SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF 3RD EDITION OF ASSOCHAM HEALTH, BEAUTY AND WELLNESS SYMPOSIUM 2026 AT CHANDIGARH ON MAY 7, 2026.
- by Admin
- 2026-05-07 13:40
ऐसोचैम के ‘हेल्थ, ब्यूटि एंड वेलनेस सिंपोज़ियम’ के अवसर पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 07.05.2026, गुरूवार समयः सुबह 11:00 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज ‘एसोचैम हेल्थ, ब्यूटी एंड वेलनेस सिम्पोजियम’ के इस तीसरे संस्करण में आप सभी के बीच मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और आत्मिक संतोष की अनुभूति हो रही है। मैं ASSOCHAM को इस महत्वपूर्ण मंच के आयोजन के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ, जो नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तियों और विशेषज्ञों को एक साथ लाकर स्वास्थ्य एवं वेलनेस के भविष्य पर सार्थक चर्चा का अवसर प्रदान करता है।
देवियों और सज्जनों,
जब हम ASSOCHAM (The Associated Chambers of Commerce and Industry of India) की बात करते हैं, तो हम वर्ष 1920 से संचालित भारत के सबसे पुराने, सबसे सम्मानित और प्रभावशाली शीर्ष उद्योग निकायों में से एक की बात कर रहे होते हैं। यह 4 लाख 50 हजार से अधिक बड़ी, मध्यम और छोटी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। एक सदी से भी अधिक के अपने गौरवशाली इतिहास में, एसोचौम ने भारतीय उद्योग की आवाज़ बनकर ‘नीतिगत वकालत’ और सरकार तथा उद्योग के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य किया है।
मुझे यह देखकर बहुत खुशी होती है कि चंडीगढ़ में भी एसोचैम यू.टी. प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। चाहे स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना हो, MSME सेक्टर को मजबूत करना हो, स्वास्थ्य और वेलनेस टूरिज्म (Medical Tourism)का विकास हो, या फिर समावेशी सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में काम करना हो, एसोचैम की पहल हमेशा प्रशासन की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप रही है।
मुझे यह देखकर अत्यंत हर्ष हो रहा है कि यह संगोष्ठी हर वर्ष और अधिक प्रभावशाली और प्रासंगिक बनती जा रही है। पूर्व में भी इस पहल से जुड़े रहने के कारण, मैंने इसके विकास को निकट से देखा है। यह केवल विचार-विमर्श का मंच न रहकर अब जमीनी स्तर पर प्रभाव उत्पन्न करने वाला मंच बन चुका है।
पिछले वर्ष, ASSOCHAM के सहयोग से हमने चंडीगढ़ में ‘टीबी मुक्त अभियान’ की एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल शुरू की थी, जो सामूहिक प्रयास और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण है।
चंडीगढ़ में शुरू की गई टीबी रोगी गोद लेने की पहल यह दर्शाती है कि जब हम सभी मिलकर कार्य करते हैं, तो बड़े परिवर्तन संभव होते हैं। इस पहल के अंतर्गत, हमने टीबी रोगियों को एक वर्ष तक गोद लेकर उन्हें न केवल चिकित्सा सहायता प्रदान की, बल्कि उनके पोषण और भावनात्मक सहयोग का भी ध्यान रखा।
यह पहल संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और साझेदारी की भावना का प्रतीक है। यह हमें यह भी सिखाती है कि जब सरकार और उद्योग साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो जमीनी स्तर पर स्थायी परिवर्तन लाए जा सकते हैं।
आज, ASSOCHAM के इस प्रतिष्ठित मंच से, मैं एक सच्ची और मजबूत अपील करना चाहता हूँ। मैं यहाँ उपस्थित सभी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, हितधारकों और भागीदारों से अनुरोध करता हूँ कि वे टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
आइए हम सब मिलकर, अधिक से अधिक टीबी रोगियों को गोद लें, उनके उपचार और पोषण में सहयोग करें, जागरूकता बढ़ाएँ और सामाजिक कलंक को समाप्त करें और इस पहल को चंडीगढ़ से आगे अन्य क्षेत्रों तक विस्तार दें। यह केवल सरकार का मिशन नहीं है, बल्कि हम सभी की राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
देवियो और सज्जनो,
आज की संगोष्ठी का विषय अत्यंत प्रासंगिक और महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य, ब्यूटी और वेलनेस क्षेत्र आज हमारे समाज और अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। यह अब केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है।
आज ‘वेलनेस’ का अर्थ केवल बीमारियों से मुक्त होना नहीं रह गया है, बल्कि यह जीवन जीने का एक समग्र और सक्रिय दृष्टिकोण बन चुका है। आज समाज का ध्यान बीमार होने के बाद अस्पताल जाने से हटकर, जीवनशैली और पोषण में सुधार करने पर केंद्रित हो गया है। प्रिवेंटिव हेल्थकेयर हमें सिखाता है कि सही आहार और दिनचर्या से हम गंभीर बीमारियों को पहले ही रोक सकते हैं।
एक समय था जब मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी की जाती थी, लेकिन आज यह वेलनेस का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। आज का वेलनेस उद्योग तनाव प्रबंधन और मानसिक शांति को शारीरिक फिटनेस के बराबर ही अहमियत दे रहा है।
हमारी सदियों पुरानी भारतीय पद्धतियाँ, जैसे आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, आज पूरी दुनिया में फिर से स्थापित हो रही हैं। ये पद्धतियाँ अब आधुनिक विज्ञान और नवाचार के साथ मिलकर एक नई ‘वेलनेस क्रांति’ को जन्म दे रही हैं।
वेलनेस अब केवल एक स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि एक विशाल ‘वेलनेस इकॉनमी’ का रूप ले चुका है। चाहे वह हेल्थ-टेक स्टार्टअप्स हों, ऑर्गेनिक फूड इंडस्ट्री हो, या फिर मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म, यह क्षेत्र लाखों युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा कर रहा है और देश की जीडीपी में एक बड़ा योगदान दे रहा है।
संक्षेप में कहें तो, वेलनेस सेक्टर आज केवल व्यक्तियों के ‘स्वास्थ्य सुधार’ का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक ‘स्वस्थ समाज’ और ‘समृद्ध राष्ट्र’ के निर्माण की सबसे मजबूत नींव बन चुका है।
देवियो और सज्जनो,
जब हम वेलनेस और संपूर्ण स्वास्थ्य की बात करते हैं, तो हमें पंजाब के सामने खड़ी नशे की समस्या की गंभीर चुनौती को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की जड़ों को खोखला कर देता है और हमारी युवा पीढ़ी को अंधकार की ओर धकेलता है। इसलिए “नशा मुक्त पंजाब” केवल एक सरकारी लक्ष्य नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक जन-आंदोलन बनना चाहिए।
इस समस्या से निपटने के लिए हमें बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना होगा। सबसे पहले, स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता के माध्यम से युवाओं को शुरुआत में ही इस बुराई से बचाना होगा। साथ ही, हमें यह समझना होगा कि नशा अक्सर तनाव और अवसाद का परिणाम होता है, इसलिए मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग को मजबूत करना आवश्यक है।
जो युवा इस दलदल में फंस चुके हैं, उनके लिए पुनर्वास केंद्रों को करुणा और सुधार के केंद्र बनाना होगा, ताकि वे स्वस्थ होकर समाज की मुख्यधारा में लौट सकें। साथ ही, इस अभियान में हर नागरिक, परिवार और संस्था की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
मैं इस क्षेत्र से जुड़े सभी विशेषज्ञों और उद्योग जगत से आग्रह करता हूँ कि वे अपने संसाधनों और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से इस मुहिम में सहयोग करें और युवाओं को स्वस्थ जीवन, खेल और सकारात्मक दिशा की ओर प्रेरित करें।
हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम एक ऐसा पंजाब और भारत बनाएँ, जहाँ युवाओं की पहचान नशे से नहीं, बल्कि ऊर्जा, आत्मबल और राष्ट्रप्रेम से हो।
देवियो और सज्जनो,
मेरे अनुभव में, सफलता की वास्तविक कुंजी सहयोग और साझेदारी में निहित होती है। ASSOCHAM द्वारा उद्योग और प्रशासन के बीच टीबी उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण अभियान में जो प्रभावी समन्वय देखने को मिला है, वह एक आदर्श मॉडल है, जिसे देशभर में अपनाया जा सकता है।
आगे बढ़ते हुए हमें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को सुदृढ़ करना होगा, टिकाऊ और व्यापक समाधान विकसित करने होंगे, तकनीक के उपयोग को बढ़ाना होगा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करनी होगी।
आगे की दिशा में, हमें कुछ प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उपचार के साथ-साथ रोकथाम पर बल देना होगा, मानसिक स्वास्थ्य को मुख्यधारा में लाना होगा, वेलनेस सेक्टर में कौशल विकास को प्रोत्साहित करना होगा, स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना होगा तथा टीबी जैसी पहलों का विस्तार करना होगा। यही प्रयास हमें एक स्वस्थ और सक्षम समाज की ओर अग्रसर करेंगे।
इस संदर्भ में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए अनेक महत्वपूर्ण कदम भी उल्लेखनीय हैं। आयुष्मान भारत के माध्यम से देश के करोड़ों नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ और ‘नेशनल हेल्थ मिशन’ जैसी पहलें नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
साथ ही, ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ ने भी टीबी के विरूद्ध जंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें जनभागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया मिशन’ जैसे कार्यक्रम स्वास्थ्य और वेलनेस क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
देवियो और सज्जनो,
जब हम स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य और विकास की बात करते हैं, तो मेरी दृष्टि स्वाभाविक रूप से हमारे अपने शहर, चंडीगढ़ की ओर जाती है। आज चंडीगढ़ केवल अपनी सुंदरता के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि यह अपनी रणनीतिक स्थिति और विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ उत्तर भारत के एक प्रमुख ‘चिकित्सा पर्यटन केंद्र’ के रूप में तेजी से उभर रहा है।
हमारे लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि यह शहर पीजीआई जैसी विश्व प्रसिद्ध संस्था, कैंसर अस्पताल और अन्य अत्याधुनिक चिकित्सा संस्थानों का घर है। आज हमारे ये संस्थान हृदय शल्य चिकित्सा, ऑन्कोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण और ऑर्थोपेडिक जैसी जटिल प्रक्रियाओं में दुनिया की बेहतरीन चिकित्सा देखभाल प्रदान कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर, हमारा आधुनिक बुनियादी ढांचा, और पश्चिमी देशों की तुलना में बेहद किफायती चिकित्सा लागत, ये सब मिलकर चंडीगढ़ को उन सभी मरीजों के लिए एक बेहद आकर्षक गंतव्य बनाते हैं, जो एक किफायती मूल्य पर विश्व स्तरीय उपचार की तलाश में भारत आते हैं।
हम सभी जानते हैं कि चिकित्सा में केवल ‘इलाज’ ही नहीं, बल्कि ‘रिकवरी’ का भी बहुत बड़ा महत्व है। चंडीगढ़ का स्वच्छ, हरा-भरा और शांत वातावरण मरीजों को तेजी से ठीक होने के लिए एक प्राकृतिक वरदान प्रदान करता है।
इसके साथ ही, शहर का सुनियोजित ढांचा, हमारे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से निकटता और पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा दिल्ली के साथ हमारी बेहतरीन रोड कनेक्टिविटी, इसे मरीजों और उनके परिजनों के लिए आसानी से सुलभ बनाती है।
आज हम केवल आधुनिक चिकित्सा तक सीमित नहीं हैं। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि चंडीगढ़ अब ‘समग्र उपचार’ के एक बड़े केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहा है। हमारे आस-पास के क्षेत्रों में आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस पर्यटन के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
चिकित्सा पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ही ‘न्यू चंडीगढ़’ में ‘मेडिसिटी’ का विकास किया जा रहा है। अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं, सामर्थ्य और शांत वातावरण के इस अनूठे सुमेल के साथ, चंडीगढ़ वास्तव में चिकित्सा पर्यटकों की पहली पसंद बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।
अंततः, यदि हम एक व्यापक दृष्टिकोण से देखें, तो आप सभी के निरंतर समर्थन से भारत का स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य आने वाले वर्षों में एक अभूतपूर्व वृद्धि देखने जा रहा है।
देवियों और सज्जनों,
भारत को एक स्वस्थ, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा हमारे सामूहिक प्रयासों पर निर्भर करती है। आज इस मंच से हम यह संकल्प लें कि हम ‘टीबी मुक्त भारत’ के निर्माण, ‘नशा मुक्त पंजाब’ के लक्ष्य और सभी के लिए स्वास्थ्य एवं वेलनेस को बढ़ावा देने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँगे।
हमें मिलकर ऐसे उद्योग का निर्माण करना है जो न केवल लोगों के स्वास्थ्य में सुधार लाए, बल्कि अखंडता, स्थिरता और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव के मूल्यों को भी सुदृढ़ करे। यह संगोष्ठी केवल चर्चा का मंच न रहकर, एक ठोस परिवर्तन की शुरुआत बने, यही हमारी अपेक्षा है।
अंत में, मैं ASSOCHAM को एक बार पुनः इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए बधाई देता हूँ। मैं इस संगोष्ठी की सफलता की कामना करता हूँ और आशा करता हूँ कि यहाँ से निकले विचार और निर्णय देश के लिए सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
बहुत-बहुत धन्यवाद!
जय हिंद! जय भारत!