SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF STATE LEVEL WORKSHOP ON AADHAAR ECOSYSTEM PUNJAB AND CHANDIGARH ON MARCH 24, 2026.
- by Admin
- 2026-03-24 13:25
आधार इकोसिस्टम से जुड़े राज्य स्तरीय कार्यशाला के अवसर पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 24.03.2026, मंगलवार समयः सुबह 11:00 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
मुझे आज ‘आधार पारिस्थितिकी तंत्र’ (Aadhaar Ecosystem) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में आप सभी के बीच उपस्थित होकर बेहद प्रसन्नता हो रही है।
सबसे पहले, मैं इस ज्ञानवर्धक और समयबद्ध पहल के लिए पंजाब और चंडीगढ़ के संबंधित विभागों की सराहना करता हूँ, जो भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यू.आई.डी.ए.आई.) (Unique Identification Authority of India) के साथ मिलकर ‘सुशासन’ के सबसे सशक्त माध्यम ‘आधार’ पर मंथन कर रहे हैं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि पंजाब और चंडीगढ़ के लिए आयोजित यह राज्य स्तरीय कार्यशाला हमारे लोगों के जीवन को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
देवियो और सज्जनो,
जैसा कि आप सभी जानते हैं, आधार पूरे देश में लोगों को भौतिक और वित्तीय लाभों के वितरण के लिए मूलभूत पहचान बन गया है। इसने उन लोगों को सामाजिक समावेशन में सक्षम बनाया है जिनकी अन्यथा ऋण या सामाजिक कल्याण तक पहुँच नहीं थी।
बच्चे के जन्म और पंजीकरण के समय से ही, आधार एक सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत पहचान के रूप में कार्य करता है, जिससे जीवन सरल, सुविधाजनक और कुशल बन जाता है, चाहे वह मिड-डे मील योजना का लाभ उठाना हो, छात्रवृत्ति प्राप्त करना हो, नौकरी, सेवा, पेंशन या स्वास्थ्य लाभ के लिए अपनी पहचान साबित करना हो।
2010 में अपनी स्थापना के बाद से आधार में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि आधार नामांकन, अपडेट और प्रमाणीकरण प्रणाली में बदलाव लाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं और उठाए जा रहे हैं, जिससे यह प्रणाली अधिक सुविधाजनक और कुशल बन गई है।
ऑनलाइन यूसी क्लाइंट, फेस ऑथेंटिकेशन और नए आधार ऐप के लॉन्च जैसी नई व्यवस्थाएं दर्शाती हैं कि यू.आई.डी.ए.आई. प्राधिकरण निवासियों की प्रतिक्रियाओं को गंभीरता से ले रहा है और सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं तथा अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग के माध्यम से सेवा वितरण में सुधार लाने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
मुझे विश्वास है कि आज की कार्यशाला में इनमें से कुछ या सभी पहलों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
देवियो और सज्जनो,
एक समय था जब इस देश के आम नागरिक, विशेषकर हमारे ग्रामीण और वंचित तबके के लोग, अपनी पहचान साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते थे। आज, ‘‘मेरा आधार, मेरी पहचान’’ केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के लिए सशक्तिकरण, सम्मान और अधिकार का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है।
आधार आज केवल 12 अंकों की एक संख्या या एक प्लास्टिक का कार्ड नहीं है। यह विश्व का सबसे बड़ा और सबसे सफल ‘बायोमेट्रिक पहचान तंत्र’ है, जिसने भारत को वैश्विक पटल पर ‘डिजिटल गवर्नेंस’ के एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया है।
आज आधार ने शासन और नागरिकों के बीच की दूरी को कम किया है। इसने करोड़ों लोगों को एक सुरक्षित, अद्वितीय और सार्वभौमिक पहचान प्रदान की है, जिससे वे विभिन्न सरकारी और निजी सेवाओं का सहज लाभ उठा पा रहे हैं।
आधार ने सेवा वितरण प्रणाली में अभूतपूर्व परिवर्तन लाया है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सरकारी सब्सिडी और आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और भ्रष्टाचार में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक, सही समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे।
आधार केवल एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि एक व्यापक इकोसिस्टम है, जिसमें प्रमाणीकरण, ई-केवाईसी, आधार आधारित भुगतान प्रणाली तथा डिजिलॉकर जैसी अनेक सेवाएं शामिल हैं। यह इकोसिस्टम विभिन्न विभागों और सेवाओं को एकीकृत करता है, जिससे नागरिकों को तेज, सरल और सुरक्षित सेवाएं प्राप्त होती हैं।
आधार के उपयोग से नागरिकों को अनेक लाभ प्राप्त हुए हैं। बायोमेट्रिक आधारित पहचान से सटीकता सुनिश्चित होती है, जिससे त्रुटियों की संभावना कम होती है। एक ही पहचान के माध्यम से विभिन्न सेवाओं का लाभ उठाना आसान हो गया है। पारदर्शिता बढ़ी है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है और डिजिटल सेवाओं तक आम नागरिक की पहुंच सुलभ हुई है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ जैसी योजनाएँ भी आधार के बिना संभव नहीं थीं, जिनकी बदौलत आज पंजाब और चंडीगढ़ का कोई भी पात्र नागरिक भारत के किसी भी कोने में जाकर अपने हिस्से का राशन प्राप्त कर सकता है।
हालांकि, इन सभी लाभों के साथ-साथ जन-जागरूकता का अत्यंत महत्व है। यह आवश्यक है कि नागरिक आधार के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के प्रति सजग रहें। उन्हें यह जानकारी होनी चाहिए कि अपने बायोमेट्रिक डेटा की सुरक्षा कैसे करें, किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, फर्जी कॉल या ओ.टी.पी. साझा करने जैसी गलतियों से कैसे बचें।
आधार ऑपरेटरों और नोडल अधिकारियों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे तकनीक का सही उपयोग करने के साथ-साथ जनता को साइबर धोखाधड़ी के प्रति भी सचेत करें। जागरूक नागरिक ही इस प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बना सकते हैं।
हम सभी जानते हैं कि सुरक्षा और गोपनीयता आधार प्रणाली के मूल में हैं। इसमें उन्नत एन्क्रिप्शन (Encryption) तकनीकों का उपयोग किया जाता है और डेटा का उपयोग नियंत्रित एवं सीमित तरीके से किया जाता है। कानूनी प्रावधानों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहे और उसका दुरुपयोग न हो।
भविष्य की दृष्टि से देखें तो अब आधार इकोसिस्टम निरंतर विकसित हो रहा है। नई डिजिटल सेवाओं का समावेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग तथा सेवा वितरण में और अधिक दक्षता लाने के प्रयास इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
देवियो और सज्जनो,
पंजाब और चंडीगढ़ अपने निवासियों को आधार कार्ड उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भागीदार हैं और मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि दोनों सरकारें इस क्षेत्र में अच्छा काम कर रही हैं। हालांकि, अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। जारी किए गए दस्तावेजों का डिजिटलीकरण और उनकी डिजिटल सत्यापन क्षमता सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण कदम है।
इसी प्रकार, यू.आई.डी.ए.आई. प्राधिकरण द्वारा पिछले वर्ष शुरू किए गए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट अभियान को मिशन मोड में लागू करने की आवश्यकता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि उन क्षेत्रों में आधार के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए जहां पहचान स्थापित करने की आवश्यकता होती है।
इसके अलावा, सर्वोत्तम तकनीकी पद्धतियों और आधार में निर्मित सुविधाओं के माध्यम से अपनी पहचान की सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।
हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आधार समावेशन का साधन बने और किसी भी पात्र व्यक्ति को आधार कार्ड या उस सेवा या लाभ से वंचित न किया जाए जिसका वह हकदार है।
साथियो,
हमारा सर्वोच्च लक्ष्य देश के प्रत्येक नागरिक के लिए ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ सुनिश्चित करना है। और यह सुगमता तभी आ सकती है जब हमारा ‘सेवा वितरण तंत्र’ मजबूत, पारदर्शी और बाधारहित हो। इस कार्यशाला के माध्यम से हमें यह मंथन करना है कि हम अपनी वर्तमान वितरण प्रणालियों में मौजूद छोटी-मोटी कमियों को कैसे दूर कर सकते हैं और तकनीक का उपयोग करके कतारों को कैसे खत्म कर सकते हैं, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी उसका अधिकार बिना किसी परेशानी के मिल सके।
जब हम इन सुधारों, तकनीकी प्रगति और ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ की बात करते हैं, तो हमें यह सदैव स्मरण रखना चाहिए कि ये सभी प्रयास एक व्यापक और ऐतिहासिक राष्ट्रीय संकल्प का हिस्सा हैं, और वह संकल्प है माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत 2047’ का निर्माण।
भारत ने आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने तक एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनने का जो लक्ष्य रखा है, उसकी मजबूत नींव डिजिटल इंडिया और पारदर्शी सुशासन पर ही टिकी है। किसी भी देश को ‘विकसित’ बनाने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ बिना किसी भेदभाव और भ्रष्टाचार के पहुँचे। आधार जैसी अभेद्य और पारदर्शी डिजिटल पहचान प्रणाली इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने का सबसे प्रामाणिक माध्यम है।
आज जब हम ‘विकसित भारत’ की ओर तेज़ी से कदम बढ़ा रहे हैं, तो सरकारी योजनाओं में 100 प्रतिशत संतृप्ति (Saturation) के लक्ष्य को प्राप्त करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, अर्थात हर पात्र व्यक्ति को उसके अधिकार का लाभ अवश्य मिले।
आप सभी अधिकारी, ऑपरेटर और हितधारक जो इस कार्यशाला में उपस्थित हैं, आप केवल एक व्यवस्था का संचालन नहीं कर रहे हैं, बल्कि वास्तव में आप इस नए और विकसित भारत के सजग वास्तुकार हैं। आपके द्वारा किए गए तकनीकी सुधार राष्ट्र निर्माण में सीधा योगदान दे रहे हैं।
साथियो,
सुशासन एक सामूहिक प्रयास है। इस कार्यशाला का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू नई नीतिगत पहलों पर सार्थक चर्चा करना है। जब नीतियां ज़मीनी हकीकत को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं, तो उनके परिणाम हमेशा सकारात्मक होते हैं।
इसके साथ ही, इस पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े सभी भागीदारों चाहे वह यू.आई.डी.ए.आई. प्राधिकरण हो, राज्य सरकार के विभाग हों, बैंक हों या फिर ज़मीनी स्तर के ऑपरेटर हों, उनके बीच एक मजबूत और निर्बाध समन्वय स्थापित करना समय की सबसे बड़ी मांग है। केंद्र और राज्यों के बीच का यह बेहतरीन तालमेल ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता है कि इस कार्यशाला के माध्यम से हम न केवल चुनौतियों पर चर्चा करेंगे, बल्कि समाधानों का भी जश्न मनाएंगे। यह मंच यू.आई.डी.ए.आई. और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा अपनाई गई ‘सर्वाेत्तम प्रथाओं और नवाचारों’ को साझा करने और प्रदर्शित करने का एक सुनहरा अवसर है।
यदि किसी एक राज्य या जिले ने आधार के उपयोग से सार्वजनिक वितरण प्रणाली या शिक्षा के क्षेत्र में कोई शानदार नवाचार किया है, तो उस मॉडल के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाई जानी चाहिए ताकि अन्य राज्य भी उसे अपना सकें। ज्ञान और अनुभव का यह आदान-प्रदान ही इस कार्यशाला की वास्तविक सफलता होगी।
अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि तकनीक अपने आप में केवल एक साधन है; इसका असली मूल्य तब स्थापित होता है जब यह अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को आसान और बेहतर बनाती है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह राज्य स्तरीय कार्यशाला, आधार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी और आप यहाँ से जो भी व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करेंगे, उसका उपयोग पंजाब और चंडीगढ़ के नागरिकों को और अधिक बेहतरीन व पारदर्शी सेवाएँ प्रदान करने में करेंगे।
इसी के साथ, मैं आप सभी को आज की चर्चाओं के लिए शुभकामनाएं देता हूं।
धन्यवाद,
जय हिंद!