SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF AN ORIENTATION PROGRAMME ON SOCIAL SECURITY SCHEME AT CHANDIGARH ON MARCH 18, 2026.

‘आपकी योजना, आपके द्वार’ कार्यक्रम के अवसर पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 18.03.2026,  बुधवारसमयः शाम 4:30 बजेस्थानः चंडीगढ़

    

नमस्कार!

आज मुझे अत्यंत हर्ष और गर्व का अनुभव हो रहा है कि मुझे हमारे राज्य एवं देश में संचालित विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं के विषय में आप सभी के समक्ष अपने विचार साझा करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

किसी भी लोकतांत्रिक और संवेदनशील समाज की वास्तविक पहचान उसकी गगनचुंबी इमारतों या केवल आर्थिक आँकड़ों से नहीं होती। उसकी असली पहचान इस बात से होती है कि वह अपने समाज के सबसे कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों के प्रति कितनी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता है। 

पंडित दीनदयाल जी ने कहा था कि ‘‘समाज के अंतिम पायदान पर खड़े, सबसे गरीब, उपेक्षित व्यक्ति का उत्थान करना ही असली विकास है।’’ इसी ‘अंत्योदय’ की भावना को आत्मसात करते हुए हमारी सरकारें काम कर रही हैं।

इसी विचारधारा को आधार बनाकर चंडीगढ़ प्रशासन निरंतर इस दिशा में प्रयासरत है कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास की रोशनी पहुँचे और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र को वास्तविक रूप दिया जा सके।

हमारा ‘सिटी ब्यूटीफुल’ चंडीगढ़ केवल अपनी सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि अपने निवासियों के प्रति अपनी मानवीय सोच के लिए भी जाना जाता है। चंडीगढ़ प्रशासन का मूल उद्देश्य विकास की रोशनी को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना है ताकि कोई भी व्यक्ति पीछे न रह जाए।

इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा अनेक सामाजिक कल्याण योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं, जिनका लक्ष्य गरीबों, महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा वंचित समुदायों को सशक्त बनाना है।

देवियो और सज्जनो,

किसी भी समाज में सामाजिक सुरक्षा एक मजबूत और न्यायपूर्ण व्यवस्था की आधारशिला होती है। समाज के कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि हमारी नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी भी है।

सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा के अवसर, रोजगार के साधन तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। 

हम सभी जानते हैं कि किसी भी समाज की वास्तविक उन्नति तब संभव होती है जब महिलाएँ सशक्त, शिक्षित और आत्मनिर्भर हों। भारत की संस्कृति में नारी को सदैव शक्ति और सृजन की प्रतीक माना गया है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था, “जब तक महिलाओं की स्थिति में सुधार नहीं होगा, तब तक दुनिया का कल्याण संभव नहीं है।”

इसलिए, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विशेष योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जैसे, शगुन योजना, विधवा पेंशन, प्रधानमंत्री मातृ वन्दना  योजना, महिला हेल्पलाइन, सखी निवास, शक्ति सदन, सखी सेंटर, महिलाओं के लिए ऋण सुविधा तथा स्वावलंबन योजना। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज के विकास में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना है।

इसके अतिरिक्त, जिन बुजुर्गों ने अपने परिश्रम और अनुभव से इस समाज की नींव को मजबूत किया है, उनके सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से वरिष्ठ नागरिकों के लिए विभिन्न पेंशन योजनाएँ संचालित की जा रही हैं तथा वरिष्ठ नागरिक प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ विभिन्न सरकारी सेवाओं में प्राथमिकता और विशेष सुविधाएँ प्राप्त हो सकें।

हमारा यह दृढ़ विश्वास है कि दिव्यांगजन समाज की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी शक्ति हैं। यदि उन्हें उचित अवसर, संसाधन और सहयोग मिले, तो वे असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं। हमारा लक्ष्य है कि दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा में पूर्ण सम्मान और आत्मविश्वास के साथ अपनी भागीदारी निभाएँ।

इसके लिए दिव्यांगजनों हेतु पेंशन, पेट्रोल पर सब्सिडी, बेरोज़गारी भत्ता, सहायक उपकरणों की खरीद हेतु सहायता, ऋण सुविधा तथा विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र जैसी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, ताकि वे भी सम्मानपूर्वक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। 

साथियो,

किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके बच्चों के हाथों में होता है। इसलिए बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

बच्चों के समग्र विकास और संरक्षण के लिए भी अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं, जैसे, पोषण अभियान, आंगनवाड़ी सह क्रेच केंद्र, बाल हेल्पलाइन, स्पॉन्सरशिप योजना, परवरिश योजना, विधवा एवं बेसहारा महिलाओं के आश्रित बच्चों के लिए वित्तीय सहायता , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ तथा ‘हमारी बेटी’ जैसी योजनाएँ, जिन्हें विशेष रूप से चंडीगढ़ में प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना ही नहीं, बल्कि बच्चों और परिवारों को सशक्त बनाना और उन्हें बेहतर भविष्य प्रदान करना है।

साथ ही, सामाजिक कल्याण योजनाओं का मूल उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं है, बल्कि समावेशी विकास की उस भावना को साकार करना है जिसमें समाज का प्रत्येक वर्ग समान रूप से आगे बढ़ सके।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने कहा था, “सामाजिक और आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक समानता का कोई महत्व नहीं है।”

इसी दृष्टिकोण को अपनाते हुए समाज कल्याण विभाग अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदायों के लिए विभिन्न ऋण योजनाएँ भी संचालित कर रहा है, जिनका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाना है। इसके अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों के बच्चों को नकद पुरस्कार, अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहन तथा प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना जैसी योजनाएँ भी लागू की गई हैं।

देवियो और सज्जनो,

समाज की सच्ची प्रगति तभी संभव है जब हमारा युवा वर्ग स्वस्थ, जागरूक और सकारात्मक दिशा में अग्रसर हो। युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति भी हैं। यदि युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में लगाई जाए तो राष्ट्र नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम अपने युवाओं को उन सभी चुनौतियों और बुराइयों से दूर रखें जो उनके भविष्य और समाज की प्रगति में बाधा बन सकती हैं।

इसी क्रम में विभाग नशा मुक्त अभियान को भी प्रभावी रूप से लागू कर रहा है ताकि नशे जैसी घातक समस्या से समाज को मुक्ति मिल सके और हमारे युवाओं को इसके दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखा जा सके।

हम सभी की यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि इन सभी योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वास्तव में जरूरतमंद लोगों को इनका लाभ प्राप्त हो। जब सरकार और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तभी वास्तविक और समावेशी विकास संभव हो पाता है।

देवियो और सज्जनो,

भारत आज एक नए आत्मविश्वास के साथ विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2047, जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हमारा देश एक “विकसित भारत” के रूप में विश्व के सामने खड़ा हो।

विकसित भारत 2047 केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ देशवासियों का साझा संकल्प है। इसका आधार है, समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, नवाचार, सतत विकास और जनभागीदारी।

जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचेगी, जब हर नागरिक को समान अवसर मिलेगा, जब महिलाएँ, युवा, किसान और श्रमिक आत्मनिर्भर बनेंगे, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा है, “विकसित भारत का मार्ग ‘सबका प्रयास’ से ही प्रशस्त होगा।” इसलिए यह आवश्यक है कि सरकार, प्रशासन, सामाजिक संस्थाएँ और नागरिक समाज मिलकर एक सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में कार्य करें।

सामाजिक कल्याण योजनाओं की सफलता केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की भागीदारी और सहयोग आवश्यक है।

जब समाज के लोग जागरूक होंगे, जब वे इन योजनाओं का लाभ उठाने के साथ-साथ दूसरों को भी प्रेरित करेंगे, तब विकास का यह अभियान और अधिक प्रभावी होगा।

हमें यह समझना होगा कि विकास केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नियत, निष्ठा और सहभागिता से संभव होता है।

आज हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहाँ समानता हो, संवेदनशीलता हो और अवसरों की समानता हो। जहाँ कोई भी व्यक्ति गरीबी, भेदभाव या उपेक्षा के कारण पीछे न रह जाए।

हमें मिलकर एक ऐसा भारत बनाना है जहाँ हर व्यक्ति सम्मान के साथ जी सके, हर युवा अपने सपनों को साकार कर सके, और हर नागरिक राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सके।

जैसा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने कहा है, “मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।” यदि हम सभी मिलकर प्रयास करें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि सामाजिक कल्याण योजनाएँ केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं हैं, बल्कि यह एक मानवीय और संवेदनशील समाज के निर्माण का संकल्प हैं।

आइए, हम सब मिलकर यह प्रण लें कि हम इन योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में अपना योगदान देंगे और एक ऐसे भारत के निर्माण में भागीदार बनेंगे जो समृद्ध, समावेशी और सशक्त हो।

इसी भावना के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ और आप सभी का धन्यवाद करता हूँ।

धन्यवाद,

जय हिंद!