SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FOUNDATION DAY OF GUJARAT, MAHARASHTRA AND HIMACHAL PRADESH AT PUNJAB LOK BHAVAN ON MAY 1, 2026.
- by Admin
- 2026-05-01 19:30
हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के स्थापना दिवस पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 01.05.2026, शुक्रवार समयः शाम 5:00 बजे स्थानः पंजाब लोकभवन
नमस्कार!
आज का दिन हम सभी के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का दिन है। आज हम यहाँ पंजाब लोक भवन के प्रांगण में हमारे देश के तीन गौरवशाली राज्यों ‘हिमाचल प्रदेश (15 अप्रैल 2026), महाराष्ट्र (01 मई 2026) और गुजरात (01 मई 2026), का स्थापना दिवस’ मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं।
मैं आज के इस शुभ अवसर पर आप सभी को इन तीनों महान राज्यों के स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात, तीनों राज्यों ने अपने-अपने क्षेत्र में न केवल प्रगति की नई मिसालें कायम की हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक समन्वय और आर्थिक विकास में भी अद्वितीय योगदान दिया है।
आज का यह आयोजन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अत्यंत दूरदर्शी और प्रेरणादायक संकल्पना, ‘‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’’ का एक सुंदर प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री जी का यह स्पष्ट विज़न है कि हमारे देश की विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ताकत है। जब एक राज्य के लोग दूसरे राज्य की संस्कृति, भाषा, खान-पान और त्योहारों को अपनाते हैं, तो राज्यों की सीमाएं मिट जाती हैं और एक अखंड भारत का निर्माण होता है। आज पंजाब लोकभवन में इन तीनों राज्यों का उत्सव मनाना इसी संकल्प को सिद्ध कर रहा है।
आज अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस भी है। इस अवसर पर, मैं पंजाब, चंडीगढ़ और पूरे देश के निर्माण एवं विकास में अपना अमूल्य योगदान देने वाले सभी श्रमिक भाइयों और बहनों को दिल से बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ। आपकी कड़ी मेहनत, निष्ठा और समर्पण ही हमारे समाज की नींव हैं। चाहे खेत-खलिहान हों, कारखाने हों, सड़कें हों या इमारतें आपके श्रम के बिना राष्ट्र की प्रगति की कल्पना अधूरी है।
आज जब हम हिमाचल प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र का स्थापना दिवस मना रहे हैं, तो इनकी कुछ विशेषताओं से मैं आपको परिचित करवाना चाहूंगा।
हिमाचल प्रदेश
जब हम हिमाचल प्रदेश की बात करते हैं, तो हमारे मन-मस्तिष्क में बर्फ से ढकी चोटियां, कल-कल करती नदियां और वहां के लोगों की निश्छल मुस्कान उभर आती है।
देश की आजादी के बाद राजा जोगेंद्र सेन की अगुवाई में 30 रियासतों का विलय हुआ और 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ। 26 जनवरी 1950 को भारत गणराज्य बना और हिमाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। 18 दिसंबर 1970 को संसद में हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम पारित हुआ और 25 जनवरी 1971 को हिमाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।
अस्तित्व में आने से लेकर आज तक हिमाचल प्रदेश विकास की राह पर लगातार अग्रसर है। हर क्षेत्र में शून्य से शुरूआत करने वाले इस छोटे से पहाड़ी राज्य ने 78 सालों में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।
1948 में हिमाचल प्रदेश में साक्षरता दर 7 प्रतिशत थी और आज यह प्रदेश पूर्ण साक्षर राज्य बन चुका है। प्रदेश में 5 एयरपोर्ट हैं, जिनकी 1948 में संख्या शून्य थी।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी प्रदेश ने अग्रणी मुकाम हासिल किया है। हिमाचल में अब 1 एम्स, 1 सेटेलाइट पीजीआई सहित 7 मेडिकल कॉलेज, 5 डेंटल कॉलेज, कई नर्सिंग और फार्मेसी कॉलेज हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल के पास 1 ट्रिपल आईटी, 1 आईआईटी, 3 स्वायत इंजीनियरिंग संस्थान और दर्जनों इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जहां प्रदेश सहित देश के दूसरे राज्यों के छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते हैं।
हिमालय की गोद में बसा हिमाचल प्रदेश का शाब्दिक अर्थ ‘बर्फ़ीले पहाड़ों का प्रांत’ है। प्राकृतिक सुंदरता और मनमोहक पर्यटन स्थलों के लिए प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश भारत के सबसे सुंदर, शांत और सुरम्य राज्यों में से एक है, जिसे देवताओं की भूमि भी कहा जाता है।
इसकी राजधानी शिमला को पहाड़ों की रानी (Queen of the Hills) के रूप में सराहा जाता है। शिमला, मनाली, कुल्लू, धर्मशाला, डलहौजी, कसौली, चंबा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, पालमपुर, खज्जियार, कुफरी, सोलन, मंडी, नारकंडा आदि, ये स्थल हिमाचल के पर्यटन मानचित्र को वैश्विक पहचान देते हैं।
यहाँ के राष्ट्रीय उद्यान जैसे ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, पिन वैली नेशनल पार्क, इंदिरा गांधी वन्यजीव अभयारण्य, किऊलु नेशनल पार्क, खज्जियार वन्यजीव अभयारण्य जैवविविधता के संरक्षण के केंद्र हैं। साहसिक खेलों जैसे ट्रैकिंग, स्कीइंग, पैराग्लाइडिंग, रिवर राफ्टिंग आदि के लिए हिमाचल विश्वभर के युवाओं का आकर्षण केंद्र है। यहाँ की झीलें जैसे गोविंद सागर, रिवालसर, चंद्रताल, करसोग, मणिमहेश आदि प्राकृतिक सौंदर्य और अध्यात्म का संगम हैं।
हिमाचल प्रदेश केवल ‘देवभूमि’ ही नहीं, यह एक गौरवशाली ‘वीरभूमि’ भी है। इसने देश को मेजर सोमनाथ शर्मा जैसे प्रथम परमवीर चक्र विजेता से लेकर कैप्टन विक्रम बत्रा, राइफलमैन संजय कुमार और कैप्टन सौरभ कालिया जैसे शूरवीर दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश में पांच शक्तिपीठ हैं, जो कि मां चामुंडा देवी, मां चिंतपूर्णी देवी, मां बज्रेश्वरी देवी, मां नैना देवी और मां ज्वाला जी के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा बैजनाथ मंदिर, लक्ष्मी नारायाण मंदिर, हिडिम्बा मंदिर, भीमकाली मंदिर, शंगचूल महादेव मंदिर, बिजली महादेव मंदिर, त्रिलोकीनाथ, बाबा बालकनाथ, संकट मोचन, मणिकरण, किन्नौर कैलाश, श्रीखंड कैलाश, मणिमहेश कैलाश और जाखू मंदिर आदि भी दर्शनीय धार्मिक स्थल हैं।
बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए धर्मशाला का नामग्याल मठ, तिब्बती मठ, टाबो मठ, गुरु पद्मसंभव से जुड़े स्थल, सिख धर्म के लिए पांवटा साहिब, मणिकरण साहिब, त्रिवेणी साहिब आदि हिमाचल की धार्मिक विविधता को दर्शाते हैं।
कई पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में हिमालय को भगवान शिव की आसन स्थली और देवताओं का निवास क्षेत्र माना गया है। इसलिए इसे ‘देवभूमि’ भी कहा जाता है। राज्य को व्यास, पराशर, वसिष्ठ, मार्कण्डेय और लोमश आदि ऋषियों के निवास स्थल होने का गौरव प्राप्त है।
यहां विश्व प्रसिद्ध कुल्लू दशहरा, चंबा का मिंजर, श्री रेणुका जी मेला, लोहड़ी, हल्दा, फागली, लोसर और मंडी शिवरात्रि मेला जैसे त्योहार धूम धाम से मनाएं जाते हैं। यहां चंबा की मणिमहेश यात्रा श्रद्धालुओं की पहली पसंद है।
हिमाचल के हस्तशिल्प में कालीन, चमड़े के काम, कुल्लू शॉल, कांगड़ा पेंटिंग, चंबा रुमाल, स्टोल, कढ़ाई वाले घास के जूते (पुलन चप्पल), चांदी के आभूषण, धातु के बर्तन, बुने हुए ऊनी मोजे, पट्टू, बेंत और बांस की टोकरी (विकर और रतन) और लकड़ी का काम शामिल हैं।
विभिन्न रंगों की हिमाचली टोपियाँ भी प्रसिद्ध स्थानीय कला कृति हैं, और अक्सर इन्हें हिमाचली पहचान के प्रतीक के रूप में माना जाता है।
हिमाचल के लोकनृत्य जैसे नाटी, डांगी, छम, कयांग माला, लाहौली, दलशोन, चोलम्बा आदि प्रदेश के हर जिले की सांस्कृतिक पहचान हैं। नाटी नृत्य को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे बड़े लोक नृत्य के रूप में भी मान्यता मिली है।
अटल टनल (रोहतांग), विश्व की सबसे ऊँचाई पर बनी सिंगल ट्यूब टनल-प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि, बागवानी, पशुपालन, वानिकी, पर्यटन और पनबिजली पर आधारित है। यहाँ की 69 प्रतिशत आबादी कृषि से जुड़ी है। सेब, नाशपाती, आड़ू, बेर, खुमानी, आम, लीची, अमरूद, झरबेरी, अंगूर, चेरी, स्ट्रॉबेरी, अखरोट, बादाम, कीवी, ये सभी फल प्रदेश की बागवानी को समृद्ध बनाते हैं। हिमाचल देश का दूसरा सबसे बड़ा सेब उत्पादक राज्य है। इसे देश का फलों का कटोरा भी कहा जाता है।
कुछ तो बात है इस भूमि में कि इतने लोग यहां खींचे चले आते हैं। महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर तथा पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी भी इस भूमि से आकर्षित होकर यहां पर प्रवास के लिए आए थे। हिमाचल के लिए अटल जी ने कभी लिखा था, बर्फ ढंकी पर्वतमालाएं, नदियां, झरने, जंगल। किन्नरियों का देश, देवता डोलें पल-पल!
देवियो और सज्जनो,
यदि महाराष्ट्र और गुजरात की बात करें तो आज भले ही ये दोनों अलग-अलग राज्य हैं, लेकिन स्वतंत्रता के बाद ये दोनों बॉम्बे राज्य का हिस्सा थे, जहाँ मराठी और गुजराती भाषी जनसंख्या साथ रहती थी। 1950 के दशक में दोनों समुदायों ने अपनी भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण हेतु अलग राज्यों की मांग उठाई।
‘संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन’ और इंदुलाल यागनिक के नेतृत्व में चले गुजराती आंदोलन के परिणामस्वरूप 1 मई 1960 को बॉम्बे राज्य का विभाजन हुआ और महाराष्ट्र व गुजरात दो स्वतंत्र राज्यों के रूप में स्थापित हुए।
यह घटना भारतीय इतिहास में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही, और आज इन दोनों राज्यों की प्रगति उस निर्णय की दूरदर्शिता को प्रमाणित करती है।
महाराष्ट्र
यदि महाराष्ट्र की बात करें तो इसका नाम संस्कृत के दो शब्दों ‘‘महा’’ और ‘‘राष्ट्र’’ से मिलकर बना है। ‘‘महा’’ का अर्थ है ‘‘महान’’ और ‘‘राष्ट्र’’ का अर्थ है ‘‘देश’’ । इसलिए, ‘‘महाराष्ट्र’’ का अर्थ है ‘‘महान देश’’।
प्राचीन ग्रंथों में ‘महाराष्ट्र’ का उल्लेख बार-बार मिलता है, जो वैदिक संस्कृति के केंद्र के रूप में जाना जाता है। मौर्य, सातवाहन, चालुक्य, राष्ट्रकूट, शिलाहार और यादव जैसे राजवंशों ने यहाँ शासन किया।
मराठा साम्राज्य के उदय से पहले यह क्षेत्र बहमनी, गोलकुंडा और मुगल शासन के अधीन रहा, परंतु स्थानीय संस्कृति और स्वाभिमान सदैव जीवित रहे।
महाराष्ट्र वह भूमि है जहाँ संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत एकनाथ और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे महान व्यक्तित्वों ने जन्म लिया।
महाराष्ट्र ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत अग्रणी भूमिका निभाई। गांधीजी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ तक, महाराष्ट्र के वीर सपूतों ने अद्वितीय साहस और बलिदान का परिचय दिया। वासुदेव बलवंत फड़के, बाल गंगाधर तिलक और विनायक दामोदर सावरकर जैसे महान नेताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।
यह पावन धरती महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, महर्षि कर्वे और पंडिता रमाबाई जैसी समाज सुधारक विभूतियों, नानाजी देशमुख जैसे समाजसेवी तथा सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ियों की धरती है।
क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का तीसरे सबसे बड़े राज्य महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई, भारत की आर्थिक राजधानी भी कहलाती है। यहाँ शेयर बाजार, फिल्म उद्योग ‘बॉलीवुड’, अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह और विश्वस्तरीय संस्थान राज्य की पहचान को मजबूती देते हैं।
अन्य राज्यों के मुकाबले महाराष्ट्र में सबसे अधिक 6 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल स्थित हैं - छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, अजन्ता की गुफाएँ, एलिफेंटा की गुफाएं, एलोरा की गुफाएँ, पश्चिमी घाट और मुंबई का विक्टोरियन गोथिक और आर्ट डेको एन्सेम्बल।
महाराष्ट्र को भारत का सर्वाधिक किलों वाला राज्य कहा जाता है, जहाँ लगभग 350 से अधिक प्राचीन और ऐतिहासिक किले स्थित हैं।
महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोनार झील एक अधिसूचित राष्ट्रीय भौगोलिक धरोहर स्मारक है जो अपने अद्वितीय उल्कापिंडीय उद्गम के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
लावणी, राज्य की एक प्रमुख पारंपरिक लोकनृत्य और गायन शैली है। वहीं, तमाशा एक लोकप्रिय लोकनाट्य रूप है।
महाराष्ट्र में माथेरान, लोनावला, पंचगनी और महाबलेश्वर जैसे लोकप्रिय स्थल हैं, जो हर साल हजारों सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। वहीं, मुंबई स्थित जुहू बीच देश ही नहीं, दुनिया भर में अपनी लोकप्रियता और जीवंत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
महाराष्ट्र अपने अनूठे व्यंजनों के लिए जाना जाता है, जिसमें कई प्रसिद्ध व्यंजन जैसे वड़ा पाव, मिसल पाव और पूरन पोली राज्य से उत्पन्न होते हैं।
इसी तरह, महाराष्ट्र में भव्य पैमाने पर आयोजित जन्माष्टमी पर दही हांडी तोड़ने की परंपरा और गणेश चतुर्थी का उत्सव, गणपति बप्पा मोरया का वो जयघोष, पूरे देश को हर्षोल्लास से सराबोर कर देता है। ये अब केवल महाराष्ट्र के ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पर्व हैं।
महाराष्ट्र गेटवे ऑफ इंडिया और हाजी अली दरगाह जैसे कई प्रतिष्ठित स्थलों का घर है। राज्य में सिद्धिविनायक मंदिर, शिरडी साईं बाबा मंदिर, तख्त श्री हजूर साहिब और शनि शिंगणापुर जैसे कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जो पूरे भारत के भक्तों को आकर्षित करते हैं।
महाराष्ट्र का पंजाब से एक बहुत ही पवित्र नाता है। आप में से कुछ लोग शायद जानते हों कि संत नामदेव जी महाराष्ट्र से सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर पंजाब के जिला गुरदासपुर के गाँव घुमान पहुँचे थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह यहां 20 साल से अधिक समय तक रहे।
संत नामदेव के 62 अभंगों को गुरु ग्रंथ साहिब में ‘नामदेवजी की मुखबानी’ के रूप में शामिल किया गया है।
गुजरात
अगर गुजरात की बात करें तो इसका इतिहास समृद्ध है। भले ही 1960 में गुजरात एक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, लेकिन इसका इतिहास लगभग 2 हजार साल पुराना है। सिंधु घाटी सभ्यता में भी गुजरात के कुछ स्थानों का जिक्र आता है। यहाँ अधिकांश समय गुर्जर जनजाति के लोगों ने राज किया है। यही कारण है कि पुराने समय में गुजरात को ‘‘गुर्जरात्रा’’ के नाम से जाना जाता था।
इतिहास के विभिन्न कालखंडों में मौर्य, गुप्त, चालुक्य, राष्ट्रकूट, सोलंकी, वघेल, मुगल, मराठा और ब्रिटिश शासकों ने यहाँ शासन किया।
गुजरात की भूमि ने महात्मा गांधी, सरदार पटेल, दादा भाई नौरोजी, विक्रम साराभाई, धीरूभाई अंबानी और जमशेदजी टाटा जैसे महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, विज्ञान, उद्योग, और सामाजिक सुधारों में अमूल्य योगदान दिया।
आधुनिक भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भी गुजरात की ही धरती से हैं। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और निर्णायक नीतियों के परिणामस्वरूप आज भारत विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है और वैश्विक मंच पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।
गुजरात, खासकर सूरत शहर, को ‘‘हीरों की राजधानी’’ भी कहा जाता है। दुनिया में जितने हीरे बेचे जाते हैं, उनमें से लगभग 90 प्रतिशत से अधिक हीरों की कटाई और पॉलिशिंग गुजरात में होती है।
कच्छ का रण, गुजरात में स्थित एक विशाल और अद्भुत नमक मरुस्थल है, जो विश्व के सबसे बड़े खारे रेगिस्तानों में से एक माना जाता है।
गुजरात प्रमुख स्वतंत्रता आंदोलनों की भूमि रहा है - खेड़ा, बारडोली, बोरसाद में सत्याग्रह और नमक सत्याग्रह। महात्मा गांधी का साबरमति आश्रम यहां स्थित है।
गुजरात भारत में सबसे अधिक औद्योगीकृत राज्यों में से एक है और कई बड़े निगमों का घर है। राज्य अपने पेट्रोकेमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा और इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए जाना जाता है। अहमदाबाद शहर अपने कपड़ा उद्योग के कारण भारत के मैनचेस्टर के रूप में जाना जाता है।
गुजराती व्यंजन अपने मीठे और नमकीन व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है जिनमें ढोकला, खांडवी, जलेबी, थेपला और फाफड़ा शामिल हैं।
भारत की श्वेत क्रांति या दूध आधारित क्रांति गुजरात में हुई थी। इस ऐतिहासिक आंदोलन ने भारत को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बना दिया और विश्व में सबसे बड़े दूध उत्पादक देश के रूप में स्थापित किया।
गुजरात भारत में नमक का सबसे बड़ा उत्पादक है। देश में लगभग 80 प्रतिशत नमक गुजरात में ही उत्पादित किया जाता है।
गुजरात का सबसे बड़ा शहर अहमदाबाद भारत का पहला यूनेस्को विश्व धरोहर शहर है।
गुजरात का गिरनार पर्वत, 800 से अधिक प्राचीन जैन मंदिरों का पवित्र निवास स्थल है। वहीं, सोमनाथ, अक्षरधाम, द्वारकाधीश और यहां के अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में हर साल लाखों लोग दर्शन करने आते हैं। नवरात्रों के दिनों में गुजरात में मनाए जाने वाले डांडिया उत्सव की देश-विदेश में धूम रहती है।
‘लौह पुरुष’ सरदार पटेल की स्मृति में निर्मित 182 मीटर ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ आज विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा है।
गुजरात के पास भारत के राज्यों में सबसे लंबी तटरेखा है, जो 1,600 किलोमीटर तक फैली हुई है। यहां 41 बंदरगाह हैं, जिनमें 1 प्रमुख, 11 मध्यवर्ती और 29 छोटे बंदरगाह शामिल हैं।
गरबा नृत्य गुजरात की आध्यात्मिक अभिव्यक्ति है और पारंपरिक त्योहारों की उत्सव भावना विश्वभर में फैल चुकी है।
गुजरात के शिल्प उत्पादों की कारीगरी दुनिया भर में लोकप्रिय है, जो राज्य की जीवंत संस्कृति को प्रतिबिंबित करते हैं।
दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास गुजरात राज्य के सासन-गिर जंगल में स्थित है। यह स्थल गिर नेशनल पार्क और सैंक्चुरी के नाम से भी जाना जाता है।
साथियो,
ये तो हमारे महान राष्ट्र के केवल तीन राज्यों के उदाहरण हैं, जहाँ प्रकृति की समृद्धि, परंपराओं की गरिमा और विकास की अद्भुत गति का सुंदर संगम देखने को मिलता है। हमारा भारत तो विविधताओं, संभावनाओं और उपलब्धियों के अनगिनत रंगों से भरा हुआ है, जो इसे विश्व पटल पर एक विशिष्ट और गौरवपूर्ण पहचान दिलाता है।
हम अलग-अलग भाषाएं बोल सकते हैं, हमारे पहनावे अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारे भीतर धड़कने वाला दिल एक ‘भारतीय’ का है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और कच्छ से लेकर कामरूप तक, यह सांस्कृतिक धागा ही हमें एक सूत्र में बांधे रखता है। यही विविधता हमारी शक्ति है, यही हमारी पहचान है और यही हमें ‘विश्व गुरु’ बनने की दिशा में आगे बढ़ाती है।
आज का भारत बदल रहा है। यह वह भारत नहीं है जो दुनिया की ओर देखता था; आज दुनिया समाधान के लिए भारत की ओर देखती है। भारत आज सही मायनों में वैश्विक पटल पर एक ‘मशाल वाहक’ बनकर उभर रहा है। चाहे वह योग हो, आयुर्वेद हो, पर्यावरण संरक्षण हो या वैश्विक शांति का संदेश, भारत पूरी दुनिया को ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का मार्ग दिखा रहा है।
हम ‘विश्व गुरु’ बनने की राह पर तेज़ी से अग्रसर हैं, और यह तभी संभव है जब हम सभी 140 करोड़ भारतीय कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। विकास की इस यात्रा में देश के सभी राज्यों को भारत के विकास इंजन के रूप में अपनी अहम भूमिका निभानी है।
अंत में, मैं इस अवसर पर आप सभी से यह आह्वान करता हूँ कि हम ‘अमृत काल’ में भारत को 2047 तक एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के संकल्प को साकार करें। इसके लिए हमारा एकजुट रहना अत्यंत आवश्यक है।
मुझे हमारे प्राचीन वेदों का वह शांति और एकता का मंत्र याद आता है, जो आज के समय में सबसे अधिक प्रासंगिक है, ‘‘संगच्छध्वम् संवदध्वम् सम् वो मनांसि जानताम्।’’ यानी हम सब एक साथ चलें, एक साथ बोलें, और हमारे मन एक हों।
मैं एक बार फिर से हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के निवासियों को स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई देता हूँ। आप सभी स्वस्थ रहें, सुखी रहें और राष्ट्र की प्रगति में अपना अमूल्य योगदान देते रहें।
धन्यवाद,
जय हिन्द!