SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FOUNDATION DAY OF ARUNACHAL PRADESH AND MIZORAM AT PUNJAB LOK BHAVAN ON FEBRUARY 25, 2026.
- by Admin
- 2026-02-25 19:20
अरूणाचल प्रदेश और मिज़ोरम राज्यों के स्थापना दिवस पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 25.02.2026, बुधवार समयःशाम 5:00 बजे स्थानः पंजाब लोकभवन
नमस्कार!
मैं आप सभी का अरुणाचल प्रदेश और मिज़ोरम राज्यों के स्थापना दिवस के अवसर पर हार्दिक स्वागत करता हूँ। यह दिन “एक भारत, श्रेष्ठ भारत”की भावना के अंतर्गत हमारी राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत, पंजाब लोक भवन द्वारा देश के अन्य राज्यों के स्थापना दिवस मनाने की एक प्रेरणादायक परंपरा का निर्वहन किया जाता है। इसी क्रम में आज अरुणाचल प्रदेश एवं मिज़ोरम के स्थापना दिवस का आयोजन किया गया है।
हम सभी जानते हैं कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति इसकी विविधता में निहित एकता है। अरुणाचल प्रदेश और मिज़ोरम, दोनों ही राज्यों ने अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता को सहेजते हुए, राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र और सहिष्णुता को सुदृढ़ किया है। यहाँ की जनजातियाँ, भाषाएँ, परंपराएँ, और उत्सव, भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को और गहराई देते हैं।
वैसे तो, अरुणाचल प्रदेश और मिज़ोरम, दोनों राज्यों का स्थापना दिवस 20 फरवरी को मनाया जाता है। लेकिन कुछ कारणों से हम इन राज्यों का स्थापना दिवस आज मना रहे हैं।
इस दिवस को मनाने का उद्देश्य केवल अतीत के संघर्षों और उपलब्धियों का स्मरण करना ही नहीं, बल्कि भविष्य की आशाओं, विकास की संभावनाओं तथा राष्ट्रीय एकता के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करना भी है।
यह समारोह न केवल अरुणाचल प्रदेश एवं मिज़ोरम के गौरवशाली इतिहास और उल्लेखनीय उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि यह हमें यह भी स्मरण कराता है कि हमारा राष्ट्र विविधताओं में एकता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करता है।
आज जब हम अरुणाचल प्रदेश एवं मिज़ोरम का स्थापना दिवस मना रहे हैं, तो इनकी कुछ विशेषताओं से मैं आपको परिचित करवाना चाहूंगा।
अरूणाचल प्रदेश
अरुणाचल प्रदेश का इतिहास अत्यंत समृद्ध, प्राचीन और गौरवशाली रहा है। इस क्षेत्र का उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों एवं ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है, जो इसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है। आधुनिक काल में, ब्रिटिश शासन के दौरान यह क्षेत्र “नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (छम्थ्।)” के नाम से जाना जाता था।
स्वतंत्रता के पश्चात, 20 जनवरी 1972 को इसे केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा प्रदान किया गया तथा इसका नाम “अरुणाचल प्रदेश”रखा गया। तत्पश्चात, 20 फरवरी 1987 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ और देश का 24वाँ राज्य बना।
आज यह राज्य भारत की सीमाओं की रक्षा, जैव विविधता के संरक्षण और ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा राज्य है।
अरुणाचल प्रदेश को भारत का ‘क्राउन ज्वेल’अथवा ‘हिडन जेम’ कहा जाता है। यह अपनी बेमिसाल प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव से सदैव चमकता रहा है।
भारत में सूर्य की किरणें सबसे पहले अरुणाचल प्रदेश की धरती पर ही पड़ती हैं। इसलिए इसे “उगते सूरज की भूमि” (Land of the Rising Sun) भी कहा जाता है।
अरुणाचल प्रदेश का उल्लेख कालिका पुराण और महान हिंदू महाकाव्य महाभारत के साहित्य में भी मिलता है। एक हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश वह स्थान है जहाँ ऋषि परशुराम ने अपने पाप धोए, ऋषि व्यास ने ध्यान किया, राजा भीष्मक ने अपना राज्य स्थापित किया और भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी रुक्मिणी से विवाह किया।
कामरूप और अहोम जैसे शक्तिशाली राजवंशों और राज्यों द्वारा शासित, अरुणाचल प्रदेश में मालिनिथान मंदिर, परशुराम कुंड, भीष्मकनगर किला, ईटानगर किला आदि जैसे असंख्य ऐतिहासिक स्मारक और पुरातात्विक अवशेष हैं।
इसके अलावा, राज्य में अनेक प्रमुख पर्यटन स्थल हैं, जिनमें तवांग मठ (भारत का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ), डोंग गाँव (भारत में सबसे पहले सूर्य की किरणें) मौलिंग नेशनल पार्क, ज़ीरो घाटी, सेला दर्रा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
यहाँ 26 प्रमुख जनजातियाँ और 100 से अधिक उप-जनजातियाँ निवास करती हैं, जिनमें प्रत्येक की अपनी विशिष्ट भाषा, परंपरा, वेशभूषा, उत्सव और सामाजिक संरचना है।
अरूणाचल प्रदेश के बहादुर योद्धाओं और शौर्यवान लोगों ने अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए, भारत माता की सुरक्षा में अपनी अमूल्य भूमिका निभाई है। इनमें ताजी मिदेरेन का नाम प्रमुख है जिन्होंने अपने साथी मिश्मी जनजाति के सदस्यों को ब्रिटिश सत्ता के विकास का विरोध करने के लिए संगठित किया, तथा पैंगोन और अन्य मिश्मी प्रमुखों के नेतृत्व में मिश्मी संघ की स्थापना की।
चीन, म्यांमार और भूटान से लगी इसकी अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ इसकी रणनीतिक महत्ता को रेखांकित करती हैं, जबकि यहाँ के नागरिकों और युवाओं का भारतीय सेना एवं अर्धसैनिक बलों में योगदान राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का सशक्त उदाहरण है।
अरुणाचल प्रदेश ने “Medicine from the Sky”पहल के तहत, ड्रोन के माध्यम से दूर-दराज के गांवों में दवाओं और वैक्सीनों की आपूर्ति की व्यवस्था की है। यह प्रौद्योगिकी का समाजोपयोगी उपयोग करके सामाजिक सुधार का एक बेहतरीन उदाहरण है।
जैसे पंजाब को "Food Bowl of India" के रूप में जाना जाता है, वैसे ही अरुणाचल प्रदेश को भी देश के "Fruit Bowl"के रूप में जाना जाता है। यह राज्य ‘खासी मंदारिन’संतरे और कीवी उत्पादन में देश में पहले स्थान पर जबकि बड़ी इलायची के उत्पादन में इसका दूसरा स्थान है।
अरुणाचल प्रदेश में महिला सशक्तिकरण एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जहाँ पंचायतों में लगभग 47 प्रतिशत महिलाओं का प्रतिनिधित्व है।
यहां की अंशू जामसेनपा ने माउंट एवरेस्ट पर पांच दिन में दो बार सफल आरोहण कर साहस और दृढ़ संकल्प का विश्व रिकॉर्ड बनाया। तागे रीता ताखे ने प्रदेश के कृषि-आधारित उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया और राज्य की कृषि परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाई है।
साहित्य के क्षेत्र में ममांग दाई ने अपनी रचनाओं से जनजातीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और महिला अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई। जुमडे योमगाम गैमलिन ने नशा मुक्ति के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य करते हुए सैकड़ों युवाओं को नया जीवन दिया और हज़ारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया।
कर्नल पोनुंग डोमिंग ने भारतीय सेना में नेतृत्व कर यह सिद्ध किया कि बेटियाँ राष्ट्ररक्षा में भी अग्रणी हैं, जबकि तेनज़िन यांगकी ने राज्य की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनकर प्रशासनिक इतिहास रचा। ये सभी महिलाएँ अरुणाचल प्रदेश में विकास की दिशा तय करने वाली सशक्त शक्ति का प्रतीक हैं।
इसके अलावा, इस अवसर पर, मैं स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी मोजे रीबा और मातमूर जामोह को नमन करता हूँ, जिनके साहस और त्याग ने इस सीमांत क्षेत्र में स्वतंत्रता की चेतना को सशक्त किया।
साथ ही मैं माननीय श्री किरेन रिजिजू जी का भी उल्लेख करना चाहूंगा, जो वर्तमान में भारत सरकार में संसदीय कार्य तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्री के रूप में राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। वे अरुणाचल प्रदेश की धरती से जुड़े ऐसे विशिष्ट व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपने परिश्रम और समर्पण से राष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य की पहचान को सुदृढ़ किया है।
मिज़ोरम
वहीं यदि हम मिज़ोरम की बात करें तो इसका इतिहास संघर्ष, आत्मसम्मान और शांति की मिसाल है। 16वीं-17वीं शताब्दी में मिज़ो जनजातियों के लुशाई हिल्स में बसने के साथ इस क्षेत्र की यात्रा प्रारंभ हुई। ब्रिटिश शासन में यह असम का भाग था, पर स्वतंत्रता के बाद सांस्कृतिक पहचान और स्वायत्तता की मांगें उभरने लगीं।
1959 के अकाल ने यह आंदोलन तीव्र बनाया, जिसके परिणामस्वरूप मिज़ो नेशनल फ्रंट का गठन हुआ और 1966 में विद्रोह हुआ।
लंबे संवाद के बाद 30 जून 1986 को हुए मिज़ोरम समझौते ने शांति स्थापित की, और 20 फरवरी 1987 को मिज़ोरम को भारत का 23वाँ राज्य घोषित किया गया। इसके पश्चात राज्य ने शांति, शिक्षा, सामाजिक समरसता और सतत विकास में उल्लेखनीय प्रगति की और आज यह उच्च साक्षरता, सौहार्द तथा जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है।
मिज़ोरम की संस्कृति सामूहिकता, अनुशासन, और प्रकृति के प्रति सम्मान पर आधारित है। ‘मिज़ो’ यहाँ की प्रमुख जनजाति है। मिज़ो समाज में ‘ज़ाव्लबुका’ (सामूहिक छात्रावास) जैसी सामुदायिक परंपराएँ, पारंपरिक गीत-संगीत, और हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा है।
मिज़ोरम की पारंपरिक नृत्य शैलियाँ-चेराव (बांस नृत्य), खुआल्लम, च्हेइलाम, सर्लमकाई-देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। यहाँ की हस्तशिल्प, बुनाई, बांस और लकड़ी की कारीगरी, और पारंपरिक वस्त्र मिज़ो समाज की रचनात्मकता का प्रमाण हैं।
मिज़ोरम प्राकृतिक सुंदरता, जैव-विविधता और शांत वातावरण से समृद्ध एक अद्वितीय राज्य है। भारत के सभी राज्यों में मिज़ोरम में जनजातीय आबादी का प्रतिशत सर्वाधिक है। यहाँ की अधिकांश जनसंख्या विभिन्न जनजातीय समुदायों से बनी है।
यहां के मिज़ो समाज की ‘त्लावमंगाइना’ विचारधारा दूसरों की सेवा को सर्वोपरि मानती है, जो न केवल व्यक्तिगत विकास और संतोष में सहायक है, बल्कि समाज में सहयोग, भाईचारे और सामूहिक प्रगति को भी बढ़ावा देती है।
98.2 प्रतिशत की उच्च साक्षरता दर के साथ मिज़ोरम अंतर-सांस्कृतिक जीवंतता का एक अनूठा मिश्रण समेटे हुए है।
देश के अधिकांश हिस्सों की तरह, मिज़ोरम में भी कृषि मुख्य पेशा है। ‘झूम खेती’ मिज़ोरम में एक महत्वपूर्ण प्रथा है। इसमें जंगलों को काटना, पत्तियों को जलाना और भूमि पर खेती करना शामिल है। मिज़ोरम में सभी प्रमुख कृषि गतिविधियाँ और त्यौहार झूम खेती के इर्द-गिर्द घूमते हैं।
मिज़ोरम, म्यांमार और बांग्लादेश से सटी अपनी सीमाओं के कारण, भारत की पूर्वी सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। यहाँ के युवा बड़ी संख्या में सेना में भर्ती होते हैं, और राज्य ने कई उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारी देश को दिए हैं।
मिज़ोरम में कार्यबल में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्हें पुरूषों के बराबर माना जाता है और समाज के सभी पहलुओं में भाग लेने के समान अवसर दिए जाते हैं।
यहाँ के युवा शिक्षा, खेल, और सामाजिक सेवा में अग्रणी हैं। मिज़ोरम ने फुटबॉल, हॉकी, और अन्य खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
खेल जगत में लालरेमसियामी हमारज़ोटे ने ओलंपिक तथा एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर मिज़ोरम का गौरव बढ़ाया। कला और संस्कृति के क्षेत्र में बाल प्रतिभा एस्थर लालदुहावमी हनामते ने कम उम्र में ही अपनी गायन प्रतिभा से देश का ध्यान आकर्षित किया और राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किया।
पद्म श्री से सम्मानित सामाजिक चेतना और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में संगखुमी बुआलछुआक का योगदान प्रेरणास्पद है। प्रशासनिक सेवाओं में एल. तोछोंग, मिज़ोरम की प्रथम महिला आईएएस अधिकारी, तथा लालखामा, राज्य के प्रथम आईएएस अधिकारी और मिज़ो शांति समझौते के प्रमुख शिल्पकार, ने सुशासन की सशक्त नींव रखी।
पद्म श्री से सम्मानित प्रथम मिज़ो नागरिक एन्सेल्म साविहलीरा, तथा स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना लालनू रोपुइलियानी और पराक्रमी ज़ामपुइमांगा जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व हमारी साहसिक परंपरा के प्रतीक हैं।
इन सभी महान व्यक्तित्वों की उपलब्धियाँ हमें यह संदेश देती हैं कि प्रतिभा, परिश्रम और सामाजिक प्रतिबद्धता से मिज़ोरम निरंतर नई ऊँचाइयों को छूता रहेगा।
देवियो और सज्जनो,
भारत विविधताओं का एक अनुपम संगम है। अरूणाचल प्रदेश और मिज़ोरम की तरह देश का हर राज्य अपनी अलग पहचान के साथ इस राष्ट्र को समृद्ध बनाती है। चाहे वह प्राकृतिक सौंदर्य हो, सांस्कृतिक विरासत हो या सामाजिक संरचना, यही विविधता भारत को विश्व में अद्वितीय बनाती है।
हमारा राष्ट्रीय आदर्श “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” हमें यह सिखाता है कि विविधता कोई चुनौती नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। जब हम भिन्नताओं में निहित सम्मान, सहिष्णुता और सहयोग को स्वीकार करते हैं, तभी एक सशक्त और प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।
हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों ने भी यही संदेश दिया कि एकता ही हमारी वास्तविक शक्ति है। महात्मा गांधी जी का स्पष्ट मत था कि भारत की आत्मा उसकी एकता में बसती है, और यही विचार आज भी हमें हर क्षेत्र में प्रेरणा देता है।
हमारा लोकतंत्र, हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ, तथा हमारी वैज्ञानिक और आर्थिक प्रगति इस एकता की भावना से संचालित हैं। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत जैसे अभियानों के माध्यम से हम एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। परंतु यह विकास तभी पूर्ण होगा, जब प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार, समान अवसर और सम्मान प्राप्त हो।
अंत में मैं एक बार फिर से पंजाब की जनता की ओर से अरुणाचल प्रदेश और मिज़ोरम के सभी नागरिकों को राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ देता हूँ।
आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि विविधता को सम्मान देंगे, एकता को मजबूत करेंगे, और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के सपने को साकार करेंगे।
धन्यवाद,
जय हिंद!