SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF OPENING CEREMONY AND PRIZE DISTRIBUTION OF T10 TENNIS BALL GULLY CRICKET 2026 AT PUNJAB LOK BHAVAN ON MAY 2, 2026.
- by Admin
- 2026-05-02 19:35
‘गली क्रिकेट 2026’ टूर्नामेंट के समापन पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 02.05.2026, शनिवार समयः शाम 5:00 बजे स्थानः पंजाब लोकभवन
नमस्कार!
आज ‘गली क्रिकेट 2026’ के इस समापन समारोह में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत गर्व और हर्ष की अनुभूति हो रही है। मैं सबसे पहले यूटी क्रिकेट एसोसिएशन और चंडीगढ़ पुलिस को इस बात के लिए बधाई देना चाहता हूँ कि उन्होंने मिलकर एक ऐसा मंच तैयार किया है, जो केवल खेल का मैदान नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य निर्माण की एक प्रयोगशाला बन गया है।
इस सराहनीय प्रयास ने न केवल हमारे युवाओं की असीम ऊर्जा को खेल के मैदान की ओर मोड़ा है, बल्कि ‘बल्ला घुमाओ, नशा भगाओ’ के संकल्प के साथ नशे जैसी घातक सामाजिक बुराई के विरुद्ध एक अत्यंत सशक्त और निर्णायक संदेश भी दिया है।
आज इस ऊर्जावान प्रांगण में उपस्थित होकर, मैं यह गहराई से महसूस कर रहा हूँ कि हम यहाँ केवल एक क्रिकेट टूर्नामेंट के समापन के लिए एकत्रित नहीं हुए हैं। यह आयोजन क्रिकेट के मैदान से कहीं आगे की सोच है। यह एकजुटता और सामाजिक जागृति का एक भव्य उत्सव है।
इस मुहिम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि युवाओं को सही दिशा और उद्देश्य मिल जाए, तो वे केवल रिकॉर्ड तोड़ने वाले खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण और सामाजिक परिवर्तन के मजबूत स्तंभ बन जाते हैं। ‘गली क्रिकेट’ वास्तव में एक ऐसा सामाजिक आंदोलन बन चुका है, जो खेल की भावना के माध्यम से हमारी भावी पीढ़ी को एक स्वस्थ और नशामुक्त जीवनशैली की ओर अग्रसर कर रहा है।
साथियों,
‘गली क्रिकेट’ केवल एक टूर्नामेंट नहीं है; यह एक अनूठी युवा-संचालित पहल है जो अपने चौथे सीज़न में प्रवेश कर चुकी है। यह खेल, अनुशासन और सामुदायिक जुड़ाव का एक अद्भुत संगम है। जब हम इस आयोजन की अब तक की यात्रा पर नज़र डालते हैं, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं लगता।
वर्ष 2023 में आयोजित पहले सीज़न में 300 से अधिक टीमों और 3 हजार 500 से अधिक खिलाड़ियों के साथ इसकी शुरुआत हुई, और इसने ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज कराया।
फिर वर्ष 2024 में सीज़न 2 के साथ यह कारवां और बढ़ा। इसमें 300 से अधिक टीमों और 3 हजार 600 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया और इसे ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में स्थान मिला।
और वर्ष 2025 के सीज़न 3 की बात करें तो इसमें 500 से अधिक टीमों और 6 हजार 500 से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी ने वह पैमाना हासिल किया, जो ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ के योग्य है।
यदि इस वर्ष आयोजित इस सीज़न 4 की बात करें तो इस चौथे सीज़न में 32 महिला टीमों सहित कुल 288 टीमों के 3 हजार 456 से अधिक खिलाड़ी पूरे उत्साह के साथ मैदान में उतरे हैं। यह युवाओं की असीम ऊर्जा और समुदाय के साथ उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि यू.टी. क्रिकेट एसोसिएशन और चंडीगढ़ पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ छेड़ी गई ‘बल्ला घुमाओ, नशा भगाओ’ की यह मुहिम अब हर घर की आवाज़ बन चुकी है। समाज और युवाओं द्वारा इस प्रयास को दी गई यह व्यापक स्वीकार्यता हमें यह अटूट विश्वास दिलाती है कि हमारे शहर का भविष्य सुरक्षित और बिल्कुल सही हाथों में है।
साथियो,
इस चौथे सीज़न की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी उपलब्धि इसका इंडियन स्ट्रीट प्रीमियर लीग (ISPL) के साथ जुड़ना है। अब यह केवल एक स्थानीय टूर्नामेंट नहीं रह गया है। यह हमारे गली के टैलेंट को सीधे एक पेशेवर मंच प्रदान कर रहा है। इसके माध्यम से खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर एक्सपोज़र मिल रहा है।
यह युवाओं को खेल के माध्यम से न केवल अपनी पहचान बनाने, बल्कि आय के नए अवसर प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। आपके जुनून को अब एक वास्तविक करियर में बदलने का यह एक शानदार अवसर है।
देवियो और सज्जनो,
आज मैं विशेष रूप से चंडीगढ़ पुलिस की भूमिका की सराहना करना चाहूँगा। वर्दी में हमारे ये जवान न केवल कानून व्यवस्था बनाए रखते हैं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी बखूबी निभा रहे हैं। गली क्रिकेट ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ का एक जीवंत उदाहरण है।
इस आयोजन ने युवाओं और पुलिस के बीच एक मजबूत विश्वास और भरोसे का पुल बनाया है। आज हमारे बच्चे पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली एक संस्था के रूप में नहीं देखते, बल्कि उन्हें अपना दोस्त, अपना मार्गदर्शक और एक भागीदार मानते हैं। कानून प्रवर्तन से परे जाकर युवाओं के साथ यह सकारात्मक जुड़ाव समाज के लिए अत्यंत लाभकारी है।
साथ ही, मैं इस अवसर पर यूटी क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री संजय टंडन जी की विशेष रूप से सराहना करना चाहूँगा। इस पूरी पहल को एक छोटे से विचार से एक विशाल जन-आंदोलन में बदलने का श्रेय उनके कुशल नेतृत्व और विज़न को जाता है। आपने चंडीगढ़ के युवाओं को जो दिशा दी है, उसके लिए यह शहर हमेशा आपका आभारी रहेगा।
देवियों और सज्जनों,
खेल मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और उनके लाभ केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास तक विस्तृत होते हैं। नियमित खेलकूद शरीर को स्वस्थ, सशक्त और ऊर्जावान बनाते हैं। यह हृदय को मजबूत करते हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और जीवनशैली से जुड़ी अनेक बीमारियों से बचाव करते हैं। एक स्वस्थ शरीर ही एक सशक्त और सक्रिय जीवन की नींव होता है।
खेलों का सबसे खूबसूरत और सशक्त पहलू यह है कि वे समाज को बांटने वाली हर दीवार को ध्वस्त कर देते हैं। खेल का मैदान ना तो कोई जाति देखता है, ना धर्म पूछता है; ना यह ऊंच-नीच का भेद जानता है और ना ही अमीरी-गरीबी की सीमाओं को मानता है। वहाँ केवल प्रतिभा, पसीना और टीम भावना बोलती है।
जब कोई नन्हा खिलाड़ी मैदान की मिट्टी पर अपना पहला कदम रखता है, तो उसकी एकमात्र पहचान उसका खेल-कौशल और उसका जुनून होता है। मैदान एक ऐसा पवित्र मंच है जहाँ विभिन्न परिवेशों से आए युवा केवल ‘सहयोगी’ नहीं, बल्कि एक अटूट ‘इकाई’ बन जाते हैं। वे एक-दूसरे की कमियों को ढंकते हैं, एक-दूसरे की जीत के लिए पसीना बहाते हैं और सामूहिक संघर्ष के बाद साझा सफलता का जश्न मनाते हैं।
वास्तव में, खेल के मैदान पर दिखने वाला यह सामंजस्य ही हमारे ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की असली आत्मा है। यही वह विविधता में एकता है, जो हमारे लोकतंत्र और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। खेल वास्तव में एक ऐसा शक्तिशाली माध्यम है, जो हमारे समाज में समानता, सामाजिक समरसता और एकजुटता की भावना को सबसे गहराई से सींचता है।
खेल हमें यह सिखाता है कि हारने के बाद फिर से उठकर कैसे खड़ा होना है। एक महान विचारक ने कहा है, ‘‘चैंपियन वह नहीं होता जो कभी नहीं हारता, बल्कि चैंपियन वह होता है जो हारने के बाद भी हार नहीं मानता।’’ और यही जज़्बा हमें जीवन के हर क्षेत्र में सफल बनाता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी कहा है, “खेल हमें टीमवर्क, अनुशासन और संघर्ष से सफलता प्राप्त करने की सीख देता है।” उनका आशय है कि एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ युवाओं द्वारा ही किया जा सकता है। आज नशे जैसी भयानक बुराई हमारे समाज को खोखला कर रही है। ऐसे में यह गली क्रिकेट युवाओं को एक नशामुक्त, स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली की ओर ले जा रहा है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत सरकार ‘खेलो इंडिया’, ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ और ‘टार्गेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से खेल की एक नई संस्कृति विकसित कर रही है। हमारा लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं है, बल्कि ‘स्वस्थ भारत, सशक्त भारत’ का निर्माण करना है। गली क्रिकेट जैसी पहलें भारत सरकार के इसी विज़न को ज़मीनी स्तर पर साकार कर रही हैं।
साथियो,
मेरा दृढ़ विश्वास है कि चंडीगढ़ का यह ‘गली क्रिकेट मॉडल’ केवल एक शहर तक सीमित रहने वाली पहल नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। यह मॉडल दर्शाता है कि यदि पुलिस और खेल संगठनों के समन्वित प्रयासों से युवाओं को सकारात्मक दिशा दी जाए, तो सामाजिक परिवर्तन को एक सशक्त आंदोलन का रूप दिया जा सकता है।
यदि भारत के विभिन्न राज्य इस प्रकार के समन्वित और उद्देश्यपूर्ण प्रयासों को अपनाएँ, तो न केवल युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा मिलेगी, बल्कि हम एक स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त भारत के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकेंगे।
हम सभी इस कड़वे सच से भली-भांति परिचित हैं कि नशा किस प्रकार हमारे युवाओं को उनके सुनहरे भविष्य से दूर कर देता है। यह केवल एक व्यक्ति को नहीं उजाड़ता, बल्कि पूरे परिवार को पीड़ा में और समाज की असीम ऊर्जा को निराशा के गहरे गर्त में धकेल देता है।
लेकिन, जब यही युवा पूरे जोश के साथ मैदान में उतरता है, जब उसके हाथों में बल्ला और आँखों में जीत का लक्ष्य होता है, तब वह केवल एक खेल नहीं खेल रहा होता, वह अपने जीवन की एक नई और सकारात्मक दिशा चुन रहा होता है! नकारात्मकता और अवसाद को पीछे छोड़ते हुए, जब मैदान की मिट्टी पर हमारे युवाओं का पसीना गिरता है, तो यकीन मानिए, समाज में एक नई उम्मीद का अंकुर फूटता है।
मैं हमेशा मानता हूँ कि खेल महज़ कोई मनोरंजन नहीं है; यह एक सामाजिक आंदोलन है। यह सिखाता है कि असली ‘नशा’, असली खुमारी तो मेहनत, अनुशासन और टीम भावना में है, उन रसायनों में नहीं जो जीवन को भीतर से खोखला कर दें। इसलिए, आज जब हमारे ये युवा मैदान में चौके-छक्के लगाते हैं, तो वे केवल रन नहीं बनाते, बल्कि वे नशे के खिलाफ एक हुंकार भरते हैं। वे पूरे देश को यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि भारत का युवा अब जाग चुका है, और वह अपने भविष्य को स्वस्थ, सशक्त और सार्थक रूप से गढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मेरे प्रिय युवा साथियो,
आज भारत एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। हमारा लक्ष्य केवल आर्थिक महाशक्ति बनना नहीं, बल्कि अपनी गौरवशाली परंपराओं के साथ पुनः ‘विश्व गुरु’ के शिखर पर स्थापित होना है। ‘विकसित भारत 2047’ का निर्माण हमारे युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और चरित्र पर ही निर्भर करता है।
स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, “मुझे लोहे की मांसपेशियों और फौलाद की नसों वाले युवाओं की आवश्यकता है।” यह संदेश हमें बताता है कि एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण स्वस्थ, अनुशासित और समर्पित युवाओं से ही होता है।
और मुझे यह देखकर अत्यंत गर्व होता है कि खेल का यह मैदान स्वामी जी के उसी सपने को साकार करने की एक बेहतरीन प्रयोगशाला है। यहाँ बहाया गया आपका पसीना न केवल आपके शरीर को फौलादी बनाता है, बल्कि आपके मानसिक संकल्प को भी इतना दृढ़ कर देता है कि जीवन की कोई भी चुनौती, निराशा या नशे जैसी कुप्रवृत्ति आपको अपने लक्ष्य से डिगा नहीं सकती।
अंत में, मैं अपने सभी युवा खिलाड़ियों से यही कहना चाहूँगा कि हमेशा सक्रिय रहें, अनुशासन में रहें और सकारात्मक विकास पर ध्यान केंद्रित करें। मैदान पर पसीना बहाएं, अपनी ऊर्जा को खेल में लगाएं और नशे जैसी बुराइयों से कोसों दूर रहें। याद रखिए, जब आप मैदान में उतरते हैं, तो आप केवल एक खेल नहीं खेलते, आप अपने चरित्र का, अपने समाज का और अपने राष्ट्र का निर्माण कर रहे होते हैं।
मैं इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली सभी टीमों, विजेताओं और आयोजकों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। इस सफल आयोजन के लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं।
आइए, एक बार फिर पूरे जोश के साथ संकल्प लें, ‘‘बल्ला घुमाओ, नशा भगाओ!’’
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिंद!