SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF SAMPOORANTA ABHIYAAN SAMMAN SAMAROH AT STATE LEVEL AT LOK BHAVAN PUNJAB ON FEBRUARY 20, 2026.

“सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह” के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 20.02.2026,  शुक्रवारसमयः दोपहर 12:30 बजेस्थानः लोक भवन पंजाब

    

नमस्कार!

आप सभी के साथ आज इस गरिमामय अवसर पर जुड़कर पंजाब में आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के अंतर्गत सम्पूर्णता अभियान की सफलता तथा उल्लेखनीय प्रगति का उत्सव मनाना मेरे लिए अत्यंत गर्व और संतोष का विषय है। यह अवसर उस सामूहिक संकल्प और प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसके माध्यम से हम अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

आज मैं आपके समक्ष भारत की सबसे परिवर्तनकारी और दूरदर्शी शासन पहलों में से एक, नीति आयोग के आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme) तथा आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (Aspirational Blocks Programme)पर अपने विचार साझा करने के लिए उपस्थित हूँ। 

ये कार्यक्रम भारत की विकास रणनीति में एक मौलिक बदलाव का प्रतीक हैं। यह बदलाव क्रमिक प्रगति से आगे बढ़कर लक्षित और परिणामोन्मुख परिवर्तन की ओर है; इनपुट-आधारित शासन से परिणाम-आधारित विकास की ओर है; तथा अलग-थलग योजनाओं से अभिसरण, सहयोग और समन्वय आधारित कार्यप्रणाली की ओर है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम एक दूरदर्शी पहल है, जिसकी शुरुआत माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जनवरी 2018 में देश के 112 ज़िलों में की गई थी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत पंजाब के दो ज़िले, फ़िरोज़पुर और मोगा को शामिल किया गया। इस पहल का मूल उद्देश्य विकास की गति को तीव्र करना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी क्षेत्र, कोई भी समुदाय और कोई भी नागरिक विकास की मुख्यधारा से पीछे न रह जाए।

इस कार्यक्रम का केन्द्रीय तत्व जमीनी स्तर पर शासन और सेवा वितरण में वास्तविक परिवर्तन लाना है। इसके अंतर्गत स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास तथा बुनियादी अवसंरचना जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। ये वे क्षेत्र हैं जो सीधे-सीधे मानव विकास से जुड़े हैं और जिनमें सुधार से जीवन की गुणवत्ता में व्यापक परिवर्तन संभव होता है।

आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि इसमें राज्य सरकारों को मुख्य चालक की भूमिका सौंपी गई है। प्रत्येक ज़िले की विशिष्ट क्षमताओं और शक्तियों की पहचान कर उन्हें विकास के उत्प्रेरक के रूप में उपयोग किया जाता है। 

साथ ही, प्रगति को मापने के लिए वस्तुनिष्ठ संकेतकों पर आधारित रैंकिंग प्रणाली अपनाई गई है। इससे ज़िलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन मिलता है और वे राज्य के सर्वश्रेष्ठ से राष्ट्र के सर्वश्रेष्ठ बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर होते हैं।

इसके साथ ही, आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम की सफलता और उससे प्राप्त अनुभवों को आगे बढ़ाते हुए, आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम की शुरुआत 7 जनवरी 2023 को की गई। इस कार्यक्रम के अंतर्गत देश के 27 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों के 500 ब्लॉकों को शामिल किया गया है। 

पंजाब की बात करें तो इस कार्यक्रम के अन्तर्गत इसके 7 जिलों के 10 ब्लॉक आते हैं। इनमें मक्खू (फिरोजपुर), निहाल सिंह वाला (मोगा), डेरा बाबा नानक एवं कलानौर (गुरदासपुर), शाहकोट (जालंधर), अजनाला एवं हरशे छीना (अमृतसर), ढिलवां एवं सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला), तथा धुरी (संगरूर) शामिल हैं। यह पहल विकास की प्रक्रिया को और अधिक विकेन्द्रित बनाती है तथा ब्लॉक स्तर पर केंद्रित हस्तक्षेप को संभव बनाती है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति के लिए दिशा, मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करना है तथा विकास के लाभों को हाशिए पर खड़े और कमजोर वर्गों तक पहुँचाना है।

देवियो और सज्जनो,

राज्य स्तर पर, आकांक्षी जिला एवं आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम का संचालन मुख्य सचिव के नेतृत्व में एक मज़बूत समीक्षा तंत्र के माध्यम से किया जा रहा है, जिसमें विभागों के बीच अभिसरण, के.पी.आई-आधारित निगरानी, डेटा सत्यापन तथा जिलों और ब्लॉकों को लक्षित सहयोग सुनिश्चित किया जाता है। केंद्र और फील्ड स्तर के प्रशासन के बीच राज्य एक महत्वपूर्ण समन्वय कड़ी के रूप में कार्य करता है, जिससे समयबद्ध क्रियान्वयन और विकास संकेतकों में सतत सुधार सुनिश्चित हो सके।

नीति आयोग के आकांक्षी जिला और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रमों के अंतर्गत, देश के आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों की निगरानी ‘चैम्पियंस ऑफ चेंज डैशबोर्ड (Champions of Change Dashboard)के माध्यम से की जाती है, जो प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs - Key Performance Indicators) पर वास्तविक समय की प्रगति को ट्रैक करता है। 

डेल्टा रैंकिंग प्रणाली पूर्ण उपलब्धियों के बजाय क्रमिक सुधार को महत्व देती है, जिससे जिलों और ब्लॉकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन मिलता है।

मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि पंजाब के मोगा और फिरोज़पुर ज़िले आकांक्षी ज़िले के रूप में प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन अनुदान के लिए पात्र ठहरे हैं। 

इसी प्रकार, राज्य के अकांक्षी ब्लॉक उत्कृष्ट मॉडल के रूप में उभरे हैं। ये उपलब्धियाँ राज्य प्रशासन, ज़िला अधिकारियों और जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों की प्रतिबद्धता और परिश्रम का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।

देवियो और सज्जनो,

आकांक्षी ज़िलों और ब्लॉकों में उत्पन्न इस सकारात्मक ऊर्जा को ठोस परिणामों में बदलने के उद्देश्य से नीति आयोग द्वारा जुलाई 2024 से सितंबर 2024 तक सम्पूर्णता अभियान का आयोजन किया गया। 

इस राष्ट्रीय अभियान का उद्देश्य छह-छह महत्वपूर्ण प्रदर्शन संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति (सैचुरेशन) प्राप्त करना था, ताकि विकास का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सुनिश्चित रूप से पहुँच सके।

पंजाब में यह अभियान समावेशी, लक्षित और तीव्र विकास का एक प्रभावशाली माध्यम बनकर उभरा। कई ज़िलों और ब्लॉकों ने उत्कृष्ट नेतृत्व, नवाचार और प्रभावी क्रियान्वयन का परिचय दिया। 

मुझे यह साझा करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि 2 आकांक्षी ज़िलों और 5 आकांक्षी ब्लॉकों ने तीन या उससे अधिक संकेतकों में संतृप्ति प्राप्त की, जबकि 3 ब्लॉकों ने दो या उससे कम संकेतकों में संतृप्ति हासिल की। यह प्रगति इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा, स्पष्ट लक्ष्य और समन्वित प्रयासों से ठोस परिवर्तन संभव है।

इन उल्लेखनीय उपलब्धियों को सम्मान देने के उद्देश्य से ही आज इस सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह का आयोजन किया गया है। आज इस मंच से आकांक्षी ज़िलों और आकांक्षी ब्लॉकों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 4 वर्तमान डिप्टी कमिश्नरों को मेडल और प्रमाण-पत्र तथा 3 पूर्व डिप्टी कमिश्नरों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया है। इन अधिकारियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन अत्यंत समर्पण, नवाचार और परिणामोन्मुख दृष्टिकोण के साथ किया है, जिसके सकारात्मक प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिए हैं।

मैं इन सभी सम्मानित अधिकारियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। यह सम्मान केवल आपके व्यक्तिगत प्रयासों की सराहना नहीं है, बल्कि यह अन्य ज़िलों और ब्लॉकों के लिए भी प्रेरणा बनेगा और सुशासन, नवाचार तथा जनसेवा के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

देवियो और सज्जनो,

भारत के महान लोकतंत्र में जनता के विचार हमारी शक्ति हैं, जनता के सपने हमारी पूंजी हैं और जनता की आकांक्षाएँ हमारा मार्गदर्शन करती हैं। शासन और जनता के बीच कोई दूरी नहीं होनी चाहिए। जब हम नागरिकों की अपेक्षाओं को समझते और आत्मसात करते हैं, तभी नीतियाँ प्रभावी और निर्णय सार्थक बनते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में देश ने एक नया, नागरिक-केंद्रित शासन मॉडल अपनाया है, जिसमें हर निर्णय के केंद्र में नागरिक है। “नागरिक देवो भव” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि हमारी कार्य-संस्कृति और शासन दर्शन का मूल मंत्र है। इसी भावना के साथ लिया गया हर निर्णय हमारे नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित होना चाहिए।

मैं प्रत्येक अधिकारी, प्रत्येक कर्मचारी और प्रत्येक कर्मयोगी से कहना चाहता हूँ कि जब भी आप अपने दायित्व स्थल पर प्रवेश करें, एक क्षण रुककर स्वयं से यह प्रश्न अवश्य पूछें, क्या आज मेरा कार्य नागरिकों के जीवन को सरल, सुरक्षित और समृद्ध बनाएगा? यही आत्ममंथन, यही संवेदनशीलता, हमारे कार्यस्थलों की सबसे बड़ी शक्ति बनेगी।

अनुभव बताता है कि जब शासन सेवा-भाव से चलता है, तो परिणाम असाधारण होते हैं। तभी समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक विकास पहुँचता है, तभी करोड़ों लोग गरीबी से बाहर निकलते हैं और तभी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था नई ऊर्जा और गति प्राप्त करती है।

साथियो,

विकसित भारत 2047 केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि विश्व के समक्ष भारत की एक सशक्त प्रतिज्ञा है। इसलिए हमारी हर नीति और हमारा हर निर्णय सेवा, संवेदनशीलता और समावेशन की भावना से प्रेरित होना चाहिए। एक दिन, जब आप अपने दायित्व काल को पूर्ण कर अपने कार्यालय से विदा लेंगे, तब आप गर्व के साथ पीछे मुड़कर देख सकेंगे और आत्मसंतोष से कह सकेंगे कि मैंने हर निर्णय राष्ट्रहित में लिया, हर दिन नागरिकों की सेवा को प्राथमिकता दी। वही संतोष आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि और आपकी जीवनभर की पूंजी बनेगा।

महात्मा गांधी जी ने हमें सिखाया कि अधिकारों की भव्य इमारत कर्तव्य की मजबूत नींव पर ही खड़ी होती है। हमारे संविधान निर्माताओं ने भी कर्तव्य को सर्वोच्च महत्व दिया है, क्योंकि जब हम अपने कर्तव्यों का निष्ठा से पालन करते हैं, तभी हम बड़ी से बड़ी चुनौती का समाधान कर पाते हैं।

देशवासियों के सपनों को साकार करने का आधार कर्तव्य है। कर्तव्य ही आरंभ है, कर्तव्य ही इस जीवंत राष्ट्र की प्राणवायु है। करुणा और कर्मठता से जुड़ा हर कर्म कर्तव्य है; संकल्पों की आशा कर्तव्य है; परिश्रम की पराकाष्ठा कर्तव्य है; हर समस्या का समाधान कर्तव्य है और विकसित भारत का विश्वास भी कर्तव्य ही है।

साथियो,

आज भारत तेज़ी से एक नए युग और नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। आने वाले वर्षों में हमारी पहचान केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि शासन की गुणवत्ता, नीतियों की स्पष्टता और कर्मयोगियों की निष्ठा से होगी। आज लिए गए निर्णय केवल प्रशासनिक फैसले नहीं हैं, बल्कि वे 2047 के विकसित भारत की दिशा तय करने वाले कदम हैं। यह लक्ष्य केवल एक वर्ष या एक तिथि नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के सपनों की समय-सीमा है।

इस महान यात्रा में हर संस्था, हर अधिकारी, हर कर्मचारी और हर कर्मयोगी की भूमिका महत्वपूर्ण है। हमारा संकल्प होना चाहिए कि हमारे कार्यस्थल संवेदनशील, नागरिक-केंद्रित और उत्तरदायित्वपूर्ण शासन के प्रतीक बनें। वे ऐसे स्थान बनें जहाँ सत्ता नहीं, सेवा दिखे; पद नहीं, प्रतिबद्धता दिखे; और अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व दिखाई दे।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारा संकल्प इतिहास लिखेगा और हमारा परिश्रम आने वाली पीढ़ियों को दिशा देगा। आइए, हम हर क्षण का सदुपयोग करें और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ ऐसे पुण्य कार्य करें कि आने वाली शताब्दियाँ गर्व से कहें, यही वह समय था, जब भारत ने अपने भविष्य को नई ऊर्जा, नई गति और नए आत्मविश्वास के साथ पुनः परिभाषित किया।

साथ ही, मुझे यह भी विश्वास है कि राज्य सरकार के नेतृत्व, केंद्र सरकार के सहयोग और सभी हितधारकों की सहभागिता से “सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह” का यह मंच सुशासन को और अधिक सुदृढ़ करेगा, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करेगा तथा सभी संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति प्राप्त करने की हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाएगा।

मैं आशा करता हूँ कि भविष्य में भी नीति आयोग, संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य, ज़िला एवं ब्लॉक प्रशासन के समन्वित प्रयासों से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, क्षमता निर्माण और सतत सेवा वितरण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे विकास की गति और अधिक तेज़ हो सके।

अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि सच्चा विकास सबसे तेज़ आगे बढ़ने वालों की प्रगति से नहीं, बल्कि सबसे कमजोर व्यक्ति के सशक्तिकरण और उत्थान से मापा जाता है। इसी भावना के साथ हमें निरंतर आगे बढ़ना है।

धन्यवाद,

जय हिन्द!