SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHANDKATARIA ON THE OCCASION OF NMIMS CHANDIGARH HALF MARATHON 4TH EDITION AND PRIZE DISTRIBUTION AT CHANDIGARH ON MARCH 8, 2026.
- by Admin
- 2026-03-08 10:20
NMIMS Chandigarh Half Marathon के अवसर पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 08.03.2026, रविवार समयःसुबह 7:30 बजे स्थानः चंडीगढ़
आप सभी को मेरा सप्रेम नमस्कार और इस खुशनुमा सुबह की राम-राम!
आज इस गौरवपूर्ण क्षण पर, जब हम NMIMS Chandigarh Half Marathon 2026 के विजेताओं को पदक और पुरस्कार प्रदान कर रहे हैं, मैं आप सभी को हृदय से बधाई देता हूँ। विशेष प्रसन्नता की बात है कि नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ (NMIMS) द्वारा आयोजित NMIMS Chandigarh Half Marathon का यह चौथा संस्करण है।
चार वर्षों की इस सतत यात्रा ने यह सिद्ध किया है कि यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता का उत्सव है। आज यहाँ उपस्थित प्रत्येक प्रतिभागी अपने साहस, अनुशासन और दृढ़संकल्प के कारण विजेता है।
मुझे यह जानकर विशेष प्रसन्नता हुई है कि यह मैराथन आज पूरे विश्व में मनाए जा रहे ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’को समर्पित है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, जो प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को मनाया जाता है, विश्वभर में महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का उत्सव है। यह दिन लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने का एक आह्वान भी है।
इस दिवस का इतिहास एक सदी से भी अधिक पुराना है; पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस वर्ष 1911 में मनाया गया था। पिछले 115 वर्षों की यह यात्रा सामूहिक प्रयास, सतत संघर्ष, जागरूकता और समानता की दिशा में निरंतर प्रगति की गाथा है।
जानकर खुशी हुई कि मैराथन के इस चौथे संस्करण की थीम "Unstoppable Her"यानी अजेय नारी रखी गई है। यह विषय अपने आप में बहुत शक्तिशाली है। हमारी मातृशक्ति सचमुच ‘अनस्टॉपेबल’है। जब एक महिला कुछ ठान लेती है, तो कोई भी बाधा, कोई भी चुनौती और कोई भी परिस्थिति उसके कदमों को रोक नहीं सकती।
आज इन 5 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 21 किलोमीटर की मैराथन में महिलाओं और युवा बालिकाओं की भारी भागीदारी देखकर यह सिद्ध हो गया है कि आज की नारी स्वास्थ्य, फिटनेस और समाज के हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। एक स्वस्थ महिला ही एक स्वस्थ परिवार और अंततः एक सशक्त राष्ट्र की नींव रखती है।
मुझे विशेष प्रसन्नता है कि इस आयोजन में लगभग 50 दिव्यांगजन भी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। उनकी सहभागिता यह सिद्ध करती है कि संकल्प और साहस के आगे कोई भी सीमा बाधा नहीं बन सकती। उनका उत्साह हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है और समावेशिता के हमारे संकल्प को सशक्त करता है।
मैं आज इस मैराथन के तीनों वर्गों के सभी 18 विजेताओं को हार्दिक बधाई देता हूँ, जिनमें 9 पुरुष और 9 महिलाएँ शामिल हैं और जिन्हें लगभग 1 लाख रूपये तक की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया है। आप सभी विजेता अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से समाज के लिए प्रेरणा बने हैं।
साथ ही, मैं आज इस अवसर पर गैर-सरकारी संगठनों, व्यवसाय, सामाजिक कार्य आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली सभी 5 महिलाओं को भी हार्दिक बधाई देता हूं। यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का नहीं, बल्कि उस सकारात्मक परिवर्तन का है जो ये महिलाएँ समाज में ला रही हैं। आपका अभिनंदन वास्तव में महिला सशक्तिकरण और समान अवसरों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
मैं इस अवसर पर विशेष रूप से प्रोफेसर डॉ. ज्योत्सना सिंह, कैंपस डायरेक्टर, NMIMS चंडीगढ़ को हार्दिक बधाई देना चाहता हूँ। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में इस चौथे संस्करण ने एक नई ऊँचाई प्राप्त की है।
उन्होंने यह सिद्ध किया है कि महिला नेतृत्व केवल प्रशासनिक दक्षता तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह दृष्टि, संवेदनशीलता और परिवर्तनकारी सोच का प्रतीक होता है। उनके मार्गदर्शन में यह आयोजन महिला सशक्तिकरण, समावेशिता और समानता का सशक्त संदेश लेकर सामने आया है।
मैं इस उद्देश्यपूर्ण आयोजन के लिए ‘नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज’, जो कि एक प्रतिष्ठित डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी है, के चंडीगढ़ कैंपस की पूरी टीम को भी हार्दिक बधाई देता हूँ।
वर्ष 1981 में श्री विले पार्ले केलवणी मंडल (SVKM) द्वारा मुंबई में स्थापित यह संस्थान, आज देश के सबसे अग्रणी और प्रतिष्ठित शिक्षा केंद्रों में से एक बन चुका है। भारतीय उद्योगपति और परोपकारी स्वर्गीय श्री नरसी मोनजी जी की स्मृति में शुरू हुआ यह सफर, शुरुआत में केवल मैनेजमेंट की शिक्षा तक सीमित था, लेकिन आज यह इंजीनियरिंग, फार्मेसी, आर्किटेक्चर, विज्ञान और कानून जैसे अनेक क्षेत्रों में एक वटवृक्ष का रूप ले चुका है।
मुझे यह देखकर बहुत खुशी होती है कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता का जो मानक NMIMS ने मुंबई में स्थापित किया था, आज वही गुणवत्ता और वही संस्कार वे अपने चंडीगढ़ कैंपस के माध्यम से पंजाब और उत्तर भारत के युवाओं को प्रदान कर रहे हैं। शिक्षा के साथ-साथ छात्रों का समग्र विकास और समाज के प्रति जागरूकता, जिसका एक उत्कृष्ट उदाहरण आज की यह मैराथन है, संस्थान की इसी महान परंपरा का जीवंत प्रमाण है।
प्रिय धावको,
किंवदंती के अनुसार फिडीपीडिस नामक एक वीर सैनिक ने मैराथन के युद्ध में यूनानी सेना की पर्शियनों पर विजय का संदेश पहुँचाने के लिए बिना रुके मैराथन से एथेंस तक दौड़ लगाई। यह केवल एक संदेश नहीं था, बल्कि साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक था। उस ऐतिहासिक दौड़ ने मानव धैर्य और इच्छाशक्ति की अद्भुत क्षमता को संसार के सामने प्रस्तुत किया।
मैराथन से एथेंस तक की दूरी लगभग 26 मील, अर्थात् लगभग 42 किलोमीटर थी। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में लंबी दूरी की इस दौड़ को “मैराथन” कहा जाने लगा और आज भी फुल मैराथन की मानक दूरी 42 किलोमीटर (26 मील) ही निर्धारित है।
मैराथन केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि यह व्यक्तिगत उपलब्धि, अनुशासन, धैर्य और सामूहिकता का उत्सव है। विश्वभर में हर वर्ष 800 से अधिक मैराथन आयोजित होते हैं, जिनमें लाखों लोग भाग लेते हैं। अधिकांश प्रतिभागी जीतने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं को चुनौती देने, स्वास्थ्य सुधारने और सामाजिक उद्देश्य के लिए दौड़ते हैं।
भारत में भी मैराथन संस्कृति तेज़ी से विकसित हो रही है और आज यह केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि फिटनेस, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक जागरूकता का सशक्त माध्यम बन चुकी है।
देश में आयोजित होने वाले प्रमुख मैराथनों में टाटा मुंबई मैराथन, दिल्ली हाफ मैराथन, गोवा रिवर मैराथन, कावेरी ट्रेल मैराथन, गो हेरिटेज रन (हम्पी) और पंख एमपी हाफ मैराथन शामिल हैं। इन सभी आयोजनों ने भारत में फिटनेस संस्कृति को प्रोत्साहित किया है।
इसी क्रम में 1 मार्च 2026 को हमारे चंडीगढ़ शहर में आयोजित प्रथम अंतरराष्ट्रीय चंडीगढ़ मैराथन ने इस उभरती हुई मैराथन संस्कृति को एक नया आयाम प्रदान किया है। इस ऐतिहासिक आयोजन ने न केवल देश-विदेश के धावकों को एक मंच पर एकत्रित किया, बल्कि चंडीगढ़ को एक फिट, अनुशासित और वैश्विक दृष्टिकोण वाले शहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी बढ़ाया। मैं आशा करता हूं कि यह आयोजन आने वाले वर्षों में शहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर और सशक्त रूप से स्थापित करेगा।
साथियो,
हम सदियों से सुनते आ रहे हैं, ‘चरैवेति, चरैवेति’ यानी चलते रहो! क्योंकि जीवन का पर्याय ही चलना है, रुकना नहीं। ठहरा हुआ पानी और ठहरा हुआ इंसान, दोनों अपनी जीवंतता खो देते हैं। जब तक हमारी सांसें चल रही हैं, हमारे कदम भी आगे बढ़ते रहने चाहिए, चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो।
और जब हम जीवन के इस फलसफे को खेल के मैदान पर उतारते हैं, तो मैराथन से बेहतर कोई और उदाहरण नहीं मिलता। दोस्तों, मैराथन केवल कुछ किलोमीटर की एक दौड़ नहीं है; यह मानवीय दृढ़ता और प्रतिकूल परिस्थितियों पर हमारी विजय का एक जीवंत प्रतीक है। यह उस क्षण का उत्सव है जब आपकी मांसपेशियां जवाब दे देती हैं, आपकी सांसें फूलने लगती हैं, लेकिन आपका दिमाग आपसे कहता है, ‘बस एक कदम और!’ यह दौड़ हमें सिखाती है कि जब हालात हमारे खिलाफ हों, तब भी कैसे अपने लक्ष्य की ओर मजबूती से टिके रहना है।
अक्सर लोग इसे एथलेटिक्स का एक हिस्सा भर मान लेते हैं, लेकिन गहराई से देखें तो यह शारीरिक कौशल की परीक्षा से कहीं अधिक है। यह हमारी ‘अदम्य मानवीय भावना’ का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह साबित करता है कि जब इंसान अपने भीतर के संकल्प को जगा लेता है, तो कोई भी दूरी, कोई भी दर्द और कोई भी चुनौती उसे उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। एक मैराथन धावक अपने पैरों से ज्यादा अपने हौसले और अपने दिल से दौड़ता है।
दौड़ना केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, यह एक मानसिक तपस्या भी है। जब आप निर्धारित कुछ किलोमीटर की किसी दौड़ के लिए दौड़ते हैं, तो आप केवल एक निश्चित दूरी तय नहीं कर रहे होते, बल्कि आप अपने आलस्य, अपनी शारीरिक सीमाओं और अपनी थकान पर विजय प्राप्त कर रहे होते हैं।
आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहाँ मानसिक तनाव और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, वहाँ स्वास्थ्य ही हमारा सबसे बड़ा और असली धन है। इस मैराथन के माध्यम से NMIMS ने हमारे ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ को भी एक नई और मजबूत गति प्रदान की है।
इसलिए, आज यह दौड़ सिर्फ रास्तों पर नहीं, बल्कि हम सबके भीतर होनी चाहिए, अपने डर को हराने की दौड़, अपनी कमजोरियों से आगे निकलने की दौड़! आइए, जीवन के इस मैराथन में बिना रुके, बिना थके, एक साथ आगे बढ़ें।
साथियो,
दौड़ना हो या कोई अन्य शारीरिक गतिविधि, यह केवल शरीर को सक्रिय रखने का साधन नहीं, बल्कि स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवनशैली का आधार है। नियमित व्यायाम शरीर को सुदृढ़, मन को संतुलित और व्यक्तित्व को आत्मविश्वासी बनाता है। खेल हमें धैर्य, निरंतरता और लक्ष्य के प्रति समर्पण सिखाते हैं। ये वही गुण हैं जो जीवन और राष्ट्र-निर्माण दोनों में सफलता की कुंजी हैं।
आज ‘विकसित भारत 2047’ का हमारा संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसे भारत की परिकल्पना है जो स्वस्थ, शिक्षित, आत्मनिर्भर और नैतिक रूप से सशक्त हो। जब हमारा युवा वर्ग शारीरिक रूप से फिट, मानसिक रूप से जागरूक और चरित्र से दृढ़ होगा, तभी भारत विज्ञान, नवाचार, खेल और वैश्विक नेतृत्व में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा। स्वस्थ युवा ही विकसित भारत की पूंजी हैं।
इसी संदर्भ में मैं युवाओं से एक महत्वपूर्ण आग्रह करना चाहता हूँ कि नशे से दूर रहें। नशा केवल एक व्यक्तिगत कमजोरी नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। यह स्वास्थ्य को नष्ट करता है, प्रतिभा को क्षीण करता है और सपनों को अधूरा छोड़ देता है। जो युवा अपनी ऊर्जा खेल, शिक्षा और नवाचार में लगाते हैं, वही अपने जीवन और राष्ट्र का निर्माण करते हैं।
याद रखिए, नशा क्षणिक सुख देता है, परंतु दीर्घकालिक विनाश का कारण बनता है। इसके विपरीत, अनुशासन, परिश्रम और स्वस्थ जीवनशैली स्थायी सफलता और सम्मान दिलाते हैं। आपमें अपार क्षमता है, उसे व्यर्थ न जाने दें। अपने शरीर को मजबूत बनाइए, अपने मन को सकारात्मक रखिए और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहिए।
आप केवल अपने परिवार की आशा नहीं हैं, आप भारत की शक्ति हैं। अपने सपनों को साकार कीजिए, अपने लक्ष्य को ऊँचा रखिए और अपने जीवन को ऐसा बनाइए कि आने वाला भारत आप पर गर्व करे। आइए, हम संकल्प लें कि हम स्वयं भी नशे से दूर रहेंगे और अपने साथियों को भी जागरूक करेंगे।
अपना संबोधन समाप्त करने से पहले, एक बार फिर मैं सभी विजेताओं को बधाई देता हूँ। लेकिन जो लोग आज मंच पर पुरस्कार नहीं ले पा रहे हैं, मैं उनसे कहना चाहूँगा कि आपको तनिक भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है। इस मैराथन में हिस्सा लेना, सुबह जल्दी उठकर दौड़ने का संकल्प लेना और अपने लक्ष्य को पार करना, अपने आप में एक बहुत बड़ी जीत है। आप सभी विजेता हैं।
चूंकि यह मैराथन "Unstoppable Her" को समर्पित है, मैं अंत में यही कहना चाहूँगा कि आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहाँ हमारी बेटियां, हमारी बहनें और हमारी माताएं वास्तव में ‘अनस्टॉपेबल’ बन सकें। उन्हें आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित माहौल, समान अवसर और पूरा सम्मान मिले।
मैं एक बार फिर NMIMS प्रबंधन सहित सभी आयोजकों को इस आयोजन को सफल बनाने के लिए हृदय से धन्यवाद करता हूँ।
आप सभी स्वस्थ रहें, मस्त रहें और इसी तरह जीवन के हर क्षेत्र में बिना रुके दौड़ते और जीतते रहें।
धन्यवाद,
जय हिंद!