speech of hon’ble governor punjab and administrator, ut chandigarh, shri gulab chand kataria on the occasion of swadeshi trade fair, ludhiana – 2026 at kisan mela ground, pau ludhiana on february 21, 2026.

‘स्वदेशी ट्रेड फेयर-लुधियाना  2026’ के अवसर पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 21.02.2026,  शनिवारसमयः शाम 6:30 बजेस्थानः लुधियाना

         

नमस्कार!

आज लुधियाना के इस ऐतिहासिक ‘किसान मेला मैदान’ में आयोजित इस ‘स्वदेशी व्यापार मेला’ के उद्घाटन अवसर पर आप सभी के समक्ष उपस्थित होकर मुझे अत्यंत हर्ष और गर्व का अनुभव हो रहा है। आज से शुरू होकर 1 मार्च 2026 तक चलने वाला यह मेला एक ‘महाकुंभ’ है, जहाँ हमारी मिट्टी की महक, हमारे लोगों के हाथों का हुनर और हमारे युवाओं की आधुनिक सोच का संगम हो रहा है।

इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए मैं स्वदेशी जागरण मंच, पंजाब का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। 

हम सभी जानते हैं कि देश के आर्थिक हितों और स्वदेशी आत्मनिर्भरता की रक्षा की ऐतिहासिक आवश्यकता की पूर्ति हेतु 22 नवंबर 1991 को महाराष्ट्र के नागपुर में ‘स्वदेशी जागरण मंच’ की स्थापना हुई। इसके प्रणेता और मार्गदर्शक थे महान विचारक, अर्थशास्त्री एवं राष्ट्रऋषि दत्तोपंत ठेंगड़ी। उनके साथ भारतीय मजदूर संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ, सहकार भारती और अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत जैसे राष्ट्रवादी संगठनों ने मिलकर इस मंच की नींव रखी। 

स्थापना के आरंभ से ही मंच का यह विचार रहा है कि विकास का केंद्र पूंजी नहीं, बल्कि मानव होना चाहिए; देश की अर्थव्यवस्था भारतीय आवश्यकताओं, संस्कृति और परिस्थितियों के अनुरूप हो; कुटीर उद्योगों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, कारीगरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समान रूप से सशक्त किया जाए; तथा पूंजी और रोजगार का सृजन स्थानीय स्तर पर हो।

आज, वर्ष 2026 में, आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल की राष्ट्रीय भावना यह सिद्ध करती है कि स्वदेशी जागरण मंच की दूरदृष्टि कितनी सटीक थी। कोविड-19 जैसी वैश्विक चुनौतियों ने आत्मनिर्भरता के महत्व को और स्पष्ट किया है। आज स्टार्टअप्स, कृषि नवाचार और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता, ये सभी स्वदेशी विचारधारा की ही सशक्त अभिव्यक्ति हैं।

आज स्वदेशी जागरण मंच एक सशक्त जन-अभियान के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसके पास आत्मनिर्भर भारत और एक न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था के निर्माण का स्पष्ट दृष्टिकोण और ठोस कार्ययोजना है। यह राष्ट्र की एक ऐसी जागृत शक्ति है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।

देवियो और सज्जनो,

भारत की आत्मा गांवों में बसती है। हमारी कृषि परंपरा, कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, हथकरघा और स्वदेशी उत्पाद केवल आर्थिक गतिविधियाँ नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा हैं। स्वदेशी व्यापार मेला इन्हीं मूल्यों को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने का एक सार्थक प्रयास है।

मेरा मानना है कि यह आयोजन केवल एक व्यावसायिक मंच या बाज़ार मात्र नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र-निर्माण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को और अधिक मजबूत करने का एक पवित्र अभियान है। आज समय की सबसे बड़ी मांग यही है कि हम अपने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दें और अपने छोटे उद्योगों तथा ज़मीनी स्तर के कारीगरों को सशक्त बनाएं। इस मेले का मूल उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को जन-जन तक पहुँचाना और उसका प्रसार करना है।

मुझे बताया गया है कि इस भव्य मेले के प्रमुख आकर्षणों में खादी और हथकरघा के सुंदर परिधान, अद्भुत हस्तशिल्प, मिट्टी और धातु से बनी शानदार कलाकृतियां, ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थ, स्वास्थ्यवर्धक मिलेट्स, और साथ ही बेहतरीन आयुर्वेदिक व हर्बल उत्पाद देखने को मिलेंगे।

इतना ही नहीं, इस एक्सपो के दौरान हमारे कुशल शिल्पकारों द्वारा उनकी कला का सजीव प्रदर्शन भी किया जाएगा। साथ ही, हमारे पारंपरिक लोक नृत्य, लोक संगीत और अन्य रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इस आयोजन की शोभा बढ़ाएंगे और हमारी समृद्ध विरासत का दर्शन कराएंगे।

आज यहाँ मुझे जो दृश्य दिखाई दे रहा है, वह नए भारत की, और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की एक सजीव तस्वीर है। 

इस मंच से मैं देख पा रहा हूँ कि कैसे यह मेला हमारे कृषक उत्पादक संगठनों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, ग्रामीण उद्यमियों, हमारी महिला स्वयं सहायता समूहों और ऊर्जावान युवा नवप्रवर्तकों को एक ही छत के नीचे लाया है। यह एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

स्वदेशी का विचार हमारी सभ्यतागत चेतना में गहराई से निहित है। यह केवल एक आर्थिक सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम अपने किसानों, कारीगरों, लघु उद्यमियों, स्टार्टअप्स, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्वदेशी उद्योगों को सशक्त बनाकर राष्ट्र को मजबूत करें। स्वदेशी हमें स्मरण कराता है कि वास्तविक विकास वही है जो समावेशी हो, टिकाऊ हो और हमारी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हो।

यह स्वदेशी मेला उसी दृष्टि का सजीव रूप है। यहाँ की प्रत्येक प्रदर्शनी समर्पण, नवाचार और भारतीय उद्यमिता की अदम्य भावना का प्रतीक है। पारंपरिक हस्तशिल्प से लेकर आधुनिक नवाचार तक, जैविक उत्पादों से लेकर स्वदेशी तकनीक तक, यह मंच हमारी समृद्ध विरासत और उज्ज्वल भविष्य की गतिशीलता को एक साथ प्रस्तुत करता है।

देवियो और सज्जनो,

आज जब दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है, तो इस बदलती दुनिया में भारत अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। हमारा मंत्र स्पष्ट है, ‘वोकल फॉर लोकल’। यानी हमें अपने स्थानीय उत्पादों पर गर्व करना है, उनका उपयोग करना है, और उन्हें वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है।

तेजी से वैश्वीकरण के इस युग में आर्थिक आत्मनिर्भरता का अर्थ अलगाव नहीं, बल्कि सशक्तिकरण है। स्वदेशी उत्पादों का समर्थन करना स्थानीय रोजगार को सुदृढ़ करना, कौशल विकास को बढ़ावा देना, उद्यमिता को प्रोत्साहित करना और धन को हमारे समाज के भीतर संचालित रखना है।

जब हम स्वदेशी को चुनते हैं, तो हम अपने उत्पादकों के सम्मान और अपने राष्ट्र की समृद्धि को चुनते हैं। यह स्वदेशी मेला उन्हें स्वदेशी उत्पादों, पारंपरिक शिल्प, सतत तकनीकों और नवाचारी समाधानों को प्रदर्शित करने का सशक्त मंच प्रदान करता है, जो आत्मनिर्भर भारत की भावना को प्रतिबिंबित करता है।

यदि हम आत्मनिर्भर होंगे, तो विश्व का कोई भी राष्ट्र हम पर अनुचित शुल्क या प्रतिबंध नहीं लगा सकेगा। यदि हमें विश्वगुरु बनना है, तो स्वदेशी ही एकमात्र मंत्र है।

यह मेला उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच सेतु का कार्य भी करता है। यह जागरूकता उत्पन्न करता है, विश्वास को सुदृढ़ करता है और स्वदेशी वस्तुओं के प्रति भरोसा बढ़ाता है। यह हमें अपने उपभोग के स्वरूप पर पुनर्विचार करने और समाज के व्यापक हित में सजग निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है।

मैं विशेष रूप से हमारी महिला स्वयं सहायता समूहों की माताओं और बहनों का अभिनंदन करना चाहता हूँ। आपने यह साबित कर दिया है कि जब एक महिला सशक्त होती है, तो पूरा परिवार, पूरा समाज और पूरा राष्ट्र सशक्त होता है। आपके द्वारा बनाए गए उत्पाद न केवल गुणवत्ता में बेहतरीन हैं, बल्कि उनमें आपकी ममता और मेहनत का रंग भी झलकता है।

साथ ही, मैं उन युवा नवप्रवर्तकों की भी सराहना करता हूँ जो कृषि और स्वदेशी व्यापार में नई तकनीक और नए विचार लेकर आ रहे हैं। आज का युवा केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बन रहा है। यही ऊर्जा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करेगी।

साथियों,

आज जिस प्रकार का अस्थिर और अनिश्चित वैश्विक वातावरण हम देख रहे हैं, उसमें भारत के लिए सबसे सुरक्षित, सबसे सशक्त और सबसे दूरदर्शी मार्ग आत्मनिर्भर बनने का मार्ग है। आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह संकल्प लेना है कि हम स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएँगे, उन्हें प्राथमिकता देंगे और उनका गर्व के साथ उपयोग करेंगे।

आज आवश्यकता है कि ‘मेक इन इंडिया’ के प्रति हमारा उत्साह और अधिक प्रबल हो। जब हम स्वदेशी उत्पादों को अपनाते हैं, तो हम केवल एक वस्तु नहीं खरीदते, बल्कि अपने देश के श्रमिक, कारीगर, किसान, उद्यमी और युवा के श्रम को सम्मान देते हैं। यही आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक आत्मा है।

स्वदेशी का अर्थ केवल देश में बनी वस्तुओं का उपयोग करना नहीं है, बल्कि यह एक विचार है, एक जीवनशैली है और हमारे राष्ट्र के स्वाभिमान का प्रतीक है।

हमें “स्वदेशी स्वीकार-विदेशी बहिष्कार” के मंत्र को एक नारे के रूप में नहीं, बल्कि अपने दैनिक जीवन का संकल्प बनाकर अपनाना होगा। इसका अर्थ यह है कि हम सोच-समझकर, स्वेच्छा से और गर्व के साथ स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें तथा अनावश्यक विदेशी निर्भरता से स्वयं को मुक्त करें। जब यह मंत्र हमारी सोच, हमारे व्यवहार और हमारे उपभोग की आदतों का हिस्सा बनेगा, तभी स्वदेशी एक आंदोलन से आगे बढ़कर जन-संस्कार और राष्ट्रीय जीवनशैली का रूप ले सकेगा।

स्वदेशी कोई वर्षों पुराना आंदोलन भर नहीं है, यह हमारे भविष्य को सुदृढ़ करने वाला विचार है। और इस विचार का नेतृत्व आज आपको करना है। हमारे समाज के युवा, हमारे बेटे-बेटियाँ इस आंदोलन की सबसे बड़ी शक्ति हैं। हमें यह संकल्प लेना होगा कि अब हमारे घर-परिवार में अनावश्यक विदेशी वस्तुओं के लिए कोई स्थान नहीं होगा।

हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने एक बार ‘वेड इन इंडिया’ (Wed In India) का आह्वान किया था। उसका परिणाम यह हुआ कि अनेक परिवारों ने विदेशों में होने वाले विवाह रद्द कर, भारत में ही विवाह आयोजित किए। केवल एक विचार ने, केवल एक संकल्प ने, देश के प्रति भावना को जागृत कर दिया। केवल एक विचार और एक सशक्त संकल्प ने राष्ट्र के प्रति सुप्त भावना को जागृत कर दिया। यही स्वदेशी की वास्तविक शक्ति है, जहाँ विचार प्रेरणा बनता है और प्रेरणा व्यवहार में परिवर्तित होकर राष्ट्र निर्माण की यात्रा तय करती है।

साथियो,

मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत केवल सरकारी योजनाएँ नहीं हैं। इनकी सफलता हम सबकी सहभागिता पर निर्भर करती है। यही हमारी सामूहिक शक्ति है, यही हमारी आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षित भविष्य है। जब हम भारतीय उत्पादों को अपनाएँगे, तो गुणवत्ता अपने आप बेहतर होगी, पैकेजिंग सुधरेगी, कीमतें प्रतिस्पर्धी होंगी, क्योंकि बाज़ार में टिके रहने के लिए हर उत्पाद को श्रेष्ठ बनना ही पड़ेगा।

हमें यह भी समझना होगा कि देश का धन देश में रहना चाहिए। हमारा रुपया बाहर जाए, यह किसी भी रूप में राष्ट्रहित में नहीं है। स्वदेशी अपनाकर हम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं और लाखों हाथों को रोजगार देते हैं।

मैं व्यापारियों से भी विशेष आग्रह करना चाहता हूँ। आज हमारा समाज केवल किसान-आधारित नहीं है; वह उद्यमी और व्यापारी समाज भी बन चुका है। मेरा निवेदन है कि व्यापारी भाई अपनी दुकानों पर गर्व से यह लिखें, “यहाँ केवल स्वदेशी वस्तुएँ उपलब्ध हैं।”

जो स्वदेशी खरीदना चाहता है, वह आपके पास आए, और आप भी स्वदेशी ही बेचें। यह भी देशभक्ति का ही एक रूप है। देशभक्ति केवल ऑपरेशन सिंदूर जैसे सीमा पर होने वाले अभियानों तक सीमित नहीं है। स्वदेशी अपनाना, स्वदेशी बेचना और स्वदेशी को बढ़ावा देना, यह भी उतनी ही सशक्त देशभक्ति है।

मैं अपनी इस भावना को आप सभी तक पहुँचाना चाहता हूँ। आज आप सब यहाँ से यह संकल्प लेकर जाएँ कि आप समाज में जागृति लाएँगे, स्वदेशी के इस विचार को जन-आंदोलन बनाएँगे और अपने योगदान से राष्ट्र को नई शक्ति प्रदान करेंगे। यही हमारा दायित्व है, यही हमारा संकल्प है और यही भारत के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। 

मैं आप सभी से, विशेषकर लुधियाना और पंजाब के निवासियों से यह अपील करता हूँ कि इस ‘स्वदेशी व्यापार मेले’ में अपने परिवार और बच्चों के साथ अवश्य आएं। हमारे इन ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को देखें, उन्हें खरीदें और उनके हौसले को बढ़ाएं।

मैं इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए स्वदेशी जागरण मंच को हार्दिक बधाई देता हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि यह मेला न केवल पंजाब, बल्कि पूरे उत्तर भारत में स्वदेशी उद्यमशीलता की एक नई लहर पैदा करेगा और ‘मेक इन इंडिया’ के हमारे संकल्प को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

अंत में, मैं यही कामना करता हूँ कि स्वदेशी व्यापार मेला एक जनआंदोलन का रूप ले, जिससे स्वदेशी उद्यम सशक्त हों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बने और भारत आत्मनिर्भरता की ओर और अधिक दृढ़ता से आगे बढ़े।

इन्हीं शब्दों के साथ, मैं इस स्वदेशी व्यापार मेले की सफलता की मंगलकामना करता हूँ और आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।                                   

धन्यवाद, 

जय हिन्द!