SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF OPENING CEREMONY OF 29TH ALL INDIA POLICE GOLF TOURNAMENT AT CHANDIGARH ON MARCH 18, 2026.

29वें अखिल भारतीय पुलिस गोल्फ टूर्नामेंट के अवसर पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 18.03.2026, बुधवार

समयः सुबह 8:15 बजे

स्थानः चंडीगढ़

नमस्कार!

आज इस गरिमामय अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। 29वें अखिल भारतीय पुलिस गोल्फ टूर्नामेंट (गजेटेड अधिकारी) 2025-26 के आयोजन ने न केवल एक प्रतिष्ठित खेल परंपरा को आगे बढ़ाया है, बल्कि देश की पुलिस सेवाओं के बीच समन्वय, सौहार्द, अनुशासन और आपसी विश्वास की भावना को भी सुदृढ़ किया है। 

सबसे पहले, इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए मैं चंडीगढ़ पुलिस को हार्दिक बधाई देता हूँ। साथ ही इस आयोजन में अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करने के लिए गोल्फ क्लब एसोसिएशन का भी हार्दिक आभार प्रकट करता हूं।

देवियो और सज्जनो,

‘सिटी ब्यूटीफुल’ को एक सुरक्षित शहर बनाए रखने में वर्ष 1966 में स्थापित चंडीगढ़ पुलिस की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। "We Care For You" के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए, हमारी पुलिस ने शहर की बढ़ती चुनौतियों के अनुरूप अपने बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमताओं को निरंतर सुदृढ़ किया है।

मुझे यह बताते हुए गर्व होता है कि चंडीगढ़ पुलिस नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने और माननीय गृह मंत्री जी द्वारा उद्घाटित ई-साक्ष्य, ई-समन व न्याय सेतु जैसे अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉम्र्स को अपनाने वाला देश का अग्रणी पुलिस बल है।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ, एक ‘सामाजिक साझेदार’ के रूप में भी इसका योगदान अद्भुत है। नशे के विरुद्ध युवाओं को सही दिशा देने के लिए “बल्ला घुमाओ, नशा भगाओ” जैसे गली क्रिकेट टूर्नामेंट की पहल यह साबित करती है कि चंडीगढ़ पुलिस केवल एक प्रवर्तन एजेंसी नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी व्यापक जिम्मेदारियों को भी भली-भांति समझती है। 

वहीं यदि वर्ष 1997 में स्थापित ‘चंडीगढ़ गोल्फ एसोसिएशन’ की बात करें तो यह इस क्षेत्र में गोल्फ खेल के संवर्धन एवं विकास हेतु समर्पित है। इस संस्था की निष्ठा सदैव बच्चों एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली खिलाडि़यों तथा गोल्फ प्रेमियों को प्रशिक्षित करने, उन्हें मंच प्रदान करने और उनके उत्साहवर्धन पर केंद्रित रही है।

देवियो और सज्जनो,

यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रीय पुलिस बलों से गजेटेड अधिकारी इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए यहाँ एकत्रित हुए हैं। यह केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं है; यह एक ऐसा सशक्त मंच है, जहाँ वर्दी से जुड़े विविध संगठन राष्ट्र सेवा, पेशेवर उत्कृष्टता, और भाईचारे की साझी भावना में बंधते हैं। ऐसे आयोजन हमें याद दिलाते हैं कि भले ही हमारी जिम्मेदारियाँ अलग-अलग क्षेत्रों में हों, पर हमारा लक्ष्य एक ही है, राष्ट्र की सुरक्षा, समाज की शांति और नागरिकों का विश्वास।

आज जब हम सभी गोल्फ खेल से जुड़े इस महत्वपूर्ण आयोजन के अवसर पर उपस्थित हैं तो हमें इस खेल के इतिहास से परिचित होना चाहिए। यह एक प्राचीन और विशिष्ट खेल है, जिसका आधुनिक स्वरूप 15वीं शताब्दी में स्कॉटलैंड में विकसित हुआ। 1754 में सेंट एंड्रूज़ गोल्फ क्लब की स्थापना के साथ गोल्फ को संगठित रूप और नियम मिले, जिसे आज "Home of Golf" कहा जाता है।

19वीं शताब्दी में यह खेल ब्रिटेन से अमेरिका, यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया तक फैल गया। औद्योगिक क्रांति और ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार ने इसे वैश्विक पहचान दी। 20वीं सदी में बॉबी जोन्स, जैक निकलस और टाइगर वुड्स जैसे खिलाडि़यों ने गोल्फ को विश्व स्तर पर नई ऊँचाइयाँ दीं।

भारत में गोल्फ का इतिहास लगभग दो शताब्दी पुराना है। 1829 में कोलकाता में रॉयल कोलकाता गोल्फ क्लब की स्थापना के साथ इसकी शुरुआत हुई, जो एशिया का सबसे पुराना गोल्फ क्लब है। धीरे-धीरे यह खेल दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ और अन्य शहरों में फैला। आज यह खेल युवाओं और खेल संस्थाओं के प्रयासों से लगातार लोकप्रियता और जन-आधार प्राप्त कर रहा है।

साथियो,

पुलिस सेवा अत्यंत चुनौतीपूर्ण, संवेदनशील और जिम्मेदारीपूर्ण होती है। यह केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कार्य नहीं है; यह निरंतर सतर्कता, मानसिक दृढ़ता, त्वरित निर्णय क्षमता, नैतिक शक्ति और मानवीय संवेदनशीलता की माँग करती है। दिन हो या रात, त्योहार हो या संकट, पुलिस बल सदैव समाज के साथ खड़ा रहता है। ऐसी सेवा में कार्यरत अधिकारियों के लिए शारीरिक सुदृढ़ता और मानसिक संतुलन दोनों का महत्त्व अत्यधिक बढ़ जाता है। यही कारण है कि खेल गतिविधियाँ पुलिस सेवा का एक महत्त्वपूर्ण पूरक पक्ष बन जाती हैं।

खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं; वे व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त साधन हैं। खेल हमें सिखाते हैं कि लक्ष्य पर ध्यान कैसे केंद्रित किया जाए, दबाव में संतुलन कैसे बनाए रखा जाए, असफलता से सीखकर पुनः कैसे उठ खड़ा हुआ जाए, और सफलता को विनम्रता के साथ कैसे स्वीकार किया जाए। 

खेल हमें यह भी सिखाते हैं कि प्रतिस्पर्धा का अर्थ विरोध नहीं, बल्कि आत्मोन्नति है। मैदान पर उतरने वाला प्रत्येक खिलाड़ी अपने भीतर के श्रेष्ठतम को सामने लाने का प्रयास करता है। यही भावना जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्टता की नींव बनती है।

विशेष रूप से गोल्फ एक ऐसा खेल है जो धैर्य, एकाग्रता, संतुलन, संयम और रणनीतिक सोच की मांग करता है। गोल्फ में बाहरी शक्ति से अधिक महत्व आंतरिक नियंत्रण का होता है। इसमें हर शॉट केवल तकनीक का नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास का परिणाम होता है। यही गुण एक सफल पुलिस अधिकारी के लिए भी उतने ही आवश्यक हैं। परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, चुनौतियाँ अचानक सामने आती हैं, निर्णय अक्सर क्षणों में लेने पड़ते हैं, ऐसे में संतुलित मन, स्पष्ट दृष्टि और सुदृढ़ विवेक ही अधिकारी को विशिष्ट बनाते हैं।

मैं यह कहना चाहूँगा कि खेल और सुरक्षा सेवाओं का संबंध अत्यंत गहरा है। जिस प्रकार खेल में नियमों का सम्मान अनिवार्य होता है, उसी प्रकार पुलिस सेवा में संविधान, कानून और कर्तव्य के प्रति निष्ठा सर्वोपरि होती है। जिस प्रकार खेल में टीम भावना सफलता की कुंजी होती है, उसी प्रकार पुलिस संगठन में समन्वय और विश्वास उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। और जिस प्रकार खेल में हर हार अगली जीत की तैयारी बन सकती है, उसी प्रकार सेवा जीवन की हर चुनौती आगे बढ़ने का अवसर बन सकती है।

नेल्सन मंडेला का एक प्रसिद्ध कथन है, "Sport has the power to change the world" यानी खेलों में दुनिया को बदलने की शक्ति होती है। यह कथन केवल प्रेरणात्मक नहीं, बल्कि अत्यंत व्यावहारिक सत्य है। खेल व्यक्ति को अनुशासित बनाते हैं, संस्थानों को सशक्त बनाते हैं और समाज को जोड़ते हैं। पुलिस जैसे अनुशासित बलों के लिए खेल केवल शारीरिक क्षमता का प्रश्न नहीं, बल्कि संस्थागत संस्कृति, मनोबल और पेशेवर उत्कृष्टता का भी प्रश्न है।

देवियो और सज्जनो,

आज जब हम इस टूर्नामेंट के अवसर पर एकत्रित हैं, तब हमें यह भी स्मरण रखना चाहिए कि ऐसे आयोजन केवल खेल कौशल का प्रदर्शन भर नहीं हैं। ये संस्थागत आत्मीयता को बढ़ाते हैं, अंतर-राज्यीय समन्वय को मजबूत करते हैं, और विभिन्न पुलिस संगठनों के अधिकारियों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर भी प्रदान करते हैं। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में, जहाँ सुरक्षा और शांति बनाए रखने का दायित्व अनेक एजेंसियों पर साझा रूप से आधारित है, वहाँ ऐसे मंचों का महत्त्व और बढ़ जाता है।

यह आयोजन हमें “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना का भी स्मरण कराता है। विभिन्न राज्यों, भिन्न पृष्ठभूमियों और अलग-अलग पुलिस संगठनों से आए अधिकारी जब एक मंच पर मिलते हैं, तो वे केवल प्रतिभागी नहीं रहते; वे राष्ट्रीय एकता के जीवंत प्रतीक बन जाते हैं। इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ हमारे संघीय ढाँचे को अधिक मानवीय, अधिक संवादपूर्ण और अधिक सहयोगी बनाती हैं।

आज के समय में पुलिस व्यवस्था से समाज की अपेक्षाएँ भी लगातार बढ़ रही हैं। जनता चाहती है कि पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था न हो, बल्कि विश्वास, संवेदनशीलता, व्यावसायिकता और त्वरित सेवा का प्रतीक बने। इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं; इसके लिए संतुलित व्यक्तित्व, दृढ़ मनोबल, स्वस्थ शरीर और सकारात्मक दृष्टिकोण भी आवश्यक है। खेल इन सभी गुणों को विकसित करने का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम हैं।

खेल व्यक्ति में विनम्रता का विकास करते हैं। जीत हमें आत्मविश्वास देती है, लेकिन हार हमें आत्ममंथन करना सिखाती है। जो खिलाड़ी हार के बाद भी अभ्यास जारी रखता है, वही अगले अवसर पर बेहतर प्रदर्शन करता है। यही जीवन का नियम भी है। 

पुलिस सेवा में भी कई बार परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं होतीं, संसाधन सीमित होते हैं, चुनौतियाँ जटिल होती हैं; फिर भी जो अधिकारी संयम, धैर्य और निष्ठा बनाए रखता है, वही सच्चे अर्थों में नेतृत्व का परिचय देता है।

मैं विशेष रूप से यह कहना चाहूँगा कि आज देश को ऐसे अधिकारियों की आवश्यकता है जो केवल दक्ष ही न हों, बल्कि प्रेरणास्रोत भी हों; जो केवल आदेश का पालन ही न करें, बल्कि अपने आचरण से दूसरों के लिए मानक स्थापित करें; जो केवल व्यवस्था बनाए न रखें, बल्कि समाज में विश्वास भी उत्पन्न करें। खेल इस नेतृत्व क्षमता को निखारने का एक सुंदर माध्यम हैं। 

साथियो,

हमारे भारतीय चिंतन में शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर विशेष बल दिया गया है। उपनिषदों से लेकर योग परंपरा तक, हर जगह यह संदेश मिलता है कि संतुलित जीवन ही श्रेष्ठ जीवन है। खेल इस संतुलन को व्यवहार में उतारने का अवसर देते हैं। वे शरीर को सक्रिय, मन को सजग और दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाते हैं। इसलिए खेल संस्कृति को बढ़ावा देना केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि एक सशक्त संस्थागत निवेश है।

मुझे विश्वास है कि यह टूर्नामेंट न केवल उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन का मंच बनेगा, बल्कि देश के विभिन्न पुलिस संगठनों के अधिकारियों के बीच सौहार्द, सहयोग और आपसी सम्मान की भावना को और अधिक मजबूत करेगा। यहाँ बना संवाद आगे चलकर संस्थागत सहयोग में परिवर्तित होगा, और यही सहयोग राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएगा। 

मैं सभी प्रतिभागियों से कहना चाहूँगा कि इस प्रतियोगिता में परिणाम महत्वपूर्ण अवश्य है, परंतु उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण है आपकी सहभागिता, आपका अनुशासन, आपका आचरण और आपकी खेल भावना। पदक सीमित लोगों को मिलते हैं, लेकिन सम्मान और प्रेरणा उन सभी को मिलती है जो ईमानदारी से अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं। इसलिए पूरे उत्साह, पूरे आत्मविश्वास और पूरे सौहार्द के साथ इस प्रतियोगिता में भाग लीजिए।

याद रखिए, विजय केवल ट्रॉफी उठाने में नहीं, बल्कि स्वयं को हर दिन बेहतर बनाने में है। सच्चा खिलाड़ी वही है जो प्रतिस्पर्धा में उत्कृष्टता और व्यवहार में विनम्रता बनाए रखे। अनुशासन वह सेतु है, जो लक्ष्य और उपलब्धि के बीच दूरी को समाप्त करता है।

भगवद्गीता का एक अत्यंत प्रेरक संदेश है, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” अर्थात् हमारा अधिकार केवल कर्म पर है, फल पर नहीं। यह संदेश खेल के मैदान में भी उतना ही सत्य है जितना जीवन में। यदि आपका प्रयास उत्कृष्ट है, आपका मन निष्पक्ष है और आपका लक्ष्य शुद्ध है, तो आपकी यात्रा स्वयं में सार्थक है।

मैं चंडीगढ़ पुलिस को एक बार फिर इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए बधाई देता हूँ। साथ ही, देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रीय पुलिस बलों से पधारे सभी अधिकारियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। आप सभी की उपस्थिति इस आयोजन की गरिमा को अनेक गुना बढ़ाती है।

मैं गोल्फ क्लब एसोसिएशन तथा इस प्रतियोगिता से जुड़े सभी आयोजकों, समन्वयकों, तकनीकी अधिकारियों और सहयोगी कर्मियों की भी सराहना करता हूँ, जिनके प्रयासों से ऐसा सुव्यवस्थित और गरिमामय आयोजन संभव हो पाया है। 

अंत में, मैं सभी प्रतिभागियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। मेरी आशा है कि यह प्रतियोगिता खेल भावना, अनुशासन, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, पारस्परिक सम्मान और राष्ट्रीय एकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करेगी। आप सभी न केवल अपने-अपने संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, बल्कि उस सेवा-धर्म का भी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिसके केंद्र में राष्ट्रहित, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा है।

आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि खेल और सेवा, दोनों क्षेत्रों में हम उत्कृष्टता, निष्ठा और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाएँगे। हम ऐसा भारत बनाएँगे जहाँ शक्ति के साथ संवेदनशीलता हो, अनुशासन के साथ मानवीयता हो, और प्रतिस्पर्धा के साथ सहकारिता भी हो।

इसी विश्वास और शुभेच्छा के साथ, मैं आप सभी को पुनः हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।

धन्यवाद,

जय हिंद!