SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF THREE DAY NATIONAL CHINTAN SHIVIR TITLED ANTYODAYA SANKALP – VIKSIT BHARAT @2047 AT CHANDIGARH ON APRIL 24, 2026.

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के ‘‘चिंतन शिविर’’ पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 24.04.2026, शुक्रवारसमयः शाम 5:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

         

नमस्कार!

आज, सिटी ब्यूटीफुल ‘चंडीगढ़‘ की इस ऊर्जावान और शांतिपूर्ण भूमि पर आप सभी का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित 24 से 26 अप्रैल तक चलने वाला यह ‘चिंतन शिविर’ केवल एक प्रशासनिक बैठक नहीं है; बल्कि यह एक पवित्र वैचारिक ‘मंथन’ है।

हमारे पुराणों में कथा है कि जब देवों और दानवों ने मिलकर ‘समुद्र मंथन’ किया था, तो उसमें से ‘अमृत’ निकला था। मुझे पूर्ण विश्वास है कि अगले तीन दिनों तक केंद्र और राज्यों के बीच जो यह गहन विचार-मंथन होगा, उससे नीतियों और सुशासन का वह ‘अमृत’ निकलेगा, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को नवजीवन प्रदान करेगा।

मैं माननीय केंद्रीय मंत्रियों और यहाँ उपस्थित सभी उच्च स्तरीय अधिकारियों का आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए चंडीगढ़ को चुना।

मित्रों, 

किसी भी राष्ट्र की महानता इस बात से नहीं मापी जाती कि उसके सबसे अमीर लोग कितने संपन्न हैं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह अपने सबसे कमजोर और वंचित वर्ग के साथ कैसा व्यवहार करता है।

हमें इस बात का गर्व है कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के योग्य नेतृत्व में केन्द्र सरकार पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा विभिन्न कानूनों और योजनाओं के माध्यम से न केवल विकासात्मक अंतर को कम करने का प्रयास किया जा रहा है, बल्कि एक ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में कार्य हो रहा है, जहाँ हर व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो।

हम सभी जानते हैं कि किसी भी नीति की सफलता केवल उसके निर्माण में नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित होती है। यही कारण है कि केंद्र और राज्य सरकारों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के बीच सशक्त समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन राज्य सरकारों और यूटी प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। अतः यह “चिंतन शिविर” केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, संवाद और सहयोग को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

हमारा लक्ष्य स्पष्ट है कि हम समाज के सभी कमजोर और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ें और सभी के जीवन में व्याप्त विकास की खाई को पाटें। इन वर्गों के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जो विभिन्न योजनाएं लागू की गई हैं, वे मात्र सरकारी कागज़ नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक न्याय और समानता की गारंटी हैं। यह ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र का साक्षात स्वरूप है।

साथियो,

हम सभी जानते हैं कि ‘चिंतन’ हमारी भारतीय संस्कृति का मूल है। यह शिविर केवल योजनाओं की समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘अंत्योदय’ के संकल्प को सिद्ध करने का एक महायज्ञ है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाना और उसे सम्मानजनक जीवन देना।

मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि चंडीगढ़ प्रशासन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि वर्ष 2025-26 के दौरान हमने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं:

  • अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहनः सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए ‘अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना’ के तहत हमने 50 जोड़ों को लाभान्वित किया है। इन जोड़ों को 2.5 लाख रुपये की संयुक्त एफडीआर प्रदान की गई है, ताकि वे अपने नए जीवन की मजबूत शुरुआत कर सकें। इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा अगस्त 2025 से मार्च 2026 के बीच नागरिक अधिकार संरक्षण एक्ट और SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 18 कैंप लगाए गए। इन कैंपों के माध्यम से 1 हजार 605 विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को जागरूक किया गया है, ताकि एक भेदभाव-मुक्त समाज का निर्माण हो सके।
  • अनुसूचित जाति का सशक्तिकरणः इस वर्ष चंडीगढ़ प्रशासन ने कुल 511 अनुसूचित जाति लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ा है। इसमें छोटे व्यवसायों के लिए ऋण, शिक्षा, वाहन खरीद, कौशल विकास और विशेष रूप से सफाई कर्मचारियों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं शामिल हैं। वहीं सुरक्षा के लिए चौबीस घंटे एस.सी/एस.टी. हेल्पलाइन निरंतर कार्यरत है।
  • गरिमापूर्ण स्वच्छता कार्यः चंडीगढ़ को पूर्णतः ‘मैला ढोने की प्रथा’ (Manual Scavenging)से मुक्त घोषित किया जा चुका है। चंडीगढ़ में सारा सफाई कार्य आधुनिक मशीनों और उपकरणों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे हमारे सफाई मित्रों को सुरक्षा और सम्मान मिला है।
  • ट्रांसजेंडर कल्याणः समावेशी समाज की दिशा में कदम बढ़ाते हुए चंडीगढ़ में एक ‘ट्रांसजेंडर सेल’ की स्थापना की गई है। समाज के हर वर्ग को सम्मान व समान अवसर की प्रतिबद्धता के तहत, समाज कल्याण विभाग द्वारा 11 नवंबर 2025 को एक विशेष ‘समानता’ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसके माध्यम से ट्रांसजेंडर समुदाय को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। हमारा उद्देश्य सभी हितधारकों को संवेदनशील बनाना रहा है ताकि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल कर उन्हें गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित किया जा सके।
  • जून 2025 में ‘नशीली दवाओं के दुरुपयोग के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर हमने एक व्यापक जन-संपर्क अभियान चलाया, जिसके माध्यम से लगभग 3 लाख 51 हजार 23 व्यक्तियों तक पहुँच बनाकर उन्हें नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया। नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 16 विशेष कार्यक्रम और क्षमता निर्माण के लिए 8 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से 2 हजार 431 लोगों को ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से नशा-विरोधी शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही, युवा पीढ़ी को इस बुराई से बचाने के लिए स्कूली स्तर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्कूलों में कुल 486 गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनके जरिए 38 हजार 880 छात्र-छात्राओं तक अपनी पहुँच बनाकर उन्हें नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया है।
  • चंडीगढ़ एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र होने के कारण आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां शिक्षा प्राप्त करने हेतु आते हैं। इस निरंतर आवागमन के चलते शहर में युवाओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रहती है, जिससे उनकी संवेदनशील आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रयास करना आवश्यक हो जाता है। इस परिप्रेक्ष्य में, यूटी प्रशासन द्वारा नशा मुक्ति एवं नियंत्रण हेतु निरंतर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि युवाओं के लिए एक सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। हालांकि, इस चुनौती की व्यापकता को देखते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से बेहतर समन्वय, रणनीतिक सहयोग एवं अतिरिक्त समर्थन प्रदान करने का विनम्र अनुरोध है, जिससे चंडीगढ़ को नशा मुक्त बनाने के संकल्प को और अधिक मज़बूत किया जा सके।
  • चंडीगढ़ प्रशासन दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए पूरी तरह समर्पित है, जिसके अंतर्गत चंडीगढ़ में दिव्यांगजनों की 14 हजार 796 की लक्षित जनसंख्या के मुकाबले अब तक कुल 16 हजार 915 पंजीकरण किए जा चुके हैं, जो कि लक्ष्य का 114.32 प्रतिशत है, और इनमें से 13 हजार 70 (88.33 प्रतिशत) दिव्यांगजनों के Unique Disability ID Card भी जारी किए जा चुके हैं। इस प्रक्रिया को और भी सुगम बनाने के लिए शहर के पाँच प्रमुख अस्पतालों GMSH-16, GMCH-32, PGIMER, GRIID-31 और सेक्टर-32 स्थित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान को मूल्यांकन हेतु निर्धारित किया गया है।
  • चंडीगढ़ में दिव्यांगजनों के लिए पुनर्वास सेवाओं को मज़बूत और सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से, सामाजिक कल्याण विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा PRAYAAS में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (DDRC) की स्थापना हेतु स्थान चिन्हित किया गया है। इस संबंध में सिपडा  (SIPDA) योजना के अंतर्गत बजट स्वीकृति के लिए प्रस्ताव दिनांक 17.02.2026 को पत्र के माध्यम से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली को प्रेषित किया गया है।
  • दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, 14 फरवरी 2026 को दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए आदरणीय डॉ. वीरेंद्र कुमार जी द्वारा ‘नेत्र’ (NETRA) डिजिटल लाइब्रेरी का उद्घाटन किया गया। इस आधुनिक लाइब्रेरी के माध्यम से ऑडियो बुक्स, ई-टेक्स्ट और सहायक तकनीक से जुड़ी शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जिससे दृष्टिबाधित साथियों को स्वतंत्र रूप से सीखने और कौशल विकास में बड़ी मदद मिल रही है। यह पहल ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए शुरू की गई है, ताकि शिक्षा तक आसान पहुंच बनाकर हमारे दृष्टिबाधित युवाओं को ज्ञान के बल पर सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
  • इसके साथ ही, बुजुर्गों की देखभाल के लिए विभाग द्वारा चंडीगढ़ में दो सीनियर सिटीजन होम चलाए जा रहे हैं, जो सेक्टर-15 और सेक्टर-43 में स्थित हैं। सेक्टर-15 स्थित होम विशेष रूप से बेसहारा बुजुर्गों के लिए है, जहाँ उनके रहने, खाने-पीने, कपड़ों और स्वास्थ्य जांच जैसी तमाम सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त प्रदान की जा रही हैं, ताकि वे अपना बुढ़ापा सम्मान और सुरक्षा के साथ बिता सकें।

साथियो, 

नीतियां कितनी भी शानदार क्यों न हों, वे तब तक सफल नहीं हो सकतीं जब तक उनका धरातल पर सही क्रियान्वयन न हो। और इसी धरातल की प्राथमिक जिम्मेदारी हमारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के कंधों पर है।

इस ‘चिंतन शिविर’ का सबसे बड़ा उद्देश्य इसी समन्वय को मजबूत करना होना चाहिए। हमें एक ‘टीम इंडिया’ के रूप में काम करना है। यदि केंद्र सरकार योजना का मस्तिष्क है, तो राज्य सरकारें उसकी भुजाएं हैं। दोनों के बीच एक मजबूत तालमेल के बिना हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकते।

इस ‘शिविर’ में हमारा ध्यान कुछ प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित होना चाहिए। सबसे पहले, हमें नीति और क्रियान्वयन के बीच मौजूद कमियों की पहचान करनी होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योजनाएं कहाँ और किन कारणों से अटक रही हैं, तथा उन बाधाओं को समयबद्ध तरीके से दूर किया जा सके। इसके साथ ही, हमारा लक्ष्य शत-प्रतिशत संतृप्ति सुनिश्चित करना होना चाहिए, अर्थात् एक भी पात्र लाभार्थी अपने अधिकार से वंचित न रहे और सभी योजनाओं का लाभ 100 प्रतिशत लक्षित समूह तक पहुँचे।

इसके अतिरिक्त, लास्ट-माइल डिलीवरी को सुदृढ़ बनाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि सुदूर गाँवों और बस्तियों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक भी बिना किसी भ्रष्टाचार या अनावश्यक देरी के सरकारी सहायता पहुँच सके। 

भारत के संविधान ने हमें समानता, न्याय और गरिमा का अधिकार दिया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था, “सामाजिक और आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक लोकतंत्र टिक नहीं सकता।” यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।

देवियो और सज्जनो,

हम सभी जानते हैं कि भारत आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। हमने वर्ष 2047 तक भारत को एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने का विराट संकल्प लिया है। लेकिन, क्या हम एक ऐसे ‘विकसित भारत’ की कल्पना कर सकते हैं जहाँ हमारा एक सफाई कर्मचारी आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा हो? क्या हम ऐसे भारत की कल्पना कर सकते हैं जहाँ कोई दिव्यांगजन अवसर के अभाव में पीछे छूट जाए? नहीं!

विकसित भारत का मार्ग ‘अंत्योदय’ से होकर गुजरता है। आदरणीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने कहा था, ‘‘जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति का उत्थान नहीं हो जाता, तब तक देश का विकास अधूरा है।’’ विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा जब विकास समावेशी होगा।

मैं यहाँ एक प्रेरणादायक पंक्ति कहना चाहूँगा, “जिस समाज में सबसे कमजोर व्यक्ति सुरक्षित और सम्मानित महसूस करता है, वही समाज वास्तव में सशक्त और विकसित कहलाता है।”

और जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा था, “किसी भी निर्णय को लेते समय उस सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति के बारे में सोचिए, और स्वयं से पूछिए कि आपका निर्णय उसके लिए कितना उपयोगी है।”

आज के इस चिंतन शिविर में उपस्थित सभी नीति-निर्माताओं और प्रशासकों से मेरा यह आह्वान है कि इन तीन दिनों में आप फाइलों और आंकड़ों से बाहर निकलकर, मानवीय संवेदनाओं के साथ चर्चा करें। हमें ऐसी नीतियां बनानी हैं जो कागजों पर नहीं, लोगों के जीवन में बोलें।

पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की ये पंक्तियाँ आज के संदर्भ में बहुत सटीक बैठती हैं:

‘‘बाधाएं आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं,

पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,

निज हाथों में हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा!’’

आइए, हम सब कदम मिलाकर चलें। केंद्र और राज्य की सीमाएं भूलकर, एक ‘सशक्त, सुरक्षित और समावेशी भारत’ के निर्माण के लिए मंथन करें।

मुझे पूरी उम्मीद है कि 26 अप्रैल को जब यह ‘चिंतन शिविर’ संपन्न होगा, तो हम सब अपने-अपने राज्यों में एक नई ऊर्जा, एक स्पष्ट रोडमैप और एक अटूट संकल्प के साथ वापस लौटेंगे।

आप सभी को इस अत्यंत महत्वपूर्ण ‘मंथन’ के लिए मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ।

धन्यवाद,

जय हिंद!