SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF YOUTH FESTIVAL SANKALP AT BATALA ON APRIL 16, 2026.

‘‘विश्वा मित्र सेखड़ी इंस्टीट्यूट’’ के स्थापना दिवस पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 16.04.2026, गुरूवारसमयः दोपहर 12:00 बजेस्थानः बटाला

नमस्कार!

आज का यह दिन केवल एक शिक्षण संस्थान का स्थापना दिवस नहीं है, बल्कि यह माझा क्षेत्र और हमारे सीमावर्ती जिलों की उस अदम्य इच्छाशक्ति का उत्सव है, जो शिक्षा और समाज सुधार के दम पर एक नया पंजाब गढ़ रही है। मुझे आज विश्वा मित्र सेखड़ी इंस्टीट्यूट्स के इस प्रांगण में आकर और आप सभी बटाला वासियों की इस अद्भुत उपस्थिति को देखकर अत्यंत गौरव और ऊर्जा की अनुभूति हो रही है।

जब मैं श्री अश्विनी सेखड़ी द्वारा अपने पिता स्व. श्री विश्वामित्र सेखड़ी जी की याद में वर्ष 2003 में स्थापित इस विश्वा मित्र सेखड़ी इंस्टीट्यूट्स के अब तक के सफर को देखता हूँ, तो मुझे इसमें एक तपोवन के दर्शन होते हैं। एन.एच.-44 पर गांव सैद मुबारक, बटाला में स्थित यह संस्थान हमारे सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं की आशाओं का केंद्र है। लॉ, फार्मेसी, नर्सिंग, बी.एड, ई.टी.टी, मैनेजमेंट और आर्ट्स एंड साइंस जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से इस संस्थान ने जो शिक्षा की अलख जगाई है, वह वंदनीय है।

मुझे यह जानकर अत्यंत हर्ष हुआ कि अपनी स्थापना से अब तक इस संस्थान ने हमारे सीमावर्ती जिलों के 10 हजार से अधिक छात्रों को उत्कृष्ट शिक्षा देकर उनके करियर को संवारा है। और उससे भी बड़ी बात यह है कि आज यहाँ पढ़ रहे 2 हजार से अधिक विद्यार्थियों में से 70 प्रतिशत हमारी बेटियां हैं जो इस सीमावर्ती क्षेत्र से आती हैं। 

यह आंकड़े नहीं, बल्कि पंजाब में हो रही एक मूक क्रांति का प्रमाण हैं। जब एक बेटी पढ़ती है, तो केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि दो परिवार और पूरी आने वाली पीढ़ी शिक्षित और संस्कारित होती है। यह संस्थान सही मायनों में भारत सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को धरातल पर उतार रहा है।

हमारा माझा और पंजाब का यह सीमावर्ती क्षेत्र भारत का अभेद्य दुर्ग रहा है। यहाँ के लोगों ने देश की रक्षा के लिए अपनी छाती पर गोलियां खाई हैं। पंजाबियों ने अपने पसीने से देश का पेट भरा है और अपने खून से देश की सीमाएं सींची हैं।

लेकिन, दुख होता है यह देखकर की जिन हाथों में देश की रक्षा हेतु शस्त्र होने चाहिएं, उन्हीं हाथों में नशे के इंजेक्शन हैं। इसका मूल कारण हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान द्वारा रची जा रही ‘नार्को-टेररिज्म’ की साजिश है। इसका सबसे पहला और सीधा वार इसी सीमावर्ती क्षेत्र के हमारे युवाओं पर होता है।

ऐसे कठिन समय में, जहाँ बहुत से लोग केवल समस्या की चर्चा करते हैं, विश्वा मित्र सेखड़ी इंस्टीट्यूट्स ने समाधान का मार्ग चुना है। यह मेरे लिए, और पूरे पंजाब के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि यह संस्थान सीमावर्ती जिले का एकमात्र पूर्णतः ‘नशामुक्त’ कैंपस है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है।

मुझे याद है, वर्ष 2019 में जब नशे के खिलाफ एक जन-आंदोलन की आवश्यकता थी, तब इसी संस्थान ने भारत की ‘सबसे बड़ी ट्रैक्टर रैली’ का आयोजन किया था। उस रैली में 7 हजार ग्रामीण युवाओं ने अपने ट्रैक्टरों पर सवार होकर नशे के खिलाफ जो हुंकार भरी थी, उसने पूरे देश का ध्यान खींचा था। ट्रैक्टर पंजाब के किसान की मेहनत का प्रतीक है, और उस मेहनत को नशे के खिलाफ एक हथियार बनाना, इस संस्थान के प्रबंधन की अद्भुत सोच का परिणाम था।

हाल ही में, 2024 में भी आपके द्वारा आयोजित ‘नशा-विरोधी कार्यक्रम’ जिसमें गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. करमजीत सिंह जी और बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के कुलपति डॉ. राजीव सूद जी ने मार्गदर्शन किया, यह दर्शाता है कि आपका विज़न कितना स्पष्ट और लक्ष्य-केंद्रित है।

साथियो,

आज के इस समारोह का विषय ‘संकल्प नशा विरुद्ध’ अत्यंत प्रासंगिक, सार्थक और समय की आवश्यकता को दर्शाने वाला है, जो समाज में जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित करता है। 

नशा आज एक प्रमुख सामाजिक चिंता का विषय बन गया है। आज पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में इस समस्या से जूझ रही है। भारत की भौगोलिक स्थिति ‘गोल्डन ट्रायंगल’ (‘गोल्डन ट्रायंगल’ आमतौर पर भारत के प्रमुख पर्यटन सर्किट को संदर्भित करता है, जो मानचित्र पर दिल्ली, आगरा और जयपुर को एक त्रिभुज के आकार में जोड़ता है) और ‘गोल्डन क्रिसेंट’ (‘गोल्डन क्रिसेंट’ दक्षिण-पश्चिम एशिया का एक प्रमुख अवैध अफ़ीम उत्पादक क्षेत्र है, जिसमें अफ़ग़ानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान शामिल हैं) के बीच होने के कारण इसे और संवेदनशील बनाती है, जिसके चलते नशे का जाल तेजी से फैल रहा है। 

एक ओर जहाँ नशों का उपयोग बढ़ रहा है, वहीं सामाजिक मूल्य, आत्म-संयम, संयुक्त परिवार प्रणाली और पारंपरिक अनुशासन कमजोर होते जा रहे हैं। बदलते सामाजिक-आर्थिक परिवेश ने भी नशे की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है। सिंथेटिक ड्रग्स और टीकों द्वारा नसों के माध्यम से नशा लेने की बढ़ती प्रवृत्ति ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है, जिससे एड्स जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।

नशे की लत केवल आपूर्ति की समस्या नहीं, बल्कि उन सामाजिक परिस्थितियों से जुड़ी है जो इसकी मांग पैदा करती हैं। आधुनिक जीवनशैली और सामाजिक संवेदनशीलता भी इस चुनौती को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

नशे के कारण हमारे समाज को एक बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। यह विशेष रूप से युवाओं के लिए गंभीर खतरा बन गया है। उत्सुकता, रोमांच और साथियों के दबाव के कारण युवा आसानी से इसकी चपेट में आ जाते हैं, जबकि इसके स्वास्थ्य और सामाजिक दुष्परिणामों के प्रति पर्याप्त जागरूकता का अभाव होता है।

नशों के उपयोग से व्यक्तियों, परिवारों और समग्र रूप से समाज के लिए गंभीर सामाजिक और आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। अत्यधिक नशा तो मृत्यु का कारण भी बन सकता है। नशे का उपयोग पूरे परिवार पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और इसके सदस्यों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को अत्यंत असुरक्षित बना देता है। परिवार को सामाजिक कलंक, अकेलेपन और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ता है। 

हमारा ध्यान नशे के शिकार लोगों को नशामुक्त, अपराध-मुक्त और लाभकारी रोजगार देकर उन्हें समाज का एक उत्पादक सदस्य बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। इस संदर्भ में, नशा करने वाले व्यक्तियों के प्रभावी सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। नशे के हानिकारक प्रभावों के बारे में नवीन तरीकों के माध्यम से निरंतर जागरूकता पैदा करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दिसंबर 1987 में संयुक्त राष्ट्र ने 26 जून को ‘नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ घोषित किया था, जिसका उद्देश्य नशामुक्त समाज के लिए वैश्विक स्तर पर जागरूकता और सहयोग बढ़ाना है।

हमारे संविधान निर्माताओं ने भी अनुच्छेद 47 के तहत नशीले पदार्थों के सेवन पर रोक लगाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार को राज्य का प्राथमिक कर्तव्य माना है। इसी दिशा में कड़ा ‘एन.डी.पी.एस. एक्ट, 1985’ लागू किया गया, जो मादक पदार्थों की तस्करी रोकता है और उपचार केंद्रों की स्थापना सुनिश्चित करता है।

नशे के इस दानव को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सरकारें पूरी दृढ़ता से काम कर रही हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में वर्ष 2020 में आरंभ किया गया ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इसके तहत सीमावर्ती जिलों में विशेष रूप से जागरूकता, पुनर्वास और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां जीरो-टॉलरेंस की नीति के साथ ड्रग सिंडिकेट्स की कमर तोड़ रही हैं।

साथ ही, पंजाब सरकार का ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान प्रभावी रूप से आगे बढ़ रहा है। इसके तहत अब तक 58 हजार से अधिक नशा तस्करों की गिरफ्तारी और बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ व ड्रग मनी की बरामदगी सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

पंजाब लोकभवन भी इस कार्य के लिए प्रयासशील है, पंजाब के 6 सीमावर्ती जिलों में ग्राम सुरक्षा समितियाँ बनाई गई हैं, जो कि बी.एस.एफ., पुलिस, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर नशों के खिलाफ हमारी लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

मैंने स्वयं नशे की इस गंभीर समस्या को समाप्त करना अपना व्यक्तिगत मिशन बनाया है और जमीनी स्तर पर विभिन्न नशा-विरोधी अभियानों में सक्रिय भागीदारी की है। सीमावर्ती जिलों के दौरे, पदयात्राओं के माध्यम से जनजागरूकता और ‘सर्व धर्म सम्मेलनों’ के जरिए सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने के प्रयास निरंतर किए गए हैं।

इसके साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों के मुखियों के साथ बैठकों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हमारे शिक्षण संस्थान पूरी तरह नशामुक्त और सुरक्षित बने रहें, ताकि आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो सके।

देवियो और सज्जनो, 

मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि हमारे सीमावर्ती क्षेत्रों में बसने वाले नागरिक केवल हमारी भौगोलिक सीमाओं के रक्षक मात्र नहीं हैं, बल्कि वे इस महान राष्ट्र की आत्मा के सच्चे प्रहरी और हमारी सुरक्षा की ‘प्रथम पंक्ति’ हैं। जब भी देश पर कोई संकट आता है, तो यहाँ के लोग एक अजेय ढाल बनकर सबसे पहले सीना तानकर खड़े होते हैं। यहाँ की माटी की तासीर ही कुछ ऐसी है कि इन क्षेत्रों के युवाओं की रगों में साहस, अदम्य अनुशासन और देशभक्ति की भावना स्वाभाविक रूप से रची-बसी होती है। देश पर मर मिटने का जो जज़्बा यहाँ के युवाओं में है, वह पूरे भारत के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है।

लेकिन आज दुश्मन यह जान चुका है कि वह हमसे सीधे युद्ध में नहीं जीत सकता, इसलिए वह ‘नशे’ के रूप में एक अदृश्य और कायरतापूर्ण छद्म युद्ध लड़ रहा है। उसका सीधा निशाना हमारी यही वीर युवा पीढ़ी है, ताकि उनकी इस असीम ऊर्जा को भटकाया जा सके। इसीलिए, आज यह पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है कि हम इन संवेदनशील क्षेत्रों में उत्कृष्ट शिक्षा, संस्कार और निरंतर जागरूकता का व्यापक विस्तार करें।

जब हमारे इन वीर युवाओं के हाथों में उच्च शिक्षा की ताकत और सही मार्गदर्शन होगा, तभी वे अपनी इस स्वाभाविक ऊर्जा और शौर्य को एक सकारात्मक दिशा में मोड़ पाएंगे। एक शिक्षित और जागरूक युवा ही नशे जैसी घातक बुराइयों के चक्रव्यूह को तोड़ सकता है। शिक्षा वह अचूक अस्त्र है जो न केवल उन्हें इन बुराइयों से दूर रखेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त और जागृत स्तंभ भी बनाएगा।

मेरे युवा साथियो, 

आप ही पंजाब की पहचान हैं, आप ही उसका भविष्य हैं। याद रखें, “जो युवा अपने लक्ष्य पर केंद्रित होता है, वही इतिहास रचता है।” अपनी ऊर्जा को खेल, शिक्षा, नवाचार और राष्ट्र सेवा में लगाएँ। नशा आपको कमजोर बनाता है, जबकि ज्ञान और अनुशासन आपको सशक्त बनाते हैं।

आज जब भारत अपनी आज़ादी के अमृत काल में है, तो हमारे सामने एक ही लक्ष्य है, ‘विकसित भारत 2047। जब देश आज़ादी के 100 वर्ष मनाएगा, तब हमें भारत को विश्व का सिरमौर बनाना है। और यह तभी संभव है जब पंजाब का युवा सशक्त, शिक्षित और नशामुक्त होगा।

हम वह पंजाब चाहते हैं जहाँ हमारे युवाओं के हाथों में सिरिंज या नशा नहीं, बल्कि लैपटॉप, स्टेथोस्कोप, कानून की किताबें और खेल के मैदानों के मेडल हों। भारत के विकास के रथ का सबसे मजबूत पहिया पंजाब को ही बनना होगा।

मुझे किसी कवि की ये पंक्तियां याद आती हैं: 

‘‘नशे से नाता तोड़ो, राष्ट्र निर्माण से नाता जोड़ो,

उठो पंजाब के शेरो, फिर से सफलता के नए कीर्तिमान छोड़ो।’’

आज यहाँ उपस्थित सभी बटाला के नागरिकों को देखकर मेरा विश्वास और भी दृढ़ हो गया है। आप सभी का यहाँ जुटना यह साबित करता है कि बटाला अब चुप नहीं बैठेगा।

आइए, इस ‘स्थापना दिवस’ को हम ‘संकल्प दिवस’ में बदल दें। आज हम सब मिलकर यह शपथ लें कि हम अपने घर, अपने मोहल्ले, अपने शिक्षण संस्थानों और अपने ऐतिहासिक बटाला शहर को पूर्ण रूप से ‘नशा मुक्त शहर’ बनाएंगे।

मैं विश्वा मित्र सेखड़ी इंस्टीट्यूट्स के प्रबंधन, शिक्षकों और सभी विद्यार्थियों को अब तक की इसकी इस शानदार यात्रा के लिए हृदय से बधाई देता हूँ। आप इसी तरह शिक्षा का प्रकाश फैलाते रहें और समाज का मार्गदर्शन करते रहें। पंजाब लोकभवन और प्रशासन आपके हर इस नेक प्रयास में चट्टान की तरह आपके साथ खड़ा है।

स्वस्थ रहें, जागरूक रहें और अपने ‘रंगले पंजाब’ को बचाने में अपना सर्वोच्च योगदान दें।

धन्यवाद,

जय हिंद!