SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF DISTRIBUTION OF STUDY MATERIAL TO MERITORIOUS UNDERPRIVILEGED STUDENTS AT CHANDIGARH ON MAY 19, 2026.

भारत विकास परिषद द्वारा स्कूली विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री वितरण समारोह पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 19.05.2026,  मंगलवारसमयः सुबह 11:00 बजेस्थानः चंडीगढ़

   नमस्कार!

आज इस अत्यंत प्रेरणादायी समारोह में आपके बीच उपस्थित होकर मुझे आंतरिक संतोष और अपार प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है। आज का यह दिन हमारे समाज के उस सामूहिक संकल्प का उत्सव है, जो हर बच्चे के हाथ में कलम और हर चेहरे पर मुस्कान देखना चाहता है।

मैं भारत विकास परिषद को हृदय की गहराइयों से बधाई देता हूँ, जिसने आज हमारे इन होनहार और मेधावी बच्चों को उनकी शैक्षणिक यात्रा में संबल प्रदान करने के लिए इस ‘शिक्षण सामग्री वितरण’ कार्यक्रम का आयोजन किया है। 

मैं भारत विकास परिषद् चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री अजय दत्ता, भारत विकास परिषद् के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री सुरेश जैन, साक्षरता प्रकल्प के निदेशक श्री अशोक कुमार गोयल, भारत विकास परिषद् चण्डीगढ़ के अध्यक्ष श्री एम.के. विरमानी सहित अन्य सभी सदस्यों को इस सफल आयोजन के लिए बधाई देता हूँ।

मुझे ज्ञात हुआ है कि आज लगभग 450 जरुरतमंद स्कूली बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म, बैग, स्टेशनरी आदि सेवा भाव से वितरित की गई है, जो कि देश के साक्षरता कार्यक्रम को और अधिक मजबूती देने के लिये बहुत ही नेक कार्य है।

देवियो और सज्जनो,

जब हम भारत विकास परिषद का नाम लेते हैं, तो हमारे मन में एक ऐसे संगठन की छवि उभरती है जो देश की उन्नति और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित है।

हम सभी जानते हैं कि भारत विकास परिषद की स्थापना 10 जुलाई 1963 को स्वामी विवेकानंद जी के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर देश के प्रबुद्ध नागरिकों और विचारकों, जिनमें डॉ. सूरज प्रकाश जी का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है, के प्रयासों से हुई थी। प्रारंभ में इसका गठन ‘सिटिजन्स काउंसिल’ के रूप में हुआ था, जो बाद में ‘भारत विकास परिषद’ के रूप में राष्ट्र सेवा का एक विशाल वटवृक्ष बन गया।

भारत विकास परिषद का सेवा नेटवर्क आज कितना विशाल हो चुका है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों में इसकी 1500 से अधिक शाखाएं और विदेशों में भी एक दर्जन से ज्यादा शाखाएं सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इनमें लगभग 1 लाख 56 हजार समर्पित सदस्य निःस्वार्थ भाव से सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।

यदि हम भारत विकास परिषद्, चंडीगढ़ की बात करें, तो वर्ष 1987 से यह शाखा सेवा, संस्कार और समर्पण की भावना के साथ समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्ग के उत्थान हेतु निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सहयोग के क्षेत्र में परिषद् द्वारा किए जा रहे प्रयास न केवल सराहनीय हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणास्रोत भी हैं।

हमारे अपने शहर चंडीगढ़ के सेक्टर 24-बी स्थित इंदिरा हॉलिडे होम में परिषद द्वारा संचालित धर्मार्थ चिकित्सा एवं निदान केंद्र इसका जीवंत उदाहरण है, जो बेहद मामूली दरों पर रोजाना लगभग 1200 मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रहा है। इसके साथ ही, परिषद वंचित वर्ग की बेटियों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए 4 बाल विकास केंद्र और एक सिलाई केंद्र भी सफलतापूर्वक चला रही है।

शिक्षा के क्षेत्र में, परिषद अपने ‘साक्षरता प्रोजेक्ट’ के तहत वर्ष 1987 से ही जरूरतमंद बच्चों को पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी दे रही है, जिससे अब तक 22 हजार से अधिक छात्र लाभान्वित होकर आज अपने जीवन में बेहतरीन मुकाम हासिल कर चुके हैं।

मुझे यह जानकर बेहद प्रसन्नता हुई है कि हमारे चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा सरकारी स्कूलों के कक्षा 12वीं तक के सभी छात्रों को NCERT की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की पहल से प्रेरित होकर, परिषद ने इस वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 25 लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया है। 

इसके तहत कक्षा 11वीं और 12वीं के 200 होनहार छात्रों के साथ-साथ 9वीं कक्षा के 90 प्रतिशत से अधिक प्राप्त करने वाले 120 छात्रों को हेल्प-बुक्स और 5 हजार रूपये की वार्षिक छात्रवृत्ति दी जाएगी। साथ ही, उनके समग्र विकास के लिए हर महीने पर्सनैलिटी डेवलपमेंट क्लासेस भी आयोजित की जाएंगी। मैं परिषद के इस विजनरी कदम की खुले दिल से सराहना करता हूँ।

देवियो और सज्जनो,

बच्चों को स्कूल बैग, यूनिफॉर्म, पुस्तकें, स्टेशनरी और अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना केवल एक सहायता या दान का कार्य नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की एक सशक्त और दूरदर्शी पहल है। जब हम किसी बच्चे के हाथ में पुस्तक देते हैं, तो वास्तव में हम उसके भविष्य को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी शक्ति है।

यदि किसी राष्ट्र को सशक्त बनाना है, तो उसके बच्चों को शिक्षित और संस्कारित बनाना होगा। जब शिक्षा का प्रकाश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है, तभी वास्तविक सामाजिक और राष्ट्रीय विकास संभव होता है। ऐसे प्रयास समाज में समान अवसर, संवेदनशीलता और सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखते हैं।

हमारे जीवन में कई उपलब्धियाँ तुरंत खुशी देती हैं, लेकिन शिक्षा ऐसी अमूल्य पूंजी है, जो धीरे-धीरे पूरे जीवन को संवारती है। अच्छी शिक्षा का वास्तविक लाभ तब दिखाई देता है, जब विद्यार्थी अपने परिवार का सहारा बनते हैं, समाज की जिम्मेदारियाँ निभाते हैं और राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं।

कहा गया है, “विद्या धनं सर्वधनप्रधानम्।” अर्थात् विद्या सबसे श्रेष्ठ धन है। यह न कभी घटती है, न चुराई जा सकती है, और न ही बाँटने से कम होती है।

और क्योंकि आज मुझे यहाँ उपस्थित बच्चों से सीधे संवाद करने का अवसर मिल रहा है, इसलिए मैं आप सभी बच्चों से विशेष रूप से कहना चाहूँगा कि आपका स्कूली जीवन आपके पूरे भविष्य की नींव है। यही वह समय है, जब आप अपने सपनों को आकार देते हैं, अपने व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं और जीवन के मूल संस्कार सीखते हैं।

प्रिय बच्चों,

परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, यदि आपके भीतर सीखने की लगन, अनुशासन और मेहनत करने का संकल्प है, तो कोई भी कठिनाई आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। हमेशा बड़े सपने देखिए, अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान कीजिए, और पूरी ईमानदारी व मेहनत से पढ़ाई कीजिए।

जो विद्यार्थी आज मन लगाकर शिक्षा प्राप्त करते हैं, वही कल देश के जिम्मेदार डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, प्रशासक और जागरूक नागरिक बनते हैं। उनका व्यक्तित्व, उनकी सोच और उनके संस्कार ही आगे चलकर समाज और राष्ट्र की दिशा तय करते हैं। इसलिए स्कूली शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और जिम्मेदार नागरिकता की आधारशिला है।

हो सकता है कि आज आपके पास संसाधनों की थोड़ी कमी हो, लेकिन याद रखिएगा कि इतिहास गवाह है, दुनिया की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खोजें महलों में नहीं, बल्कि अभावों के बीच संघर्ष की भट्टी में तपकर निकली हैं।

‘‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।’’

आप परिस्थितियों को कभी बहाना न बनने दें। हमारे देश के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी का जीवन याद रखिए, जिन्होंने अखबार बेचकर अपनी पढ़ाई पूरी की। देश के प्रधानमंत्री जी का जीवन देखिए। आपकी आर्थिक स्थिति यह तय नहीं कर सकती कि आप भविष्य में कहाँ तक पहुँचेंगे; यह केवल आपकी मेहनत, आपकी लगन और आपकी एकाग्रता तय करेगी।

बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि ‘शिक्षा शेरनी का दूध है, जो इसे पिएगा वह दहाड़ेगा।’ आज आपको जो यह किताबें, कॉपियां और बैग मिल रहे हैं, ये केवल वस्तुएं नहीं हैं, ये आपके सपनों को उड़ान देने वाले पंख हैं। इनका पूरा सम्मान करें, मन लगाकर पढ़ें और खुद को इस काबिल बनाएं कि कल आप भी समाज को वापस लौटाने की स्थिति में हों।

मैं अभिभावकों और शिक्षकों से विशेष आग्रह करना चाहूँगा कि वे बच्चों की शिक्षा को केवल अंकों और प्रतियोगिता तक सीमित न रखें, बल्कि इसे एक दीर्घकालिक निवेश और व्यक्तित्व विकास की प्रक्रिया के रूप में देखें। बच्चों पर केवल अधिक अंक लाने का दबाव न डालें, बल्कि उनमें सीखने की जिज्ञासा, नैतिक मूल्य, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास विकसित करने का प्रयास करें। जब शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित न रहकर जीवन में आत्मसात होती है, तभी वह व्यक्ति के चरित्र और भविष्य को सशक्त बनाती है।

मैं सभी अभिभावकों और शिक्षकों से यह भी आग्रह करता हूँ कि वे बच्चों को एक पौधे की तरह प्रेम, धैर्य और संवेदनशीलता से सींचें। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने कहा था, “शिक्षक को माली की तरह होना चाहिए, जो पौधों को उनके स्वाभाविक रूप से विकसित होने में सहायता करता है।”

बच्चों को सही वातावरण, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलेगा, तो वे निश्चित रूप से जीवन में ऊँचाइयों को प्राप्त करेंगे और समाज के लिए प्रेरणा बनेंगे।

देवियो और सज्जनो,

हमारे भारतीय वास्तुकला, दर्शन और संस्कृति में परोपकार को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है, ‘‘परहित सरिस धरम नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।।’’ अर्थात, दूसरों की भलाई करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है और दूसरों को कष्ट देने से बड़ा कोई पाप नहीं है। आज भारत विकास परिषद जिस कार्य को कर रहा है, वह इसी ‘परहित’ और ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के भाव का साक्षात् उदाहरण है।

मैं आज इस मंच से चंडीगढ़ के और हमारे पूरे देश के सक्षम और संपन्न नागरिकों, व्यावसायिक घरानों और सामाजिक संस्थाओं से एक विशेष अपील करना चाहता हूँ। किसी भी राष्ट्र का संतुलित विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक समाज का हर वर्ग एक-दूसरे के सहयोग के लिए आगे न आए।

हमें इन प्रतिभाशाली बच्चों पर कोई ‘अहसान’ नहीं करना है, बल्कि इन्हें अपना मानकर इनके अधिकारों को इन तक पहुँचाना है। दान केवल धन का नहीं होता। समय, ज्ञान, मार्गदर्शन और प्रेरणा का दान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। एक शिक्षक का मार्गदर्शन, एक पुस्तक का सहयोग और एक सकारात्मक शब्द भी किसी बच्चे का जीवन बदल सकता है।

यदि ईश्वर ने आपको सक्षम बनाया है, तो यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप समाज के उस हिस्से के लिए प्रकाश स्तंभ बनें जो अभी भी अंधेरे से जूझ रहा है। आइए, हम सब मिलकर शिक्षा के इस महायज्ञ में अपनी आहुति दें। चाहे वह किसी बच्चे की फीस की जिम्मेदारी लेना हो, किताबें दान करना हो या उन्हें मेंटरशिप देना हो, आपका छोटा सा प्रयास किसी का पूरा जीवन बदल सकता है।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार भी शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से विद्यार्थियों के समग्र विकास, कौशल निर्माण और समान अवसरों पर विशेष बल दिया गया है।

आज डिजिटल शिक्षा, स्कॉलरशिप योजनाएँ, कौशल विकास कार्यक्रम और पुस्तक सहायता जैसी अनेक पहलें विद्यार्थियों के भविष्य को सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं। लेकिन सरकार के प्रयास तभी सफल होते हैं, जब समाज और सामाजिक संगठन भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। 

चंडीगढ़ प्रशासन शहर के हर बच्चे को, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से आता हो, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हमारी सरकारी स्कूल प्रणालियों को लगातार मजबूत और आधुनिक बनाया जा रहा है ताकि समावेशी शिक्षा का सपना साकार हो सके। लेकिन सरकार के इन प्रयासों को जब भारत विकास परिषद जैसे संगठनों का साथ मिलता है, तो इसकी गति और प्रभावशीलता दोगुनी हो जाती है।

मैं एक बार फिर भारत विकास परिषद के सभी सदस्यों को इस पुनीत कार्य के लिए साधुवाद देता हूँ। प्यारे बच्चों को आशीर्वाद और ढेरों शुभकामनाएं देता हूँ कि आप खूब पढ़ें, अपने माता-पिता, अपने शिक्षकों और इस पूरे देश का नाम रोशन करें।

आइए, हम सब मिलकर इस संकल्प को दोहराएं कि हम भारत के हर बच्चे के भीतर के सामर्थ्य को जगाएंगे और एक आत्मनिर्भर, शिक्षित और ‘विकसित भारत’ का निर्माण करेंगे।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिंद!

जय भारत!