SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF PLATINUM JUBILEE CELEBRATION OF GURU NANAK DEV ENGINEERING COLLEGE AT LUDHIANA ON APRIL 8, 2026.

गुरू नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज के प्लेटिनम जुबली समारोह पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 08.04.2026, बुधवारसमयः सुबह 11:00 बजेस्थानः लुधियाना

नमस्कार!

आज, पंजाब के राज्यपाल के रूप में, इस अत्यंत प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक संस्थान, गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज (GNDEC) की ‘प्लेटिनम जुबली’ समारोह के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे जो असीम प्रसन्नता और गर्व की अनुभूति हो रही है, उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। एक ऐसा संस्थान जिसने शिक्षा के क्षेत्र में 70 वर्षों की एक गौरवमयी और बेदाग यात्रा पूरी की हो, वह पूरे राष्ट्र के लिए एक तीर्थ के समान है।

मैं उन सभी को बधाई देना चाहूँगा जिन्होंने इस कॉलेज के विकास में अपना योगदान दिया है, जिनमें प्रबंधन, प्रिंसिपल, प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्र शामिल हैं।

इस संस्थान ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अपना एक विशिष्ट स्थान बनाया है। वर्ष 1956 में अपनी यात्रा शुरू करने वाला गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज पंजाब के ग्रामीण छात्रों की आकांक्षाओं का प्रतीक बन गया है, जिसने ऐसे शानदार प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ तैयार किए हैं जिन्होंने राज्य और राष्ट्र के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

इस कॉलेज की आधारशिला भारत के प्रथम राष्ट्रपति, स्वर्गीय डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी द्वारा रखी गई थी।

यह बड़े गर्व की बात है कि यह कॉलेज पंजाब का पहला ऐसा इंजीनियरिंग कॉलेज था जिसे वर्ष 2012 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा स्वायत्त (Autonomous) दर्जा प्रदान किया गया था। यह और भी गर्व की बात है कि यह कॉलेज वर्तमान में NAAC (National Assessment and Accreditation Council) द्वारा 'A' ग्रेड और NBA (National Board of Accreditation) से भी मान्यता प्राप्त है।

हर्ष का विषय है कि यह कॉलेज वर्ष 2006 से लगातार विभिन्न स्वतंत्र राष्ट्रीय एजेंसियों जैसे इंडिया टुडे, आउटलुक, सीएसआर, स्टार टीवी आदि द्वारा देश के शीर्ष 50 इंजीनियरिंग कॉलेजों में शामिल रहा है, जिनमें आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी सम्मिलित हैं।

मुझे जानकारी दी गई है कि वर्तमान में यह संस्थान 13 ग्रेजुएट और 10 पोस्ट ग्रेजुएट कार्यक्रम संचालित कर रहा है, जिनमें एमबीए और एमसीए भी शामिल हैं।

लगभग 40 हजार ग्रेजुएट और 10 हजार पोस्ट-ग्रेजुएट विद्यार्थी इस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और वर्तमान में भारत तथा विदेशों में उच्च पदों पर कार्यरत होकर अपनी संस्था का गौरव बढ़ा रहे हैं।

कॉलेज की एक और अनूठी उपलब्धि समाज को परामर्श सेवाएं प्रदान करके बड़े संसाधन जुटाना है। किसी भी संस्थान के विकास के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि इससे वह समय के साथ नई-नई चीज़ों से जुड़ा और अपडेट रहता है। मैं इसे ‘कर्मचारियों की कड़ी मेहनत, निष्ठा और समर्पण’ तथा ‘प्रबंधन के दृष्टिकोण और दिशा-निर्देशन’ का एक बेहतरीन संगम मानता हूँ।

देवियो और सज्जनो,

यह कॉलेज केवल ईंटों, कंक्रीट और प्रयोगशालाओं से बनी एक इमारत मात्र नहीं है; यह उस महान ज्योति, सिखों के प्रथम गुरु, श्री गुरु नानक देव जी के नाम और उनके शाश्वत दर्शन का एक जीवंत प्रतीक है।

गुरु साहिब एक महान आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ एक महान वैज्ञानिक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने सदियों पहले ब्रह्मांड के रहस्यों और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने की बात कही थी। उन्होंने पूरी मानवता को ‘‘किरत करो, नाम जपो और वंड छको’’ का जीवन का सबसे व्यावहारिक और शक्तिशाली त्रिकोणीय मंत्र दिया था

मेरा मानना है कि एक इंजीनियर का जीवन ‘किरत करो’ यानी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कर्म करने के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। अपनी बौद्धिक क्षमता और परिश्रम से समाज के लिए पुल, सड़कें, मशीनें और सॉफ़्टवेयर का निर्माण करना सच्ची ‘किरत’ का उत्कृष्ट उदाहरण है।

साथ ही, नाम जपो (परमात्मा का स्मरण करो) का सिद्धांत हमें विनम्र बनाता है और सिखाता है कि हम कितनी भी तकनीकी तरक्की कर लें, हमें अपनी जड़ों और उस परम शक्ति से जुड़े रहना चाहिए।

इसके अलावा, वंड छको (मिल-बांट कर खाओ) का सिद्धांत हमें सिखाता है कि हमारी शिक्षा और हमारी तकनीक का लाभ केवल हमारे व्यक्तिगत स्वार्थ तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचे।

आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो ननकाना साहिब एजुकेशन ट्रस्ट (NSET) के उन दूरदर्शी संस्थापकों को नमन करने का मन करता है, जिन्होंने एक ऐसा महान सपना देखा था। उस दौर में, जब देश नया-नया आजाद हुआ था और ग्रामीण पंजाब के युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा एक दूर का सपना हुआ करती थी, तब इस कॉलेज ने ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग शिक्षा देने का बीड़ा उठाया।

यह पंजाब का पहला ऐसा इंजीनियरिंग कॉलेज बना जिसने ग्रामीण युवाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा।

इन 70 वर्षों में, इस संस्थान ने देश और दुनिया को केवल इंजीनियर नहीं दिए, बल्कि ऐसे ‘राष्ट्र-निर्माता’ दिए हैं जिन्होंने भारत के बुनियादी ढांचे, रक्षा, आईटी सेक्टर और उद्योग जगत की नींव रखी है।

देवियो और सज्जनो,

आज हम एक ऐसे परिवर्तनशील युग में जी रहे हैं, जहाँ तकनीक अभूतपूर्व गति से हमारे जीवन और भविष्य की दिशा तय कर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती हुई तकनीकें न केवल उद्योगों को बदल रही हैं, बल्कि समाज की संरचना को भी नई परिभाषा दे रही हैं। यह युग अवसरों का भी है और चुनौतियों का भी।

ऐसे समय में एक इंजीनियर की भूमिका केवल एक अच्छी नौकरी प्राप्त करने तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि वह समाज के परिवर्तन का एक प्रमुख वाहक बन जाता है। आज विश्व जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और ऊर्जा संकट जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। इन चुनौतियों का समाधान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नवाचार और तकनीकी समाधान से ही संभव है।

मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान से विशेष रूप से आग्रह करना चाहूँगा कि यहाँ से निकलने वाले युवा इंजीनियर केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित न रहें, बल्कि ऐसे समाधान विकसित करें जो पर्यावरण के अनुकूल, किफायती और टिकाऊ हों। हमें ऐसी तकनीकों की आवश्यकता है जो विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित कर सकें।

पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य के संदर्भ में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यहाँ की खेती, भूमिगत जल का तेजी से गिरता स्तर, और पराली (Stubble Burning) जैसी समस्याएँ केवल पर्यावरणीय ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी हैं। इनका समाधान भी हमारे युवाओं की प्रयोगशालाओं, शोध और नवाचार से ही निकलेगा, चाहे वह स्मार्ट सिंचाई प्रणाली हो, वैकल्पिक ऊर्जा के साधन हों, या पराली के प्रबंधन के लिए नई तकनीकें।

देवियो और सज्जनो,

आज की दुनिया में जहाँ तकनीक ने रोजमर्रा के जीवन में एक बड़ी जगह बना ली है, स्वदेशी तकनीक का विकास समय की मांग है। पर्याप्त और प्रासंगिक तकनीकी ज्ञान से लैस हमारे युवा टेक्नोक्रेट्स और इंजीनियरों का सार्थक योगदान राष्ट्र निर्माण के लिए एक आशा की किरण है। 

यह समय हमारे देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए आज की ऊर्जावान और गतिशील युवा पीढ़ी पर विश्वास जताने का है। जब हमारे युवा अपनी प्रतिभा, नवाचार और कौशल का उपयोग देश के भीतर ही करेंगे, तब भारत न केवल तकनीकी दृष्टि से सशक्त बनेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर नेतृत्व की भूमिका भी निभा सकेगा। तकनीकी आत्मनिर्भरता हमारे देश में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और समग्र कल्याण के एक नए युग का मार्ग प्रशस्त करेगी।

हालाँकि, इस दिशा में एक महत्वपूर्ण चुनौती ‘ब्रेन ड्रेन’ अर्थात प्रतिभा पलायन की भी है, जिस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। बेहतर अवसरों, सुविधाओं और संसाधनों की तलाश में हमारे सबसे मेधावी युवा विदेशों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने देश में ऐसा अनुकूल वातावरण, विश्वस्तरीय शोध सुविधाएँ और नवाचार के अवसर प्रदान करें, जिससे हमारी प्रतिभा यहीं रहकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सके।

मेरा दृढ़ विश्वास है कि तकनीकी शिक्षा तभी सार्थक और प्रभावी बनती है, जब वह आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाले, किफायती और टिकाऊ समाधान प्रदान करे। हमें ऐसी तकनीकी प्रगति की आवश्यकता है जो समाज की वास्तविक समस्याओं को समझे और उनका व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करे। जैसा कि एक प्रसिद्ध कथन है, “ज्ञान का सर्वाेत्तम उपयोग मानवता की सेवा में ही है।”

यह विचार आपके पेशेवर जीवन में सदैव प्रेरणा और मार्गदर्शक शक्ति के रूप में कार्य करना चाहिए। साथ ही, तकनीक का विकास और उसका उपयोग नैतिकता और उच्च चारित्रिक मूल्यों के अनुरूप होना अनिवार्य है, क्योंकि इनके बिना तकनीकी प्रगति अपना वास्तविक महत्व और प्रभाव खो देती है।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस संस्थान के विद्यार्थी अपनी प्रतिभा, परिश्रम और नवाचार के माध्यम से न केवल अपने भविष्य का निर्माण करेंगे, बल्कि राष्ट्र और समाज के लिए भी एक सशक्त, टिकाऊ और समृद्ध भविष्य की नींव रखेंगे।

मेरे प्रिय युवा साथियो, 

आप वास्तव में सौभाग्यशाली हैं कि आप ऐसे संस्थान का हिस्सा हैं, जिसकी एक गौरवशाली और समृद्ध विरासत रही है। जब आप इस परिसर से बाहर निकलेंगे, तो आपके कंधों पर इस संस्थान के 70 वर्षों के इस गौरव को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

मैं आपसे विशेष रूप से यह कहना चाहूँगा कि अपने कौशल के साथ-साथ अपने चरित्र का निर्माण भी करें। दुनिया में एक उत्कृष्ट इंजीनियर, कोडर, डिजाइनर या टेक्नोक्रेट बनना निश्चित ही सराहनीय है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है एक संवेदनशील, नैतिक और जिम्मेदार इंसान बनना। आपकी तकनीक में मानवीय संवेदनाओं का समावेश होना चाहिए, ताकि वह समाज के लिए वास्तव में उपयोगी बन सके।

इसके साथ ही, मैं आपको प्रेरित करना चाहूँगा कि आप केवल नौकरी तलाशने वाले न बनें, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनें। भारत युवाओं का देश है और इसमें असीम संभावनाएँ हैं। अपने नवाचार, स्टार्टअप्स और उद्यमिता के माध्यम से न केवल स्वयं आगे बढ़ें, बल्कि दूसरों के लिए भी अवसर उत्पन्न करें और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

आप असफलताओं से कभी घबराएँ नहीं। कोई भी बड़ा आविष्कार या उपलब्धि पहली बार में सफल नहीं होती। हर असफलता हमें कुछ नया सिखाती है और आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है। इसलिए, हर अनुभव को सीख के रूप में स्वीकार करें और निरंतर प्रयास करते रहें, यही सफलता का मूल मंत्र है।

मैं इस अवसर पर कॉलेज के समस्त संकाय सदस्यों की हृदय से सराहना करता हूँ। एक शिक्षक वह कुम्हार होता है जो मिट्टी को आकार देकर उसे एक मजबूत बर्तन बनाता है। आपकी मेहनत के बिना यह प्लेटिनम जुबली संभव नहीं थी।

साथ ही, मैं यहाँ उपस्थित पूर्व छात्रों का भी अभिनंदन करता हूँ। आप इस कॉलेज के सच्चे ‘राजदूत’ हैं। आपने दुनिया भर में पंजाब और अपने इस कॉलेज का झंडा बुलंद किया है। मेरा आपसे आग्रह है कि अपनी मातृ संस्था से हमेशा जुड़े रहें और नए छात्रों का मार्गदर्शन करते रहें।

अंत में, मैं गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज की प्रबंधन समिति, स्टाफ और छात्रों को इस ऐतिहासिक 70वें स्थापना दिवस की बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में यह संस्थान ‘शताब्दी’ की ओर बढ़ते हुए शिक्षा और शोध के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

परमात्मा आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखे।

धन्यवाद,

जय हिंद!