SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASIONOF MOTORISED WHEEL CHAIR DISTRIBUTION FUNCTION BY SAKSHAM PUNJAB AT PGIMER CHANDIGARH ON APRIL 21, 2026.
- by Admin
- 2026-04-21 19:20
सक्षम पंजाब के ‘मोटराइज्ड व्हीलचेयर वितरण समारोह’ पर
माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन
दिनांकः 21.04.2026, मंगलवार
समयः शाम 5:00 बजे
स्थानः पीजीआई चंडीगढ़
नमस्कार!
आज ‘सक्षम पंजाब’ द्वारा आयोजित इस अत्यंत पुनीत ‘मोटराइज्ड व्हीलचेयर वितरण समारोह’ में उपस्थित होकर मुझे हृदय से असीम शांति और गौरव की अनुभूति हो रही है। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में मैं अनेक कार्यक्रमों में जाता हूँ, लेकिन जहाँ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े या शारीरिक रूप से किसी चुनौती का सामना कर रहे हमारे भाई-बहनों के जीवन में रंग भरने का कार्य हो रहा हो, वहाँ उपस्थित होना मैं अपना परम सौभाग्य मानता हूँ।
आज के इस पुनीत कार्य का श्रेय ‘समदृष्टि, क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल’ (सक्षम) की पंजाब इकाई को जाता है। मैं ‘सक्षम पंजाब’ की पूरी टीम को इस उत्कृष्ट और संवेदनशील पहल के लिए अपनी ओर से हार्दिक बधाई देता हूँ।
मुझे ज्ञात हुआ है कि ‘सक्षम’ की स्थापना वर्ष 2008 में नागपुर में हुई थी, जिसका मूल भाव है, “दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना तथा उनके पूर्ण सहभाग एवं समावेशन के माध्यम से समाज और राष्ट्र के समग्र हित को सुदृढ़ करना।” आज यह संस्था देशभर में अपनी सक्रिय इकाइयों के माध्यम से दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण हेतु सराहनीय कार्य कर रही है, जिनमें सक्षम पंजाब एक सशक्त कड़ी के रूप में उभरकर सामने आया है।
यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि यह संस्था दिव्यांगजनों की सक्रिय सहभागिता से संचालित होती है। यह न केवल दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए कार्यरत है, बल्कि समाज के सक्षम वर्ग को भी सेवा और समर्पण के विविध प्रकल्पों से जोड़कर एक समावेशी वातावरण का निर्माण कर रही है।
इसका उत्कृष्ट उदाहरण प्रयागराज महाकुंभ के दौरान आयोजित ‘नेत्र महाकुंभ’ है, जहाँ लगभग 2 लाख 78 हजार लोगों की नेत्र-जाँच, लगभग 1 लाख 50 हजार लाख चश्मों का वितरण, तथा लगभग 800 विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं के माध्यम से व्यापक स्तर पर जनसेवा का कार्य किया गया। इस महाअभियान में पंजाब से भी लगभग 30 डॉक्टरों की टीम ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इसी क्रम में, राजस्थान के लोकदेवता बाबा रामदेव जी, रामदेवरा में दिनांक 1 अगस्त 2025 से 2 सितंबर 2025 तक (33 दिवस) आयोजित ‘नेत्र कुंभ’ भी एक अद्वितीय सेवा-उदाहरण है, जिसमें लगभग 1 लाख 25 हजार नेत्र-जाँच, 1 लाख चश्मों का वितरण, तथा लगभग 11 हजार सफल नेत्र-ऑपरेशन किए गए। इस विशाल आयोजन में लगभग 100 डॉक्टर, 100 ऑप्टोमेट्रिस्ट और 1500 से अधिक प्रबंधक कार्यकर्ता सेवा में संलग्न रहे।
पंजाब में ‘सक्षम’ वर्ष 2018 से निरंतर सक्रिय है और वर्तमान में इसकी टीम राज्य के 15 जिलों में कार्य कर रही है। संस्था द्वारा पटियाला एवं लुधियाना में स्थापित दो दिव्यांग सेवा केंद्र दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु निरंतर सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, ‘सक्षम पंजाब’ द्वारा समय-समय पर चिकित्सा शिविर, रक्तदान शिविर, नेत्र-जाँच शिविर तथा विभिन्न विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया जाता रहा है, जिससे समाज में जागरूकता एवं सहभागिता को सुदृढ़ किया जा रहा है।
‘सक्षम’ का संकल्प है कि ऐसा अनुकूल एवं समावेशी वातावरण निर्मित किया जाए, जहाँ दिव्यांगजन सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक, सभी क्षेत्रों में समान रूप से सहभागिता कर सकें तथा आत्मसम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
भाइयो और बहनों,
हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने एक बहुत ही सुंदर और क्रांतिकारी शब्द दिया है, ‘दिव्यांग’। पहले हम ‘विकलांग’ कहते थे, जिसमें एक कमी का बोध होता था। लेकिन ‘दिव्यांग’ शब्द यह स्पष्ट करता है कि यदि ईश्वर ने किसी व्यक्ति के शरीर के एक अंग में कोई चुनौती दी है, तो उसके भीतर एक ‘दिव्य अंग’ या एक विशेष क्षमता भी अवश्य दी है।
मुझे यह कहते हुए कोई संकोच नहीं कि हमारे दिव्यांग भाई-बहनों में जो अदम्य साहस, संघर्ष करने की क्षमता और जीवन के प्रति जो उत्साह होता है, वह हम सभी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। किसी कवि ने सत्य ही कहा है, ‘‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’’
मैं समझता हूं कि आज जिन 20 दिव्यांगजनों को यह मोटराइज्ड व्हीलचेयर प्रदान की जा रही है, यह केवल लोहे और बैटरी से बनी एक मशीन नहीं है; यह आपकी आत्मनिर्भरता के नए पंख हैं। यह आपके रुके हुए कदमों को गति देने और आपके सपनों को नई उड़ान देने का एक माध्यम है।
साथियो,
भारतवर्ष की भूमि हमेशा से त्याग, सेवा और परोपकार की भूमि रही है। और जब हम पंजाब की बात करते हैं, तो यह तो हमारे महान गुरुओं की धरती है। श्री गुरु नानक देव जी ने हमें ‘‘वंड छकना’’ (मिल-बांट कर खाना) और ‘‘सरबत दा भला’’ (सभी का कल्याण) का अमर संदेश दिया है।
हमारे शास्त्रों में सेवा और दान का जो महत्व बताया गया है, वह किसी से छिपा नहीं है,
‘‘परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः, परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
परोपकाराय दुहन्ति गावः, परोपकारार्थ मिदम् शरीरम्।।‘‘
अर्थात, वृक्ष परोपकार के लिए फलते हैं, नदियां परोपकार के लिए बहती हैं, गायें परोपकार के लिए दूध देती हैं; यह शरीर भी परोपकार के लिए ही है।
आज जिन दानवीरों ने इस व्हीलचेयर वितरण के लिए आर्थिक सहयोग दिया है, मैं उन्हें नमन करता हूँ। सेवा और करुणा ही ईश्वर तक पहुँचने का सर्वोत्तम मार्ग है। हम सभी जानते हैं कि “नर सेवा ही नारायण सेवा है”। आपने इन दिव्यांगजनों के चेहरों पर मुस्कान लाकर साक्षात ईश्वर की आराधना की है। मैं समाज के अन्य सामर्थ्यवान लोगों से भी आह्वान करता हूँ कि वे ‘सक्षम’ जैसी संस्थाओं के साथ जुड़ें और अपनी आय का कुछ अंश समाज के वंचित वर्ग के उत्थान में लगाएं।
देवियो और सज्जनो,
हम सभी जानते हैं, किसी भी राष्ट्र की प्रगति तब तक अधूरी है जब तक विकास की मुख्यधारा में समाज के हर वर्ग की भागीदारी न हो। ‘‘सक्षम भारत, समर्थ भारत’’ का सपना तभी साकार हो सकेगा जब दिव्यांगजनों को राष्ट्र की प्रगति में समान भागीदार के रूप में मान्यता दी जाए।
दिव्यांगजन हमारे समाज का अभिन्न, सम्मानित और सशक्त अंग हैं। वे किसी भी दृष्टि से समाज से अलग या कम नहीं हैं, बल्कि अपनी विशिष्ट क्षमताओं, दृढ़ इच्छाशक्ति और रचनात्मक सोच के माध्यम से समाज को समृद्ध करने वाले नागरिक हैं।
‘‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’’ के मंत्र से प्रेरित होकर मोदी सरकार ने 2014 से अब तक देशभर में 32 लाख से अधिक दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण एंव यंत्र उपलब्ध करवाए हैं, जबकि लगभग 1 हजार दिव्यांगजनों को सूक्ष्म उद्यमों और आजीविका संबंधी गतिविधियों के विस्तार के लिए 18 करोड़ रूपये से अधिक के ऋण उपलब्ध करवाए गए।
जब हम दिव्यांगजन सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो अनेक प्रेरक उदाहरण सामने आते हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि शारीरिक सीमाएँ कभी भी हौसलों की उड़ान को रोक नहीं सकतीं। आज भारत के दिव्यांगजन हर क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं।
खेल जगत में जम्मू-कश्मीर की शीतल देवी ने बिना हाथों के पैरों से तीर चलाकर एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। देवेंद्र झाझरिया ने पैरालंपिक में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। इसी क्रम में अवनि लेखरा ने टोक्यो 2020 में स्वर्ण व कांस्य तथा पेरिस 2024 में पुनः स्वर्ण पदक जीतकर अदम्य साहस और संकल्प का उदाहरण प्रस्तुत किया। जबकि 2025 में भारत की दृष्टिबाधित महिला टीम ने भी टी-20 विश्व कप का खिताब जीतकर भारत की खेल-शक्ति का नया आयाम प्रस्तुत किया।
प्रशासनिक सेवाओं में इरा सिंघल ने 2014 में यू.पी.एस.सी. में प्रथम स्थान प्राप्त कर यह दिखाया कि शारीरिक चुनौती बुद्धिमत्ता और नेतृत्व को सीमित नहीं कर सकती। साहस की मिसाल अरुणिमा सिन्हा हैं, जिन्होंने कृत्रिम पैर के सहारे माउंट एवरेस्ट फतह किया। उद्यमिता में श्रीकांत बोला ने दृष्टिबाधा के बावजूद ‘बोलंट इंडस्ट्रीज’ की स्थापना कर सैकड़ों दिव्यांगजनों को रोजगार दिया।
कला के क्षेत्र में रविंद्र जैन जी ने जन्म से दृष्टिबाधित होते हुए भी भारतीय संगीत को अमर कृतियाँ दीं, जबकि सुधा चंद्रन ने कृत्रिम पैर के साथ नृत्य में नई ऊँचाइयाँ छूकर यह सिद्ध किया कि आत्म-अभिव्यक्ति पर कोई सीमा लागू नहीं होती।
ये सभी उदाहरण हमें सिखाते हैं कि अवसर, विश्वास और समर्थन मिले तो दिव्यांगजन असंभव को भी संभव बना सकते हैं।
देवियो और सज्जनो,
हमारा समाज तभी वास्तव में प्रगतिशील कहलाएगा, जब हम दिव्यांगजनों को सहानुभूति की नहीं, बल्कि समान अवसर, सम्मान और सहभागिता की दृष्टि से देखें। उन्हें दया का पात्र नहीं, बल्कि अधिकारों और आत्मसम्मान से युक्त सशक्त नागरिक के रूप में स्वीकार करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण केवल योजनाओं और कानूनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह समाज की सोच और व्यवहार में परिवर्तन का विषय है। जब हम उनके लिए सुलभ वातावरण, समावेशी संरचनाएँ और सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं, तभी उनकी वास्तविक प्रतिभा सामने आती है।
सरकार का स्पष्ट मानना है कि ‘दिव्यांगता’ शरीर में नहीं, बल्कि अवसरों की कमी और समाज की सोच में होती है। इसी सोच के साथ, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने दिव्यांगजनों के जीवन को सुगम और सम्मानजनक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
चाहे वह ‘सुगम्य भारत अभियान’ हो, जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों को दिव्यांग-सुलभ बनाया जा रहा है, या फिर ‘एडिप योजना’ (ADIP Scheme - Assistance to Persons with Disabilities for Purchase/Fitting of Aids/Appliances) जिसके अंतर्गत दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहायक उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। इन सभी पहलों के माध्यम से सरकार की संवेदनशीलता, प्रतिबद्धता और समावेशी विकास की सोच स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
दिव्यांगजनों के अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ एक ऐतिहासिक कदम है। 19 अप्रैल 2017 से लागू इस कानून ने 1995 के अधिनियम का स्थान लेते हुए दिव्यांगता की श्रेणियों को बढ़ाकर 21 किया, जिससे अधिक लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह अधिनियम शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण, सुगम्यता, गैर-भेदभाव और समावेशी विकास को कानूनी अधिकार बनाते हुए दिव्यांगजनों को समान अवसर और पूर्ण सहभागिता की सुनिश्चितता प्रदान करता है।
साथ ही, विशिष्ट दिव्यांगजन पहचान पत्र (Unique Disability ID) परियोजना एक क्रांतिकारी पहल है जिसने दिव्यांगजनों को बार-बार प्रमाण पत्र बनवाने की परेशानी से मुक्त कर दिया है। अब यह एक कार्ड पूरे देश में मान्य है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना अत्यंत सरल और पारदर्शी हो गया है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।
इसके अतिरिक्त, दिव्यांगजनों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पेंशन योजनाएँ, स्वास्थ्य बीमा और पुनर्वास केंद्रों का भी विस्तार किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य दिव्यांगजनों को एक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है।
शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी, सरकार ने दिव्यांग छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की राशि और दायरा दोनों बढ़ाए हैं। ‘स्किल इंडिया’ मिशन के तहत दिव्यांगजनों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि वे रोजगार प्राप्त कर सकें और ‘जॉब सीकर’ की बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ बन सकें। आज का यह ‘दिव्य कला मेला’ उसी कौशल विकास का एक शानदार परिणाम है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम “दया” नहीं, बल्कि “सम्मान और अवसर” की भावना से कार्य करें। समाज की प्रगति का सही मापदंड यह है कि वह अपने सबसे कमजोर वर्ग के साथ कैसा व्यवहार करता है।
हमें ऐसा वातावरण बनाना होगा जहाँ दिव्यांगजन बिना किसी बाधा के शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन में भाग ले सकें।
मैं युवाओं से विशेष रूप से आग्रह करता हूँ कि सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, समाज के कमजोर वर्गों के लिए संवेदनशील बनें तथा तकनीक और नवाचार के माध्यम से दिव्यांगजनों के लिए समाधान विकसित करें।
आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम दिव्यांगजनों के सम्मान, अधिकार और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य करेंगे।
अंत में, मैं व्हीलचेयर प्राप्त कर रहे अपने सभी साथियों से यही कहना चाहूँगा कि यह मशीन आपके लिए एक नया अवसर है। आप इस आधुनिक तकनीक का उपयोग अपनी शिक्षा पूरी करने, रोजगार प्राप्त करने और समाज में एक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए करें।
याद रखिए, इतिहास ऐसे अनगिनत उदाहरणों से भरा पड़ा है जहाँ शारीरिक अक्षमता को मात देकर लोगों ने दुनिया बदल दी। चाहे वे महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग हों, या माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली अरुणिमा सिन्हा। आप में भी वही क्षमता है!
मैं एक बार पुनः ‘सक्षम पंजाब’ की पूरी टीम, सभी दानदाताओं और कार्यकर्ताओं की प्रशंसा करता हूँ। आपकी यह ‘समदृष्टि’ (समान दृष्टि) ही एक समरस और सशक्त भारत का निर्माण करेगी।
ईश्वर आप सभी को स्वस्थ और प्रसन्न रखे। मेरी मंगलकामनाएं आप सभी के साथ हैं।
धन्यवाद,
जय हिन्द!