SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CULMINATION OF SANSHAKT BALL MAHOTSAV 3.0 ON THE EVE OF 12TH FOUNDATION DAY AT CHANDIGARH ON FEBRUARY 27, 2026.

‘सशक्त बाल महोत्सव-3.0, 2025’ के समापन समारोह के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 27.02.2026, शुक्रवारसमयः सुबह 11:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

सभी गणमान्य अतिथिगण, चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सी.सी.पी.सी.आर) की अध्यक्षा एवं सदस्यगण, तथा मेरे प्रिय बच्चों!

मैं आप सभी को ‘सशक्त बाल महोत्सव-3.0, 2025’ के समापन समारोह के इस पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ एवं अभिनंदन प्रेषित करता हूँ। चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित यह जीवंत उत्सव हमारे बच्चों की ऊर्जा, प्रतिभा और असीम संभावनाओं का सच्चा प्रतिबिंब है।

सबसे पहले, मैं आयोग के 12वें स्थापना दिवस के अवसर पर हार्दिक बधाई देता हूँ। वर्ष 2014 में स्थापित चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग पिछले कई वर्षों से चंडीगढ़ के प्रत्येक बच्चे के अधिकार, सुरक्षा और गरिमा की रक्षा एवं संवर्धन सुनिश्चित करने वाला एक सशक्त स्तंभ बनकर उभरा है।

हर्ष का विषय है कि सी.सी.पी.सी.आर. की अध्यक्षा सुश्री शिप्रा बंसल और उनकी पूरी टीम संविधान में निहित मूल्यों एवं अंतरराष्ट्रीय संधियों के सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करते हुए बच्चों की शिक्षा, शोषण से सुरक्षा, एवं स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता जैसे विषयों पर सजग एवं सक्रिय भूमिका निभा रहा है। बाल अधिकारों की रक्षा और बाल मन के समग्र विकास के प्रति उनका समर्पण वास्तव में प्रशंसनीय है।

यह अत्यंत आवश्यक है कि हम सभी मिलकर ऐसा भविष्य का निर्माण करें जहाँ हर बच्चे के अधिकारों की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित हो। सभी प्रशासनिक विभागों, हितधारकों और नागरिकों के सहयोग एवं सहभागिता से हम चंडीगढ़ को एक वास्तविक बाल-मित्र शहर बना सकते हैं।

देवियो और सज्जनो,

पिछले एक माह से चल रहा यह ‘सशक्त बाल महोत्सव-3.0’ केवल एक आयोजन नहीं था; यह बच्चों की रचनात्मकता, उनके अधिकारों और उनकी असीम ऊर्जा का एक महाकुंभ था।

मेरे विचार में ‘सशक्त बाल’ का अर्थ केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ होना नहीं है। एक ‘सशक्त बच्चा’ वह है जो जीवन की चुनौतियों और विफलताओं का सामना मुस्कान के साथ कर सके। जिसे यह पता हो कि ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ क्या है, और जो किसी भी प्रकार के शोषण के खिलाफ निडर होकर अपनी आवाज़ उठा सके। जिसमें अपने बड़ों के प्रति सम्मान, पर्यावरण के प्रति प्रेम और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना हो।

मुझे यह जानकर विशेष प्रसन्नता है कि ‘सशक्त बाल महोत्सव’ के इस तीसरे संस्करण में चंडीगढ़ के सरकारी एवं निजी विद्यालयों के बच्चों के साथ-साथ बाल देखभाल संस्थानों के बच्चों की भी सहभागिता सुनिश्चित की गई। यह समावेशिता एक सशक्त संदेश देती है कि हर बच्चा महत्वपूर्ण है, हर आवाज मायने रखती है और हर सपने को एक मंच मिलना चाहिए।

इस महोत्सव के अंतर्गत आयोजित श्लोक वाचन, भाषण प्रतियोगिता, चित्रकला, निबंध लेखन तथा नाट्य प्रतियोगिता जैसी विविध एवं रोचक गतिविधियों ने बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति, आलोचनात्मक चिंतन और आत्मविश्वास विकसित करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया है। ऐसी पहलें न केवल प्रतिभा को निखारती हैं, बल्कि युवा मन में संस्कार, टीम भावना और नेतृत्व गुणों को भी सुदृढ़ करती हैं।

देवियो और सज्जनो,

पुलिस अधिकारी एवं अन्य हित धारक बच्चों के संबंध में संरक्षण और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनके कार्यो और दायित्व के बारे मे पूरी जानकारी होना जरुरी है। 

मैं आयोग द्वारा ‘बाल यौन अपराधों से संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम, 2012’ के प्रावधानों के अंतर्गत पुलिस अधिकारियों एवं अन्य प्रमुख हितधारकों के लिए आयोजित दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला की पहल की भी सराहना करता हूँ। यह बाल संरक्षण कानूनों के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

हितधारकों की क्षमता वृद्धि अत्यंत आवश्यक है, ताकि हमारे बच्चे हर समय स्वयं को सुरक्षित, और संरक्षित महसूस करें। साथ ही, 'Training Module for Police Officers and other Key Stakeholders under the provisions of the Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act, 2012' आधारित पुस्तिका का विमोचन भी अत्यंत सराहनीय है, जो संबंधित अधिकारियों को बच्चों से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता के साथ कार्य करने में सहायक सिद्ध होगी।

देवियो और सज्जनो,

बच्चे हमारे समाज की सबसे मूल्यवान पूंजी हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य में ही राष्ट्र का भविष्य निहित है। उनकी शिक्षा, सुरक्षा तथा मानसिक और भावनात्मक विकास केवल पारिवारिक दायित्व नहीं, बल्कि समाज और राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। एक सशक्त, संवेदनशील और आत्मविश्वासी नागरिक के निर्माण की प्रक्रिया बचपन से ही आरंभ होती है, इसलिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक बच्चे को ऐसा परिवेश मिले जो उसे सुरक्षित, सम्मानपूर्ण और प्रेरणादायी लगे।

यह अनिवार्य है कि हर बच्चा शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और बौद्धिक रूप से स्वस्थ वातावरण में विकसित हो। ऐसा वातावरण, जहाँ भय नहीं बल्कि विश्वास हो, जहाँ दंड नहीं बल्कि संवाद हो, और जहाँ प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ करुणा और सहयोग के मूल्य भी सिखाए जाएँ। बचपन जीवन का सबसे कोमल, संवेदनशील और विकासशील चरण होता है, जब एक बच्चा न केवल ज्ञान अर्जित करता है, बल्कि अपने संस्कार, दृष्टिकोण और व्यक्तित्व की नींव भी रखता है।

एक खुशहाल और सुरक्षित बचपन केवल व्यक्तिगत सुख तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज की स्थिरता, समरसता और राष्ट्र की उन्नति की आधारशिला बनता है। जो बच्चे प्रेम, सुरक्षा और अवसरों के वातावरण में पलते हैं, वही आगे चलकर जिम्मेदार नागरिक, संवेदनशील नेता और सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनते हैं। इसके विपरीत, उपेक्षा और असुरक्षा से ग्रस्त बचपन समाज के लिए दीर्घकालिक चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है।

जब हम यह कहते हैं कि हर बच्चे को खुशहाल बचपन का अधिकार है, तो इसका अर्थ केवल भोजन, वस्त्र और आवास जैसी भौतिक आवश्यकताओं तक सीमित नहीं होता। इसका व्यापक दायरा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समुचित स्वास्थ्य सेवाएँ, सुरक्षित परिवेश, संतुलित पोषण, मानसिक एवं भावनात्मक सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और समान अवसरों तक पहुँच को समाहित करता है। यह तभी संभव है जब परिवार, समाज, शैक्षणिक संस्थान और शासन, सभी मिलकर बच्चों के हित में समन्वित और संवेदनशील प्रयास करें। यही निवेश हमारे बच्चों में नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र के भविष्य में किया गया सबसे मूल्यवान निवेश होगा।

देवियो और सज्जनो, 

बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए भारत सरकार और हमारा यूटी प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम जैसे सशक्त कानून बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर जीरो टॉलरेंस सुनिश्चित करते हुए पीड़ित बच्चों को सुरक्षित, गोपनीय और संवेदनशील वातावरण में त्वरित न्याय एवं पुनर्वास प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग और प्रशासन मिलकर इन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन कर रहे हैं, ताकि प्रत्येक बच्चा भयमुक्त बचपन जी सके।

शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार और उसके सशक्तिकरण की मजबूत आधारशिला है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप निपुण भारत मिशन से प्रारंभिक साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को सुदृढ़ किया जा रहा है, जबकि पीएम-पोषण योजना बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और विद्यालय उपस्थिति को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए मिशन वात्सल्य अनाथ, बेसहारा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को संरक्षण और पारिवारिक वातावरण प्रदान कर रहा है। वहीं, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान ने बालिकाओं के प्रति सामाजिक सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाया है और आज हमारी बेटियाँ हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।

अंततः, इन सभी योजनाओं और कानूनों की वास्तविक सफलता तभी संभव है जब हम सब जागरूक होकर बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें अंतिम पंक्ति तक पहुँचाने में अपनी साझा जिम्मेदारी निभाएँ।

देवियो और सज्जनो,

आज हम 2026 में जी रहे हैं। यह डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग है। आज हमारे बच्चों के सामने चुनौतियां वैसी नहीं हैं जैसी हमारे समय में हुआ करती थीं।

आज सबसे बड़ा खतरा भौतिक दुनिया से अधिक डिजिटल दुनिया (Cyber World)में है। साइबर बुलिंग, स्क्रीन की लत, और सोशल मीडिया के कारण बच्चों में बढ़ता तनाव और मानसिक अवसाद आज के समय की सबसे बड़ी चिंताएं हैं।

मैं यहाँ उपस्थित सभी माता-पिता और शिक्षकों से आग्रह करना चाहूँगा कि वे बच्चों के साथ ‘क्वालिटी टाइम’ बिताएं। मशीनों के इस युग में बच्चों को मानवीय संवेदनाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन पर अपनी महत्वाकांक्षाओं का बोझ न डालें, बल्कि उनके स्वाभाविक विकास में एक मित्र और मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं।

यहाँ उपस्थित सभी प्रिय बच्चों,

मैं आप सभी से कहना चाहूँगा कि आप चंडीगढ़ का गौरव और हमारे राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य हैं। आपमें से प्रत्येक में अद्वितीय प्रतिभा और अपार संभावनाएँ निहित हैं। पूरे उत्साह के साथ भाग लें, निडर होकर सपने देखें और अपने विचारों को व्यक्त करने में कभी संकोच न करें। याद रखें, आत्मविश्वास और चरित्र आपकी सबसे बड़ी शक्तियाँ हैं। निरंतर सीखते रहें, आगे बढ़ते रहें और एक जिम्मेदार एवं संवेदनशील नागरिक के रूप में स्वयं को विकसित करते रहें।

आप भारत का वह भविष्य हैं जो 2047 में ‘विकसित भारत’ का नेतृत्व करेगा। मेरी आपको केवल तीन सलाह हैं। बड़े सपने देखें और कभी भी अपने सपनों की उड़ान को सीमित न करें। आप जो चाहें, वह बन सकते हैं। सवाल पूछें क्योंकि जिज्ञासा ही ज्ञान की जननी है। कभी भी कुछ नया सीखने या सवाल पूछने से न झिझकें। असफलता से न डरें, जीवन में गिरना हार नहीं है, गिरकर न उठना हार है।

आदरणीय शिक्षकों के प्रति मैं अपना हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ, जो अपने सतत मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से बच्चों के शैक्षणिक ही नहीं, बल्कि नैतिक और भावनात्मक आधार को भी सुदृढ़ बनाते हैं। जिज्ञासा और मूल्यों के संवर्धन में आपकी भूमिका अमूल्य है।

प्रिय अभिभावकों, 

आपके निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन के लिए मैं आपको भी साधुवाद देता हूँ। बच्चे की पहली शिक्षा घर से प्रारंभ होती है, और आपका प्रेम, धैर्य तथा समझ उनके उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। आइए, हम सभी मिलकर प्रत्येक बच्चे के लिए एक सुरक्षित, सहयोगी और सशक्त वातावरण का निर्माण करें।

यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में, मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि प्रशासन हमारे बच्चों की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य और उनकी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि चंडीगढ़ का हर कोना, हर स्कूल और हर सार्वजनिक स्थान बच्चों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हो। आयोग की पहलों को प्रशासन का पूरा समर्थन निरंतर मिलता रहेगा।

‘सशक्त बाल महोत्सव-3.0’ की सफलता का उत्सव मनाते हुए, आइए हम सभी बाल-मित्र चंडीगढ़ के निर्माण के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः दृढ़ करें, जहाँ प्रत्येक बच्चा स्वयं को सुरक्षित, सशक्त और प्रेरित महसूस करे।

मैं एक बार फिर से चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा एवं उनकी संपूर्ण टीम को इस उत्कृष्ट पहल तथा बाल अधिकारों की सेवा में 12 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।

धन्यवाद,

जय हिन्द!