SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF EXHIBITION TITLED ‘ CHANDIGARH’S INDIAN MODERNISTS’ AT GOVERNMENT MUSEUM AND ART GALLERY SECTOR 10 CHANDIGARH ON MARCH 24, 2026.

‘‘चंडीगढ़ के निर्माण के 75 वर्ष - चंडीगढ़ के भारतीय आधुनिकतावादियों का सम्मान’’  के अवसर पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 24.03.2026, मंगलवारसमयः शाम 5:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

नमस्कार!

आज हम सब यहाँ एक अत्यंत गौरवशाली अवसर पर एकत्रित हुए हैं। चंडीगढ़ के निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, चंडीगढ़ प्रशासन और ‘चंडीगढ़ सिटिज़न्स फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित यह समारोह केवल एक शहर की वर्षगांठ नहीं है; यह स्वतंत्र भारत की सृजनात्मक चेतना, आधुनिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का जीवंत प्रतीक है।

मैं इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए चंडीगढ़ प्रशासन और ‘चंडीगढ़ सिटिज़न्स फाउंडेशन’ को हार्दिक बधाई देता हूं।

हम सभी जानते हैं कि चंडीगढ़ प्रशासन की भूमिका इस शहर के विकास और उसकी विशिष्ट पहचान को बनाए रखने में अत्यंत सराहनीय रही है। प्रशासन ने योजनाबद्ध विकास, उत्कृष्ट नागरिक सुविधाओं, स्वच्छता, हरित क्षेत्रों के संरक्षण तथा आधुनिक अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से चंडीगढ़ को देश के सर्वश्रेष्ठ शहरों में स्थान दिलाया है। 

बदलते समय की चुनौतियों के अनुरूप सतत विकास, स्मार्ट पहल, पर्यावरण संरक्षण और जन-हितैषी नीतियों के माध्यम से प्रशासन ने इस शहर की मूल भावना को अक्षुण्ण बनाए रखा है। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन प्रशंसा का पात्र है।

वहीं अगर चंडीगढ़ सिटिज़न्स फ़ाउंडेशन की बात करें तो, चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के प्रतिष्ठित नागरिकों द्वारा वर्ष 2025 में स्थापित यह संगठन विचारों और अनुभवों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करते हुए समावेशिता, शांति, सद्भाव, संस्कृति, साहित्य, रचनात्मकता, विरासत संरक्षण और सतत जीवन-शैली जैसे मूल्यों को बढ़ावा देता है।

सेवानिवृत्त जनरल वी. पी. मलिक के नेतृत्व में यह मंच नागरिकों को विभिन्न आयोजनों, संगोष्ठियों और जन-संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से मानव कल्याण और सतत विकास के लिए सहभागिता के अवसर प्रदान करता है।

मुझे बताया गया है कि फाउंडेशन ने अपनी गतिविधियों के प्रभावी संचालन हेतु 12 विषय-आधारित समूह गठित किए हैं, जो स्वास्थ्य, राष्ट्रीय सुरक्षा, कला-साहित्य, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, शहरी नियोजन, शिक्षा, खेल, पर्यटन तथा महिला सशक्तिकरण जैसे विविध क्षेत्रों को समाहित करते हैं।

200 से अधिक अनुभवी और प्रेरित स्वयंसेवकों के सहयोग से यह संस्था विभिन्न कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

देवियो और सज्जनो,

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि चंडीगढ़ कई मायनों में अद्वितीय है। चंडीगढ़ का इतिहास भी अपने आप में बेहद अनूठा है। जब देश के विभाजन के दौरान हमने पंजाब की राजधानी लाहौर को खो दिया, तो हमें एक नई राजधानी की तलाश करनी पड़ी। उस समय के नेताओं ने किसी मौजूदा शहर को राजधानी बनाने के बजाय एक नई राजधानी के निर्माण का अत्यंत साहसिक निर्णय लिया।

जिन परिस्थितियों में उन्होंने यह निर्णय लिया, वे बहुत ही दुखद और त्रासद थीं। विभाजन के कारण हुई मौतें और तबाही, लाखों लोगों का विस्थापन और मजबूरन पलायन, उन्हें आश्रय देने और बसाने की तात्कालिकता, धन की कमी आदि। और फिर भी, उन्होंने शून्य से एक नए और आधुनिक शहर के निर्माण का फैसला किया।

चंडीगढ़ को राष्ट्रीय नवनिर्माण का प्रतीक बनना था, जो भारत के भविष्य, इसकी आधुनिकता और इसकी अदम्य भावना का प्रतिनिधित्व करे। यह भारत के औपनिवेशिक अतीत से अलगाव और एक विशिष्ट ‘भारतीय आधुनिकतावाद’ का स्वरूप था। चंडीगढ़ उस सच्ची पंजाबी भावना, ‘चढ़दी कला’ का प्रतीक है, जिसका अर्थ है विपरीत परिस्थितियों में भी निरंतर प्रगति और उत्साह बनाए रखना।

इस आधुनिक शहर का निर्माण 1951 में आरंभ हुआ और 75 वर्षों बाद आज भी चंडीगढ़ एक वैश्विक मॉडल के रूप में स्थापित है। यह एक सुव्यवस्थित, संतुलित और उच्च गुणवत्ता वाला शहरी जीवन प्रदान करने वाला शहर है। भारत ही नहीं, संभवतः विश्व में भी चंडीगढ़ जैसा कोई अन्य शहर नहीं है। यह शहर ‘विकसित भारत’ की शहरी परिकल्पना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।

चंडीगढ़ की सेक्टर आधारित ग्रिड प्रणाली, सुव्यवस्थित और विस्तृत सड़क नेटवर्क, हरित क्षेत्र, उद्यान, आधुनिक वास्तुकला की विशिष्ट शैली, उत्तम जल आपूर्ति और भूमिगत सीवरेज प्रणाली, ये सभी इसके निवासियों को प्रकृति के निकट एक संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं।

चंडीगढ़ की इस अनूठी कहानी और इसके विरासत मूल्यों को संरक्षित, प्रोत्साहित और व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की आवश्यकता है, ताकि देश और विश्व के लोग इससे परिचित हों और इसकी महत्ता को समझ सकें। ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे बढ़ते हुए यह और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है कि हम इस विरासत को संजोकर रखें।

यह वर्ष 2026 चंडीगढ़ शहर के निर्माण की शुरुआत के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। हम सभी को एक साथ मिलकर अगले 3 वर्षों, यानी 2026, 2027 और 2028 तक लगातार कार्यक्रमों और आयोजनों की एक श्रृंखला द्वारा चंडीगढ़ के निर्माण के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाना चाहिए। चंडीगढ़ प्रशासन ने एक विस्तृत प्रस्ताव दस्तावेज़ तैयार किया है कि किस प्रकार के कार्यक्रम और आयोजन किए जा सकते हैं।

मैं विभिन्न संस्थानों, स्कूलों और कॉलेजों के सभी प्रमुखों से अपील करता हूँ कि वे आगे आएं और अपने-अपने संस्थानों में अपने स्तर पर इन आयोजनों और कार्यक्रमों को आयोजित करें। इस तरह चंडीगढ़ के निर्माण के 75 वर्षों का जश्न एक जन-आंदोलन बन जाएगा और चंडीगढ़ के निर्माताओं को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

देवियो और सज्जनो,

जब भी चंडीगढ़ की वास्तुकला की बात होती है, तो महान फ्रांसीसी वास्तुकार ‘ली कार्बूज़ियर’ का नाम स्वाभाविक रूप से सबसे पहले लिया जाता है। उनका मास्टर प्लान अद्वितीय था। लेकिन, आज का यह विशेष आयोजन एक बहुत ही महत्वपूर्ण और अक्सर भुला दिए जाने वाले पहलू पर केंद्रित है और वह है, हमारे अपने ‘भारतीय आधुनिकतावादियों’ का अमूल्य योगदान।

ली कार्बूज़ियर के उस विशाल और जटिल विज़न को भारतीय परिस्थितियों, यहाँ की जलवायु, संस्कृति और सीमित संसाधनों के बीच ज़मीन पर उतारने का असली भागीरथ प्रयास हमारे भारतीय वास्तुकारों, इंजीनियरों और प्रशासकों ने ही किया था। आज हम जिस सुव्यवस्थित और उत्कृष्ट जीवन का अनुभव चंडीगढ़ में करते हैं, वह उनके दूरदर्शी विचारों और उच्च स्तर के कार्यों का परिणाम है। 

जिस शहर की परिकल्पना 5 लाख की आबादी के लिए की गई थी, वह आज 11 लाख से अधिक लोगों का घर है। 75 वर्षों की इस यात्रा में हमारे सामने यातायात, बुनियादी ढांचे और जनसंख्या के दबाव जैसी अनेक नई चुनौतियाँ खड़ी हुई हैं। लेकिन चंडीगढ़ की यह खासियत रही है कि इसने अपनी ‘मूल विरासत’ से समझौता किए बिना विकास को अपनाया है।

आज प्रशासन ‘स्मार्ट सिटी’ पहल के तहत शहर को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों व सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रहा है। हमारी चुनौती यह है कि हम इस ऐतिहासिक शहर को एक ‘जीवंत संग्रहालय’ के साथ-साथ एक ‘भविष्योन्मुखी महानगर’ भी बनाए रखें।

चंडीगढ़ आज विश्वभर में शहरी नियोजन और आधुनिक वास्तुकला के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में जाना जाता है। यह शहर स्वच्छता, हरित वातावरण, सुव्यवस्थित जीवनशैली और उच्च मानव विकास के मानकों के लिए प्रसिद्ध है। “सिटी ब्यूटीफुल” के रूप में इसकी पहचान केवल इसके सौंदर्य में नहीं, बल्कि इसकी संरचना, संतुलन और जीवन की गुणवत्ता में निहित है। 

यह शहर हमें सिखाता है कि विकास केवल भौतिक संरचनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, पर्यावरणीय संतुलन और सामाजिक समरसता का समन्वय है।

आज, जब हम चंडीगढ़ के 75 वर्षों की इस गौरवपूर्ण यात्रा का उत्सव मना रहे हैं, तब हमें यह भी स्मरण रखना चाहिए कि भविष्य की चुनौतियाँ हमारे सामने हैं। बढ़ती जनसंख्या, शहरी दबाव, पर्यावरणीय संकट और संसाधनों की सीमाएँ हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करती हैं कि हम इस शहर की मूल भावना को संरक्षित रखते हुए इसे और अधिक टिकाऊ, समावेशी और स्मार्ट कैसे बना सकते हैं।

प्रिय युवा साथियों, चंडीगढ़ केवल एक विरासत नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। आपको अनुशासन, स्वच्छता, नवाचार और संवेदनशीलता जैसे इस शहर के मूल्यों को आगे बढ़ाना है। एक महान शहर का निर्माण केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों से होता है। आप सभी इस परिवर्तन के वाहक हैं और आपके प्रयास ही इस शहर के भविष्य को दिशा देंगे।

“विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में चंडीगढ़ एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर सकता है। सतत विकास, हरित ऊर्जा, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव-केंद्रित शहरीकरण के क्षेत्र में यह शहर देश के अन्य नगरों के लिए प्रेरणा बन सकता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास और विरासत के बीच संतुलन बना रहे और आने वाली पीढ़ियाँ भी इस अद्वितीय शहर की गरिमा और सुंदरता का अनुभव कर सकें।

देवियो और सज्जनो,

चंडीगढ़ प्रशासन, ‘चंडीगढ़ सिटिज़न्स फाउंडेशन’ के सहयोग से आज इस कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है ताकि उन महान भारतीय विभूतियों को सम्मानित किया जा सके जिन्होंने चंडीगढ़ शहर के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 

आइए, हम इस प्रथम समूह के इन 12 महान व्यक्तित्वों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करें, जिनके अमूल्य योगदान ने चंडीगढ़ के निर्माण और उसकी विशिष्ट पहचान को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुझे विश्वास है कि भविष्य में भी ऐसे अनेक योगदानकर्ताओं को सम्मानित किया जाएगा। 

हालांकि उनमें से अधिकांश आज हमारे बीच नहीं हैं, परंतु उनके परिवारजन आज यहाँ उपस्थित हैं और उनके सम्मान को ग्रहण कर रहे हैं। हम भाग्यशाली हैं कि उनमें से एक श्री एस.डी. शर्मा जी व्यक्तिगत रूप से इस सम्मान को प्राप्त करने के लिए यहाँ मौजूद हैं।

देवियो और सज्जनो,

वर्तमान और भावी पीढ़ी के लिए जो कुछ भी मूल्यवान है, वह हमारी विरासत है और हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए इसके लाभ सुनिश्चित करने चाहिए। इसलिए, आइए हम सब मिलकर चंडीगढ़ के सभी लोगों, विशेष रूप से छात्रों और युवाओं में जागरूकता और भागीदारी बढ़ाएं, ताकि इस वर्ष से शुरू होकर अगले तीन वर्षों तक चंडीगढ़ के निर्माण के 75 वर्ष मनाए जा सकें। 

मैं सभी संस्थानों, व्यावसायिक निकायों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, स्कूलों और कॉलेजों तथा व्यक्तियों से इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील करता हूँ। 

मैं मीडिया में अपने मित्रों से भी अनुरोध करता हूँ कि वे इस प्रयास में लोगों को लामबंद करने में सक्रिय योगदान दें और स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक, सभी स्तरों पर चंडीगढ़ और इसके मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करें।

इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

धन्यवाद, 

जय हिंद!