SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FIRST CONVOCATION OF SARDAR BEANT SINGH STATE UNIVERSITY, GURDASPUR ON 23.04.2026.
- by Admin
- 2026-04-23 18:35
सरदार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रथम दीक्षांत समारोह पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 23.04.2026, गुरूवार समयः शाम 4:00 बजे स्थानः गुरदासपुर
नमस्कार!
मुझे आज सरदार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी, गुरदासपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह के इस ऐतिहासिक अवसर पर यहाँ उपस्थित होकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह दीक्षांत समारोह इस नवोदित संस्थान की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। संतों, शूरवीरों और शहीदों की भूमि पंजाब के इस जीवंत सीमावर्ती जिले में स्थित इस प्रतिष्ठित संस्थान से स्नातक होना एक ऐसा सम्मान है, जिसके साथ एक महान विरासत भी जुड़ी हुई है।
सबसे पहले, मैं आज उपाधि प्राप्त कर रहे सभी 560 छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ। इनमें 125 पोस्ट-ग्रेजुएट और 435 ग्रेजुएट विद्यार्थी शामिल हैं। पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर पर, विज्ञान (भौतिकी) के 16, रसायन विज्ञान के 27, गणित के 5, एमबीए (डिजिटल मार्केटिंग) के 28, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के 1 तथा एमसीए के 48 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की जा रही हैं।
ग्रेजुएट स्तर पर, बीसीए के 86, बीएससी (नॉन-मेडिकल) के 20, बीबीए (मार्केटिंग) के 20 तथा बीएससी (ऑनर्स) कृषि के 54 और बीएससी (ऑनर्स) भौतिकी के 10 विद्यार्थी उपाधि प्राप्त कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, बी.टेक. बायोटेक्नोलॉजी के 8, केमिकल इंजीनियरिंग के 4, सिविल इंजीनियरिंग के 19, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के सर्वाधिक 165, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के 17, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन के 7, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के 20 तथा बैचलर ऑफ वोकेशन के 5 विद्यार्थी आज सम्मानित किए जा रहे हैं।
यह विविधता और व्यापकता इस संस्थान की शैक्षणिक सशक्तता और बहुआयामी प्रतिभा का प्रतीक है। आपकी यह सफलता वर्षों की मेहनत, समर्पण और अनुशासन का परिणाम है।
मैं विद्यार्थियों के माता-पिता और समस्त शिक्षकगणों और अभिभावकों और परिवारजनों को भी हार्दिक बधाई देता हूँ। आपका अटूट सहयोग, त्याग और प्रोत्साहन उनकी सफलता की नींव रहा है।
मुझे बताया गया है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2021 में एक इंजीनियरिंग कॉलेज को उन्नत कर की गई थी। तब से अब तक इसने उल्लेखनीय प्रगति की है और वर्तमान में यह सात इंजीनियरिंग शाखाओं, प्रबंधन और विज्ञान में ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट प्रोग्राम तथा कृषि विज्ञान में ग्रेजुएट प्रोग्राम का संचालन कर रहा है। वर्तमान में विश्वविद्यालय की प्रवेश क्षमता 1 हजार 332 विद्यार्थियों की है तथा परिसर में कुल लगभग 3 हजार 200 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इतने कम समय में विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक विस्तार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अपनाने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, प्रबंधन और फार्मास्युटिकल साइंसेज जैसे उभरते क्षेत्रों में पाठ्यक्रम प्रारंभ कर एक दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। साथ ही, नवाचार एवं उद्यमिता केंद्र, ड्रोन प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र तथा कौशल विकास केंद्र जैसी पहलें रोजगार, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
मैं समझता हूं कि एक विश्वविद्यालय ज्ञान का भंडार होता है और वह आने वाली पीढ़ियों के लिए देश के मानव संसाधन को आकार देता है। अपनी भविष्य यात्रा में यह संस्थान अतीत के समृद्ध अनुभवों को आत्मसात करते हुए भविष्य के लिए सक्षम और सशक्त मानव मस्तिष्क तैयार करता है।
मेरा मानना है कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल ज्ञान का प्रसार करना नहीं, बल्कि उसे एक सशक्त और गहन प्रक्रिया के रूप में विकसित करना होना चाहिए, जिससे विद्यार्थी बौद्धिक और आध्यात्मिक दोनों रूपों से सशक्त बन सकें। महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित शिक्षा की वह परिभाषा, जो व्यक्ति के सर्वांगीण विकास पर बल देती है, आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और हमारे लिए एक आदर्श मानक बनी हुई है।
आज जब हम इस प्रतिष्ठित संस्थान के प्रथम दीक्षांत समारोह के साक्षी बने हैं, तो हमें स्वर्गीय सरदार बेअंत सिंह जी को नमन करना चाहिए, जिनके नाम पर यह विश्वविद्यालय स्थापित है। वे केवल एक पूर्व मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि शांति, साहस और लोकतंत्र के प्रतीक थे।
कठिन दौर में उन्होंने पंजाब को आतंकवाद और अशांति से बाहर निकालकर शांति और भाईचारे की राह पर अग्रसर किया तथा राष्ट्रहित में अपने प्राणों का बलिदान दिया।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है। आप सभी से अपेक्षा है कि उनके आदर्शों को अपनाकर शांति, सद्भाव और देशभक्ति के साथ राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि सरदार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी आने वाले समय में ऐसे सशक्त और संवेदनशील मानव संसाधन का निर्माण करते हुए एक आदर्श स्थापित करेगा।
मेरे प्रिय विद्यार्थियो,
आज जब आप सभी इस प्रतिष्ठित संस्थान से अपनी डिग्रियाँ प्राप्त कर रहे हैं, तो यह अवसर केवल आपकी शैक्षणिक उपलब्धि का नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का भी प्रतीक है।
आप आज ऐसे समय में अपनी उपाधियां प्राप्त कर रहे हैं, जब भारत परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। आज भारत विश्व की सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरकर सामने आया है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, व्यवसाय, कला और अन्य क्षेत्रों में भारतीयों ने विश्व के अनेक देशों में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। आज वैश्विक स्तर पर भारत की छवि में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन आया है।
यह परिवर्तन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत विश्व का सबसे युवा देश बनकर उभर रहा है और हमारी 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की अपार ऊर्जा है, जिसकी ओर पूरी दुनिया आशा से देख रही है। आने वाले 20-25 वर्ष, अर्थात ‘अमृत काल’, पूरी तरह आपकी पीढ़ी के हैं। वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का दायित्व अब आपके हाथों में है।
आज के स्टार्टअप, नवाचार और डिजिटल युग में अवसरों की कोई कमी नहीं है। मेरी आपसे अपेक्षा है कि आप केवल रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजन करने वाले बनें और अपने ज्ञान, कौशल एवं समर्पण से भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनाने में योगदान दें।
प्रिय साथियो,
नवाचार और ज्ञान के क्षेत्र में भारत का योगदान सदैव उल्लेखनीय रहा है। महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने 12वीं शताब्दी में पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा की अवधि का सटीक आकलन किया। इसी प्रकार, शून्य की अवधारणा, योग और आयुर्वेद जैसी अमूल्य धरोहरें भी विश्व को भारत की ही देन हैं। एक समय था जब भारत अनेक क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाता था।
इसी संदर्भ में महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था, “हम भारतीयों के बहुत ऋणी हैं, जिन्होंने हमें गिनती करना सिखाया; इसके बिना कोई भी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज संभव नहीं होती।”
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी इस गौरवशाली परंपरा को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि उसे नवाचार, अनुसंधान और विकास के माध्यम से आगे बढ़ाएँ। इन्हीं प्रयासों से हम समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं और गरीबी, बीमारी, बेरोजगारी तथा भूख जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान कर सकते हैं। इस विश्वविद्यालय के स्नातक के रूप में आप सभी पर यह दायित्व है कि आप अपने अर्जित ज्ञान को केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज और राष्ट्र के कल्याण में सार्थक रूप से उपयोग करें।
साथियो,
इस महत्वपूर्ण अवसर पर मैं पंजाब राज्य के समक्ष उपस्थित कुछ चुनौतियों की ओर भी आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। पंजाब, जो वीरता और समृद्ध विरासत की भूमि है, आज नशा, बेरोजगारी और कुछ क्षेत्रों में आर्थिक ठहराव जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है।
मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूँ कि इन चुनौतियों का समाधान केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है; इसके लिए समाज के सामूहिक प्रयास और विशेष रूप से युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
नशा केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि हमारे समाज के भविष्य के लिए एक गंभीर खतरा है। आप सभी को न केवल इससे दूर रहना है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने और सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी अग्रणी भूमिका निभानी है।
इसी प्रकार, बेरोजगारी केवल नौकरियों की कमी नहीं, बल्कि शिक्षा और कौशल के बीच के अंतर का परिणाम भी है। ऐसे में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे शिक्षा को कौशल आधारित, उद्योगोन्मुख और परिणामोन्मुख बनाएं।
गुरदासपुर क्षेत्र, अपनी भौगोलिक स्थिति और कृषि आधार के कारण, समेकित ग्रामीण-औद्योगिक विकास का एक आदर्श मॉडल बन सकता है। बेहतर संपर्क, कौशल विकास और संस्थागत सहयोग के माध्यम से यह क्षेत्र उद्यमिता और रोजगार सृजन का केंद्र बन सकता है।
हमें पारंपरिक कृषि पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे उच्च मूल्य, प्रौद्योगिकी आधारित और विविधीकृत बनाना होगा। इसके लिए कृषि-प्रसंस्करण, खाद्य उद्योग, किसान उत्पादक संगठन, ग्रामीण उद्यम और सिंचाई, भंडारण तथा आपूर्ति श्रृंखला में नवाचार को बढ़ावा देना आवश्यक है।
कौशल आधारित शिक्षा, उद्यमिता और नवाचार को प्रोत्साहित करके यह विश्वविद्यालय न केवल रोजगार क्षमता बढ़ा रहा है, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर भी बना रहा है। कौशल विकास बेरोजगारी का सबसे प्रभावी समाधान है और सार्थक व्यस्तता नशे के विरुद्ध एक मजबूत हथियार है।
मेरे युवा साथियों, मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप नशा-मुक्त, कौशलयुक्त और आत्मनिर्भर पंजाब के दूत बनें। आपके ज्ञान, आपके निर्णय और आपके कार्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
जैसा कि भगवान बुद्ध ने कहा है, “अप्प दीपो भव” अर्थात् स्वयं अपने मार्गदर्शक बनें। इसी प्रेरणा के साथ आप अपने जीवन में सही निर्णय लें और उद्देश्यपूर्ण जीवन जिएँ।
हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं, जहाँ तकनीक, नवाचार और ज्ञान तीव्र गति से दुनिया को बदल रहे हैं। ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी पहलें नए अवसर प्रदान कर रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट सिस्टम और उन्नत तकनीकें भविष्य को आकार दे रही हैं। आपको इन अवसरों का सदुपयोग समाज के कल्याण के लिए करना है।
मेरे प्रिय स्नातकों, आपके लिए मेरा सरल लेकिन महत्वपूर्ण मंत्र है कि आप अपने कार्य में दक्षता और उत्कृष्टता के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहें, कुशल पेशेवर के रूप में वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजें, नवाचारी सोच के साथ नए अवसरों का सृजन करें, पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें और सबसे बढ़कर नैतिकता को अपने जीवन का सर्वोच्च आधार बनाएं। यही मूल्य आपको न केवल एक सफल पेशेवर बनाएंगे, बल्कि एक जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक के रूप में भी स्थापित करेंगे।
हमेशा याद रखें, आप केवल डिग्री धारक नहीं, बल्कि इस संस्थान के प्रतिनिधि और राष्ट्र की आशाओं के वाहक हैं। एक सशक्त लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका केवल भागीदारी तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्व की भी होती है।
आज भारत ही नहीं, पूरा विश्व आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। अपनी जीवन यात्रा में आप कभी उस गरीब को अनदेखा न करें जो कहीं आपके घर के पास हो, किसी दूखी को असहाय न छोडें, अपने समाज की कन्याओं को जीवन, आदर और सुरक्षा दें और जहाँ कहीं भी हों हमेशा याद रखें कि आप सर्वप्रथम भारतीय हैं।
प्रिय छात्रों, आपके हर कार्य से भारत प्रभावित होता है। आपकी सफलता भारत की सफलता है और आपकी असफलता से देश को पीड़ा होती है और मैं भी उसमें शामिल हूँ।
अंत में, मैं संकाय सदस्यों के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए आभार व्यक्त करता हूँ और अभिभावकों को भी बधाई देता हूँ, जिनके सहयोग से यह सफलता संभव हुई है।
मैं सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल, सफल और सार्थक भविष्य की कामना करता हूँ तथा सरदार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी, गुरदासपुर को निरंतर प्रगति और उत्कृष्टता के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ।
एक बार पुनः आप सभी को इस ऐतिहासिक अवसर पर हार्दिक बधाई।
धन्यवाद,
जय हिन्द!