SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF WORLD RED CROSS DAY AT PUNJAB LOK BHAVAN ON MAY 8, 2026.

‘वर्ल्ड रेड क्रॉस डे’ के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 08.05.2026, शुक्रवार

समयः सुबह 11:00 बजे

स्थानः चंडीगढ़

नमस्कार!

आज विश्व रेड क्रॉस दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और गर्व की अनुभूति हो रही है। विश्व रेड क्रॉस दिवस हर वर्ष 8 मई को मनाया जाता है, जो रेड क्रॉस के संस्थापक, महान मानवतावादी हेनरी ड्यूनांट की जयंती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब भी दुनिया में संकट आता है-चाहे वह युद्ध हो, प्राकृतिक आपदा हो या स्वास्थ्य संकट-मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म बन जाती है।

विश्व रेड क्रॉस दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं है, बल्कि यह उन लाखों स्वयंसेवकों, कर्मचारियों और समर्थकों के प्रति सम्मान का प्रतीक है, जो बिना किसी भेदभाव के मानव जीवन की रक्षा और सेवा में जुटे हैं। इस दिन का मुख्य उद्देश्य है, रेड क्रॉस आंदोलन के मूल सिद्धांतों, मिशन और गतिविधियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, और संकट के समय मानवता, करुणा और एकजुटता के महत्व को रेखांकित करना।

रेड क्रॉस दिवस हमें यह भी सिखाता है कि सेवा, दया और सहयोग के बिना कोई भी समाज सशक्त नहीं बन सकता। यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने जीवन में सेवा, दान और सहयोग को अपनाएँ, और जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहें।

आज जब विश्व अनेक प्रकार के संघर्षों, महामारियों और आपदाओं से जूझ रहा है, रेड क्रॉस मानवता की लौ जलाकर यह संदेश देता है कि “सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है’’।

साथियो,

इस वर्ष विश्व रेड क्रॉस दिवस की थीम है, "On the Side of Humanity" (मानवता के पक्ष में)। यह थीम उन सभी स्वयंसेवकों, कर्मचारियों और सहयोगियों को सम्मान समर्पित करती है, जो हर कठिन परिस्थिति में मानवता की सेवा और पीड़ितों की सहायता के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करते हैं।

इस वर्ष का संदेश हमें यह प्रेरणा देता है कि संकट की हर घड़ी में मानवता को सर्वोपरि रखा जाए। सेवा, करुणा और सहयोग की भावना ही एक सुरक्षित, संवेदनशील और समावेशी समाज की वास्तविक नींव है। यह थीम हम सभी को प्रेरित करती है कि हम अपने जीवन में सेवा और सहानुभूति के मूल्यों को अपनाएँ तथा जरूरतमंद और पीड़ित लोगों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहें।

देवियो और सज्जनो,

आज जब हम रोड क्रॉस डे माना रहे हैं तो हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि रेड क्रॉस की स्थापना का प्रेरणादायक इतिहास क्या है। 

रेड क्रॉस आंदोलन की नींव 1859 में इटली के सोलफेरिनो युद्ध के दौरान पड़ी, जब हेनरी ड्यूनांट ने युद्ध के मैदान पर घायल सैनिकों की दयनीय स्थिति देखी। उन्होंने स्थानीय लोगों को संगठित कर घायलों की सेवा की, और बाद में अपने अनुभवों को “ए मेमोरी ऑफ सोलफेरिनो” नामक पुस्तक में लिखा।

इस पुस्तक में ड्यूनांट ने एक स्थायी, तटस्थ और स्वैच्छिक संगठन की आवश्यकता पर बल दिया, जो युद्ध में घायल लोगों की देखभाल कर सके। 1863 में जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें 16 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और रेड क्रॉस आंदोलन की नींव रखी गई। 1864 में जेनेवा कन्वेंशन के तहत रेड क्रॉस का प्रतीक और उसके सिद्धांत स्थापित किए गए।

आज, रेड क्रॉस और रेड क्रेसेंट मूवमेंट दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय नेटवर्क है, जिसमें 190 से अधिक राष्ट्रीय सोसाइटीज, लाखों स्वयंसेवक और कर्मचारी शामिल हैं।

देवियो और सज्जनो,

भारत में रेड क्रॉस संस्था की स्थापना 1920 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुई थी। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, और देशभर में 1,200 से अधिक शाखाएँ हैं। प्रारंभ में इसका उद्देश्य प्रथम विश्व युद्ध के घायल सैनिकों और प्रभावित नागरिकों को सहायता प्रदान करना था, और इसकी गतिविधियाँ मुख्य रूप से चिकित्सा सेवा, प्राथमिक उपचार, रक्तदान और राहत वितरण तक सीमित थीं।

हालांकि, भारत की स्वतंत्रता के पश्चात रेड क्रॉस ने अपने कार्यक्षेत्र को व्यापक बना लिया। अब यह संस्था न केवल प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रहती है, बल्कि यह सामान्य परिस्थितियों में भी विभिन्न संस्थागत सेवाओं के माध्यम से स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों को सहयोग एवं सुदृढ़ता प्रदान करता है।

रेड क्रॉस संस्था की नींव इसके सात मूलभूत सिद्धांतों, मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, स्वैच्छिक सेवा, एकता और सार्वभौमिकता पर टिकी है। इन सिद्धांतों के कारण रेड क्रॉस हर परिस्थिति में, हर व्यक्ति तक बिना भेदभाव के सहायता पहुँचाने में सक्षम है। मानवता और निष्पक्षता इसके सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो इसे अन्य संगठनों से अलग बनाते हैं।

देवियो और सज्जनो,

कमजोरों, वंचितों और पीड़ितों की सेवा करना भारत की सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का मूल आधार रहा है। यह भावना हमारे संस्कारों में रची-बसी है। सेवा, सहानुभूति और सहयोग की संस्कृति हमें पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत में मिली है।

महर्षि वेदव्यास जी ने मानव जीवन की सबसे बड़ी नैतिकता को दो शब्दों में बहुत ही सरलता से अभिव्यक्त किया है, ‘‘परोपकारः पुण्याय’’, अर्थात, दूसरों के हित में कार्य करना ही सच्चा पुण्य है।

इसी प्रकार, गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है, ‘‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई’’, यानी दूसरों की भलाई से बड़ा कोई धर्म नहीं और दूसरों को कष्ट पहुँचाने से बड़ा कोई अधर्म नहीं।

हम उस भारतभूमि से हैं जिसने बुद्ध, महावीर, गुरु नानक देव और महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों को जन्म दिया, जिन्होंने अपने जीवन को परोपकार, सत्य और सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने कर्मों और जीवनशैली से यह दिखाया कि सच्चा सुख तभी है जब हम अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जिएं।

आज जब हम सेवा और सहयोग के प्रतीक, रेड क्रॉस जैसी संस्थाओं की बात करते हैं, तो यह स्मरण कर लेना आवश्यक है कि इन मूल्यों की नींव हमारे देश में सदियों पहले रखी जा चुकी थी।

साथियो,

मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि पंजाब राज्य रेड क्रॉस तथा इसकी जिला शाखाएँ मानवसेवा के महान मानवीय मिशन को पूरा करने में सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभा रही हैं। पिछले वर्ष पंजाब के विभिन्न जिलों में आई भीषण बाढ़ के दौरान, पंजाब राज्य रेड क्रॉस और इसकी जिला शाखाओं ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फँसे लोगों तक हर संभव सहायता पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया। 

जलभराव वाले गाँवों तक खाद्य सामग्री पहुँचाने के लिए नावों की व्यवस्था, मच्छरों के नियंत्रण हेतु फॉगिंग मशीनें, पशुओं के लिए चारा, राशन, तिरपाल, टेंट, दवाइयाँ, बर्तन, कंबल, रजाइयाँ, फोल्डिंग बेड, गद्दे, गर्म वस्त्र एवं अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाकर रेड क्रॉस ने मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। यह वास्तव में अत्यंत प्रशंसनीय और प्रेरणादायी कार्य है। 

मुझे पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में भी पंजाब राज्य रेड क्रॉस और इसकी जिला शाखाएँ अन्य मानवीय संगठनों के सहयोग से किसी भी आपदा या संकट की स्थिति में मानवता की सेवा हेतु सदैव तत्पर रहेंगी।

मुझे यह जानकर भी अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि पंजाब रेड क्रॉस ने देश में ऑनलाइन फर्स्ट एड ट्रेनिंग सिस्टम के पायलट प्रोजेक्ट का सफल नेतृत्व किया। इस अभिनव पहल को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया गया और अब इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया जा रहा है। यह पंजाब के लिए गर्व का विषय है कि यहाँ से प्रारंभ हुई यह पहल आज राष्ट्रीय स्तर पर जनसेवा और आपदा प्रबंधन को सशक्त बना रही है।

यह भी अत्यंत गर्व का विषय है कि “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान, जब पड़ोसी देश द्वारा ड्रोन और मिसाइलों के माध्यम से हमले किए जा रहे थे और लोग घायल हो रहे थे, तब एक सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब रेड क्रॉस और इसकी जिला शाखाओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। रेड क्रॉस द्वारा सिविल डिफेन्स स्वयंसेवकों और आम नागरिकों को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण प्रदान किया गया तथा आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने में सहयोग किया गया। 

साथ ही, किसी भी संभावित आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकारी ब्लड बैंकों को पर्याप्त रूप से सुरक्षित रखने के लिए मेगा रक्तदान शिविरों का आयोजन भी किया गया। यह सेवा भावना और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण है।

देवियो और सज्जनो,

पंजाब वह पुण्य भूमि है, जहां रेड क्रॉस के मूल सिद्धांत, अर्थात बिना किसी भेदभाव के निःस्वार्थ मानव सेवा, का सर्वोत्तम और ऐतिहासिक उदाहरण सदियों पूर्व देखने को मिला था। 

रेड क्रॉस की स्थापना से लगभग 170 वर्ष पहले, हमारे दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के शिष्य, भाई घनैया जी ने श्री आनंदपुर साहिब के युद्ध क्षेत्र में जो करुणा और सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया, वह आज भी मानवता के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

जब युद्ध अपने चरम पर था और चारों ओर घायल सैनिक कराह रहे थे, तब भाई घनैया जी ने न केवल अपने साथी सैनिकों को, बल्कि शत्रु सेना के घायल जवानों को भी पानी पिलाया और उनके घावों पर मरहम लगाया। उन्होंने किसी जाति, धर्म, रंग या पक्षपात की भावना से ऊपर उठकर सेवा को अपना धर्म बनाया।

उनकी यह निःस्वार्थ भावना, जहाँ मित्र और शत्रु का भेद नहीं था, केवल मानवता थी, वास्तव में रेड क्रॉस आंदोलन की आत्मा का साक्षात प्रतीक है।

हमें गर्व है कि हम उस महान परंपरा से जुड़े हैं, उस भूमि से आते हैं, जहां भाई घनैया जी जैसे महापुरुषों ने सेवा, करुणा और निष्पक्षता की जो अमिट छाप छोड़ी, वह आज भी हमें मानव सेवा के लिए प्रेरित करती है।

साथियो,

इतिहास साक्षी है कि पंजाब की धरती ने सदैव सत्य, साहस और राष्ट्रभक्ति का साथ दिया है। पंजाब के लोगों ने हर प्रकार के अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष किया है। लेकिन वर्तमान समय में पंजाब एक गंभीर सामाजिक चुनौती यानी नशे की समस्या का सामना कर रहा है। यह समस्या हमारी युवा पीढ़ी के भविष्य को प्रभावित कर रही है।

राज्य सरकार युवाओं को इस भयानक समस्या से बचाने के लिए अनेक योजनाओं और अभियानों पर कार्य कर रही है। हजारों नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है तथा लाखों रुपये मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं।

पंजाब के राज्यपाल होने के नाते मैंने भी इसे अपना नैतिक दायित्व समझते हुए रेड क्रॉस के माध्यम से “युद्ध नशों विरुद्ध” अभियान के अंतर्गत पंजाब के सीमावर्ती जिलों में पदयात्राएँ आयोजित की हैं। इन यात्राओं का उद्देश्य हमारे युवाओं को जागरूक करना, उन्हें नशे के दुष्परिणामों के प्रति सचेत करना तथा उन्हें सकारात्मक और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में प्रेरित करना है।

मुझे अत्यंत संतोष है कि इन पदयात्राओं में बच्चों, माताओं, बहनों, धार्मिक नेताओं, सामाजिक संस्थाओं, युवा क्लबों और समाज के सभी वर्गों का भरपूर सहयोग और समर्थन प्राप्त हुआ। यह जनसहभागिता इस बात का प्रमाण है कि जब समाज एकजुट होकर किसी बुराई के खिलाफ खड़ा होता है, तो परिवर्तन निश्चित रूप से संभव होता है।

आज इस महत्वपूर्ण अवसर पर मैं आप सभी से भावपूर्ण अपील करता हूँ कि आइए, हम सब मिलकर नशों के विरुद्ध इस संघर्ष को एक जन-आंदोलन बनाएं और इसे सफल बनाने में अपना सक्रिय योगदान दें, ताकि हम अपने पवित्र गुरुओं की इस पावन धरती को नशामुक्त, स्वस्थ, सुरक्षित और खुशहाली के रंगों से परिपूर्ण बना सकें।

देवियो और सज्जनो,

इस विशेष अवसर पर मैं महान दार्शनिक स्वामी विवेकानंद जी के प्रेरणादायक शब्दों को स्मरण करना चाहता हूँ। उन्होंने कहा था, ‘‘वे ही जीवित हैं जो दूसरों के लिए जीते हैं, बाकी सब तो जीवित होते हुए भी मृत के समान हैं।’’ 

रेड क्रॉस की वर्दी केवल एक पहचान नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का एक महान दायित्व है। मैं विशेष रूप से युवाओं से कहना चाहूँगा कि वे केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित न रहें, बल्कि समाज की वास्तविक आवश्यकताओं और संवेदनाओं से भी जुड़ें। जब आप किसी जरूरतमंद की सहायता करते हैं, रक्तदान करते हैं या संकट की घड़ी में किसी पीड़ित का सहारा बनते हैं, तो जो आत्मिक संतोष प्राप्त होता है, वह किसी भी भौतिक उपलब्धि से कहीं अधिक मूल्यवान होता है।

मदर टेरेसा ने भी कहा था, “हम सभी महान कार्य नहीं कर सकते, लेकिन छोटे कार्यों को महान प्रेम के साथ अवश्य कर सकते हैं।” मैं समझता हूं कि रेड क्रॉस हमें वही मंच प्रदान करता है, जहाँ छोटे-छोटे सेवा कार्य मिलकर समाज में बड़ा परिवर्तन लाते हैं।

मेरा दृढ़ विश्वास है कि जो व्यक्ति अपना जीवन दूसरों की भलाई के लिए समर्पित करता है, वह केवल समाज को ही नहीं, बल्कि स्वयं को भी भीतर से समृद्ध बनाता है।

अंत में, मैं उन सभी गुमनाम नायकों यानी हमारे रेड क्रॉस के उन हजारों वालंटियर्स को नमन करता हूँ, जो बिना किसी तालियों या पुरस्कार की उम्मीद के, दिन-रात मानवता की सेवा में लगे हुए हैं। आप ही इस समाज के असली हीरो हैं।

आइए, आज विश्व रेड क्रॉस दिवस के इस शुभ अवसर पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम रेड क्रॉस के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारेंगे। हम एक ऐसा समाज बनाएंगे जहाँ कोई भी व्यक्ति दर्द में अकेला न हो, जहाँ हर आंसू पोंछने के लिए एक हाथ आगे बढ़े।

आप सभी ने मुझे इतने धैर्य और शांति से सुना, इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। रेड क्रॉस पंजाब को उनके महान कार्यों के लिए पुनः शुभकामनाएं!

धन्यवाद,

जय हिंद! 

जय भारत!