SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CELEBRATION OF INTERNATIONAL WOMEN’S DAY ON THE THEME BALANCE THE SCALES AT CHANDIGARH ON MARCH 8, 2026.
- by Admin
- 2026-03-08 19:45
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 08.03.2026, रविवार समयः शाम 5:00 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज 8 मार्च 2026 को, हम सब यहाँ ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। सबसे पहले, मैं यहाँ उपस्थित सभी मातृशक्ति को अपना नमन अर्पित करता हूँ और आप सभी को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
यह दिन केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं है, बल्कि यह उन असीम संभावनाओं, अद्वितीय संघर्षों और उस अदम्य साहस का उत्सव है, जो एक स्त्री के रूप में जन्म लेने के साथ ही शुरू हो जाता है। यह दिन हमें रुककर यह सोचने का अवसर देता है कि हमने समाज के रूप में कितनी प्रगति की है और अभी समानता के उस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए हमें कितना लंबा सफर और तय करना है।
आज के इस विशेष अवसर पर, मैं चंडीगढ़ के विकास और समाज के लिए अपना अमूल्य योगदान देने वाली सभी 25 महिलाओं को Women Achiever Award से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई देता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपका यह सम्मान न केवल आपकी उपलब्धियों को मान्यता देगा, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि आज हमने ‘प्रेरणा 2.0’ (PRERNA: Power, Resilience, Empowerment & Recognition of Noteworthy Women Achievers) नामक पुस्तिका का अनावरण किया है। यह पुस्तिका सामाजिक कल्याण विभाग की एक प्रशंसनीय पहल है। यह हमारे समाज में महिलाओं की शक्ति, साहस और योगदान को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। विभाग की यह पहल आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
मैं आपको बताना चाहता हूं कि इस वर्ष, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 का थीम है, “Give to Gain”। ‘‘गिव टू गेन’’ का अर्थ बहुत गहरा है। इसका अर्थ है कि जब हम महिलाओं को अवसर, शिक्षा, सम्मान, और सहयोग देते हैं, तो बदले में पूरा समाज और पूरी दुनिया विकास और समृद्धि प्राप्त करती है। महिलाओं में निवेश करना कोई एहसान नहीं है, बल्कि यह मानवता के बेहतर भविष्य के लिए सबसे सुरक्षित और लाभकारी निवेश है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत वर्ष 1911 में हुई थी और इसे आधिकारिक मान्यता संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1975 में प्रदान की गई। तब से लेकर आज तक यह दिवस विश्वभर में महिलाओं की उपलब्धियों, उनके संघर्षों और समाज निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को सम्मानित करने का प्रतीक बन चुका है।
देवियो और सज्जनो,
नारी-शक्ति हमारे समाज की आधारभूत शक्ति है। भारतीय परंपरा में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। इसी भावना के कारण हम देवी दुर्गा, काली और लक्ष्मी की पूजा करते हैं। ये देवियाँ इस सत्य का प्रतीक हैं कि नारी केवल कोमलता और संवेदनशीलता की प्रतीक नहीं, बल्कि अदम्य साहस, धैर्य और शक्ति का भी स्वरूप है।
रामायण और महाभारत जैसे हमारे महाकाव्यों में भी नारी के गौरवशाली स्थान का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। माता सीता का धैर्य और त्याग, द्रौपदी का साहस, गार्गी और मैत्रेयी का ज्ञान तथा रानी लक्ष्मीबाई का अद्वितीय शौर्य इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव प्रेरणा और शक्ति के स्रोत के रूप में देखा गया है।
नारी को प्रकृति का स्वरूप कहा गया है, क्योंकि वह सृजन की आधारशिला है। इस संदर्भ में सिखों के प्रथम गुरु तथा जगतगुरु श्री गुरु नानक देव जी के वे प्रेरणादायक शब्द स्मरणीय हैं, जिनमें उन्होंने नारी के सम्मान का संदेश दिया। उन्होंने ने कहा है, “सो क्यों मंदा आखिए, जित जम्मे राजान” अर्थात, जिस स्त्री ने महान राजाओं को जन्म दिया, उसे भला हीन या कमतर कैसे कहा जा सकता है।
देवियो और सज्जनो,
जब हम भारतीय परिप्रेक्ष्य में महिलाओं की बात करते हैं, तो हमारा इतिहास ऐसी महान विभूतियों से भरा पड़ा है, जिन्होंने समय-समय पर यह साबित किया है कि महिला केवल कोमलता का नहीं, बल्कि शक्ति का भी प्रतीक है।
स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू, कस्तूरबा गांधी, सुचेता कृपलानी, अरुणा आसफ अली, कैप्टन लक्ष्मी सहगल और अनेक वीरांगनाओं ने अद्वितीय साहस और नेतृत्व का परिचय दिया। स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार प्रदान किए और तब से सामाजिक परिवर्तन की यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है।
आज भारतीय महिलाएँ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी नई ऊँचाइयाँ छू रही हैं। कल्पना चावला (अंतरिक्ष यात्री), टेसी थॉमस (मिसाइल वुमन), रितु करिधल (इसरो की रॉकेट वुमन), मुथैया वनिता (चंद्रयान-2 की प्रोजेक्ट डायरेक्टर), असीमा चटर्जी (कैंसर रोधी दवाओं की खोज), अन्ना मणि (मौसम वैज्ञानिक), कमला सोहोनी (जैव रसायन), गगनदीप कंग (वैक्सीन वैज्ञानिक) जैसी वैज्ञानिकों ने वैश्विक स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है। शिक्षा और अनुसंधान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि अवसर मिलने पर वे नवाचार और प्रगति की सशक्त वाहक बन सकती हैं।
राजनीति और नेतृत्व के क्षेत्र में भी महिलाओं ने महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। श्रीमती इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर सशक्त नेतृत्व प्रदान किया। श्रीमती प्रतिभा पाटिल देश की पहली महिला राष्ट्रपति रहीं, जबकि श्रीमती द्रौपदी मुर्मू भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुँचीं, जो महिला सशक्तिकरण का एक ऐतिहासिक उदाहरण है। श्रीमती विजयलक्ष्मी पंडित संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। इसी प्रकार श्रीमती सुचेता कृपलानी देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं और डॉ. किरण बेदी पहली महिला आईपीएस अधिकारी के रूप में प्रशासनिक सुधारों की एक सशक्त मिसाल प्रस्तुत की।
खेल जगत में भी भारतीय महिलाओं ने असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। कर्णम मल्लेश्वरी ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, जबकि पी.टी. उषा, साइना नेहवाल, पी.वी. सिंधु, मैरी कॉम, साक्षी मलिक, अरुणिमा सिन्हा, मीराबाई चानू और दीपा मलिक जैसी खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का गौरव बढ़ाया है। इसी प्रकार, चंडीगढ़ की युवा प्रतिभा जानवी जिंदल ने मात्र 18 वर्ष की आयु में 11 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित कर यह सिद्ध किया कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और परिवार के सहयोग से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
ये सभी उदाहरण इस सत्य को रेखांकित करते हैं कि जब महिलाओं को अवसर, सम्मान और सहयोग मिलता है, तो वे केवल स्वयं ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती हैं। वे केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सशक्त धुरी हैं।
प्यारी बहनो एवं बेटियो,
मैं मानता हूँ कि सफलता की राह पर अग्रसर होने के लिए सबसे पहले यह आवश्यक है कि आप अपनी अद्वितीय प्रतिभा को पहचानें। जब आप अपने आत्मविश्वास को जगाएंगी, तो आप पाएंगी कि आपके अंदर वह ऊर्जा है जो हर चुनौती को पार करने, जोखिम लेने और नए अवसरों का निर्माण करने में सक्षम है।
इस संदर्भ में, मुझे स्वामी विवेकानंद जी का वह ओजस्वी कथन याद आता है, जो हर महिला के लिए एक मंत्र होना चाहिए। उन्होंने कहा था, ‘‘ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से ही हमारी हैं। वह हम ही हैं जो अपनी आँखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।’’
इसलिए, अपनी आँखों से संदेह और भय का वह पर्दा हटाइए। समाज क्या कहेगा, इस डर को पीछे छोड़ दीजिए। जब एक महिला अपने ऊपर विश्वास कर लेती है, तो दुनिया की कोई भी जंजीर उसे बांध कर नहीं रख सकती।
देवियो और सज्जनो,
हमने आजादी के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। लेकिन यह केवल तभी संभव होगा जब देश की हर महिला आत्मनिर्भर और सशक्त हो।
मैं दृढ़ता से मानता हूँ कि महिला सशक्तिकरण और कार्यबल में महिलाओं की समान भागीदारी से सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति में अद्वितीय योगदान मिलता है। कोई भी राष्ट्र अपनी आधी आबादी की उपेक्षा करके प्रगतिशील नहीं हो सकता।
इस संदर्भ में हमारे महान विचारकों के प्रेरणादायक विचार हमें सही दिशा प्रदान करते हैं। डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने महिलाओं की प्रगति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था, “मैं किसी समुदाय की प्रगति को उस समुदाय की महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति से मापता हूँ।”
इसी प्रकार स्वामी विवेकानंद ने भी समाज में महिलाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा था, “जिस प्रकार एक पंख से पक्षी का उड़ना असंभव है, उसी प्रकार महिलाओं की स्थिति में सुधार लाए बिना विश्व का कल्याण संभव नहीं है।” ये विचार हमें यह संदेश देते हैं कि किसी भी समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब महिलाएँ समान अवसर, सम्मान और सशक्तिकरण के साथ आगे बढ़ें।
देवियो और सज्जनो,
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि महिलाओं को अधिक आर्थिक स्वायत्तता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राजनीतिक शक्ति प्राप्त हो।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें मिलेंगी। यह अधिनियम महिलाओं का जीवन स्तर सुधारने के लिए, क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर करने के लिए, देश में महिला नेतृत्व-आधारित विकास का नया युग लाने के लिए अहम कदम है।
सामाजिक स्तर पर भी तीन तलाक जैसी जिन कुरीतियों के कारण महिलाओं पर अत्याचार होते थे, इसके लिए कानून बनाकर करोड़ों मुस्लिम बहनों को आज तीन तलाक की अमानवीय कुप्रथा से सुरक्षा मिली है।
शौचालय ना होने की वजह से बेटियाँ स्कूल ना छोड़ें, इसके लिए करोड़ों शौचालय, बेटी की शिक्षा जारी रहे, इसके लिए सुकन्या समृद्धि योजना, बहनों को रसोई में लकड़ी का धुआँ ना सहना पड़े, इसके लिए उज्ज्वला गैस कनेक्शन, बहन-बेटी को पानी के इंतजाम में परेशान ना हो, इसके लिए हर घर नल योजना शुरू की गई है।
बहन-बेटी अंधेरे में ना रहें, इसके लिए सौभाग्य योजना से मुफ्त बिजली कनेक्शन। बेटी का घर की संपत्ति पर भी अधिकार हो, इसके लिए पीएम आवास में उसे संयुक्त भागीदारी। रोजगार, स्वरोजगार के लिए लोन देने वाली मुद्रा योजना शुरू की गई है।
गाँव की बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आय के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेल्फ हेल्प ग्रुप का विस्तार 10 करोड़ से अधिक महिलाओं तक किया गया है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश में 3 करोड़ “लखपति दीदी” बनाने तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ड्रोन उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना चलाई जा रही है। अब तक लगभग 2 करोड़ महिलाएँ “लखपति दीदी” बन चुकी हैं और 1 हजार से अधिक महिलाओं को ड्रोन प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे वे आधुनिक तकनीक का उपयोग कर कृषि एवं अन्य कार्यों में नई संभावनाएँ स्थापित कर रही हैं।
आज परिवार से लेकर पंचायत तक, इकोनॉमी से लेकर एजुकेशन और उद्यमशीलता तक, हमारी बहन-बेटियाँ हर क्षेत्र में अभूतपूर्व काम कर रही हैं।
भारत को चाँद तक पहुँचाने में महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका रही है। आज हमारे स्टार्टअप्स हों, सेल्फ हेल्प ग्रुप्स हों, या स्वच्छता जैसे सामाजिक अभियान हों, महिलाओं की भागीदारी और भूमिका देश की ताकत बन रही है।
फिर भी हमें यह स्वीकार करना होगा कि लैंगिक समानता की दिशा में अभी बहुत कार्य शेष है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन जैसे क्षेत्रों में हमें और अधिक ठोस तथा समन्वित प्रयास करने होंगे। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह महिलाओं के सम्मान, अधिकारों और अवसरों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाए।
हमारा संविधान महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करता है और हमारी नीतियाँ उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी सोच और सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाएँकृबेटियों को समान अवसर दें, उनके सपनों को उड़ान दें और उनके आत्मविश्वास को और सुदृढ़ करें।
वास्तव में, महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्र की समग्र प्रगति का आधार है। जब एक महिला सशक्त होती है, तो वह केवल स्वयं नहीं, बल्कि एक परिवार, एक समाज और अंततः पूरे राष्ट्र को सशक्त बनाती है।
आइए, इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम सभी यह संकल्प लें कि हम एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान देंगे जहाँ हर महिला सुरक्षित, सम्मानित और आत्मनिर्भर हो, जहाँ बेटियों को समान अवसर मिलें और वे निर्भीक होकर अपने सपनों को साकार कर सकें।
अंत में, मैं सभी महिलाओं को उनके अदम्य साहस, अथक परिश्रम और समर्पण के लिए हृदय से नमन करता हूँ तथा उन्हें इस विशेष दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
धन्यवाद,
जय हिंद!