SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF INAUGURATION CEREMONY FOR STUDENTS BY NOBLE FOUNDATION AT LUDHIANA ON APRIL 30,2026.
- by Admin
- 2026-04-30 14:50
नोबल फाउंडेशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 30.04.2026, गुरूवार समयः दोपहर 12:00 बजे स्थानः लुधियाना
नमस्कार!
आज लुधियाना की इस ऊर्जावान और उद्यमशील धरती पर, ‘नोबल फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित इस बहुआयामी और अत्यंत प्रेरणादायक समारोह में उपस्थित होकर मुझे अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है।
आज का यह समारोह अत्यंत विशेष है क्योंकि आज हमने समाज के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों, शिक्षा और स्वावलंबन, को एक साथ मजबूती प्रदान की है। एक ओर जहाँ वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए फाउंडेशन के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल बैग और पुस्तकें वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी गई है, वहीं दूसरी ओर सिलाई प्रशिक्षण केंद्र से अपना कोर्स पूरा करने वाली हमारी कर्मठ बहनों को प्रमाणपत्र सौंपकर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर किया गया है। इसके साथ ही, समाज के प्रति अपनी सेवाओं के लिए 5 विशिष्ट विभूतियों को ‘स्वाभिमान सम्मान’ से अलंकृत करना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से अत्यंत गर्व का विषय है।
आज का यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं है; यह एक ‘विकसित और सशक्त भारत’ की उस मजबूत नींव का प्रतीक है, जहाँ समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का संकल्प लिया गया है।
मेरा मानना है कि समाज सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि एक साधना है। और मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता है कि नोबल फाउंडेशन इस साधना को पूरी निष्ठा के साथ कर रहा है।
आज मुझे ‘नोबल फाउंडेशन’ की इस अद्भुत और प्रेरणादायक यात्रा के बारे में बात करते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है। समाजसेवी श्री राजेन्द्र शर्मा द्वारा वर्ष 2009 में स्थापित इस संस्था ने सड़कों पर भीख मांगने और कूड़ा बीनने वाले जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा की रोशनी से जोड़ने के एक महान संकल्प के साथ शुरुआत की थी। केवल 5 बच्चों से शुरू हुआ यह सफर आज एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है।
वर्तमान में, फाउंडेशन द्वारा माँ शारदा विद्यापीठ के नाम से चलाए जा रहे पंजाब के 30 स्कूलों में, जिनमें से 26 अकेले लुधियाना में हैं, लगभग 5 हजार बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस पुनीत कार्य में लगभग 150 शिक्षक निस्वार्थ भाव से अपना योगदान दे रहे हैं।
मुझे यह जानकर अत्यंत हर्ष और गर्व हो रहा है कि सत्र 2025-26 की 5वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में संस्था के 188 बच्चों ने परीक्षा दी और उनमें से 52 बच्चों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित कर अपनी असाधारण मेधा का परिचय दिया है। अभावों और सीमित संसाधनों के बावजूद इन बच्चों द्वारा हासिल की गई यह सफलता यह सिद्ध करती है कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती।
यह गर्व का विषय है कि संस्था बच्चों में प्रारंभिक अवस्था से ही बचत और वित्तीय साक्षरता के संस्कार विकसित कर रही है। ‘पिग्गी बैंक प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को एक गुल्लक दी जाती है, जिसमें वे अपने जेब खर्च का एक हिस्सा नियमित रूप से जमा करते हैं। वर्ष के अंत में यह राशि उनके बैंक खातों में सुरक्षित जमा कर दी जाती है, और अधिकतम बचत करने वाले बच्चों को पुरस्कृत भी किया जाता है। यह पहल आत्मनिर्भरता और वित्तीय अनुशासन की मजबूत नींव है।
यह फाउंडेशन केवल स्कूली शिक्षा तक ही सीमित नहीं है। इसने लोगों के घरों में काम करने वाली अब तक 1 हजार से अधिक महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है, और परिवारों को नशामुक्ति के प्रति जागरूक भी किया है।
स्वास्थ्य सेवा के पुनीत कार्य में भी इस संस्था का योगदान अतुलनीय है। इसके द्वारा आयोजित निरंतर चिकित्सा शिविरों के द्वारा अब तक 33 हजार से अधिक नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। इन शिविरों का दायरा केवल निशुल्क दवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें चश्मे का वितरण, आँखों की जटिल सर्जरी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर जांच जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएँ भी शामिल हैं ।
सबसे प्रेरक बात यह है कि जिन बच्चों ने कभी अभाव देखा था, वे आज पंजाब, केरल, उत्तराखंड और नेपाल जैसी जगहों पर राष्ट्रीय आपदाओं के समय राहत कार्यों में अपना योगदान दे रहे हैं। साथ ही, वे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों पर हमारे सैनिकों को राखी और कार्ड भेजकर अपना सम्मान प्रकट करते हैं।
वर्तमान में नोबल फाउंडेशन प्राथमिक स्तर तक शिक्षा प्रदान कर रहा है, लेकिन अब इसका लक्ष्य 6वीं से 12वीं कक्षा तक एक भव्य ‘गुरुकुल’ स्थापित करना है। इस उद्देश्य के लिए संस्था ने पिछले वर्ष 44 साहीवाल गायों के साथ एक गौशाला की स्थापना करके आत्मनिर्भरता का एक सराहनीय मॉडल पेश किया है। इस गौशाला से उत्पादित देशी घी की बिक्री से प्राप्त आय को गुरुकुल के निर्माण में लगाया जाएगा।
हम सभी भली-भांति जानते हैं कि इतने विशाल और व्यापक अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत बड़े संसाधनों की आवश्यकता होती है। 3 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक खर्च वाले इस पुनीत मिशन को नोबल फाउंडेशन, शहर के उद्योगपतियों और आप जैसे शुभचिंतकों के उदार सहयोग से ही निरंतर आगे बढ़ा पा रहा है। समाज के प्रति आपका यह योगदान वास्तव में वंदनीय है।
मैं समझता हूं कि नोबल फाउंडेशन केवल बच्चों को शिक्षित ही नहीं कर रहा है, बल्कि जिंदगियां बदल रहा है, परिवारों को सशक्त बना रहा है और एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर रहा है।
देवियो और सज्जनो,
आज संस्था द्वारा संचालित स्कूलों में झुग्गी-झोंपड़ी से आने वाले बच्चों के लिए वर्ष 2026-27 के नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ किया गया है। साथ ही 10 नौनिहालों को स्कूल बैग और पुस्तकों का वितरण भी किया गया है।
मैं सभी बच्चों से कहना चाहूंगा कि आज जब आपको बैग और पुस्तकें प्रदान की गई हैं, तो यह केवल सामग्री का वितरण नहीं है, बल्कि यह आपके सपनों को पंख देने का प्रयास है। ये पुस्तकें आपके जीवन को दिशा देंगी और आपको एक जिम्मेदार नागरिक बनाएंगी।
मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि छोटे सपने मत देखो, क्योंकि छोटे सपनों में बड़ी शक्ति नहीं होती। आपमें से प्रत्येक बच्चा भविष्य का वैज्ञानिक, शिक्षक, प्रशासक और देश का निर्माता बन सकता है।
मुझे इस महान कार्य को देखकर नेल्सन मंडेला जी का वह प्रसिद्ध कथन याद आता है। उन्होंने कहा था कि ‘‘शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं।’’ और मैं समझता हूं कि गरीबी और अभाव के चक्र को तोड़ने का एकमात्र अचूक अस्त्र शिक्षा ही है।
हमारी केंद्र सरकार का यह स्पष्ट विज़न है कि विकास का प्रकाश समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020), ‘समग्र शिक्षा अभियान’ और ‘पीएम श्री’ जैसी भारत सरकार की योजनाएं यह सुनिश्चित कर रही हैं कि हमारे देश का कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे। नोबल फाउंडेशन का यह प्रयास सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को धरातल पर उतारने का एक अत्यंत जीवंत उदाहरण है।
आज के इस कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण और भावुक कर देने वाला पहलू हमारी मातृशक्ति का सम्मान है। घरों में काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाली उन 6 माताओं-बहनों को मैं हृदय से नमन करता हूँ, जिन्होंने संस्था द्वारा संचालित सिलाई सेंटर में अपना 6 महीने का कोर्स पूरा किया है। आज उन्हें प्रमाण पत्र और उनमें से प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली 2 महिलाओं को सिलाई मशीन प्रदान की गई है।
बहनों, आपने यह सिद्ध कर दिया है कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र या परिस्थिति नहीं होती। एक प्रसिद्ध कहावत है कि ‘‘एक पुरुष को शिक्षित करना एक व्यक्ति को शिक्षित करना है, लेकिन एक महिला को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना एक पूरी पीढ़ी को सशक्त बनाना है।’’
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी बार-बार कहा है, “नारी शक्ति ही राष्ट्र की प्रगति की सबसे बड़ी शक्ति है।” आज आप सभी महिलाएं ‘आत्मनिर्भर भारत’ के इस संकल्प को साकार कर रही हैं।
भारत सरकार आज महिलाओं को केवल ‘लाभार्थी’ नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की ‘भागीदार’ मानती है। ‘लखपति दीदी योजना’, ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’, ‘मुद्रा योजना’, उज्ज्वला योजना और ‘स्टैंड-अप इंडिया’ जैसी तमाम योजनाएं हमारी महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ही चलाई जा रही हैं। यह सिलाई मशीन आपके लिए केवल एक उपकरण नहीं है, बल्कि आपके स्वाभिमान और आर्थिक आज़ादी का इंजन है।
देवियों और सज्जनों,
किसी भी राष्ट्र की महानता उसके उन नागरिकों से मापी जाती है जो समाज के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं। आज ‘नोबल फाउंडेशन’ द्वारा 5 ऐसी ही असाधारण विभूतियों को ‘स्वाभिमान सम्मान’ से अलंकृत किया गया है। मैं इन सभी को हृदय से बधाई देता हूँ।
एवन साइकिल्स के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह पाहवा जी (पद्मश्री सम्मानित): एवन साइकिल के माध्यम से आपने न केवल उद्योग जगत में पंजाब का नाम रोशन किया है, बल्कि हजारों-लाखों लोगों को रोजगार देकर राष्ट्र निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दिया है।
डॉ. नारायण दास भगत जी (पद्मश्री सम्मानित): भोपाल से पधारे डॉ. नारायण दास भगत जी ने हमारी पुरातन वस्तुओं और प्राचीन धरोहरों को सहेजने का जो महान कार्य किया है, वह सरकार के ‘विरासत भी, विकास भी’ के मंत्र का साक्षात स्वरूप है।
श्री साहब सिंह थिंद जीः जिन्होंने गदरी आंदोलन के महान स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों की मदद करने का बीड़ा उठाया है। आपका यह कार्य हमें याद दिलाता है कि हम उन शूरवीरों के ऋणी हैं जिन्होंने इस देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
श्री सुरिंदर पाल शर्मा जीः नासा (NASA) के पूर्व वैज्ञानिक होने के बावजूद, आपने अपनी जड़ों को नहीं भुलाया और पंजाब के एक गाँव को ‘गार्बेज मुक्त’ (कचरा मुक्त) बनाकर ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की एक मिसाल कायम की है। आपकी यह ‘रिवर्स माइग्रेशन’ और सेवा भाव युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है।
श्रीमती सविता भट्टाचार्य जीः मुंबई से पधारीं शास्त्रीय संगीत की इस महान साधिका ने देशभर के विभिन्न स्कूलों के 75 हज़ार बच्चों को तिरंगे के साथ ‘वंदेमातरम’ का गान करवाकर राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई है। आपने हमारी युवा पीढ़ी के दिलों में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ और देशभक्ति की जो लौ जगाई है, वह वंदनीय है।
आप पाँचों विभूतियों का जीवन और कार्य हम सभी के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश है।
देवियो और सज्जनो,
मेरा मानना है कि समाज के वंचित वर्ग का उत्थान केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हमारा सर्वोच्च नैतिक और मानवीय दायित्व है। हमारे भारतीय दर्शन में ‘अंत्योदय’ का विचार सर्वोपरि रहा है, जिसका अर्थ है, समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति का उदय।
जब तक समाज के सबसे पिछड़े, शोषित और वंचित व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से नहीं जोड़ा जाता, तब तक एक समर्थ और सशक्त राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। सच्चा विकास वही है जो केवल आँकड़ों में न दिखे, बल्कि वह महलों से निकलकर झुग्गी-झोंपड़ियों तक पहुँचे और हर गरीब के चेहरे पर मुस्कान लाए।
वंचित वर्गों के सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी और स्थायी मार्ग शिक्षा तथा कौशल विकास है। शिक्षा वह प्रकाश है जो अज्ञानता और अभावों के अंधेरे को मिटाकर भविष्य की नई राहें खोलती है। जब हम समाज के निर्धन बच्चों के हाथों में पुस्तकें सौंपते हैं, तो हम वास्तव में उन्हें स्वाभिमान के साथ जीने का अस्त्र प्रदान करते हैं। आर्थिक सहायता एक तात्कालिक सहारा हो सकती है, लेकिन शिक्षा और हुनर से प्राप्त आत्मनिर्भरता स्थायी होती है।
आज जब हमारा देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र पर चलते हुए ‘विकसित भारत 2047’ के महान लक्ष्य की ओर तीव्र गति से अग्रसर है, तो सरकार ने ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’, ‘आयुष्मान भारत’, और ‘पीएम स्वनिधि’ जैसी अनेक योजनाएं विशेष रूप से उन वर्गों के लिए तैयार की हैं जो दशकों तक उपेक्षित रहे।
लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि राष्ट्र निर्माण का यह विराट संकल्प केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जन-भागीदारी से ही सिद्ध किया जा सकता है। इसमें समाज के संपन्न वर्ग और स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत अनिवार्य हो जाती है।
मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है कि ‘नोबल फाउंडेशन’ जैसे संगठन इसी दिशा में समाज और सरकार के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रहे हैं। जब हम इस तरह सामूहिक रूप से प्रयास करेंगे, तभी एक ऐसे समरस समाज का निर्माण होगा जहाँ जन्म की परिस्थितियां किसी की भी प्रगति में बाधा नहीं बनेंगी।
मैं अंत में नोबल फाउंडेशन के प्रबंधन, सभी दानदाताओं और कार्यकर्ताओं की भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूँ। आपने यह साबित किया है कि निस्वार्थ सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, ‘‘वास्तव में जीवित वही हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं।’’
मैं सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, हमारी माताओं-बहनों की सफलता और सम्मानित विभूतियों के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।
आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जो न केवल आर्थिक रूप से संपन्न हो, बल्कि सामाजिक रूप से भी समरस और संवेदनशील हो।
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद!
जय हिंद!