अपना काम करते रहें।
आज जब हम यह स्थापना दिवस मना रहे हैं, तो आइए हम अपने अतीत को नमन करें, वर्तमान की उपलब्धियों का उत्सव मनाएँ और एक उज्ज्वल भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएँ। आईआईटी रोपड़ आज उत्कृष्टता के एक प्रकाश स्तंभ के रूप में खड़ा है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले वर्षों में यह संस्थान और भी ऊँचाइयों को छूते हुए ज्ञान को नई दिशा देगा, नवाचार को गति देगा और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देगा।
समस्त आईआईटी रोपड़ परिवार को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी आगे की यात्रा उपलब्धियों, खोजों और प्रभावपूर्ण योगदान से परिपूर्ण हो।
धन्यवाद,जय हिन्द!