SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CONVOCATION OF BHAI GURDAS GROUP OF INSTITUTIONS AT SANGRUR ON APRIL 10, 2026.
- by Admin
- 2026-04-10 19:55
भाई गुरदास ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के दीक्षांत समारोह पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 10.04.2026, शुक्रवार समयः शाम 5:00 बजे स्थानः संगरूर
नमस्कार!
आज संगरूर की इस ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पावन धरती पर, ‘भाई गुरदास ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस’ के इस तीसरे दीक्षांत समारोह में आपके बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत हर्ष और संतोष की अनुभूति हो रही है। दीक्षांत समारोह केवल उपाधियाँ बांटने का एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह आपके सपनों के ‘उड़ान भरने’ का दिन है।
सबसे पहले, मैं आज शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए उपाधि प्राप्त करने वाले सभी 1 हजार 479 ग्रेजुएट पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों को बधाई देता हूँ। इनमें 375 पोस्ट ग्रेजुएट और 1104 ग्रेजुएट विद्यार्थी शामिल हैं। आपने न केवल अपने परिवार और संस्थान का नाम रोशन किया है, बल्कि अपने उज्ज्वल भविष्य की एक मजबूत नींव भी रखी है।
आपकी यह सफलता केवल आपकी अपनी नहीं है, बल्कि आपके शिक्षकों के मार्गदर्शन और आपके माता-पिता के त्याग का भी फल है। उन माता-पिता को मेरा नमन, जिन्होंने अपनी इच्छाओं को सीमित रखकर आपके पंखों को मजबूती दी। आज की आपकी डिग्री आपकी मेहनत के साथ-साथ उनके संघर्षों का भी पदक है।
आज जिस प्रतिष्ठित संस्थान से आप शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रहे हैं, वह अपने आप में अत्यंत विशिष्ट है। क्योंकि यह महान सिख विद्वान, प्रखर कवि और ‘श्री आदि ग्रंथ साहिब जी’ के प्रथम लिखारी (Scribe) ‘भाई गुरदास जी’ के पवित्र नाम को धारण किए हुए है। भाई गुरदास जी का जीवन ज्ञान, भक्ति, सेवा और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। ऐसे महान व्यक्तित्व के नाम पर स्थापित इस संस्थान से शिक्षा प्राप्त करना आप सभी के लिए बहुत बड़े सौभाग्य की बात है।
मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता होती है कि भाई गुरदास ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक चेयरमैन स्वर्गीय सरदार हाकम सिंह जावंधा द्वारा वर्ष 2002 में स्थापित इस प्रतिष्ठित संस्थान ने मालवा क्षेत्र और विशेषकर संगरूर में शिक्षा की एक मजबूत नींव रखी है। इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी और लॉ जैसे विभिन्न क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर इस संस्थान ने न केवल पंजाब, बल्कि पूरे देश को उत्कृष्ट पेशेवर दिए हैं।
मुझे ज्ञात हुआ है कि इस समूह के अंतर्गत 9 संस्थान संचालित हो रहे हैं, जो विभिन्न विषयों में 11 हजार से अधिक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इनमें भाई गुरदास इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, भाई गुरदास पॉलिटेक्निक कॉलेज, भाई गुरदास कॉलेज ऑफ लॉ, भाई गुरदास इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, भाई गुरदास इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, भाई गुरदास डिग्री कॉलेज, भाई गुरदास इंस्टीट्यूट ऑफ एलाइड साइंसेज, भाई गुरदास इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन तथा भाई गुरदास कॉलेज ऑफ फार्मेसी जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। इसका इंजीनियरिंग कॉलेज NBA (National Board of Accreditation) मान्यता प्राप्त है।
संस्थान के प्रभावशाली प्लेसमेंट सेल का विद्यार्थियों के लिए प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में सफल प्लेसमेंट का सशक्त और सिद्ध रिकॉर्ड रहा है। इस वर्ष करीब 250 कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव दौरान 8 लाख से 18 लाख के वार्षिक पैकेज पर कई छात्र अच्छी कंपनियों के लिए चुने गए हैं।
इसके फूड टेक्नोलॉजी विभाग में रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए सरकार की ओर से 78 लाख का पैकेज मिलना इस संस्थान के लिए गर्व की बात है। यहाँ हर साल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस, सेमिनार और फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं।
यहाँ का शिक्षण संकाय उद्योग, अध्यापन और शोध का व्यावहारिक अनुभव रखने वाले अनुभवी विशेषज्ञों से सुसज्जित है।
साथ ही, पूरे पाठ्यक्रम के दौरान व्यक्तित्व विकास से संबंधित कक्षाओं को भी समाहित किया गया है, जिससे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जा सके।
साथियो,
आज जब मैं इस महत्वपूर्ण दीक्षांत समारोह में आप सभी के बीच उपस्थित हूँ, तो मुझे इस सभागार में बैठे आप सभी युवाओं की आँखों में भारत का उज्ज्वल और सशक्त भविष्य स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। आज का यह दिन आपके जीवन की यात्रा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
अब जब आप जीवन के इस नए चरण में कदम रख रहे हैं, तो यह संकल्प अवश्य लें कि आप अपने ज्ञान, कौशल और अनुभव के माध्यम से समाज को वह सब लौटाएँगे, जो आपने उससे प्राप्त किया है। आपकी सफलता केवल आपकी व्यक्तिगत उपलब्धि न रहे, बल्कि वह समाज के उत्थान और राष्ट्र के विकास का माध्यम भी बने।
याद रखें, सच्ची सफलता वही है जो दूसरों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए। चाहे आप किसी भी क्षेत्र में जाएँ, आपका प्रत्येक कार्य समाज के प्रति आपकी जिम्मेदारी को दर्शाए। अपने आसपास के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान में योगदान दें, और अपने ज्ञान का उपयोग ऐसे समाधान विकसित करने में करें जो समाज की वास्तविक समस्याओं को दूर कर सकें।
आप अपने भीतर सेवा, संवेदनशीलता और नैतिकता के मूल्यों को सदैव जीवित रखें। यही वह मार्ग है, जो आपको व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ सामाजिक सम्मान और आत्मसंतोष भी प्रदान करेगा।
गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर अपनी एक उत्कृष्ट कविता में उन आवश्यक मानवीय मूल्यों पर जोर देते हैं जो भारतीय लोकाचार का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा थाः-
- ईश्वर के चरणों में फूल चढ़ाने के लिए मंदिर मत जाओ। सबसे पहले, अपने घर को प्रेम और दया की सुगंध से भर दो।
- ईश्वर की वेदी के सामने मोमबत्तियां जलाने के लिए मंदिर मत जाओ। सबसे पहले, अपने हृदय से पाप, अभिमान और अहंकार का अंधकार दूर करो।
- प्रार्थना में सिर झुकाने के लिए मंदिर मत जाओ। सबसे पहले, अपने साथियों के सामने विनम्रता से झुकना सीखो और उन लोगों से माफी मांगो जिनके साथ तुमने गलत किया है।
- घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना करने के लिए मंदिर मत जाओ। सबसे पहले, किसी दबे-कुचले व्यक्ति को ऊपर उठाने के लिए नीचे झुको। युवाओं को सशक्त बनाओ, उन्हें कुचलो मत।
- अपने पापों की क्षमा मांगने के लिए मंदिर मत जाओ। सबसे पहले, उन्हें अपने दिल से माफ कर दो जिन्होंने तुम्हें चोट पहुंचाई है!
यही दृष्टिकोण भारत को अद्वितीय बनाता है। भाईचारे और अपनत्व की इस भावना का जश्न मनाएं।
आज, मैं आपसे एक अपील करना चाहूंगा कि आप अपने दिमाग को केवल विचारों का ‘पार्किंग स्थल’ (ठिकाना) न बनने दें; केवल असफल होने के डर से किसी भी विचार को धरातल पर उतारने में कभी संकोच न करें। असफलता का डर केवल आपके मन का एक डर है।
यदि प्रयास पहली बार में सफल नहीं होते हैं, तो यह कोई विफलता नहीं है बल्कि यह एक सार्थक प्रयास है। इतिहास का कोई भी मील का पत्थर पहले प्रयास में हासिल नहीं किया गया है। इसलिए प्रयास करते रहें, और मुझे पूरा यकीन है कि आपका भविष्य असीम विकास और स्थायी उपलब्धियों से भरा होगा।
प्रिय युवा साथियो,
भारत सदैव से शिक्षा और ज्ञान की समृद्ध परंपरा का संवाहक रहा है। हमारी संस्कृति में विद्या को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। जब पंचतंत्र कहता है, ‘‘स्वदेशे पूज्यते राजा, विद्वान सर्वत्र पूज्यते’’ अर्थात् राजा की पूजा केवल उसके राज्य में होती है, लेकिन एक विद्वान व्यक्ति का हर जगह सम्मान और स्वागत किया जाता है, तो यह हमें ज्ञान और विद्वता के प्रति सम्मान की हमारी महान परंपरा को याद रखने के लिए प्रेरित करता है।
इतिहास साक्षी है कि भारत को ‘विश्वगुरु’ का गौरव प्राप्त था। तक्षशिला, नालंदा और पुष्पगिरी जैसे महान शिक्षा केंद्र केवल विश्वविद्यालय नहीं थे, बल्कि ज्ञान, शोध और विचार-विमर्श के वैश्विक केंद्र थे। यहाँ विश्व के विभिन्न देशों से विद्यार्थी और विद्वान अध्ययन के लिए आते थे, जिससे भारत ज्ञान और संस्कृति का केंद्र बना रहा। इन विश्वविद्यालयों ने न केवल शिक्षा दी, बल्कि एक ऐसी बौद्धिक परंपरा को जन्म दिया, जिसने मानवता के विकास को नई दिशा प्रदान की।
अब समय आ गया है कि भारत एक बार फिर शिक्षा के एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरे। हमें केवल अपनी पिछली उपलब्धियों पर ही संतोष करके नहीं रुक जाना चाहिए। हमें अपनी ताकतों के आधार पर आगे बढ़ना होगा और नए मानक स्थापित करने होंगे। सर्वांगीण उत्कृष्टता और वैश्विक एजेंडे का नेतृत्व करने की क्षमता ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है। यह नीति हमारी शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, बहुविषयक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाती है, जिससे विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार सीखने के अवसर मिलते हैं। यह केवल विषय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि सृजनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन और समस्या-समाधान क्षमता को विकसित करने पर विशेष बल देती है, जो 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप है।
इस नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू मातृभाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देना है, जिससे विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें। साथ ही, यह नीति अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को प्रोत्साहित करती है, जिससे हमारे युवा स्टार्टअप, उद्यमिता और नई तकनीकों के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकें।
मुझे विश्वास है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से भारत पुनः ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में सशक्त कदम बढ़ाएगा और हमारी युवा पीढ़ी ज्ञान, कौशल और मूल्यों से संपन्न होकर वैश्विक मंच पर नेतृत्व करेगी।
साथियो,
आज का युग ‘तकनीक और नवाचार’ का युग है। भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, और इस यात्रा में आपकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। मुझे पूरा विश्वास है कि आप अपनी मेधा से ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करेंगे। हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ परिवर्तन की गति तीव्र है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर क्लाइमेट चेंज तक. चुनौतियाँ बड़ी हैं। लेकिन याद रखें, हर चुनौती अपने साथ एक अवसर लेकर आती है।
शिक्षा का अंतिम लक्ष्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि एक बेहतर चरित्र का निर्माण और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। नवाचार अपनाएँ, लकीर का फ़कीर न बनें। लीक से हटकर सोचें। भारत को आज ‘जॉब सीकर्स’ की नहीं, ‘जॉब क्रिएटर्स’ की जरूरत है। जान यदि शस्त्र है, तो चरित्र उसका कवच है।
आज जब आप इस परिसर की दहलीज लांघकर पेशेवर दुनिया में कदम रखेंगे, तो याद रखिएगा कि दुनिया आपसे केवल एक ‘डिग्री होल्डर’ होने की उम्मीद नहीं करती, बल्कि एक ‘चेंज मेकर’ होने की उम्मीद करती है।
मेरे प्यारे युवाओं,
आप उस धरती के वारिस हैं जिसने दुनिया को ‘श्रम’ और ‘शक्ति’ का पाठ पढ़ाया है। पंजाब ऋषियों की तपस्या, गुरुओं की वाणी और शहीदों के बलिदान की भूमि है। यह हमेशा से शूरवीरों, किसानों और विद्वानों की भी धरती रही है। अब पंजाब को आपकी ऊर्जा की जरूरत है। आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम पंजाब की आबो-हवा को फिर से वैसा ही पावन बनाएंगे जैसा हमारे गुरुओं ने चाहा था।
मैं इस अवसर पर विशेष रूप से युवाओं से आह्वान करता हूँ कि आप पंजाब को नशामुक्त, हरा-भरा और समृद्ध बनाने का संकल्प लें। खेल, उद्यमिता और कौशल विकास के माध्यम से आप पंजाब के गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। अपनी जड़ों से जुड़े रहें और अपने सपनों को पंख दें। आप चाहे दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएं, अपनी जड़ों और अपनी संस्कृति को कभी न भूलें।
जाते-जाते बस इतना कहूँगा कि जीवन में कभी असफलताओं से मत घबराना। गिरना बुरा नहीं है. गिरकर न उठना बुरा है। अपनी शिक्षा का उपयोग न केवल स्वयं के विकास के लिए, बल्कि राष्ट्र के अंतिम व्यक्ति के आंसू पोंछने के लिए भी करें। आपकी डिग्री आपकी मेहनत का सम्मान है, लेकिन आपकी असली पहचान आपके विचारों और कर्मों से होगी। जीवन में हमेशा सीखते रहें और नई चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास से करें।
सभी मेधावी छात्रों को मेडल और उपाधि प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई। आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं।
धन्यवाद,
जय हिंद!