SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF 75 YEARS EXCELLENCE AVON CYCLES PLATINUM JUBILEE CELEBRATION AT LUDHIANA ON APRIL 14, 2026.
- by Admin
- 2026-04-14 15:05
एवन साइकिल्स के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित समारोह पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 14.04.2026, मंगलवार समयः दोपहर 12:00 बजे स्थानः लुधियाना
नमस्कार!
आज लुधियाना की इस ऊर्जावान धरती पर आप सबके बीच उपस्थित होना मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है। लुधियाना, जो भारत की साइकिल निर्माण राजधानी कहलाता है, आज एवन साइकिल्स के 75 वर्ष पर्णू होने का साक्षी बन रहा है।
कुछ अवसर औपचारिकता के होते हैं, लेकिन आज का यह अवसर गर्व का विषय है। 75 वर्षों की निरंतर यात्रा केवल एक आँकड़ा नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के संकल्प, परिश्रम और मूल्यों का प्रतीक है, जिन्होंने इस संस्था को बनाया और इसे आगे बढ़ाया।
इस गौरवशाली यात्रा की शुरुआत बेहद साधारण थी, जो उद्यमशील पंजाबी भावना का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। देश के विभाजन के बाद, स्वतंत्रता के शुरुआती दौर में वर्ष 1947 में, दूरदर्शी पाहवा बंधुओं ने यह सपना देखा कि आम आदमी को सुलभ और किफायती परिवहन का साधन उपलब्ध कराया जाए।
वर्ष 1951 में पाहवा बंधुओं, श्री हंसराज पाहवा, सरदार जगत सिंह पाहवा और श्री सोहन लाल पाहवा ने मिलकर एवन साइकिल्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। उनका बड़ा सपना एक ऐसी स्वदेशी साइकिल निर्माण कंपनी स्थापित करना था, जो आयातित ब्रांडों को टक्कर दे सके और राष्ट्र की आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दे। अपने अटूट संकल्प और दूरदर्शिता के साथ उन्होंने साइकिल निर्माण का लाइसेंस प्राप्त किया, और इसी के साथ भारत के साइकिल उद्योग में एक नए युग की शुरुआत हुई।
यह यात्रा आसान नहीं थी। यह यात्रा है, गुणवत्ता से समझौता न करने की, बदलते समय के साथ नई तकनीक को अपनाने की, और करोड़ों भारतीयों का भरोसा जीतने की। एवन ने केवल साइकिलें नहीं बनाईं, बल्कि उसने आम हिंदुस्तानी को रफ्तार दी, एक मज़दूर को उसके कारखाने तक पहुँचाया, एक छात्र को उसके स्कूल तक पहुँचाया और देश की प्रगति के पहिये को गति दी।
किसी कवि ने बहुत खूब कहा है, ‘‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’’ पाहवा परिवार और एवन के हर एक कर्मचारी ने अपने हौसलों से यह उड़ान भरी है।
गर्व का विषय है कि एवन साइकिल्स के अध्यक्ष ओंकार सिंह पाहवा जी के नेतृत्व में आज एवन साइकिल्स के पास 400 से अधिक उत्पादों का एक विस्तृत पोर्टफोलियो है, जो देशभर में 3000 से अधिक बिक्री केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध है, जिनमें 100 से अधिक विशेष (एक्सक्लूसिव) स्टोर भी शामिल हैं। वर्ष 2025 से कंपनी की वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 30 लाख साइकिलों तक पहुँच चुकी है। अपनी गुणवत्ता, नवाचार और विश्वसनीयता के दम पर एवन साइकिल्स आज भारत के अग्रणी साइकिल ब्रांडों में अपना एक मजबूत और सम्मानित स्थान बनाए हुए है।
व्यापार की दुनिया में 75 वर्ष का सफर असाधारण होता है। अधिकांश संस्थान एक दशक भी नहीं टिक पाते, और बहुत कम ही 25 वर्षों से आगे बढ़ पाते हैं। ऐसे में 75 वर्षों तक निरंतर प्रगति करना एक दुर्लभ उपलब्धि है।
इस संस्था ने आर्थिक उदारीकरण, वैश्वीकरण, तकनीकी बदलाव और वैश्विक महामारी जैसी अनेक चुनौतियों का सामना किया है, और हर बार और अधिक मजबूत होकर उभरी है। यह केवल भाग्य नहीं, बल्कि संस्था के चरित्र और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।
आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो पाते हैं कि एवन साइकिल की यह 75 वर्ष की यात्रा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न का एक जीवंत और बहुत पुराना उदाहरण है। आपने दशकों पहले ही दुनिया को यह दिखा दिया था कि भारतीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर किसी से कम नहीं हैं।
आज के समय में साइकिल केवल एक साधारण वाहन नहीं रह गई है। भारत सरकार के ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ को ज़मीनी स्तर पर साकार करने में साइकिलिंग का सबसे बड़ा योगदान है। इसके साथ ही, जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौती से जूझ रही है और हमारा देश ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है, तब साइकिल पर्यावरण संरक्षण का सबसे सशक्त और ‘ग्रीन’ माध्यम है।
मुझे यह जानकर और भी अधिक प्रसन्नता होती है कि एवन ग्रुप केवल व्यापार और मुनाफे तक सीमित नहीं है। आपने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत समाज की जो सेवा की है, वह वंदनीय है। चाहे ‘माता कौशल्या देवी पाहवा चैरिटेबल अस्पताल’ के माध्यम से लाखों लोगों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना हो, शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना हो, या लुधियाना को हरा-भरा बनाने के लिए वृक्षारोपण अभियान चलाना हो, एवन ने हमेशा यह साबित किया है कि सच्चा उद्योगपति वही है जो समाज को अपना परिवार माने।
हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है, ‘‘परोपकाराय सताम् विभूतयः’’ यानी सज्जनों की संपत्ति हमेशा दूसरों की भलाई के लिए होती है और एवन ने इस श्लोक को पूरी तरह से चरितार्थ किया है।
देवियो और सज्जनो,
साइकिल मानव जीवन का एक मौलिक और लोकतांत्रिक साधन है जो हर किसी के लिए सुलभ है। यह भारत सरकार के LiFE (Lifestyle for Environment) मिशन से पूरी तरह जुड़ा हुआ है, जो हमें सतत जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
पिछले दो सौ वर्षों में साइकिल ने अपनी प्रासंगिकता और उपयोगिता को सिद्ध किया है। हालांकि, मोटर चालित परिवहन ने लंबे समय तक प्रभुत्व बनाए रखा है, लेकिन साइकिल ने अपने अपार स्वास्थ्य, पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों के कारण वैश्विक स्तर पर अपना सम्मानजनक स्थान बनाए रखा है।
ग्रामीण भारत के लिए यह केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि जीवन रेखा है। उनके लिए यह स्कूल, कार्यस्थल, बाज़ार और अवसरों तक पहुँचने का एक उपयोगी साधन है।
देवियो और सज्जनो,
मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि हमारा लुधियाना शहर उद्योग जगत का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है, जिसके चलते इसे ‘भारत का मैनचेस्टर’ कहा जाता है।
यहाँ की औद्योगिक इकाइयाँ न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करती हैं। यदि विश्वपटल पर हरित क्रांति के बाद पंजाब को किसी अन्य क्षेत्र में पहचान मिली है, तो वह लुधियाना का साइकिल उद्योग है।
लुधियाना को साइकिल निर्माण की राजधानी भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ भारत की लगभग 90 प्रतिशत साइकिलों का उत्पादन होता है और करीब 4 हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग प्रतिवर्ष 2 करोड़ से अधिक साइकिलें बनाते हैं। यह हमें चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा साइकिल निर्माता बनाता है, जो हमारे लिए गर्व की बात है। 5 लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इन उद्योगों से जुड़े हैं, जिससे यह शहर ‘भारत की औद्योगिक धड़कन’ बन गया है।
लुधियाना शहर ने हमें साइकिल उद्योग से जुड़े उद्योगपतियों सहित और भी बहुत से उद्योगपति दिए हैं जिन्होंने देश-विदेश में राज्य का नाम रोशन किया है। इनमें भारती एंटरप्राइज़िस के संस्थापक श्री सुनील भारती मित्तल, ट्राईडेंट ग्रुप के संस्थापक श्री राजिंदर गुप्ता, हीरो साइकिल्स के संस्थापक स्व. श्री ओम प्रकाश मुंजाल जी और वर्धमान ग्रुप के संस्थापक श्री एस.पी. ओसवाल शामिल हैं। इसके अलावा यहां पर क्रैमिका, किट्टी और बॉन ब्रेड जैसी कंपनियां भी स्थापित हैं।
साथियो,
लुधियाना के औद्योगिक विकास की चर्चा करते हुए हम उस गंभीर चुनौती को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते, जो हमारे पर्यावरण और भविष्य के लिए खतरा बन चुकी है, ‘बुड्ढा नाला’ का प्रदूषण। जो जलधारा कभी अपने स्वच्छ जल के कारण ‘बुड्ढा दरिया’ कहलाती थी, वह आज औद्योगिक कचरे, रसायनों और अनुपचारित सीवेज के कारण अत्यधिक प्रदूषित हो चुकी है।
विशेष रूप से डाइंग और इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योगों से निकलने वाले ज़हरीले अपशिष्ट ने इस जलधारा को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जो आगे चलकर सतलुज नदी में मिलकर पूरे क्षेत्र के पेयजल, कृषि भूमि और लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है। यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर एक गंभीर प्रश्न है।
आज मैं सभी उद्योगपतियों और नागरिकों से अपील करता हूँ कि ‘बुड्ढा नाला’ को पुनर्जीवित करना अपनी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी समझें। उद्योगों में जल शोधन संयंत्रों का प्रभावी उपयोग करें और ‘ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ जैसे मानकों को अपनाएं। आर्थिक विकास तभी सार्थक है, जब वह प्रकृति और समाज के साथ संतुलन में हो।
आइए, हम सब मिलकर ‘रंगले पंजाब’ को ‘प्रदूषण-मुक्त पंजाब’ बनाने का संकल्प लें, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ स्वच्छ जल और स्वस्थ पर्यावरण की विरासत प्राप्त कर सकें। यदि प्रशासन, उद्योग और समाज मिलकर कार्य करें, तो ‘बुड्ढा नाला’ को फिर से जीवनदायिनी ‘बुड्ढा दरिया’ बनाने का लक्ष्य अवश्य प्राप्त किया जा सकता है।
देवियो और सज्जनो,
आज विश्व तेजी से सतत और हरित परिवहन की ओर बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक साइकिल इस परिवर्तन के केंद्र में है, जहाँ स्वच्छ ऊर्जा और सस्ती गतिशीलता का संगम होता है।
भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह केवल एक नीति नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। एवन साइकिल्स जैसे अनुभवी और सक्षम उद्योगों के लिए यह एक अवसर है, भविष्य की दिशा में नेतृत्व करने का अवसर।
आज जब भारत अपनी आज़ादी के अमृत काल से गुज़र रहा है, तो देश के सामने एक बहुत बड़ा और स्पष्ट लक्ष्य है, ‘विकसित भारत 2047’। जब 2047 में हमारा देश आज़ादी के 100 वर्ष मनाएगा, तब हमें एक ऐसा भारत बनाना है जो आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक रूप से विश्व का नेतृत्व करे।
इस ‘विकसित भारत’ के निर्माण में पंजाब के उद्योगों और विशेषकर एवन जैसी कंपनियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में एवन साइकिल्स अपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट को और मज़बूत करेगी, ई-बाइक्स और ग्रीन मोबिलिटी के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगी, और पूरी दुनिया में पंजाब का परचम लहराएगी।
साथियो,
राष्ट्र का निर्माण केवल सरकारों से नहीं, बल्कि उन लोगों और संस्थानों से होता है, जो कुछ स्थायी और सार्थक बनाते हैं।
एवन साइकिल्स जैसे संस्थान न केवल रोजगार सृजित करते हैं, बल्कि समाज को सशक्त बनाते हैं और भारत की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करते हैं।
75 वर्ष केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक मजबूत आधार है, जिस पर भविष्य की नई ऊँचाइयाँ निर्मित होंगी।
अंत में, मैं एवन साइकिल्स के प्रबंधन, यहाँ के इंजीनियरों, और दिन-रात पसीना बहाने वाले हर एक श्रमिक भाई-बहन को 75 वर्षों की इस सफल यात्रा की हृदय की गहराइयों से बधाई देता हूँ। आपकी मेहनत ही इस कंपनी की असली पूंजी है।
मैं आशा करता हूँ कि जब 25 वर्ष बाद एवन साइकिल्स अपनी शताब्दी मनाएगा, तो वह न केवल भारत की, बल्कि पूरे विश्व की नंबर वन साइकिल निर्माता कंपनी होगी। आप सभी स्वस्थ रहें, निरंतर प्रगति करें और राष्ट्र निर्माण में इसी प्रकार अपना योगदान देते रहें।
‘‘उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।’’ इसका अर्थ है कि कार्य केवल उद्यम और मेहनत से ही सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा करने या सपने देखने से नहीं।
इसी कामना और विश्वास के साथ, मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
धन्यवाद,
जय हिन्द!