SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF URJA JYOTISH SAMMAN SAMAROH – 2026 AT CHANDIGARH ON MARCH 15, 2026.
- by Admin
- 2026-03-15 18:05
“ऊर्जा - ज्योतिष सम्मान समारोह 2026” के अवसर पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 15.03.2026, रविवार समयः शाम 4:00 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज इस “ऊर्जा - ज्योतिष सम्मान समारोह 2026” के गरिमामय अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं है, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टि के उस समन्वय का उत्सव है, जिसने सदियों से हमारी सभ्यता को दिशा प्रदान की है।
इस मंच की विशेषता यह है कि आज यहाँ भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों से पधारे हुए प्रख्यात पंडित, विद्वान और शोधकर्ता उपस्थित हैं, जिन्होंने अपनी वर्षों की शोध और अनुभव को इस मंच के माध्यम से साझा किया है।
इन सभी महान विद्वानों के ज्ञान रूपी मोतियों को एक सुंदर माला में पिरोने का सराहनीय कार्य ज्योतिष प्रांगण की पूरी टीम ने अत्यंत परिश्रम, समर्पण और अनुशासन के साथ किया है।
सर्वप्रथम, मैं आज इस मंच पर ज्योतिष शास्त्र के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित होने वाले देशभर से पधारे लगभग सभी 150 विद्वानों को हृदय से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ। आपका यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति आपके योगदान की भी स्वीकृति है। मुझे विश्वास है कि आप सभी भविष्य में भी अपने ज्ञान और अनुभव से समाज को मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे।
साथ ही, मैं ‘ज्योतिष प्रांगण’ संस्थान और इसके समर्पित नेतृत्व, विशेष रूप से इसकी अध्यक्षा श्रीमती पूनम शर्मा जी, को भी हार्दिक बधाई देता हूँ कि उन्होंने वर्ष 1996 से निरंतर तीन दशकों तक ज्योतिष, आध्यात्मिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए सराहनीय कार्य किया है। किसी भी संस्था के लिए इतने लंबे समय तक निरंतर सेवा और समर्पण के साथ कार्य करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समाज को मार्ग दिखाने वाला विज्ञान है यह संस्था ज्योतिष, टैरो, वास्तु और आध्यात्मिक ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य कर रही है।
जानकर हर्ष हुआ कि ज्योतिष प्रांगण केवल ज्ञान प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। गरीबों की सहायता, जरूरतमंदों को मार्गदर्शन, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास तथा युवाओं को सही दिशा देने का कार्य इसकी पहचान बन चुका है।
आज के समय में जब समाज अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, ऐसे में ज्योतिष प्रांगण जैसी संस्थाएँ लोगों को आशा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर रही हैं।
मैं पूनम शर्मा जी को उनके 30 वर्षों के निरंतर योगदान के लिए हृदय से बधाई देता हूँ। उनका जीवन हम सभी के लिए, विशेषकर महिलाओं के लिए, एक प्रेरणास्रोत है।
देवियो और सज्जनो,
भारत की पहचान केवल उसकी भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसकी गहन आध्यात्मिक परंपरा और ज्ञान की समृद्ध धरोहर से भी होती है। हमारी सभ्यता ने सदियों पहले ही ब्रह्मांड, प्रकृति और मानव जीवन के बीच गहरे संबंधों को समझने का प्रयास किया था।
भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्योतिष को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसे केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं माना गया, बल्कि इसे काल, ग्रहों और प्रकृति के प्रभावों को समझने का एक वैज्ञानिक और दार्शनिक माध्यम माना गया है।
हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है, “ज्योतिषं वेदचक्षुः” अर्थात ज्योतिष वेदों की आँख है। इसका अर्थ यह है कि ज्योतिष वह माध्यम है जो समय, दिशा और जीवन के प्रवाह को समझने में हमारी सहायता करता है। प्राचीन भारत में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य, चाहे वह यज्ञ हो, शिक्षा का आरंभ हो, विवाह हो या राज्यकार्य, ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर ही निर्धारित किया जाता था।
इस ब्रह्माण्ड में स्थित नवग्रहों और नक्षत्रों का पृथ्वी पर मानव जीवन पर गहरा प्रभाव माना गया है, और इन प्रभावों के सूक्ष्म अध्ययन तथा आकलन की विद्या को ज्योतिष कहा जाता है।
ज्योतिष शास्त्र मूलतः ग्रहों, नक्षत्रों और तारों की गति, स्थिति और उनके मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का गहन अध्ययन है। भारतीय ज्ञान परंपरा में इसे अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
हमारे शास्त्रों में भी ग्रहों के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा गया हैः
“ग्रहाधीनं जगत्सर्वं ग्रहाधीनाः नरावराः।
कालज्ञानं ग्रहाधीनं ग्रहाः कर्मफलप्रदाः।।”
अर्थात् यह सम्पूर्ण जगत ग्रहों के अधीन माना गया है, और मनुष्य का जीवन भी उनसे प्रभावित होता है। समय का ज्ञान भी ग्रहों की गति से ही संभव होता है, और इन्हीं के आधार पर कर्मों के फल का संकेत प्राप्त होता है।
यही कारण है कि भारतीय परंपरा में ज्योतिष को केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय, प्रकृति और मानव जीवन के संबंधों को समझने का एक गहन अध्ययन माना गया है।
देवियो और सज्जनो,
यह उल्लेखनीय है कि भारत में खगोल विज्ञान और ज्योतिष का विकास अत्यंत प्राचीन काल से होता आया है। महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट, वराहमिहिर और भास्कराचार्य जैसे विद्वानों ने न केवल ग्रहों और नक्षत्रों की गति का अध्ययन किया, बल्कि गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में भी विश्व को महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनकी कृतियाँ आज भी यह प्रमाणित करती हैं कि भारतीय विद्वानों ने हजारों वर्ष पहले ही ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने का गहन प्रयास किया था।
साथियो,
आज के आधुनिक युग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि हम अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ समझें और उसे समाज के कल्याण के लिए उपयोग करें।
ज्योतिष का वास्तविक उद्देश्य केवल भविष्य की भविष्यवाणी करना नहीं है, बल्कि मानव जीवन को सकारात्मक दिशा देना, आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करना और जीवन में संतुलन स्थापित करना है।
जब ज्योतिष को ज्ञान, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ा जाता है, तब यह समाज के लिए मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
आज जब विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, तब मानव जीवन में आध्यात्मिक संतुलन और सकारात्मक सोच का महत्व और भी बढ़ जाता है।
हमारी भारतीय परंपरा हमेशा से यह संदेश देती रही है कि ज्ञान का उद्देश्य केवल जानकारी प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक बनाना है।
स्वामी विवेकानंद ने कहा था, “ज्ञान ही वह प्रकाश है जो अज्ञान के अंधकार को दूर करता है।” इसी प्रकार ज्योतिष और आध्यात्मिक अध्ययन भी हमें जीवन को व्यापक दृष्टि से देखने और आत्मिक संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं।
आज के इस भौतिकवादी और तनावपूर्ण युग में, जहाँ हर व्यक्ति किसी न किसी मानसिक दबाव, अवसाद या अनिश्चितता से जूझ रहा है, वहाँ हमारी यह ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ एक संजीवनी का कार्य करती है। एक सच्चा ज्योतिषी केवल यह नहीं बताता कि कल क्या होगा; बल्कि वह एक मनोवैज्ञानिक, एक मार्गदर्शक और एक गुरु की भूमिका निभाता है।
मैं यहाँ उपस्थित सभी विद्वानों से यह निवेदन करना चाहता हूँ कि आप अपने ज्ञान का उपयोग समाज में ‘भय’ बेचने के लिए नहीं, बल्कि ‘आशा’ और ‘सकारात्मकता’ का संचार करने के लिए करें। जब कोई निराश व्यक्ति आपके पास आता है, तो वह आपके शब्दों से ‘ऊर्जा’ लेकर वापस जाना चाहिए। यही इस संस्था का और आज के इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भी है।
देवियो और सज्जनो,
भारत की शक्ति उसकी संस्कृति, आध्यात्मिकता और ज्ञान परंपरा में निहित है। यदि हम अपने प्राचीन ज्ञान को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर आगे बढ़ाएँ, तो यह न केवल हमारे समाज को दिशा देगा बल्कि विश्व समुदाय के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
मैं ज्योतिष को भारत की पहचान के रूप में देखता हूँ। यह केवल भविष्य की गणना की विद्या नहीं है, बल्कि समय, प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंधों को समझने का एक प्राचीन और गहन ज्ञान है।
वास्तव में भविष्य केवल व्यक्तियों का ही नहीं होता, बल्कि संस्थाओं, समाजों और राष्ट्रों का भी होता है। इतिहास साक्षी है कि समय के प्रवाह के साथ विभिन्न राष्ट्रों और सभ्यताओं ने विश्व मंच पर अपनी विशिष्ट भूमिका निभाई है।
स्वामी विवेकानंद ने भी इस संदर्भ में एक अत्यंत दूरदर्शी विचार व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था कि 17वीं शताब्दी इंग्लैंड की थी, 18वीं शताब्दी फ्रांस की, 19वीं शताब्दी जर्मनी की, 20वीं शताब्दी अमेरिका की रही, और 21वीं शताब्दी भारत की होगी।
स्वामी विवेकानंद का यह कथन केवल एक भविष्यवाणी नहीं था, बल्कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि और ज्ञान परंपरा में उनके अटूट विश्वास का प्रतीक था। आज जब हम वैश्विक परिदृश्य को देखते हैं, तो स्पष्ट होता है कि भारत न केवल आर्थिक और वैज्ञानिक प्रगति के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, बल्कि योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, दर्शन और आध्यात्मिकता जैसी अपनी प्राचीन ज्ञान परंपराओं के माध्यम से विश्व को नई दिशा भी दे रहा है।
आज पूरी दुनिया भारत की ज्ञान परंपरा, जीवन-दर्शन और आध्यात्मिक मूल्यों की ओर आकर्षित हो रही है। यह समय भारत के लिए केवल प्रगति का ही नहीं, बल्कि अपने सांस्कृतिक और बौद्धिक नेतृत्व को विश्व के सामने स्थापित करने का भी है। ऐसे में ज्योतिष, योग, आयुर्वेद और भारतीय दर्शन जैसी प्राचीन विद्याएँ मानवता को संतुलन, मार्गदर्शन और सकारात्मक दृष्टि प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
इसी भावना के साथ हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी युवा पीढ़ी भी भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े और उसे समझने का प्रयास करे।
आज के युवाओं के लिए यह आवश्यक है कि वे आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ अपने देश की प्राचीन ज्ञान प्रणालियों को भी जानें और समझें।
मुझे विश्वास है कि “ऊर्जा - ज्योतिष सम्मान समारोह” आने वाले वर्षों में भी भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार और समाज में सकारात्मक ऊर्जा के संचार का महत्वपूर्ण माध्यम बना रहेगा।
अंत में, मैं यही कहूँगा कि हमारी भारतीय संस्कृति की जड़ें बहुत गहरी हैं। योग, आयुर्वेद और ज्योतिष, ये भारत के वे तीन अनमोल रत्न हैं जो संपूर्ण विश्व को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य प्रदान कर सकते हैं।
आइए, हम सब मिलकर अपनी इस प्राचीन धरोहर पर गर्व करें, इसका वैज्ञानिक शोध के साथ संवर्धन करें और इसे आने वाली पीढ़ियों तक शुद्ध रूप में पहुँचाएं।
इसी आशा के साथ मैं सभी सम्मानित विद्वानों, प्रतिभागियों और आयोजकों को इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ और आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
‘‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।’’ (सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों)
धन्यवाद,
जय हिंद!