SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FELICITATION CEREMONY OF SCHOLARSHIP WINNERS AT CHANDIGARH ON MARCH 25, 2026.

चंडीगढ़ के खेल विभाग के ‘छात्रवृत्ति सम्मान समारोह’ पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 25.03.2026, बुधवारसमयः दोपहर 4:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

नमस्कार!

आज इतने प्रतिभाशाली, ऊर्जावान और अनुशासित युवा खिलाड़ियों के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और गर्व का अनुभव हो रहा है। यह मंच केवल एक सम्मान समारोह नहीं है, बल्कि यह उन सपनों, संघर्षों और सफलताओं का उत्सव है, जिन्हें आप सभी ने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से साकार किया है।

मैं यहाँ उपस्थित इंटर-स्कूल स्तर के लगभग 300 राज्य स्तरीय मेधावी खिलाड़ियों, उनके कोचों और अभिभावकों का हृदय से स्वागत और अभिनंदन करता हूँ। आप सभी ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से न केवल अपने परिवार और शिक्षण संस्थानों का नाम रोशन किया है, बल्कि चंडीगढ़ और देश का भी गौरव बढ़ाया है।

आपकी यह यात्रा किसी सहज राह का नाम नहीं, बल्कि संयम, कड़ी मेहनत, अनुशासन, त्याग और असंख्य रातों की जागृत साधना का अद्भुत उदाहरण है। प्रारंभिक दिनों में संसाधनों की कमी, सीमित अवसरों और तमाम सामाजिक-पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच, आपने कभी हार नहीं मानी, अपितु बाधाओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचे। 

‘गिरते हैं शहसवार ही मैदाने-जंग में, वो तिफ्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले’। (मतलब युद्ध के मैदान में लड़ते समय योद्धा ही गिरता है। जो घुटनों के बल चलते हैं वो क्या गिरेंगे।) - यह पंक्ति आपकी प्रतिभा और आपके जुनून पर पूरी तरह खरी उतरती है।

देवियो और सज्जनो,

चंडीगढ़ प्रशासन खेलों को बढ़ावा देने और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि पिछले वर्ष लगभग 4000 राज्य स्तरीय खिलाड़ियों को लगभग 20 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। यह न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि यह आपके प्रयासों की सराहना और आपके उज्ज्वल भविष्य में विश्वास का प्रतीक भी है।

इस वर्ष भी छात्रवृत्ति योजना को लेकर अत्यंत उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। फरवरी 2026 में आमंत्रित किए गए आवेदनों में लगभग 3 हजर 700 खिलाड़ियों ने आवेदन किया, जिनमें से 2 हजार 836 इंटर-स्कूल पदक विजेता खिलाड़ी हैं।

आज छात्रवृत्ति वितरण के प्रथम चरण में 647 इंटर-स्कूल पदक विजेताओं को लगभग 2.50 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है, जो अपने आप में एक प्रेरणादायी पहल है।

चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा खेलों के विकास और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन हेतु किए गए प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं। 28 अगस्त 2023 को खेल विभाग की नई खेल नीति लागू की गई, जिसके अन्तर्गत ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता को 6 करोड़ रूपए, रजत पदक विजेताओं को 4 करोड़ रुपए और कांस्य पदक विजेताओं को 2.5 करोड़ रुपए की सम्मान राशि शामिल है।

पिछले एक वर्ष में 5134 खिलाड़ियों को लगभग 28 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार एवं छात्रवृत्ति राशि वितरित की गई है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के लंबित नकद पुरस्कारों का पूर्ण रूप से निपटारा किया गया है और 1678 ग्रेडेशन प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।

खेल अवसंरचना के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देते हुए, पिछले वर्ष लगभग 500 बार खेल परिसरों की बुकिंग की गई तथा विभिन्न खेलों में लगभग 10 हजार सक्रिय सदस्य रजिस्टर हुए हैं।

चंडीगढ़ में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन भी किया गया है, जिनमें एथलेटिक्स, सॉफ्टबॉल, शतरंज, टेबल टेनिस, फुटबॉल, मैराथन, सिविल सर्विसेज खेल प्रतियोगिताएं आदि शामिल हैं। 

विशेष रूप से, 1 मार्च 2026 में आयोजित प्रथम चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय मैराथन में 3 हजार 500 धावकों, जिनमें 10 देशों के 40 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी भी शामिल थे, ने भाग लिया। आने वाले समय में एशियन रिले चैंपियनशिप 2027 और एशियन रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप 2027 जैसे बड़े आयोजनों की मेजबानी के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

हमारे खिलाड़ियों ने भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। महित संधू ने टोक्यो में आयोजित डेफ ओलंपिक्स 2025 में 2 स्वर्ण और 2 रजत पदक जीते। इशरूप नारंग ने जूनियर एशियन जूडो चैंपियनशिप 2025 में रजत पदक जीतकर एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाली शहर की पहली जूडो खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त किया। वहीं, काशवी गौतम चंडीगढ़ की पहली महिला क्रिकेटर बनी हैं, जिन्हें टेस्ट क्रिकेट के लिए चुना गया है।

साथियो,

मेरा मानना है कि किसी भी बच्चे का व्यक्तित्व केवल कक्षा के भीतर नहीं, बल्कि कक्षा के बाहर खेलों और गतिविधियों से आकार लेता है। खेल बच्चों में खेल भावना, दृढ़ संकल्प, टीमवर्क, भाईचारा और सम्मान जैसे गुण विकसित करते हैं और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने में भी सहायक होते हैं।

इसी दृष्टिकोण से गत वर्ष 2 सितंबर को चंडीगढ़ प्रशासन, ‘फेडरेशन इंटरनेशनल डी वॉलीबॉल (FIVB), अभिनव बिंद्रा फाउंडेशन ट्रस्ट (ABFT) और वॉलीबॉल फाउंडेशन के बीच हुए समझौते के तहत “उड़ान-स्कूल वॉलीबॉल कार्यक्रम” की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य विद्यालय स्तर पर बच्चों की प्रतिभा को निखारना और वॉलीबॉल को बढ़ावा देना है।

साथ ही, जनवरी 2025 में खेल एवं शिक्षा विभाग ने अभिनव बिंद्रा फाउंडेशन ट्रस्ट के सहयोग से ओलंपिक मूल्य शिक्षा कार्यक्रम (OVEP) शुरू किया, जो छात्रों में नेतृत्व, अनुशासन और सहयोग जैसे कौशल विकसित कर उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इसके अलावा, खेल बुनियादी ढांचे की बात करें तो खेल विभाग ने सेक्टर-8 और सेक्टर-39 स्थित खेल परिसरों में समर्पित शतरंज केंद्र स्थापित किए हैं, जो युवाओं को रणनीति और बौद्धिक क्षमता की दुनिया से जुड़ने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। 

इसी प्रकार, सेक्टर-42 स्थित खेल परिसर में स्थापित आधुनिक बिलियर्ड्स और स्नूकर हॉल इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि मुख्यधारा और गैर-मुख्यधारा दोनों प्रकार के खेलों को समान महत्व और प्रोत्साहन दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि खेल विभाग चंडीगढ़ द्वारा सेक्टर-16 क्रिकेट स्टेडियम को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने के प्रयास के तहत नई पिच बनाई गई है और मैदान को पूरा हरा-भरा बनाने के लिए नया घास लगाया गया है।

साथ ही, चंडीगढ़ में अब स्कूलों के खेल मैदान स्थानीय खेल संघों के लिए भी खोल दिए गए हैं। इससे खेल संघों को आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित कोच उपलब्ध होंगे, जिससे खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा और विद्यालय व समाज के बीच मजबूत जुड़ाव स्थापित होगा।

ये सभी कदम न केवल युवाओं की भागीदारी का दायरा बढ़ाते हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि चंडीगढ़ का खेल दृष्टिकोण भविष्य की ओर उन्मुख है, जहाँ मैदान पर खेले जाने वाले खेल हों या बोर्ड पर खेले जाने वाले, हर खेल को उचित मान्यता और समर्थन दिया जाएगा।

प्रिय साथियो,

खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह जीवन को दिशा देने वाला एक सशक्त साधन हैं। खेल हमें अनुशासन सिखाते हैं, टीम भावना का विकास करते हैं, और हमें यह समझाते हैं कि जीत और हार दोनों ही जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।

खेलों के माध्यम से हम सीखते हैं कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना, लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना, और निरंतर प्रयास करते रहना ही सफलता की कुंजी है। खेल हमें यह नहीं सिखाते कि कैसे जीतना है, बल्कि यह सिखाते हैं कि हार के बाद भी कैसे उठकर आगे बढ़ना है।

आज खेल उद्योग और इससे जुड़े स्टार्टअप्स देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने लगे हैं। राष्ट्रीय खेल नीति-2025 के तहत सरकार ने गांव से महानगर तक खिलाड़ियों के लिए आधुनिक सुविधाएँ, प्रशिक्षण, पुरस्कार और छात्रवृत्तियाँ उपलब्ध कराने का संकल्प लिया है। 

राष्ट्रीय खेल नीति-2025 का उद्देश्य 2036 ओलंपिक तक भारत को टॉप-5 खेल राष्ट्रों में शामिल करना है। यह तभी संभव है जब देश के हर कोने, स्कूल और गाँव से खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलेगा।

खेलो इंडिया, फिट इंडिया, और टॉप्स (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) जैसी योजनाएं नयी उर्जा, नये उत्साह और सपनों को यथार्थ में बदलने का आधार बन रही हैं। खेल न केवल बच्चों की प्रतिभा को परखते हैं, बल्कि एक सशक्त और स्वस्थ राष्ट्र की नींव भी रखते हैं।

खेल का मैदान केवल विजय अथवा हार का स्थान नहीं, बल्कि जीवन-संग्राम की कठोर भूमि है, जहां हर गिरावट सीख है, और प्रत्येक प्रयास भविष्य का आश्वासन। किसी ने खूब कहा है, “एक हार, सौ जीत का आधार होती है; जो डर मिटाता है वही विजेता कहलाता है।”

प्रिय विद्यार्थियों,

यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि आप खेलों के साथ-साथ अपनी शिक्षा पर भी समान ध्यान दें। खेल और शिक्षा का संतुलन ही आपको एक संपूर्ण व्यक्तित्व प्रदान करता है।

खेल आपको शारीरिक रूप से सशक्त बनाते हैं, जबकि शिक्षा आपको मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाती है। जब ये दोनों एक साथ चलते हैं, तब आप जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। जैसा कि कहा गया है कि “एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है।”

आप देश का भविष्य हैं। आपकी ऊर्जा, आपकी प्रतिभा और आपका संकल्प ही भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि अपने सपनों को बड़ा रखें, अपनी मेहनत को निरंतर बनाए रखें, और अपने लक्ष्य से कभी विचलित न हों।

याद रखिए, सफलता उन्हीं को मिलती है, जो असफलता से घबराते नहीं, बल्कि उससे सीखकर आगे बढ़ते हैं। और यह भी कि चैंपियन वही बनता है, जो तब भी अभ्यास करता है, जब कोई उसे देख नहीं रहा होता।

आज भारत ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में खेलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। खेल न केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम हैं, बल्कि यह राष्ट्र की पहचान और गौरव का भी प्रतीक हैं।

जब हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराते हैं, तब पूरा देश गर्व से भर उठता है। इसलिए, हमें खेलों को केवल शौक नहीं, बल्कि एक गंभीर और सम्मानजनक करियर के रूप में भी देखना होगा।

मैं इस अवसर पर खेल विभाग, यू.टी. चंडीगढ़ के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करता हूँ, जो निरंतर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए कार्य कर रहे हैं।

मैं आज यहाँ उपस्थित सभी युवा खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह छात्रवृत्ति आपके आत्मविश्वास को और मजबूत करेगी तथा आपको भविष्य में और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी।

अंत में, मैं आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।

आप निरंतर प्रगति करें, नई ऊँचाइयों को प्राप्त करें, और चंडीगढ़ एवं भारत का नाम विश्व पटल पर रोशन करें। इसी शुभकामना के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

धन्यवाद,

जय हिंद!