SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF CELEBRATION OF ACADEMIC EXCELLENCE AT PUNJAB LOK BHAVAN ON MAY 16, 2026.
- by Admin
- 2026-05-16 12:05
‘प्रतिभाशाली छात्रों के सम्मान समारोह’ के अवसर पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 16.05.2026, शनिवार समयः सुबह 10:00 बजे स्थानः पंजाब लोकभवन
नमस्कार!
आज प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के सम्मान के इस गरिमामयी समारोह में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता, गर्व और आत्मिक संतोष की अनुभूति हो रही है। यह अवसर केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि परिश्रम, अनुशासन, समर्पण और सपनों की शक्ति का भी सम्मान है।
आज हम उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का अभिनंदन करने हेतु एकत्रित हुए हैं, जिन्होंने 12वीं कक्षा में 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करके न केवल अपने विद्यालय और अभिभावकों का नाम रोशन किया है, बल्कि सम्पूर्ण चंडीगढ़ को गौरवान्वित किया है।
मैं शिक्षा विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन को इस प्रेरणादायी कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। साथ ही, आज सम्मानित होने वाले सभी प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यालय परिवार को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ।
प्रिय बच्चों,
सफलता कभी भी किसी अकेले व्यक्ति की यात्रा नहीं होती। आपकी इस सफलता के पीछे एक ‘स्वर्णिम त्रिकोण’ (Golden Triangle) काम कर रहा है। इस त्रिकोण का पहला सिरा आपका अपना कठोर परिश्रम है। दूसरा सिरा आपके शिक्षकों का मार्गदर्शन है, जिन्होंने एक कुम्हार की भांति आपके भविष्य को गढ़ा है। और तीसरा, सबसे महत्वपूर्ण सिरा आपके माता-पिता का त्याग है।
आपके माता-पिता ने अपनी इच्छाओं को मारकर आपकी शिक्षा के लिए संसाधन जुटाए हैं। आज जब आपको मंच पर सम्मानित होते हुए वे देख रहे हैं, तो विश्वास मानिए, उनके जीवन की सारी थकान मिट गई है।
जब किसी विद्यार्थी की उत्तर पुस्तिका में अंक चमकते हैं, तब उसके पीछे केवल शब्द और संख्याएँ नहीं होतीं, बल्कि अनगिनत जागी हुई रातें, माता-पिता की प्रार्थनाएँ, शिक्षकों का समर्पण और स्वयं विद्यार्थी का अदम्य संकल्प होता है।
मैं इस अवसर पर उन सभी अभिभावकों और शिक्षकों को नमन करता हूँ, जिनकी तपस्या आज आपकी सफलता के रूप में फलीभूत हुई है।
साथियो,
मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि यूटी चंडीगढ़ के सरकारी विद्यालयों ने इस वर्ष 87.25 प्रतिशत का उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किया है, जो
सी.बी.एस.ई. के अखिल भारतीय परिणाम 85.2 प्रतिशत से 2.05 प्रतिशत अधिक है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सरकारी विद्यालय अब केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि उत्कृष्टता के तीर्थ बन चुके हैं।
विशेष गर्व का विषय यह है कि इस वर्ष 57 विद्यार्थियों ने 95 प्रतिशत अथवा उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 29 थी। यह वृद्धि केवल आँकड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि सपनों के विस्तार, आत्मविश्वास के उत्थान और शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार का परिचायक है।
आज मैं विशेष रूप से उन छात्राओं को बधाई देना चाहता हूँ, जिन्होंने पुनः यह सिद्ध किया है कि यदि अवसर और संकल्प साथ हों, तो बेटियाँ हर शिखर को स्पर्श कर सकती हैं। 90.55 प्रतिशत उत्तीर्ण प्रतिशत के साथ छात्राओं ने अनुकरणीय प्रदर्शन किया है। यह केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त संकेत है।
प्रिय विद्यार्थियों, आप में से प्रत्येक विद्यार्थी एक दीपक है, जो केवल स्वयं नहीं जलता, बल्कि समाज को भी प्रकाश देता है। याद रखिए “प्रतिभा जन्म से नहीं, निरंतर परिश्रम से जन्म लेती है।”
आज मैं विशेष रूप से जी.एम.एस.एस.एस-35 के छात्र अनूप सैनी को बधाई देता हूँ, जिन्होंने 99.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर असाधारण उपलब्धि हासिल की है। उनकी सफलता यह सिद्ध करती है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाला विद्यार्थी भी देश का भविष्य गढ़ सकता है।
साथ ही, पीएमश्री जी.जी.एम.एस.एस.एस-18 की छात्रा वंशिका जैन का संघर्ष और सफलता हम सभी के लिए प्रेरणा है। श्रवण दिव्यांगता एवं टाइप-1 डायबिटीज जैसी चुनौतियों के बावजूद 96 प्रतिशत अंक प्राप्त करना यह संदेश देता है कि बाधाएँ शरीर में हो सकती हैं, मन में नहीं। वंशिका जैसी बेटियाँ हमें सिखाती हैं कि “हौसलों के आगे परिस्थितियाँ भी नतमस्तक हो जाती हैं।
मेरे युवा साथियों,
आज आप सफल हुए हैं, लेकिन याद रखिए कि यह एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। इस संदर्भ में, मैं आपको एक छोटी सी कहानी सुनाना चाहता हूँ।
एक बार एक लकड़ी काटने वाली कंपनी में दो लकड़हारे काम करते थे, राम और श्याम। राम लगातार 8 घंटे बिना रुके पेड़ काटता था, जबकि श्याम हर एक घंटे के बाद 10 मिनट का विश्राम लेता था। शाम को जब लकड़ियों का हिसाब हुआ, तो सब हैरान रह गए। श्याम ने राम से कहीं अधिक लकड़ियां काटी थीं।
राम ने आश्चर्य से पूछा, ‘‘यह कैसे संभव है? तुम तो हर घंटे आराम कर रहे थे और मैं लगातार काम कर रहा था!’’
श्याम ने मुस्कुराकर जवाब दिया, ‘‘मैं आराम नहीं कर रहा था, मित्र। उन 10 मिनटों में, मैं अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज कर रहा था।’’
यह कहानी हमें एक बहुत बड़ा जीवन मूल्य सिखाती है। आपकी ‘शिक्षा’ और आपका ‘ज्ञान’ ही आपकी कुल्हाड़ी की धार है। दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। अगर आप नई चीजें सीखना बंद कर देंगे, तो आप पीछे रह जाएंगे। इसलिए, जीवन भर एक विद्यार्थी बने रहें और अपने ज्ञान की धार को हमेशा तेज करते रहें।
आज का युग ज्ञान, नवाचार और तकनीक का युग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डेटा साइंस, ग्रीन टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप संस्कृति तेजी से दुनिया को बदल रही है। ऐसे समय में आपको केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि नई तकनीकों, रचनात्मक सोच और वैश्विक दृष्टिकोण को भी अपनाना है। लेकिन इसके साथ-साथ हमें अपने संस्कार, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को भी बनाए रखना होगा।
महात्मा गांधी जी ने कहा था, “चरित्र के बिना शिक्षा समाज के लिए खतरा बन सकती है।” इसलिए ज्ञान के साथ विनम्रता, सफलता के साथ संवेदनशीलता और प्रगति के साथ नैतिकता भी आवश्यक है।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी ने कहा था, ‘‘सपने वो नहीं होते जो आप सोते समय देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।’’
आपने अपने सपनों के लिए जो जागकर मेहनत की है, उसे कभी कम न होने दें। शिक्षा बिना संस्कारों के अधूरी है। आप जीवन में कितने भी ऊंचे मुकाम पर पहुँच जाएं, अपने माता-पिता, अपने शिक्षकों और अपनी मातृभूमि का सम्मान कभी न भूलें।
मुझे पूरा विश्वास है कि आप अपने ज्ञान और चरित्र के बल पर न केवल अपना और अपने परिवार का, बल्कि इस खूबसूरत शहर चंडीगढ़ और पूरे भारतवर्ष का नाम पूरी दुनिया में रोशन करेंगे।
मित्रो,
चंडीगढ़ हमेशा से अपनी सुनियोजित संरचना और उत्कृष्ट जीवन स्तर के लिए जाना जाता है, लेकिन हमारी सबसे बड़ी शक्ति और पहचान हमारा मजबूत शिक्षा ढांचा है।
चंडीगढ़ प्रशासन प्रत्येक विद्यार्थी को विश्वस्तरीय, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। इसी दिशा में सरकारी विद्यालयों को स्मार्ट स्कूलों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो विद्यार्थियों को नई सीखने की संभावनाएँ प्रदान कर रही हैं।
साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को पूरी गंभीरता और प्रभावशीलता के साथ लागू किया जा रहा है, ताकि रटने की पारंपरिक प्रणाली के स्थान पर विद्यार्थियों में क्रिटिकल थिंकिंग, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
हमारा उद्देश्य केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल, कला, संस्कृति और व्यक्तित्व विकास के माध्यम से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना भी है। चंडीगढ़ प्रशासन का सतत प्रयास है कि यहाँ का सरकारी शिक्षा तंत्र देशभर के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो।
प्रिय विद्यार्थियों,
आज आपको जो सम्मान मिल रहा है, वह आपके जीवन की मंज़िल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। सफलता कभी अंतिम नहीं होती और असफलता कभी स्थायी नहीं होती। जीवन में सीखने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है।
मैं आपसे विशेष रूप से यह आग्रह करता हूँ कि आप सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया का उपयोग सकारात्मक उद्देश्यों के लिए करें। अपना समय ज्ञान, कौशल और आत्मविकास में लगाएँ।
नशा, हिंसा और नकारात्मकता से दूर रहकर अपने जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाइए। एक स्वस्थ शरीर, सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवन ही महान उपलब्धियों की नींव होते हैं।
आज देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी सोचें। आप सभी भारत के भविष्य के वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासक, उद्यमी और नीति निर्माता हैं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि चंडीगढ़ के विद्यार्थी आने वाले समय में न केवल राष्ट्रीय, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी प्रतिभा और संस्कारों से देश का नाम रोशन करेंगे।
मैं इस अवसर पर सभी प्रधानाचार्यों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को भी हृदय से बधाई देता हूँ, जिनके मार्गदर्शन और त्याग ने इन विद्यार्थियों के सपनों को आकार दिया।
एक बार फिर, सभी पुरस्कार विजेता छात्रों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। जो छात्र आज मंच तक नहीं पहुँच पाए हैं, उनसे मेरा यही कहना है कि,
‘‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है,
पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’’
निरंतर प्रयास करते रहें, सफलता एक दिन आपके कदम अवश्य चूमेगी।
अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा “मेहनत की तपती धूप में जो निरंतर जलते हैं, वही एक दिन सफलता के सूरज बनकर निकलते हैं। संघर्ष जिनका साथी हो, इतिहास उन्हीं के चरण चूमता है।”
आप सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य हेतु हार्दिक शुभकामनाएँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिंद! जय भारत!