SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF BAISAKHI AWARDS 2026 AT NEW DELHI ON 26.04.2026.
- by Admin
- 2026-04-26 23:10
वर्ल्ड पंजाबी ऑर्गनाइजेशन के ‘बैसाखी अवार्ड 2026’ के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 26.04.2026, रविवार समयः रात 9:00 बजे स्थानः नई दिल्ली
नमस्कार!
आज मुझे ‘वर्ल्ड पंजाबी ऑर्गनाइजेशन’ द्वारा आयोजित ‘बैसाखी अवार्ड्स 2026’ के इस गरिमामयी शाम में, आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और गर्व की अनुभूति हो रही है। मैं पंजाब की धरती और वहाँ के लोगों की असीम ऊर्जा को प्रतिदिन बहुत करीब से महसूस करता हूँ, इसलिए इस ‘पंजाबी पुनर्जागरण’ के उत्सव में शामिल होना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भी एक सुखद अनुभव है।
मैं इस आयोजन में आमंत्रित करने के लिए ‘वर्ल्ड पंजाबी ऑर्गनाइजेशन’ और विशेष रूप से संगठन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विक्रमजीत सिंह साहनी जी का आभार प्रकट करता हूं। श्री विक्रमजीत सिंह साहनी जी ने उद्योग, समाज सेवा और जनसेवा, तीनों क्षेत्रों में एक प्रेरणादायक पहचान स्थापित की है।
एक सफल उद्योगपति होने के साथ-साथ, वे समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत रहे हैं और कौशल विकास तथा रोजगार सृजन के माध्यम से हजारों युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं।
संसद सदस्य के रूप में भी उन्होंने जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया है और सामाजिक समरसता, शिक्षा तथा सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण पहल की हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि जब व्यवसायिक सफलता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी जुड़ जाता है, तो वह राष्ट्र निर्माण की एक सशक्त शक्ति बन जाता है।
आज इस भव्य समारोह में, हमें 25 ऐसी असाधारण और चुनिंदा विभूतियों को सम्मानित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जिन्होंने अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में उत्कृष्टता के नए शिखर छुए हैं। यह पुरस्कार सूची इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि पंजाबियों की प्रतिभा किसी एक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार असीमित है। मैं आज के सभी ‘बैसाखी अवार्ड’ विजेताओं को हृदय से बधाई देता हूँ।
आज जिन श्रेणियों में अवार्ड प्रदान किए गए हैं, उनमें मनोरंजन एवं सांस्कृतिक शक्ति, समाज सेवा एवं परिवर्तनकारी शिक्षा, मीडिया, फैशन एवं वैश्विक प्रभाव, उच्च प्रभाव वाले व्यवसायिक नेतृत्व, उद्योग एवं क्षेत्रीय नेतृत्व, आतिथ्य एवं उद्यमशीलता, तथा नेतृत्व, सुशासन और सामाजिक प्रभाव जैसे विविध क्षेत्र शामिल हैं।
आपकी सफलता केवल आपकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है; यह पूरे समुदाय के लिए, हमारे युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। आपकी उपलब्धियां यह सिद्ध करती हैं कि जब प्रतिभा को कड़ी मेहनत और सच्चे इरादों का साथ मिलता है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रह जाता।
आज के इस अवसर पर, मैं वर्ल्ड पंजाबी ऑर्गनाइजेशन की असाधारण यात्रा और इसके अतुलनीय योगदान की सराहना करना चाहूँगा। 1998 में, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, श्रद्धेय श्री इन्द्र कुमार गुजराल जी के दूरदर्शी नेतृत्व में जिस संस्था का बीजारोपण हुआ था, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुकी है।
‘वर्ल्ड पंजाबी ऑर्गनाइजेशन’ विश्वभर में बसे पंजाबियों की एक ऐसी अंतर्राष्ट्रीय संस्था है, जिसका मुख्य विज़न ‘पंजाबी पुनर्जागरण’ का सूत्रपात करना है। यह पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक मंच है, जिसमें दुनिया भर के प्रतिष्ठित पंजाबी उद्योगपति, व्यवसायी, उत्कृष्ट खिलाड़ी, प्रख्यात पत्रकार, कलाकार और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सफलता का परचम लहराने वाले दिग्गज एक साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं।
यह संगठन विश्वभर में बसे पंजाबियों के बीच सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से, पंजाबी भाईचारे, लोक कला तथा हमारी समृद्ध संस्कृति को बढ़ावा देने में अत्यंत सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
आज 22 से अधिक देशों में अपनी सक्रिय उपस्थिति के साथ, यह केवल एक संगठन नहीं रह गया है, बल्कि यह ‘पंजाबी भाईचारे’ का एक वैश्विक एंबेसडर बन गया है। आप न केवल हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेज रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों से जोड़े रखने का एक भगीरथ प्रयास भी कर रहे हैं।
साथियो,
आज हम यहां ‘बैसाखी’ पर्व को समर्पित इस बैसाखी अवार्ड समारोह के अवसर पर एकत्रित हुए हैं। बैसाखी केवल फसल कटाई का एक ऋतु-पर्व नहीं है; यह पंजाब की धड़कन है, यह हमारी आस्था, हमारे शौर्य और हमारी संस्कृति का प्रतीक है।
यह वह समय होता है जब खेतों में लहलहाती फसल किसान के परिश्रम का उत्सव बनकर सामने आती है। बैसाखी हमें उस अन्नदाता के त्याग, तपस्या और अथक मेहनत की याद दिलाती है, जिसकी बदौलत हमारे देश की अन्न-भंडार भरे रहते हैं। यह पर्व प्रकृति, श्रम और समृद्धि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है।
यही वह पावन दिन है, जब 1699 में दशमेश पिता, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने श्री आनंदपुर साहिब की पवित्र धरती पर ‘खालसा पंथ’ की स्थापना की थी। उन्होंने समाज को समानता, निडरता और धर्म की रक्षा का वह संदेश दिया, जिसने इतिहास की धारा को हमेशा के लिए बदल दिया।
“सवा लाख से एक लड़ाऊं, तबे गोबिंद सिंह नाम कहाऊं।” गुरु साहिब का यह वाक्य केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि हर पंजाबी के भीतर बसने वाले अदम्य साहस का प्रमाण है। बैसाखी हमें याद दिलाती है कि जब मेहनत पसीने के रूप में खेतों में गिरती है, तो वह सुनहरी फसल बनकर लहलहाती है, और जब देश को जरूरत होती है, तो वही किसान सीमा पर खड़ा होकर एक अजेय योद्धा बन जाता है।
उसी भावना और अदम्य साहस की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति हमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देखने को मिलती है। जलियांवाला बाग के हृदयविदारक नरसंहार ने पूरे राष्ट्र की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था, और उसी क्षण से स्वतंत्रता के लिए एक नए और अडिग संकल्प का जन्म हुआ। शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों ने उस साहस का साक्षात रूप प्रस्तुत किया, और हमें यह याद दिलाया कि मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देना ही राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च स्वरूप है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के वर्षों में, और विशेष रूप से विभाजन की भयानक त्रासदी के बाद, पंजाबियों ने एक बार फिर जिस असाधारण जीवटता का परिचय दिया, वह अद्वितीय है। उन्होंने राख से उठकर अपने जीवन को फिर से संवारा, अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकी, और दिल्ली जैसे महानगरों के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी उद्यमशीलता, असीम ऊर्जा और सबको साथ लेकर चलने की समावेशी भावना ने राष्ट्र के नवनिर्माण पर एक ऐसी अमिट छाप छोड़ी है, जिस पर हम सभी को गर्व है।
देवियों और सज्जनों,
जब हम ‘पंजाब’ शब्द सुनते हैं, तो हमारे जेहन में क्या आता है? अथक परिश्रम, अटूट लंगर परंपरा, खेतों की हरियाली, गिद्दे और भांगड़े की थाप, और सबसे बढ़कर, कभी हार न मानने वाला जज्बा!
पंजाब भारत का ‘खड्ग भुजा’ भी है और ‘अन्नदाता’ भी। बात चाहे देश की सीमाओं की रक्षा की हो या देश के अन्न भंडार को भरने की, पंजाबियों ने हमेशा अपना सर्वस्व न्योछावर किया है।
और यह जज्बा केवल पंजाब या भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है। आज दुनिया का ऐसा कोई कोना नहीं, कोई ऐसा महाद्वीप नहीं, जहाँ हमारे पंजाबी डायस्पोरा ने अपनी सफलता के झंडे न गाड़े हों। कनाडा की संसद से लेकर ब्रिटेन के व्यापारिक घरानों तक, ऑस्ट्रेलिया के खेल मैदानों से लेकर अमेरिका के सिलिकॉन वैली तक, पंजाबियों ने अपनी बुद्धिमत्ता, उद्यमशीलता और मेहनत से हर जगह अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
लेकिन सबसे खूबसूरत बात यह है कि एक पंजाबी चाहे दुनिया की कितनी भी ऊँचाइयों को छू ले, उसके दिल का एक हिस्सा हमेशा अपने पिंड (गाँव), अपने खेतों और अपनी गुरुद्वारे की बाणी से जुड़ा रहता है। वह जहाँ जाता है, अपने साथ अपना ‘छोटा पंजाब’ लेकर जाता है और अपनी मेहनत से उस नई धरती को भी उपजाऊ बना देता है।
मैं यहाँ एक प्रेरणादायक पंक्ति कहना चाहूँगा, “पंजाबी केवल एक पहचान नहीं, बल्कि एक जीवंत भावना है, जो हर परिस्थिति में आगे बढ़ना और दूसरों को साथ लेकर चलना सिखाती है।”
साथियो,
आज, जब हम प्रख्यात पंजाबियों को सम्मानित कर रहे हैं, तो हम केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का ही नहीं, बल्कि उत्कृष्टता, कड़ी मेहनत और सामाजिक प्रतिबद्धता की निरंतर चली आ रही विरासत का भी जश्न मना रहे हैं। यहाँ उपस्थित प्रत्येक पुरस्कार विजेता उस समुदाय की ताकत का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने हमेशा अपने समय की चुनौतियों का डटकर सामना किया है।
मैं दुनिया भर में बसे पंजाबियों से यानी उन सभी से जो अपनी मिट्टी से दूर रहकर भी पंजाब को अपने दिल में बसाए हुए हैं, एक हार्दिक अपील भी करना चाहूँगा। आपकी सफलता हम सभी के लिए गर्व का विषय है। लेकिन इसके साथ ही, हमें यह भी स्वीकार करना होगा कि आज पंजाब कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहा है। चाहे वह युवाओं के रोजगार का मुद्दा हो, सामाजिक कल्याण हो, या फिर नशे जैसी गंभीर और चिंताजनक समस्या का समाधान खोजना हो। आपका अनुभव, आपके संसाधन और आपका वैश्विक दृष्टिकोण इस दिशा में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकते हैं।
मेरा आपसे आग्रह है कि आप फिर से अपनी जड़ों से जुड़ें, यहाँ निवेश करें और अपना योगदान दें, ताकि पंजाब केवल हमारी यादों और कहानियों में ही नहीं, बल्कि यथार्थ में भी फलता-फूलता रहे।
इस संदर्भ में, श्री विक्रमजीत सिंह साहनी जी के प्रयास विशेष सराहना के पात्र हैं। पंजाब में कौशल विकास की पहलों को बढ़ावा देने और नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने में उनका कार्य, सामाजिक परिवर्तन के प्रति उनकी गहरी और निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उनके नेतृत्व में, पंजाब में हाल ही में आई भयानक बाढ़ के दौरान ‘वर्ल्ड पंजाबी ऑर्गनाइजेशन’ की भूमिका भी उतनी ही उल्लेखनीय रही है। जब राज्य के विशाल क्षेत्र तबाह हो गए थे, गाँव जलमग्न हो गए थे, आजीविका छिन गई थी, और हजारों परिवार संकट में थे, तब यह संगठन मजबूती से लोगों के साथ खड़ा रहा।
त्वरित बचाव और राहत कार्यों से लेकर स्थायी पुनर्वास के प्रयासों तक, संस्था ने जमीनी स्तर पर सहायता प्रदान की, जिससे प्रभावित समुदायों की उम्मीद, गरिमा और आजीविका को फिर से बहाल करने में मदद मिली। ऐसे कार्य हमें याद दिलाते हैं कि संस्थाओं को सार्थकता केवल उनके दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि उनके कार्यों से मिलती है, विशेषकर सामूहिक संकट के समय में।
आज वर्ल्ड पंजाबी ऑर्गनाइजेशन एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य कर रहा है, जो वैश्विक स्तर पर बसे पंजाबी समुदाय को उनकी जड़ों से जोड़ता है और ‘पहचान’ को ‘जिम्मेदारी’ में बदलता है।
आज जब हम बैसाखी के पावन संदेश पर विचार कर रहे हैं, तो आइए हम इसके कर्म में साहस, सफलता में विनम्रता, और समाज की निस्वार्थ सेवा के शाश्वत मूल्यों को आगे बढ़ाएं। आइए हम अपने अतीत का सम्मान करें, वर्तमान की जरूरतों के लिए आगे आएं और एक ऐसे भविष्य का निर्माण करें जो हमारी इस महान विरासत के योग्य हो।
देवियो और सज्जनो,
आज जब हम “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं, तब प्रवासी भारतीयों और विशेष रूप से पंजाबी समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आप सभी भारत के सांस्कृतिक दूत हैं। आप जहाँ भी जाते हैं, वहाँ भारत की पहचान, उसकी संस्कृति और उसके मूल्यों को लेकर जाते हैं।
मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि आप अपनी जड़ों से जुड़े रहें, अपनी भाषा और संस्कृति को आगे बढ़ाएं, और समाज सेवा तथा राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।
मैं आज यहाँ उपस्थित युवाओं से कहना चाहूँगा कि आप एक ऐसी महान विरासत के वारिस हैं, जिसका इतिहास त्याग, बलिदान और निरंतर आगे बढ़ने की कहानियों से भरा पड़ा है। आधुनिकता को जरूर अपनाएं, वैश्विक नागरिक बनें, लेकिन अपनी जड़ों, अपनी ‘माँ बोली’ पंजाबी और अपने संस्कारों को कभी न भूलें।
अंत में, मैं एक बार पुनः सभी पुरस्कार विजेताओं को हार्दिक बधाई देता हूँ। आप सभी ने अपने उत्कृष्ट कार्यों से न केवल अपने परिवार और समुदाय का, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है।
मैं ‘वर्ल्ड पंजाबी ऑर्गनाइजेशन’ को इस भव्य आयोजन के लिए पुनः बधाई देता हूँ और कामना करता हूँ कि यह संगठन भविष्य में भी इसी प्रकार समाज और संस्कृति की सेवा करता रहे।
आइए, आज इस मंच से हम संकल्प लें कि हम श्री गुरु नानक देव जी के ‘‘किरत करो, नाम जपो, वंड छको’’ के शाश्वत संदेश को अपने जीवन का आधार बनाएंगे और समाज की भलाई के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिन्द!