SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FOURTH EDITION OF THE RUN FOR SINDHU MARATHON AT CHANDIGARH ON 26.04.2026.
- by Admin
- 2026-04-26 13:10
‘‘रन फॉर सिंधु मैराथन’’ के अवसर पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 26.04.2026, रविवार समयः सुबह 8:00 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के इस ऊर्जावान और प्रेरणादायक परिसर में "Run For Sindhu Marathon" के इस भव्य आयोजन में उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मैं लगातार चौथे वर्ष इस प्रेरक पहल के आयोजन हेतु सर्व सेवा सशक्तिकरण संगठन को हार्दिक बधाई एव साधुवाद देता हूं।
मैं राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय कार्य के लिए सर्व सेवा सशक्तिकरण संगठन की विशेष रूप से सराहना करना चाहूंगा। युवाओं के बीच खेल, नशे से बचाव और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उनकी प्रतिबद्धता वास्तव में प्रशंसनीय है। ऐसे समय में जब व्याकुलताएँ कई हैं और अनुशासन दुर्लभ है, ऐसी पहल हमारी युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक रोशनी के रूप में कार्य करती हैं।
मुझे बताया गया है कि वर्ष 2021 में स्थापित सर्व सेवा सशक्तिकरण संगठन एक परोपकारी गैर-सरकारी संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा तथा सामाजिक सहायता प्रदान करना है। यह समय-समय पर स्वास्थय जाँच शिविर और रक्तदान शिविरों का आयोजन करता है। यह प्रत्यक्ष रूप से अथवा अन्य गैर-सरकारी संस्थाओं, नागरिक समाज संगठनों और सरकारी एजेंसियों के सहयोग से जरूरतमंद लोगों तक अपनी सेवाएँ पहुँचाने के लिए कार्यरत है।
यह अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है कि यह संगठन युवाओं के बीच ’खेल, शिक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा देकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। संगठन के प्रयासों का एक प्रमुख आकर्षण ‘1 लाख विद्यार्थी 1 लाख स्माइल मिशन’ है, जिसका उद्देश्य देश भर में एक लाख छात्रों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता सहित सामाजिक उत्थान और समान शैक्षिक अवसरों में योगदान देना है।
इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील पाल ने पिछले 4 वर्षों से शैक्षिक वित्त पोषण कार्यक्रम और रन फॉर सिंधु मैराथन, पिछले वर्ष से ऑपरेशन सिंदुर क्रिकेट कप और युवा नेतृत्व प्रशिक्षण सफलतापूर्वक चलाया है। ये सभी कार्यक्रम राष्ट्रीयता के विचार और अखंड भारत के साथ पुरे देश में कुशल रूप से चल रहे हैं।
देवियो और सज्जनो,
आज जब हम शारीरिक स्वास्थ्य और फिटनेस से जुड़े इस महत्वपूर्ण आयोजन का हिस्सा बने हैं, तो हमें मैराथन के समृद्ध इतिहास और उससे मिलने वाली प्रेरणा को भी स्मरण करना चाहिए।
मैराथन का इतिहास हमें प्राचीन यूनान की एक प्रेरक कथा से जोड़ता है। कहा जाता है कि फिडीपीडिस नामक एक वीर सैनिक ने मैराथन के युद्ध में यूनानी सेना की पर्शियनों पर विजय का संदेश पहुँचाने के लिए बिना रुके मैराथन से एथेंस तक दौड़ लगाई। यह केवल एक संदेश नहीं था, बल्कि साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक था। उस ऐतिहासिक दौड़ ने मानव धैर्य और इच्छाशक्ति की अद्भुत क्षमता को संसार के सामने प्रस्तुत किया।
मैराथन से एथेंस तक की दूरी लगभग 26 मील, अर्थात् लगभग 42 किलोमीटर थी। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में लंबी दूरी की इस दौड़ को “मैराथन” कहा जाने लगा और आज भी फुल मैराथन की मानक दूरी 42 किलोमीटर (26 मील) ही निर्धारित है।
मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि आज संपन्न हुई इस मैराथन में 10 किलोमीटर, 5 किलोमीटर और 3 किलोमीटर की विभिन्न श्रेणियाँ रखी गई थीं, जिससे हर आयु वर्ग और हर स्तर के प्रतिभागियों को इसमें भाग लेने का अवसर मिला। यद्यपि कुल 2 लाख रूपये की आकर्षक पुरस्कार राशि ने निश्चित रूप से आप सभी को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया, लेकिन मैं यह कहना चाहूँगा कि इस दौड़ में आपका हिस्सा लेना और इसे पूरा करना ही अपने आप में आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
देवियो और सज्जनो,
आज के इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य “सिंधु दर्शन यात्रा” के प्रति जागरूकता फैलाना भी है। सिंधु नदी हमारी सभ्यता में एक अत्यंत पवित्र और गौरवपूर्ण स्थान रखती है। यह केवल एक नदी नहीं है, बल्कि हमारी पहचान, हमारी सांस्कृतिक विरासत का सतत प्रवाह और अखंड भारत की उस भावना का प्रतीक है, जो सीमाओं से परे हमारी एकता को अभिव्यक्त करती है। “इंडिया” नाम भी सिंधु से ही लिया गया है, जो हमें हमारी गहरी जड़ों और सांस्कृतिक निरंतरता का स्मरण कराता है।
सिंधु नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की जननी है। सिंधु सभ्यता के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई “सिंधु दर्शन यात्रा” केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव का एक सशक्त अभियान है। हमारे युवाओं को इस महान परंपरा से जोड़कर हम न केवल अपनी धरोहर का संरक्षण कर रहे हैं, बल्कि राष्ट्र की भावनात्मक एकता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को भी सुदृढ़ कर रहे हैं। इस प्रकार, यह मैराथन हमें अपनी जड़ों से जोड़ने का भी एक सशक्त माध्यम है।
साथियो
यह मैराथन अत्यंत सुंदर और सार्थक ढंग से शारीरिक फिटनेस को जन-जागरूकता के उद्देश्य के साथ जोड़ती है। दौड़ना मानव शक्ति और दृढ़ संकल्प की सबसे सरल लेकिन सबसे शक्तिशाली अभिव्यक्तियों में से एक है। जब आप दौड़ते हैं, तो आप केवल प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहे होते, बल्कि आप खुद को एक स्वस्थ, मजबूत और अधिक अनुशासित जीवन के लिए प्रतिबद्ध कर रहे होते हैं।
यह दौड़ आपको शारीरिक रूप से सक्रिय, मानसिक रूप से सजग और नैतिक रूप से सुदृढ़ बने रहने के लिए प्रेरित करती है। एक राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके युवाओं की ऊर्जा, अनुशासन और जीवन्तता में निहित होती है, और आज मैं उस शक्ति को आप सभी में प्रचुर मात्रा में देख रहा हूँ।
स्वामी विवेकानंद जी ने जिस जागृत, आत्मविश्वासी और राष्ट्रनिष्ठ युवा भारत की कल्पना की थी, उसका साकार स्वरूप मुझे आज “रन फॉर सिंधु” के इस चौथे संस्करण में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। यह आयोजन केवल एक खेल नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, संस्कार और राष्ट्रभक्ति को एक सूत्र में पिरोने एक आंदोलन है।
देवियो और सज्जनो,
हमारे शास्त्रों में कहा गया है, ‘‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’ अर्थात, सभी कर्तव्यों का पालन करने और धर्म के मार्ग पर चलने के लिए स्वस्थ शरीर ही सबसे पहला और मुख्य साधन है। यदि हमारा शरीर स्वस्थ और सशक्त है, तभी हम अपने दायित्वों को सही ढंग से निभा सकते हैं फिर चाहे वे व्यक्तिगत हों, सामाजिक हों या राष्ट्रीय।
अस्वस्थ शरीर न केवल हमारी कार्यक्षमता को सीमित करता है, बल्कि हमारे मन, विचार और संकल्प शक्ति पर भी प्रभाव डालता है। इसके विपरीत, स्वस्थ शरीर हमें ऊर्जा, एकाग्रता और सकारात्मकता प्रदान करता है, जिससे हम अपने जीवन के उद्देश्यों को अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सकते हैं।
एक और पुरानी कहावत है, ‘‘पहला सुख निरोगी काया।’’ आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, डिजिटल स्क्रीन की लत और तनावपूर्ण जीवनशैली में शारीरिक फिटनेस और खेलों का महत्व और भी बढ़ गया है। खेल और शारीरिक गतिविधियाँ न केवल हमें बीमारियों से दूर रखती हैं, बल्कि ये हमें अनुशासन, टीम वर्क, समय प्रबंधन और हार कर फिर से उठ खड़े होने का जज्बा भी सिखाती हैं।
मैं अपने युवा साथियों से विशेष रूप से कहना चाहूँगा कि आपका शरीर आपका सबसे बड़ा साधन है, और उसका ध्यान रखना आपका सबसे पहला कर्तव्य है। प्रतिदिन थोड़ी देर व्यायाम, दौड़, योग या किसी भी खेल गतिविधि में भाग लेना न केवल आपको शारीरिक रूप से मजबूत बनाएगा, बल्कि मानसिक रूप से भी सुदृढ़ करेगा।
स्वामी विवेकानंद ने कहा था, “सबसे पहले हमारे युवाओं को मजबूत होना चाहिए। धर्म बाद में आता है। मेरे युवा साथियो, मजबूत बनो। यही मेरी आपको सलाह है। आप गीता अध्ययन की तुलना में फुटबॉल खेलकर स्वर्ग के अधिक निकट होगे।” यह कथन हमें यह बताता है कि शारीरिक सशक्तता और आत्मबल का विकास जीवन में अत्यंत आवश्यक है।
साथियों,
मैराथन केवल पैरों से नहीं, बल्कि हौसले, धैर्य और अटूट इच्छाशक्ति से दौड़ी जाती है। जब हम नीरज चोपड़ा जैसे चैंपियंस को देखते हैं, तो वे यह सिद्ध करते हैं कि समर्पण और निरंतर अभ्यास से विश्व पटल पर असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उनका स्वर्ण पदक केवल एक धातु नहीं है, बल्कि वह इस देश के करोड़ों युवाओं के लिए यह संदेश है कि पसीने की स्याही से लिखी गई सफलता की कहानी कभी मिटती नहीं है। वे आज हमारे युवाओं के लिए केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत हैं।
लेकिन यह विजयगाथा केवल नीरज तक सीमित नहीं है। जरा याद कीजिए ‘फ्लाइंग सिख’ महान मिल्खा सिंह जी को। उनकी वह अथक दौड़, उनका वह संघर्ष आज भी इस देश के हर धावक की रगों में ऊर्जा बनकर दौड़ता है। उन्होंने हमें सिखाया कि ट्रैक पर गिरने के बाद भी उठकर दौड़ना ही असली जीत है।
और जब बात मैराथन और अदम्य जज्बे की हो रही हो, तो भला हम ‘टर्बन्ड टॉरनेडो’ फौजा सिंह जी को कैसे भूल सकते हैं? उन्होंने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि उम्र महज़ एक आंकड़ा है। 100 वर्ष से अधिक की आयु में मैराथन पूरी करके उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि इंसान के भीतर दृढ़ संकल्प हो, तो उम्र का कोई भी पड़ाव या शरीर की कोई भी थकान उसके कदमों को नहीं रोक सकती।
याद कीजिए मैरी कॉम के उस अदम्य साहस को, जिन्होंने हर सामाजिक और शारीरिक बाधा को अपने मुक्कों से पछाड़कर विश्व को नतमस्तक किया। या फिर ‘ढींग एक्सप्रेस’ हिमा दास और महान पी.टी. उषा जी को, जिनके दौड़ते कदमों ने न केवल रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि देश की बेटियों को एक नई उड़ान दी।
इन सभी दिग्गजों में एक बात समान है, सफलता उनके लिए कोई चमत्कार नहीं थी। यह हर दिन, हर सुबह, दर्द और थकान के बावजूद खुद को मैदान में उतारने और अपनी सीमाओं को लांघने का परिणाम थी।
आज हमारे खिलाड़ियों और देशवासियों के इसी जज्बे को एक नई दिशा और संसाधन देने के लिए हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ और ‘खेलो इंडिया’ जैसे राष्ट्रव्यापी अभियानों के माध्यम से आज जमीनी स्तर पर खेल और स्वास्थ्य की एक नई संस्कृति विकसित की जा रही है।
इसके साथ ही, ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं यह सुनिश्चित कर रही हैं कि हमारे होनहार एथलीटों को विश्व स्तरीय सुविधाएं और प्रशिक्षण प्राप्त हो। सरकार का विज़न बिल्कुल स्पष्ट है, हमें केवल मेडल नहीं जीतने हैं, बल्कि एक ‘स्वस्थ भारत, सशक्त भारत’ का निर्माण करना है, जहाँ फिटनेस हर नागरिक की दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा हो।
आज जब आपने इस ट्रैक पर दौड़ लगाई, तो आप केवल एक ‘फिनिश लाइन’ की ओर ही नहीं बढ़ रहे थे। आपके उन दौड़ते कदमों ने एक स्वस्थ, सशक्त और अनुशासित समाज की नींव रखी है। आपके हर एक कदम ने आज उन युवाओं को गहराई से प्रेरित किया है, जो कल इस देश का उज्ज्वल भविष्य गढ़ेंगे।
देवियो और सज्जनो,
आज जब हम “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं, तब यह आवश्यक है कि हमारा युवा वर्ग स्वस्थ, जागरूक और अनुशासित हो। जब युवा सशक्त होगा, तभी राष्ट्र समर्थ होगा।
मैं आप सभी से आह्वान करता हूँ कि आप नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, नशे जैसी बुराइयों से दूर रहें, और अपने जीवन को अनुशासित, स्वस्थ और उद्देश्यपूर्ण बनाएं।
मैं मानता हूँ कि “रन फॉर सिंधु मैराथन” केवल एक दौड़ नहीं थी, बल्कि यह स्वास्थ्य, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का एक सशक्त संदेश बनकर उभरी।
अंत में, मैं सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। आज आप सभी ने अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ लगाई, नए कीर्तिमान स्थापित किए और एक सशक्त तथा स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण की दिशा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह पहल भविष्य में और भी व्यापक रूप लेगी तथा अधिक से अधिक युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
इसी शुभकामना के साथ आप सभी का बहुत-बहुत आभार।
धन्यवाद।
जय हिंद!