SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF ROUND TABLE CONFERENCE TRICITY INTELLIGENTSIA LEVERAGING INTELLECTUAL CAPITAL FOR SOCIAL SHIFT AT CHANDIGARH ON FEBRUARY 27, 2026.
- by Admin
- 2026-02-27 16:35
“सामूहिक परिवर्तन हेतु बौद्धिक पूंजी का उपयोग” विषय पर आधारित संवाद कार्यक्रम के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 27.02.2026, शुक्रवार समयः दोपहर 2:55 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आप सभी के बीच “सामूहिक परिवर्तन हेतु बौद्धिक पूंजी का उपयोग” जैसे अत्यंत प्रासंगिक और विचारोत्तेजक विषय पर अपने विचार साझा करने का अवसर मिलना मेरे लिए गौरव और आत्मसंतोष का विषय है। यह मंच केवल एक विचार-विमर्श का अवसर नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने का एक सशक्त प्रयास है।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में आमंत्रित करने के लिए मैं ‘ट्राइसिटी इंटेलिजेंसिया’ का आभार व्यक्त करता हूं, जो अत्यंत प्रतिबद्ध बौद्धिक दिग्गजों का एक समूह है। इसमें प्रशासन, विधि, शिक्षा, चिकित्सा, मीडिया, सिविल सेवाओं, सशस्त्र बलों, सामाजिक कार्य और उद्योग जैसे सार्वजनिक जीवन के विविध क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्व सम्मिलित हैं। इन सभी सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में दशकों तक कार्य करते हुए राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण और सार्थक योगदान दिया है।
आज इस अत्यंत प्रासंगिक और समय की मांग के अनुरूप कार्यक्रम में उपस्थित आप सभी पूर्व आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारियों, सेना के वीर कमांडरों, सम्मानित न्यायविदों, चिकित्सकों, अभियंताओं, शिक्षाविदों और प्रबुद्ध समाजसेवियों का मैं हृदय से अभिनंदन करता हूँ।
आज जब मैं इस सभागार में दृष्टि डालता हूँ, तो मुझे यहाँ केवल सेवानिवृत्त अधिकारी या वरिष्ठ नागरिक नहीं दिखाई देते, बल्कि मुझे यहाँ भारतवर्ष के स्वर्णिम इतिहास के वे वास्तुकार दिखाई देते हैं जिन्होंने तीन-चार दशकों तक अपनी तपस्या और परिश्रम से इस राष्ट्र की नींव को सींचा है।
साथियो,
सेवा-निवृत्ति को अक्सर जीवन की संध्या के रूप में देखा जाता है, किंतु मैं इसे समाज-निर्माण की एक नई प्रातः बेला मानता हूँ। दशकों तक प्रशासन, सुरक्षा, न्याय, शिक्षा, चिकित्सा और तकनीकी क्षेत्रों में अर्जित आपका अनुभव केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है। आपने जिन संस्थाओं को खड़ा किया, जिन नीतियों को आकार दिया और जिन मूल्यों की रक्षा की, वे आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रहे हैं। वास्तव में, सेवा-निवृत्ति सेवा का अंत नहीं, बल्कि उसके विस्तार का अवसर है।
जब हम ‘बौद्धिक पूंजी’ की बात करते हैं, तो इसका अर्थ केवल शैक्षणिक डिग्रियों के संग्रह से नहीं है। यह पूंजी आपके दशकों के प्रशासनिक अनुभव, आपके नैतिक नेतृत्व, संस्थागत स्मृति, पेशेवर दक्षता और उस सामाजिक विश्वसनीयता से मिलकर बनी है जो आपने जीवन भर अर्जित की है।
आप सभी वरिष्ठ नागरिक इस राष्ट्र की वह जीवंत ज्ञान-संपदा हैं, जिसे किसी किताब में नहीं पढ़ा जा सकता। आज के दौर में, जब समाज तेजी से बदल रहा है, इस अथाह अनुभव और पूंजी का संगठित उपयोग ही सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी और प्रभावी कुंजी है। हमें यह सत्य स्वीकार करना होगा कि सरकारें केवल नीतियां बना सकती हैं, सड़कें और अस्पताल बना सकती हैं, लेकिन एक सशक्त, संस्कारी और जीवंत राष्ट्र का निर्माण अंततः समाज ही करता है।
राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में केवल राजनीतिक या आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं है; इसके लिए सामाजिक सुदृढ़ता नितांत आवश्यक है। किसी भी राष्ट्र की स्थिरता और अखंडता के कुछ मूल आधार होते हैं, जिनमें सशक्त परिवार, अनुशासित नागरिक, सामाजिक समरसता और गहरी सांस्कृतिक चेतना सबसे प्रमुख हैं।
हमारा कोई भी आर्थिक विकास, चाहे हम 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बन जाएं, तब तक निरर्थक है जब तक वह हमारे गहरे नैतिक और मानवीय मूल्यों से न जुड़ा हो। एक समाज के रूप में हमारे नवजागरण के लिए हमें मुख्य रूप से पांच स्तंभों पर कार्य करना होगा।
इसका पहला और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हमारी सुदृढ़ परिवार व्यवस्था है। परिवार किसी भी मनुष्य की प्रथम संस्कार-शाला है। आज आधुनिकता की अंधी दौड़ में पीढ़ियों के बीच जो संवादहीनता पनप रही है, उसे पाटना होगा। हमारे वरिष्ठ नागरिकों को अपने घरों में और आस-पड़ोस में युवाओं के लिए एक मजबूत मार्गदर्शक और ‘शॉक एब्जॉर्बर’ की भूमिका निभानी होगी।
दूसरा स्तंभ सामाजिक समरसता का है। हमें जाति, वर्ग, पंथ और भाषा की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर सामुदायिक संवाद मंचों की स्थापना करनी होगी। आपके अनुभव और आपकी स्वीकार्यता समाज के हर वर्ग में है; आप साझा उत्सवों और सामूहिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से दिलों को जोड़ने का कार्य कर सकते हैं।
तीसरा स्तंभ नागरिक कर्तव्य चेतना है। आज का समाज अपने अधिकारों के प्रति बहुत मुखर है, जो कि लोकतंत्र में अच्छी बात है, लेकिन दुर्भाग्य से हम अपने कर्तव्यों के प्रति उतने ही मौन हो जाते हैं। स्वच्छता, नागरिक अनुशासन और कानून का स्वेच्छा से पालन करना, इन मूल्यों को हमें नई पीढ़ी में रोपना होगा।
चौथा स्तंभ पर्यावरण एवं जन-स्वास्थ्य है, जो जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों से जुड़ा है। इनके प्रभाव सीधे मानव स्वास्थ्य, जीवन-शैली और संसाधनों पर पड़ रहे हैं। इन समस्याओं का समाधान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर सामूहिक सहभागिता, स्वच्छ जल संरक्षण, हरित क्षेत्रों के विस्तार और अपशिष्ट प्रबंधन से संभव है। इसमें आप जैसे अनुभवी दिग्गजों की सक्रिय भूमिका आवश्यक है, ताकि पर्यावरण संरक्षण और जन-स्वास्थ्य को साथ-साथ सुदृढ़ किया जा सके और वर्तमान व भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जीवन सुनिश्चित हो सके।
और पांचवां स्तंभ सांस्कृतिक एवं नैतिक जागरण है, जहाँ शिक्षा प्रणाली को केवल ‘करियर-ओरिएंटेड’ न रखकर ‘चरित्र-निर्माण’ पर केंद्रित करना होगा, ताकि भौतिकवाद और हमारी प्राचीन आध्यात्मिक दृष्टि के बीच एक स्थायी संतुलन बन सके।
देवियो और सज्जनो,
वर्तमान में नशे की समस्या विशेष रूप से पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में एक गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुकी है। यह केवल कानून-व्यवस्था का प्रश्न नहीं है, बल्कि परिवारों के विघटन, युवाओं के भविष्य के संकट और सामाजिक ताने-बाने के क्षरण से जुड़ा हुआ विषय है।
इससे निपटने के लिए सामुदायिक सतर्कता, प्रभावी पुनर्वास, परामर्श और विद्यालय स्तर पर जागरूकता अनिवार्य है। पूर्व पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का अनुभव इस दिशा में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। नशामुक्त समाज का निर्माण सरकार अकेले नहीं कर सकती; इसके लिए परिवार और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी आवश्यक है।
इसी प्रकार, बढ़ती हिंसा और अपराध भी समाज के लिए चिंता का विषय हैं। अपराध को केवल दंड के माध्यम से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। उसके प्रारंभिक संकेतों की पहचान और समय पर हस्तक्षेप आवश्यक है।
पूर्व आईपीएस और सैन्य अधिकारी युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित कर सकते हैं। सामुदायिक मध्यस्थता और सामाजिक नैतिकता का सुदृढ़ीकरण कानून के साथ-साथ समान रूप से आवश्यक है।
पूर्व प्रशासनिक और रक्षा अधिकारियों की भूमिका शासन-सुधार, नीति-समीक्षा, युवा अधिकारियों की मेंटरशिप और सुशासन पर विचार-पत्रों के माध्यम से अत्यंत प्रभावी हो सकती है। इसी प्रकार, चिकित्सक, अभियंता और अन्य पेशेवर वर्ग ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य शिविरों, किफायती तकनीकी समाधानों और कौशल विकास के माध्यम से समाज को सशक्त बना सकते हैं। शिक्षाविद और चिंतक शोध-आधारित सामाजिक समाधान, नेतृत्व विकास कार्यक्रम और युवाओं में राष्ट्रबोध जागृत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
साथियो,
‘ट्राइसिटी इंटेलिजेंसिया’ के लिए यह समय है कि वह केवल विचार-मंच न रहकर एक सक्रिय कार्य-मंच के रूप में उभरे। मासिक विषयक संवाद, नशामुक्ति, युवा सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और नागरिक अनुशासन जैसे विषयों पर कार्यदल, विद्यालयों, महाविद्यालयों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों के साथ समन्वय तथा वार्षिक सामाजिक उत्तरदायित्व प्रतिवेदन, ये सभी कदम इसे एक प्रभावी सामाजिक आंदोलन का रूप दे सकते हैं।
युवाओं के साथ निरंतर संवाद और सहभागिता भविष्य निर्माण की कुंजी है। एन.सी.सी., एन.एस.एस. और विश्वविद्यालयों के छात्रों के साथ संवाद, वरिष्ठ-युवा मेंटरशिप सर्कल और सेवा-आधारित नेतृत्व कार्यशालाएँ युवाओं में राष्ट्रभाव और जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करेंगी।
मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि अनुभव और ऊर्जा का जब सार्थक और उद्देश्यपूर्ण संगम होता है, तभी समाज में वास्तविक, गहरा और स्थायी परिवर्तन संभव हो पाता है। अनुभव दिशा देता है, संतुलन सिखाता है और अतीत की सीख के आधार पर भविष्य की राह दिखाता है, जबकि ऊर्जा उस दिशा में आगे बढ़ने की शक्ति, उत्साह और गति प्रदान करती है।
जब वरिष्ठों का विवेक और युवाओं का जोश एक साथ कार्य करता है, तब विचार केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ठोस कार्यों और सकारात्मक परिणामों में परिवर्तित हो जाते हैं। यही समन्वय समाज को जड़ता से बाहर निकालकर प्रगति, नवाचार और संवेदनशीलता के मार्ग पर अग्रसर करता है।
हमारा सामूहिक लक्ष्य चंडीगढ़ को एक नशामुक्त, अनुशासित, समरस और स्वच्छ समाज के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करना होना चाहिए। नागरिक-प्रेरित स्वच्छता, सक्रिय वरिष्ठ नागरिक मंच और सामुदायिक सहभागिता इसे पंजाब और हरियाणा के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बना सकती है। यह मॉडल दर्शाएगा कि जब समाज स्वयं आगे आता है, तो परिवर्तन संभव और स्थायी होता है।
साथियो,
हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने का जो स्पष्ट, दूरदर्शी और प्रेरक संकल्प लिया है, वह केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक राष्ट्रीय आह्वान है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारे पास समय सीमित अवश्य है, किंतु हमारी क्षमताएँ, संसाधन और संकल्प उससे कहीं अधिक व्यापक हैं।
मैं यह दृढ़ता से मानता हूँ कि विकसित भारत 2047 की इस यात्रा के वास्तविक सूत्रधार हमारे युवा हैं और इसकी सशक्त आधारशिला आप जैसे अनुभवी, दूरदर्शी और राष्ट्रनिष्ठ दिग्गज हैं। यदि युवाओं को आपके अनुभव, विवेक और जीवन-साधना का मार्गदर्शन प्राप्त हो जाए, तो वे न केवल तीव्र गति से आगे बढ़ेंगे, बल्कि सही दिशा में, संतुलन और मूल्यों के साथ आगे बढ़ेंगे। अनुभव और ऊर्जा का यह समन्वय ही भारत को आत्मनिर्भर, समावेशी और वैश्विक नेतृत्वकर्ता राष्ट्र बनाने की कुंजी है।
आज यदि भारत विश्व पटल पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभरा है और देश के अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिक तक सुशासन का विश्वास पहुँचा है, तो इसका श्रेय नीति-निर्माण, प्रशासन, सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आप जैसे अनुभवी शख्सियतों द्वारा तैयार की गई मजबूत नींव को जाता है। इसी नींव पर खड़ा होकर आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। आज हमारा देश फिनटेक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है, डिजिटल लेनदेन में विश्व में प्रथम स्थान पर है, और सबसे सस्ता मोबाइल डेटा उपलब्ध कराकर दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।
विकास की यह अभूतपूर्व गति पूरी तरह से सर्वस्पर्शी और समावेशी है। एक ओर जहाँ कृषि अवसंरचना, किसान उत्पादक संगठनों और ग्रामीण उद्यमिता को सुदृढ़ कर गांवों में आजीविका के नए अवसर सृजित किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर देश के बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी विस्तार हुआ है। रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण, ‘वंदे भारत’ जैसी आधुनिक ट्रेनों की शुरुआत, तथा राजमार्गों, बंदरगाहों और हवाई अड्डों के अभूतपूर्व विस्तार ने कनेक्टिविटी को नई उड़ान दी है। इसके साथ ही, ‘डिजिटल इंडिया’ के माध्यम से गांव-गांव तक इंटरनेट पहुँचा है और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) ने व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता ला दी है।
आवास, बिजली, जल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं के सार्वभौमिक विस्तार के साथ-साथ एमएसएमई और नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने इस समावेशी विकास को एक नई दिशा दी है। यह समग्र परिवर्तन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब दूरदर्शी नेतृत्व और आप जैसे अनुभवी मार्गदर्शकों का समन्वय होता है, तब राष्ट्र न केवल तेज़ी से प्रगति करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर पूर्ण आत्मविश्वास, स्थिरता और नेतृत्व क्षमता के साथ अपनी अमिट पहचान भी स्थापित करता है।
अंत में, मैं केवल यही कहूंगा कि यदि ज्ञान और अनुभव को समाज के साथ बांटा न जाए, तो वह अपनी सार्थकता खो देता है। याद रखिए, यदि हमारा परिवार सशक्त है, तो समाज स्थिर रहता है; और यदि समाज स्थिर है, तो हमारा राष्ट्र अजय और सशक्त बनता है। यह सामाजिक परिवर्तन ही नए भारत के राष्ट्र निर्माण की असली आधारशिला है।
आप जैसे अनुभवी और प्रबुद्ध नागरिक इस राष्ट्र के मूक दर्शक नहीं हो सकते; आप इस राष्ट्र के सजग प्रहरी और सच्चे संरक्षक हैं। आइए, हम सब मिलकर अपने अनुभव की इस पूंजी का निवेश करें और एक नैतिक, समरस, नशामुक्त और सशक्त भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय और ऐतिहासिक भागीदारी निभाएं।
धन्यवाद,
जय हिन्द!