SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF THE IDOL INSTALLATION AND PRAN PRATISHTHA CEREMONY AT SRI RAM BHAWAN, KHARAR ON MARCH 26, 2026.

श्री राम भवन, खरड़ में मूर्ति स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 26.03.2025, गुरूवार

समयः दोपहर 12:15 बजे

स्थानः खरड़, मोहाली

जय श्री राम!

आज रामनवमी के इस पावन और शुभ अवसर पर, श्री राम मंदिर, महाराजा अज्ज सरोवर, खरड़ की पवित्र भूमि में आयोजित मूर्ति स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा के इस दिव्य समारोह में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मैं स्वयं को अत्यंत गौरवान्वित और धन्य अनुभव कर रहा हूँ। 

सबसे पहले, मैं इस पुण्य कार्य के सूत्रधार और राम मंदिर महाराजा अज्ज सरोवर विकास समिति के अध्यक्ष श्री शशिपाल जैन जी का हृदय से अभिनंदन करता हूँ। उनके नेतृत्व, समर्पण और अथक प्रयासों के बिना इस दिव्य कार्य की कल्पना भी संभव नहीं थी। उनकी पूरी टीम ने जिस निष्ठा और सेवा भाव से इस कार्य को साकार किया है, वह वास्तव में समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

चंडीगढ़ के समीप स्थित खरड़ क्षेत्र, जो जिला मोहाली का एक महत्वपूर्ण भाग है, केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के कारण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ लगभग 152 कनाल में फैला ‘महाराजा अज्ज सरोवर’ इस भूमि की प्राचीन गौरवगाथा का जीवंत साक्षी है।

महाराजा अज्ज, जो भगवान श्रीराम के दादा जी थे, उनके नाम से जुड़ा यह सरोवर सदियों से इस क्षेत्र के लोगों की आस्था और जीवन का केंद्र रहा है। यह सरोवर न केवल जल का स्रोत रहा, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र रहा है। स्थानीय लोगों द्वारा दशकों से इसकी देखरेख करना इस बात का प्रमाण है कि हमारी संस्कृति में प्रकृति और परंपरा के प्रति कितनी गहरी श्रद्धा है।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि पंजाब सरकार द्वारा भी इस सरोवर के संरक्षण एवं विकास हेतु लगभग 9 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। यह प्रयास हमारी विरासत को संजोने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रिय श्रद्धालुओ,

इस पावन सरोवर के तट पर, स्थानीय निवासियों द्वारा अपने सहयोग और समर्पण से निर्मित यह भव्य श्री राम मंदिर जनभागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पिछले दो वर्षों में समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा दान एकत्रित कर लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से इस मंदिर का निर्माण किया गया है।

लगभग साढ़े 17 हजार वर्ग फीट में फैला यह मंदिर एक समय में 5 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को समाहित करने की क्षमता रखता है। यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि आस्था, एकता और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।

यह मंदिर निश्चित रूप से इस क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए श्रद्धा और प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

प्रिय श्रद्धालुजनो,

श्री राम मंदिर, महाराजा अज्ज सरोवर, खरड़ की इस पवित्र भूमि पर आयोजित आज का यह प्राण प्रतिष्ठा समारोह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह उस पवित्र क्षण का प्रतीक है जब हम अपने आराध्य को अपने जीवन और समाज के केंद्र में स्थापित करते हैं। प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ केवल मूर्ति में प्राणों का संचार करना नहीं, बल्कि अपने जीवन में भी उन दिव्य गुणों को धारण करना है, जिनका प्रतिनिधित्व भगवान श्रीराम करते हैं।

भगवान श्रीराम आदर्श जीवन के पथप्रदर्शक हैं। वे केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि जीवन के सर्वोच्च मूल्यों और आदर्शों के प्रतीक हैं। उन्हें ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने हर परिस्थिति में धर्म, सत्य और कर्तव्य का पालन किया।

श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि कर्तव्य को अधिकार से ऊपर रखना चाहिए, परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए, और कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। वनवास, संघर्ष और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने धैर्य, संयम और करुणा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। जैसा कि कहा गया है, “रामो विग्रहवान् धर्मः”, अर्थात श्रीराम स्वयं धर्म के साकार स्वरूप हैं।

आज के इस बदलते और जटिल युग में, जब समाज अनेक नैतिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब भगवान श्रीराम के आदर्श हमारे लिए एक सशक्त मार्गदर्शक के रूप में सामने आते हैं। हम अक्सर ‘रामराज्य’ की कल्पना करते हैं, जिसका अर्थ किसी विशेष शासन व्यवस्था से नहीं, बल्कि एक ऐसे समाज से है जहाँ सभी को समान न्याय मिले, करुणा और सद्भाव का वातावरण हो, और प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान की रक्षा हो।

यदि हम अपने जीवन में श्रीराम के इन आदर्शों को अपनाएँ, तो निश्चित रूप से एक सशक्त, नैतिक और समृद्ध समाज का निर्माण संभव है।

प्रिय श्रद्धालुजनो,

मैं इस अवसर पर एक व्यक्तिगत अनुभव भी साझा करना चाहूँगा। 27 मार्च 2025 को मुझे इस पवित्र स्थल पर आने का अवसर मिला था, और आज ठीक एक वर्ष बाद पुनः यहाँ आकर जो परिवर्तन मैं देख रहा हूँ, वह वास्तव में अद्भुत और अविस्मरणीय है। एक वर्ष के अल्प समय में जिस प्रकार इस भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है, वह समर्पण, आस्था और सामूहिक प्रयास का उत्कृष्ट उदाहरण है।

आज यहाँ भगवान श्री रामलला के दिव्य दरबार के दर्शन करके मैं अत्यंत भाव-विभोर हो गया हूँ। जिस प्रकार से रामलला का दरबार सजाया गया है, उसकी भव्यता, उसकी पवित्रता और उसकी दिव्यता मन को एक अलग ही शांति और आनंद से भर देती है।

विशेष रूप से यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है कि यहाँ महाराजा अज्ज के साथ पूरा राम परिवार विराजमान है, मानो यह दिव्य परिवार आज पूर्णता को प्राप्त हो गया हो। भगवान श्री रामचंद्र जी, माता सीता जी और मर्यादा पुरुषोत्तम के पिताश्री राजा दशरथ जी के साथ सुसज्जित यह दरबार वास्तव में अद्वितीय और विरल है। यह संभवतः ऐसा पहला अवसर है जब इस स्वरूप में पूरा राम दरबार एक साथ साकार रूप में दर्शन दे रहा है। इन पावन दर्शन को पाकर मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली और अभिभूत महसूस कर रहा हूँ।

यह मंदिर वास्तव में एक नया निर्माण नहीं, बल्कि एक पुनर्जन्म है। इस पावन स्थल पर पूर्व में भी मंदिर विद्यमान था, जहाँ श्रद्धालुओं की आस्था निरंतर प्रवाहित होती रही। समय के साथ भले ही इसकी संरचना बदल गई हो, लेकिन यहाँ की आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा कभी समाप्त नहीं हुई। आज हम उसी परंपरा को पुनः जीवंत होते देख रहे हैं।

महाराजा अज्ज सरोवर का यह क्षेत्र अपने आप में एक गौरवशाली इतिहास को समेटे हुए है। यह स्थल हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता, उनकी आस्था और उनके द्वारा स्थापित सांस्कृतिक मूल्यों का जीवंत प्रमाण है। हमारी भारतीय संस्कृति हमें सिखाती है कि हम अपने अतीत से जुड़कर ही भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। ऐसे पवित्र स्थल हमें हमारे पूर्वजों के त्याग, उनकी आस्था और उनकी जीवनशैली की याद दिलाते हैं।

यह सरोवर इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि जब स्थानीय लोग अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए एकजुट हो जाते हैं, तो वे असंभव को भी संभव बना सकते हैं। यह कार्य केवल कुछ व्यक्तियों का नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक चेतना, समर्पण और प्रयासों का परिणाम है।

आज यहाँ केवल मंदिर का पुनरुद्धार ही नहीं हुआ है, बल्कि इस पूरे क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से महाराजा अज्ज सरोवर में पुनः जल भराव के प्रयास इस स्थान को उसके पुराने गौरव की ओर ले जाने का एक सराहनीय कदम है।

जब यह सरोवर पुनः जल से परिपूर्ण होगा, तब यह न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि पर्यावरणीय और पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाएगा।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में यह पवित्र स्थल, महाराजा अज्ज सरोवर, पंजाब में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख “गेटवे” पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। यह स्थान न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी विरासत और हमारी पहचान को पूरे देश और विश्व के सामने प्रस्तुत करेगा।

यह मंदिर हमें एकता, सेवा, श्रद्धा और संस्कारों का संदेश देता है। आइए, हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि हम इस पावन धरोहर की गरिमा को बनाए रखेंगे और आने वाली पीढ़ियों को भी इसकी महत्ता से परिचित कराएंगे।

याद रखिए, जब समाज अपने मूल्यों को पहचान लेता है, तभी वह सच्ची प्रगति की ओर अग्रसर होता है।

आज इस राम नवमी के पावन दिवस पर, जब इस भव्य मंदिर में प्रभु श्री राम के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा हो रही है, तो हमें यह संकल्प भी लेना चाहिए कि हम केवल मंदिर में ही नहीं, बल्कि अपने हृदयों में भी राम के आदर्शों की प्राण-प्रतिष्ठा करें। सत्य, धर्म, मर्यादा और सबके प्रति प्रेम, यही भगवान राम का वास्तविक संदेश है।

मैं एक बार फिर इस पुनीत कार्य के लिए समिति के हर एक सदस्य, दानदाताओं और हर उस मजदूर व कारीगर को प्रणाम करता हूँ जिसके पसीने की बूंद इस मंदिर की नींव में शामिल है। भगवान श्री राम आप सभी के परिवारों में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य प्रदान करें।

अंत में, मैं प्रभु श्री राम से प्रार्थना करता हूँ कि वे हम सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें, इस पावन स्थल को सदैव समृद्धि, शांति और दिव्यता से परिपूर्ण रखें।

धन्यवाद,

जय हिन्द!