SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF DISTRIBUTION OF CERTIFICATES TO MERITORIOUS CHILDREN OF OFFICERS/EMPLOYEES OF LOK BHAVAN PUNJAB AT PUNJAB LOK BHAVAN ON MARCH 24, 2026.

पंजाब लोक भवन के कर्मचारियों के बच्चों के सम्मान समारोह पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 24.03.2026, मंगलवारसमयः दोपहर 12:30 बजेस्थानः पंजाब लोक भवन

नमस्कार!

आज का यह अवसर अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है, जब हम पंजाब लोक भवन के कर्मठ एवं समर्पित कर्मचारियों के प्रतिभाशाली बच्चों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित करने के लिए एकत्रित हुए हैं। यह केवल एक सम्मान समारोह नहीं है, बल्कि यह परिश्रम, अनुशासन, लगन और संकल्प का उत्सव है।

सबसे पहले, मैं उन सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देता हूँ, जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर इस उपलब्धि को हासिल किया है। मैं उनके माता-पिता को भी विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ, जिनके त्याग, मार्गदर्शन और प्रेरणा के बिना यह संभव नहीं था।

मैं भली-भांति जानता हूँ कि दिन भर कार्यालय की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाने के बाद, घर जाकर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनके भविष्य निर्माण पर ध्यान देना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। यह पुरस्कार जितना इन बच्चों की मेहनत का फल है, उतना ही आपके तप और बलिदान का भी परिणाम है।

मुझे आपको यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि यह लगातार दूसरा वर्ष है जब पंजाब लोक भवन में इस पुनीत सम्मान समारोह का आयोजन हो रहा है। पिछले वर्ष भी, वित्त वर्ष 2024-25 के लिए हमने इसी प्रकार अपने कर्मचारियों के होनहार बच्चों को प्रोत्साहन राशि और प्रशंसा-पत्र देकर सम्मानित किया था। हमारी कोशिश है कि लोक भवन का यह परिवार एक-दूसरे की तरक्की का भागीदार बने।

उसी सफल परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, आज वित्त वर्ष 2025-26 के लिए शैक्षणिक सत्र 2024-25 में शानदार प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशंसा-पत्र और पुरस्कार स्वरूप प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। यह आर्थिक सहायता पंजाब के राज्यपाल के विवेकाधीन अनुदान के अंतर्गत प्रदान की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य हमारे बच्चों की शैक्षणिक और खेल संबंधी उपलब्धियों को सम्मानित करना, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना और उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव को और अधिक मजबूत करना है।

आज हमने मुख्य रूप से 6 विभिन्न श्रेणियों में अपने बच्चों को सम्मानित किया है। इन श्रेणियों और बच्चों की उपलब्धियों का विवरण इस प्रकार हैः

1. कक्षा 10वीं के मेधावी छात्रः कक्षा 10वीं किसी भी विद्यार्थी के जीवन का पहला बड़ा पड़ाव होता है। मुझे खुशी है कि हमारे 11 बच्चों ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 में 10वीं की परीक्षा में 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। इन सभी 11 विद्यार्थियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए प्रशंसा-पत्र के साथ-साथ 11-11 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।

2. कक्षा 12वीं के होनहार विद्यार्थीः कक्षा 12वीं वह दहलीज है जहाँ से भविष्य और करियर की दिशा तय होती है। हमारे 3 विद्यार्थियों ने इस महत्वपूर्ण परीक्षा में 70 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। इन 3 विद्यार्थियों को प्रशंसा-पत्र सहित 21-21 हजार रुपये प्रति छात्र की सम्मान राशि दी गई है।

3. भविष्य के डॉक्टर और इंजीनियर (NEET/JEE की तैयारी): प्रतियोगिता के इस दौर में हमारे बच्चे किसी से पीछे नहीं हैं। वे विद्यार्थी जो 10वीं के बाद कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे छम्म्ज् और श्रम्म् की तैयारी कर रहे हैं, उनके सपनों को उड़ान देने के लिए 6 विद्यार्थियों को उनकी कोचिंग फीस का 30 प्रतिशत अनुदान दिया गया है। इसके अंतर्गत कुल 1 लाख 63 हजार 200 रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है।

4. व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत युवाः आज का युग कौशल और व्यावसायिक शिक्षा का युग है। जो बच्चे 12वीं के बाद विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, ऐसे 21 विद्यार्थियों को उनकी वार्षिक फीस का 30 प्रतिशत सहायता राशि के रूप में दिया गया है। इसके तहत कुल 6 लाख 25 हजार 900 रुपये की राशि प्रदान की गई है, ताकि धन के अभाव में उनकी शिक्षा में कोई बाधा न आए।

5. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी (उच्च शिक्षा के बाद): अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जो युवा विभिन्न सरकारी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें भी इस योजना से जोड़ा गया है। इसके अंतर्गत 1 विद्यार्थी को कोचिंग फीस का 30 प्रतिशत अनुदान देते हुए 10 हजार 900 रुपये की राशि प्रदान की गई है।

6. खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सितारेः शिक्षा के साथ-साथ खेलों का भी जीवन में अतुलनीय महत्व है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। हमारे जिन बच्चों ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर खेलों में अपना और राजभवन का नाम रोशन किया है, ऐसे 7 बच्चों को प्रशंसापत्र सहित कुल 41 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई है।

इसके अतिरिक्त, खेल में राज्य स्तरीय टीम में चयनित होने पर 1 बच्चे को और स्कूल स्तर पर मेडल जीतने पर 1 बच्चे को प्रशंसा-पत्र देकर सम्मानित किया गया है। साथ ही, हमारे ग्रुप-ए के अधिकारियों के 2 बच्चों को भी खेलों में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए आज प्रशंसा-पत्र से नवाजा गया है।

कुल मिलाकर, मुझे यह घोषणा करते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि आज हमने इन सभी प्रतिभाशाली बच्चों को कुल 10 लाख 25 हजार रुपये की वित्तीय सहायता राशि और 25 प्रशंसा-पत्र प्रदान किए हैं।

देवियो और सज्जनो,

मेरा हमेशा से यह स्पष्ट और दृढ़ मत रहा है कि शिक्षा किसी भी परिवार, समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी होती है। जब मैं देखता हूँ कि हमारे लोकभवन के कर्मचारी साथी अपने सीमित संसाधनों के बावजूद, अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने और आगे बढ़ाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं, तो वह केवल एक पारिवारिक कर्तव्य नहीं रह जाता, बल्कि वह सच्ची सेवा भावना और भविष्य निर्माण की एक अनुपम मिसाल बन जाता है।

यही वह विचार था, जिसने मुझे प्रेरित किया। मैंने यह सुझाव दिया था कि लोकभवन परिवार के ऐसे मेधावी और प्रतिभावान विद्यार्थियों को हर वर्ष एक मंच पर सम्मानित किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य केवल उन्हें पुरस्कृत करना नहीं है, बल्कि उन्हें यह अहसास दिलाना है कि उनके परिश्रम को देखा और सराहा जा रहा है।

मुझे यह देखकर अत्यंत गर्व की अनुभूति हो रही है कि आज जब मैं इस मंच से इन होनहार बच्चों को प्रमाणपत्र और प्रोत्साहन राशि सौंप रहा हूँ, तो हमारा वह विचार एक सुंदर और जीवंत परंपरा का रूप ले चुका है। यह पहल न केवल विद्यार्थियों में नया आत्मविश्वास जगाती है, बल्कि समूचे लोकभवन परिवार को एक ऐसे साझा उद्देश्य से जोड़ती है, जो ज्ञान, परिश्रम और समर्पण के उच्च आदर्शों का सम्मान करता है। 

अब हमारा यह सामूहिक दायित्व है कि ज्ञान की यह मशाल यूं ही जलती रहे और हर वर्ष और अधिक बच्चों के जीवन को रोशन करे।

प्रिय विद्यार्थियों,

आपकी सफलता केवल आपकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आज का युग ज्ञान, कौशल और नवाचार का युग है। ऐसे में शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, सोच के विस्तार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का साधन है।

आप केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि इस महान राष्ट्र के भविष्य के कर्णधार हैं। आज जब हम ‘विश्व गुरु भारत’ की पुनर्स्थापना और उसके नव-निर्माण की बात करते हैं, तो हमें यह भली-भांति समझना होगा कि उसकी नींव केवल और केवल एक मजबूत, आधुनिक और समावेशी शिक्षा व्यवस्था पर ही रखी जा सकती है।

याद रखिए, हम उस महान देश के वासी हैं, जिसने प्राचीन काल में तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों के माध्यम से पूरी दुनिया को ज्ञान का प्रकाश दिखाया था। अब समय आ गया है कि हम अपनी उसी बौद्धिक विरासत और आधुनिक तकनीक के समन्वय से उस प्राचीन गौरव को फिर से स्थापित करें।

आज तकनीक केवल एक विकल्प नहीं है, बल्कि यह हमारी शिक्षा और जीवनशैली का अभिन्न अंग बन चुकी है। मुझे यह देखकर खुशी होती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और ब्लॉकचेन जैसी उन्नत तकनीकों का प्रयोग अब स्कूल स्तर पर भी होने लगा है। 

हमारी ‘नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (NEP) ने हमें यह स्वर्णिम अवसर प्रदान किया है कि हम शिक्षा को केवल डिग्रियां प्राप्त करने के एक संकुचित दायरे से बाहर निकालें। यह शिक्षा अब जीवन को समग्रता से समझने, नए कौशल विकसित करने और एक सुदृढ़ चरित्र के निर्माण का शक्तिशाली साधन बन रही है।

मैं आपसे कहना चाहूँगा कि सपने वही सच होते हैं, जिनके लिए नींद नहीं, बल्कि जागकर मेहनत की जाती है। आप अपने लक्ष्य स्पष्ट रखें, निरंतर प्रयास करें और कभी असफलता से घबराएँ नहीं। असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी होती है।

खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मैं विशेष रूप से बधाई देता हूँ। खेल हमें अनुशासन, टीमवर्क, धैर्य और नेतृत्व के गुण सिखाते हैं। आज के समय में खेल केवल शारीरिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक करियर विकल्प भी बन चुका है।

प्रिय अभिभावकों,

आपकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों को उच्च शिक्षा और संस्कार प्रदान किए हैं। आप ही उनके पहले शिक्षक और सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं। मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि उनकी रुचियों और क्षमताओं को समझते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।

आज जब हम ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं, तब यह आवश्यक है कि हमारे युवा शिक्षित, सक्षम, जिम्मेदार और राष्ट्र के प्रति समर्पित हों। एक सच्चा नागरिक वही है, जो अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी पालन करता है।

मैं विद्यार्थियों से कहना चाहूँगा कि अपने ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करें,  ईमानदारी और नैतिकता को अपने जीवन का आधार बनाएं, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। याद रखें, आपकी सफलता तभी सार्थक है, जब उससे समाज और देश को भी लाभ हो।

आज जो पुरस्कार या प्रमाणपत्र आपको मिला है, यह आपकी मंजिल नहीं है; यह आपकी जीवन यात्रा का मात्र एक खूबसूरत मील का पत्थर है। यह इस बात का प्रतीक है कि आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आपको अभी और आगे जाना है, और ऊंचे आसमानों को छूना है।

याद रखिए, सफलता कभी अंतिम नहीं होती और असफलता कभी घातक नहीं होती; जो चीज़ मायने रखती है, वह है आगे बढ़ते रहने का साहस। आप डॉक्टर बनें, इंजीनियर बनें, बड़े अधिकारी बनें या किसी भी क्षेत्र में जाएँ, पर सबसे पहले एक अच्छे इंसान बनें। अपने माता-पिता के संघर्षों को हमेशा याद रखें और राष्ट्र निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दें।

अंत में, मैं एक बार फिर आप सभी विद्यार्थियों को आपके उज्ज्वल और स्वर्णिम भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएँ देता हूँ। मैं पंजाब लोक भवन के सभी कर्मचारियों को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि आपके और आपके परिवार के कल्याण के लिए हमारी यह प्रतिबद्धता भविष्य में भी इसी प्रकार निरंतर जारी रहेगी।

आप सभी स्वस्थ रहें, खुश रहें और जीवन में नित नई ऊंचाइयों को छूते रहें, यही मेरी ईश्वर से प्रार्थना है।

इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ, मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

धन्यवाद,

जय हिंद!