SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF 5TH ANNUAL CONVOCATION OF SRI GURU GRANTH SAHIB WORLD UNIVERSITY AT FATEHGARH SAHIB ON APRIL 11, 2026.
- by Admin
- 2026-04-11 15:05
‘श्री गुरू ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन | ||
| दिनांकः 11.04.2026, शनिवार | समयः सुबह 11:50 बजे | स्थानः श्री फतेहगढ़ साहिब |
नमस्कार!
आज इस पावन, गरिमामय और ऐतिहासिक अवसर पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत सम्मान, गर्व और आत्मिक संतोष का विषय है। दीक्षांत समारोह केवल उपाधियाँ प्राप्त करने का दिन नहीं है, बल्कि यह आपके वर्षों के कठोर परिश्रम, समर्पण और आपके माता-पिता के त्याग का उत्सव है।
सबसे पहले मैं आज उपाधिक प्राप्त करने वाले सभी 673 छात्र-छत्राओं को उनके इस महत्वपूर्ण मील के पत्थर के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। इनमें 32 पीएच.डी. उपाधि प्राप्त करने वाले शोधार्थी, 27 स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी, 120 पोस्टग्रेजुएट विद्यार्थी, और 494 ग्रेजुएट विद्यार्थी शामिल हैं।
आज आप जिस प्रतिष्ठित संस्थान से शिक्षा ग्रहण कर अपने जीवन के एक नये अध्याय की शुरूआत करने जा रहे हैं, वह केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, आध्यात्मिक चेतना और अकादमिक उत्कृष्टता का एक ऐसा उज्ज्वल दीपस्तंभ है, जो न केवल विद्यार्थियों के भविष्य को आलोकित करता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के मार्ग को भी दिशा प्रदान करता है।
वर्ष 2008 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी की स्थापना केवल एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में नहीं की गई थी, बल्कि इसके पीछे एक महान विज़न था। इसका उद्देश्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समानता, शांति, करुणा और आध्यात्मिक जागृति के सार्वभौमिक संदेश को विश्व पटल पर स्थापित करना है।
अपने स्थापना काल से ही इस संस्थान ने अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान और नैतिक शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। यह संस्थान न केवल विज्ञान, तकनीक और मानविकी की आधुनिक शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि हमारे युवाओं को उनकी गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से भी जोड़े हुए है। यहाँ से प्राप्त शिक्षा आपको केवल एक सफल पेशेवर ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट इंसान भी बनाती है।
137 एकड़ में फैला यह परिसर परंपरा और आधुनिकता का संतुलित संगम प्रस्तुत करता है तथा जाति, पंथ, लिंग और धर्म से परे समावेशी एवं मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करता है।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाओं से प्रेरित यह संस्थान विद्यार्थियों के भीतर केवल बौद्धिक क्षमता का विकास नहीं करता, बल्कि उनके व्यक्तित्व में नैतिकता, सेवा, करुणा, सत्यनिष्ठा और मानवता के उच्चतम मूल्यों का भी संचार करता है। यह देखना अत्यंत हर्ष और संतोष का विषय है कि यह विश्वविद्यालय समग्र शिक्षा के सिद्धांतों का अनुपालन करते हुए ऐसे नागरिक तैयार कर रहा है, जो ज्ञानवान होने के साथ-साथ संवेदनशील, उत्तरदायी और नैतिक रूप से दृढ़ हैं।
यह विश्वविद्यालय 11 संकायों के माध्यम से व्यापक शैक्षणिक ढांचा प्रदान करता है, जिनमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब अध्ययन, कृषि, बेसिक एवं एप्लाइड साइंसेज, वाणिज्य एवं प्रबंधन, शिक्षा एवं सूचना विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, भाषाएँ, विधि, प्रदर्शन कला, चिकित्सा विज्ञान तथा सामाजिक विज्ञान शामिल हैं। अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, स्मार्ट कक्षाएँ और पुस्तकालय “लर्निंग बाय डूइंग” की अवधारणा को साकार करते हैं।
समावेशिता इसकी प्रमुख विशेषता है। छात्रवृत्तियों पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये व्यय किए जाते हैं तथा 150 जरूरतमंद छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा दी जाती है। साथ ही, छात्रों और संकाय सदस्यों की 70 प्रतिशत से अधिक महिला सहभागिता इस संस्थान को लैंगिक समानता का आदर्श बनाती है।
पर्यावरण संरक्षण हेतु वर्षा जल संचयन, जल शोधन संयंत्र, हरित पट्टी और औषधीय उद्यान जैसे प्रयास सराहनीय हैं। साथ ही, 20 एकड़ में फैला खेल परिसर, योग केंद्र और सांस्कृतिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों के समग्र विकास को सुनिश्चित करते हैं।
करियर मार्गदर्शन, लगभग 50 प्रतिशत प्लेसमेंट दर और पिछले पाँच वर्षों में 20 स्टार्ट-अप की स्थापना विश्वविद्यालय की प्रगतिशील सोच को दर्शाती है।
यह विश्वविद्यालय “सरबत दा भला” के सिद्धांत पर चलते हुए शिक्षा को समाज परिवर्तन का माध्यम बना रहा है और विकसित भारत 2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रिय विद्यार्थियों,
आज का यह अवसर आपके जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि और आपके अथक परिश्रम, समर्पण और धैर्य का प्रतिफल है। इस विशेष क्षण पर, मैं फ़तेहगढ़ साहिब की पावन धरती को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ। यह वह भूमि है जहाँ साहस, आस्था और बलिदान की अमिट गाथाएँ इतिहास के स्वर्णिम पत्रों में अंकित हुई हैं।
साहिबज़ादा बाबा जोरावर सिंह और साहिबज़ादा बाबा फ़तेह सिंह का बलिदान केवल सिख इतिहास का ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के इतिहास का एक उज्ज्वल और प्रेरणादायक अध्याय है। अत्यंत कम आयु में भी उन्होंने जिस अदम्य साहस, अटूट विश्वास और अडिग संकल्प का परिचय दिया, वह हमें यह सिखाता है कि सच्चे मूल्यों की रक्षा के लिए उम्र नहीं, बल्कि आत्मबल और आस्था की आवश्यकता होती है।
फ़तेहगढ़ साहिब का इतिहास हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में सच्चाई और न्याय के मार्ग पर चलना सदैव सरल नहीं होता। अनेक बार परिस्थितियाँ प्रतिकूल होती हैं, चुनौतियाँ कठिन होती हैं और मार्ग कठिनाइयों से भरा होता है। किन्तु जो व्यक्ति अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है, जो सत्य और धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होता, वही अंततः इतिहास में अमर हो जाता है और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।
साहिबज़ादों की शहादत हमें यह स्मरण कराती है कि नैतिकता, ईमानदारी और साहस केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन के वह आधार स्तंभ हैं, जिन पर एक सशक्त और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण होता है।
आज जब आप अपने जीवन की एक नई यात्रा की ओर अग्रसर हो रहे हैं, तो यह आवश्यक है कि आप इन महान आदर्शों को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं। अपने भीतर साहस, निष्ठा और सेवा की भावना को सजीव रखें। अन्याय, असमानता और अधर्म के विरुद्ध खड़े होने का साहस रखें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।
आपके द्वारा प्राप्त यह शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब पह केवल आपके व्यक्तिगत उत्थान तक सीमित न रहकर समाज और मानवता के व्यापक हित में प्रयुक्त होगी।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की वाणी हमें यह सिखाती है कि सच्चे मार्ग पर चलने वाला कभी अकेला नहीं होता। भाई गुरदास जी का प्रेरणादायक वचन, ‘‘चरन शरण गुरु एक पैंडा जाए चल, सतिगुर कोटि पैंडा आगै होए लेत है।’’, हमें यह विश्वास दिलाता है कि यदि हम सच्चे मन और निष्ठा के साथ एक कदम भी सत्य और धर्म की ओर बढ़ाते हैं, तो गुरु की कृपा हमें अनंत गुना आगे बढ़ाती है और हमारे जीवन के मार्ग को सुगम बनाती है। यह संदेश हमें आस्था, समर्पण और सकारात्मक कर्म की शक्ति का बोध कराता है।
प्रिप विद्यार्थियों,
यह दीक्षांत समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह आपकी वर्षों की कठिन साधना, निरंतर प्रयास और अटूट विश्वास का उत्सव है। यह वह क्षण है, जब आप अपने अतीत की उपलब्धियों पर गर्व करते हुए भविष्य की संभावनाओं की ओर आशा और उत्साह के साथ देखते हैं। यह आपके माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के अथक परिश्रम और त्याग का भी सम्मान है, जिन्होंने हर कदम पर आपका मार्गदर्शन किया और आपको इस मुकाम तक पहुँचाया।
जैसे ही आप इस विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण से बाहर निकलकर व्यापक विश्व में प्रवेश करेंगे, आप एक ऐसे युग का सामना करेंगे जो तीव्र परिवर्तन, नवाचार और वैश्विक चुनौतियों से परिपूर्ण है। आज का समय केवल ज्ञान प्राप्त करने का नहीं, बल्कि उस ज्ञान को व्यवहार में उतारने का है। ऐसे में यह अत्यंत आवश्यक है कि आप अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के कल्याण, मानवता की सेवा और राष्ट्र के विकास के लिए करें।
भारत और विशेष रूप से पंजाब एक परिवर्तनशील दौर से गुजर रहे हैं। तकनीकी उन्नति, औद्योगिक विकास, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और खास कर के ए.आई. ने नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं, किन्तु साथ ही अनेक चुनौतियाँ भी प्रस्तुत की हैं। ऐसे समय में आपकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। आप केवल अपने भविष्य के निर्माता नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य के भी शिल्पकार हैं। आपमें से प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप अपने भीतर नवाचार की भावना, आलोचनात्मक दृष्टि और मानवीय संवेदनशीलता को विकसित करें। केवल सफलता प्राप्त करना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा जीवन जीना अधिक महत्वपूर्ण है जो दूसरों के लिए प्रेरणा बने और समाज में सार्थक योगदान दे।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की महान शिक्षा ‘सरब दा भला’ हमें यह सिखाती है कि हमारा जीवन केवल हमारे लिए नहीं, बल्कि समस्त मानवता के कल्याण के लिए होना चाहिए। इस सिद्धांत को अपने जीवन का आधार बनाएं। चाहे आप किसी भी क्षेत्र में कार्य करें, आपकी प्राथमिकता सेवा, सहानुभूति और न्याय की स्थापना होनी चाहिए।
मानवता की सेवा केवल बड़े और असाधारण कार्यों तक सीमित नहीं है। जीवन के छोटे-छोटे कार्य-जैसे किसी जरूरतमंद की सहायता करना, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना, या सत्य के पक्ष में खड़े होना-भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यही छोटे प्रयास मिलकर समाज में बड़े परिवर्तन का कारण बनते हैं।
प्रिय विद्यार्थियों,
आप भारत के भविष्य हैं और आपके कंधों पर केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का दायित्व है। जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर मैं आपसे यही कहना चाहूँगा कि आगे बढ़ते हुए आपको अनेक चुनौतियों और असफलताओं का सामना करना पड़ेगा, लेकिन इन्हीं परिस्थितियों में आपका वास्तविक चरित्र और क्षमता निखरती है। सदैव यह स्मरण रखें कि सफलता उन्हीं को मिलती है जो कठिनाइयों के सामने हार नहीं मानते।
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी के प्रेरणादायी शब्द हमें मार्ग दिखाते हैं कि “सपना वह नहीं जो आप सोते समय देखते हैं, बल्कि सपना वह है जो आपको सोने न दे।” यह केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक दृष्टिकोण है, जो हमें निरंतर आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।
आज के तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में आप सभी के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि आप स्वयं को भविष्य के लिए तैयार करें और नई कौशलों को निरंतर सीखते रहें। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई), डेटा विश्लेषण, डिजिटल तकनीक, हरित प्रौद्योगिकी और संचार कौशल जैसे क्षेत्रों में दक्षता आपको प्रतिस्पर्धी बनाएगी।
उदाहरण के लिए, एक इंजीनियर यदि ए.आई. और मशीन लर्निंग का ज्ञान भी रखता है, या एक कृषि छात्र यदि ड्रोन तकनीक और स्मार्ट फार्मिंग को अपनाता है, तो उसकी उपयोगिता कई गुना बढ़ जाती है। इसी प्रकार, उद्यमिता, समस्या समाधान और टीम वर्क जैसी क्षमताएँ आपको किसी भी क्षेत्र में सफल बना सकती हैं। इसलिए सीखने की प्रक्रिया को कभी समाप्त न होने दें।
आज भारत एक नए युग की ओर अग्रसर है और “विकसित भारत 2047” का संकल्प हमारे सामने है। इस महान लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपको नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और नैतिक नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
समय की आवश्यकता यह है कि आप केवल रोजगार खोजने वाले न बनें, बल्कि ऐसे सृजनकर्ता बनें जो नए अवसर उत्पन्न करें और दूसरों के लिए भी रोजगार के द्वार खोलें। यही सोच आपको व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देने के योग्य बनाएगी।
साथ ही, मैं आप सभी युवाओं का ध्यान पंजाब के सामने उपस्थित नशे की गंभीर चुनौती की ओर भी आकर्षित करना चाहता हूँ। यह केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज, परिवार और राष्ट्र के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। नशा युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और सपनों को नष्ट कर देता है।
आप सभी से मेरा आग्रह है कि स्वयं इस बुराई से दूर रहें और अपने मित्रों व समाज को भी जागरूक करें। खेल, शिक्षा, योग और सकारात्मक गतिविधियों को अपनाकर हम इस समस्या का समाधान कर सकते हैं। हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम न केवल नशा-मुक्त जीवन जीएंगे, बल्कि “नशा-मुक्त पंजाब” के निर्माण में सक्रिय भागीदारी भी निभाएंगे।
इस अवसर पर, मैं सभी अभिभावकों और संकाय सदस्यों को अपनी हार्दिक बधाई और धन्यवाद देता हैं। आपके मार्गदर्शन, समर्पण और त्याग के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। आपने इन विद्यार्थियों को न केवल शिक्षित किया, बल्कि उन्हें जीवन के मूल्यों से भी परिचित कराया।
अंत में, मैं आप सभी विद्यार्थियों से यही कहना चाहूँगा कि जीवन में निरंतर सीखते रहें, अपने मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहें और हर परिस्थिति में विनम्रता बनाए रखें। सफलता आपके जीवन में अवश्य आएगी, लेकिन यह अत्यंत आवश्यक है कि आप अपनी जड़ों से जुड़े रहें और सेवा की भावना को कभी न भूलें।
आपकी उपलब्धियाँ आपके परिवार, आपके विश्वविद्यालय और आपके राष्ट्र के लिए गौरव का कारण बनें, इसी मंगलकामना के साथ मैं आप सभी को उज्ज्वल, सफल और सार्थक भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह!
धन्यवाद,
जय हिंद!