SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF THREE DAY CRICKET TOURNAMENT ORGANISED BY THE ALL INDIA KHATIK PANCHAYAT COMMITTEE, CHANDIGARH ON MAY 7, 2026.

क्रिकेट टूर्नामेंट के समापन उपरांत ‘पुरस्कार वितरण समारोह’ पर

माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 07.05.2026, गुरूवार

 

स्थानः चंडीगढ़

नमस्कार!

आज इस तीन दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत हर्ष और गौरव की अनुभूति हो रही है। मैं इस सफल आयोजन के लिए अखिल भारतीय खटीक पंचायत समिति, चंडीगढ़ को हार्दिक बधाई देता हूँ, जिसने न केवल खेल को बढ़ावा दिया है, बल्कि समाज को एकजुट करने का भी सराहनीय कार्य किया है। 

मुझे बताया गया है कि समिति द्वारा माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘खेलो इंडिया’ अभियान से प्रेरित होकर खटीक समाज के बच्चों एवं युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने हेतु दिनांक 5, 6 और 7 मई 2026 को इस तीन दिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया गया है। इस आयोजन में देश के 12 विभिन्न प्रदेशों से खटीक समाज के प्रतिभाशाली बच्चों की टीमों ने भाग लिया है।

मैं समझता हूं कि इस टूर्नामेंट के माध्यम से युवाओं को शारीरिक गतिविधियों को अपनाने, स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने तथा नशे जैसी गंभीर सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का सशक्त संदेश दिया गया है। 

मुझे बताया गया है कि अखिल भारतीय खटीक पंचायत समिति चंडीगढ़ पिछले लगभग 40 वर्षों से चंडीगढ़ में सक्रिय रूप से कार्यरत है। समिति के वर्तमान अध्यक्ष श्री सोमन सोनकर जी के नेतृत्व में यह संस्था निरंतर समाजसेवा के कार्यों में समर्पित भाव से जुटी हुई है। इसके माध्यम से खटीक समाज सहित अन्य वर्गों के जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा में सहयोग प्रदान किया जाता है, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाती है, और युवाओं को नशों से दूर रखते हुए उन्हें शारीरिक रूप से सशक्त बनाने के लिए नियमित रूप से खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।

मैं समझता हूँ कि यह समिति केवल एक सामाजिक संगठन नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास, युवा सशक्तिकरण और सकारात्मक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है, जो वास्तव में अनुकरणीय और प्रेरणादायक है।

देवियो और सज्जनो,

आज की इस शाम, इस मैदान की रोशनी से भी अधिक यहाँ उपस्थित युवाओं के चेहरों की चमक और उनके उत्साह ने मुझे गहराई से प्रभावित किया है। इस वातावरण में जो ऊर्जा, जो जुनून और जो सकारात्मक भावना दिखाई दे रही है, वह वास्तव में अद्भुत है। 

आज हमने मैदान पर केवल रन, विकेट और जीत-हार नहीं देखी, बल्कि हमने संघर्ष, धैर्य, रणनीति और खेल भावना का उत्कृष्ट प्रदर्शन भी देखा। हर खिलाड़ी ने अपने-अपने स्तर पर सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया और यही किसी भी प्रतियोगिता की वास्तविक सफलता होती है।

मैं इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को बधाई देता हूँ। आप सभी ने जिस उत्साह, अनुशासन और खेल भावना का प्रदर्शन किया है, वह वास्तव में प्रशंसनीय है। मैं विशेष रूप से दोनों फाइनलिस्ट टीमों को यहाँ तक पहुँचने के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। साथ ही मैं यह भी कहना चाहूँगा कि यहाँ उपस्थित हर खिलाड़ी विजेता है, क्योंकि आपने अपने प्रयास और समर्पण से स्वयं को बेहतर बनाया है। 

मेरे दोस्तों,

क्रिकेट का खेल केवल बल्ले और गेंद के बीच का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह ‘समूह शक्ति’ का एक सुंदर उत्सव है। यह हमें सिखाता है कि जब कई व्यक्ति एक लक्ष्य के लिए एकजुट होकर प्रयास करते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

मैदान पर उतरने के बाद खिलाड़ी की कोई जाति, पंथ या वर्ग नहीं होता; उसकी केवल एक पहचान होती है, उसकी टीम। यही टीम स्पिरिट हमें यह सिखाती है कि जब हम अपने मतभेदों को भुलाकर एक साझा लक्ष्य के लिए कार्य करते हैं, तो सफलता निश्चित हो जाती है। यह भावना केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

एक सच्ची टीम और एक सशक्त खिलाड़ी वही होता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोता, बल्कि और अधिक मजबूत होकर उभरता है। जब कोई खिलाड़ी गलती करता है, जैसे कैच छूट जाना या जल्दी आउट हो जाना, तो पूरी टीम का उसे संभालना और उसका मनोबल बढ़ाना ही वास्तविक एकता और बॉन्डिंग का प्रतीक है। यही भावना हमें अपने जीवन और समाज में भी अपनानी चाहिए, क्योंकि एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।

खेल केवल हार या जीत के बारे में नहीं है; यह जीवन की सबसे सच्ची पाठशाला है। नेल्सन मंडेला जी ने एक बार बहुत ही गहराई से कहा था, “खेल में दुनिया को बदलने की शक्ति है। इसमें प्रेरणा देने की शक्ति है, इसमें लोगों को एकजुट करने की शक्ति है, जैसा कि शायद ही कोई और कर सके। यह युवाओं से उनकी समझ की भाषा में बात करता है। खेल निराशा की जगह आशा का संचार कर सकता है। यह नस्लीय भेदभाव को तोड़ने में सरकारों से भी अधिक शक्तिशाली है। यह हर प्रकार के भेदभाव का डटकर सामना करता है।”

साथियो,

भारत में खेलों का इतिहास केवल कुछ दशकों या सदियों पुराना नहीं है, बल्कि यह हमारी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की जड़ों में बहुत गहराई तक बसा हुआ है। हमारे वेद, उपनिषद और महाकाव्य इस बात के प्रत्यक्ष साक्षी हैं कि प्राचीन भारत में शारीरिक तंदुरूस्ती और खेल-कूद को जीवन का एक अनिवार्य और पवित्र हिस्सा माना जाता था। 

प्राचीन काल के गुरुकुलों में शिक्षा व्यवस्था केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं थी। वहां ‘मल्लयुद्ध’ (कुश्ती), ‘धनुर्विद्या’ (तीरंदाजी), ‘रथ दौड़’, और ‘शस्त्र विद्या’ जैसे खेलों और कलाओं पर विशेष बल दिया जाता था। रामायण में भगवान राम की अद्भुत धनुर्विद्या हो या महाभारत में भीम और दुर्योधन का गदा युद्ध, और अर्जुन का अचूक निशाना, ये सभी हमारे प्राचीन खेल कौशल और शारीरिक क्षमता के सर्वोच्च उदाहरण हैं। 

हमारे ऋषि-मुनियों का स्पष्ट मानना था कि ‘‘शरीरमाद्यम खलु धर्मसाधनम्’’ अर्थात् यह शरीर ही सभी कर्तव्यों और धर्मों के पालन का प्रथम और प्रमुख साधन है। शारीरिक बल के बिना कोई भी महान लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। 

आज, जब हम इस ‘बाबा बालक नाथ क्रिकेट ग्राउंड’ पर अपनी युवा पीढ़ी को पसीना बहाते और खेल भावना का परिचय देते हुए देखते हैं, तो वास्तव में हम अपनी उसी प्राचीन और गौरवशाली खेल परंपरा को फिर से जीवित कर रहे हैं। आज हमें अपनी उस महान खेल संस्कृति से प्रेरणा लेने और अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सख्त आवश्यकता है।

देवियो और सज्जनो,

आज की डिजिटल दुनिया में, जहां हमारे युवा स्मार्टफोन की स्क्रीन तक सीमित होते जा रहे हैं, शारीरिक खेलों के महत्व को कम नहीं आंका जा सकता। एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। 

जब आप क्रिकेट पिच पर कदम रखते हैं, तो आप सिर्फ अपनी मांसपेशियों की कसरत नहीं करते; आप अपने चरित्र का निर्माण करते हैं। जब रन रेट बढ़ता है तो आप दबाव को संभालना सीखते हैं। जब आप क्रीज पर साझेदारी बनाते हैं तो आप टीम वर्क का मूल्य सीखते हैं। जब आप कड़े मुकाबले के बाद प्रतिद्वंद्वी से हाथ मिलाते हैं तो आप सम्मान करना सीखते हैं। खेल हमें सिखाता है कि कैसे गिरना है, कैसे अपनी धूल झाड़नी है और कैसे अधिक दृढ़ संकल्प के साथ फिर से उठना है।

खेल, स्वास्थ्य और राष्ट्र-निर्माण के बीच इस अटूट संबंध को पहचानते हुए, भारत सरकार ने भारत को एक वैश्विक खेल महाशक्ति और एक स्वस्थ राष्ट्र में बदलने के लिए कई दूरदर्शी योजनाएं शुरू की हैं।

खेलो इंडिया योजना जमीनी स्तर पर भारत में खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से एक क्रांतिकारी पहल है। यह ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से छिपी हुई प्रतिभाओं की पहचान करती है और उन्हें शीर्ष स्तर का प्रशिक्षण प्रदान करती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि वित्तीय बाधाएं किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को चमकने से न रोकें।

माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा शुरू किया गया फिट इंडिया मूवमेंट का आंदोलन एक व्यवहार परिवर्तन अभियान है। यह हर नागरिक से शारीरिक गतिविधि और फिटनेस को अपनी दिनचर्या का एक स्वाभाविक हिस्सा बनाने का आग्रह करता है। आज का यह टूर्नामेंट फिट इंडिया की भावना का जीता-जागता उदाहरण है!

बड़े सपने देखने वालों के लिए ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’, योजना भारत के शीर्ष एथलीटों को विशेष सहायता प्रदान करती है, जिससे उन्हें ओलंपिक और पैरालंपिक की तैयारी में मदद मिलती है। यह दर्शाता है कि इस तरह के स्थानीय मैदान से लेकर अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक का सफर पूरी तरह संभव है।

जहां खेल हमें फिट रखते हैं, वहीं सरकार आयुष्मान भारत जैसी अपनी व्यापक स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से यह भी सुनिश्चित कर रही है कि हर नागरिक का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे, जिससे हमारे समुदायों को एक मजबूत सुरक्षा कवच मिल सके।

संदेश साफ है कि देश आपका साथ देने के लिए तैयार है। आपको बस अपने भीतर की आग और कड़ी मेहनत करने की इच्छाशक्ति को जगाए रखना है।

साथियो,

आज इस मंच से मैं एक अत्यंत गंभीर विषय की ओर आप सभी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। हमारा देश ‘युवा भारत’ के रूप में जाना जाता है, लेकिन नशे की समस्या हमारी इस सबसे बड़ी शक्ति को भीतर ही भीतर कमजोर कर रही है। यह केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौती है, जिसका समाधान हम सबको मिलकर करना होगा।

नशा जीवन की उस ‘गुगली’ (क्रिकेट में स्पिनर गेंदबाज़ द्वारा फेंकी जाने वाली एक विशेष और चालाक गेंद) की तरह है, जो न केवल एक खिलाड़ी के करियर को, बल्कि उसके पूरे जीवन और परिवार को भी प्रभावित कर देती है। जिन हाथों में देश का तिरंगा लहराना चाहिए, वे नशे के अंधकार में खो जाएँ, यह किसी भी समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। 

मेरा दृढ़ विश्वास है कि जो युवा खेल के मैदान में पसीना बहाता है, वह कभी नशे की ओर आकर्षित नहीं होता। खेल हमारे शरीर में प्राकृतिक आनंद और ऊर्जा का संचार करते हैं, जो किसी भी कृत्रिम नशे से कहीं अधिक सशक्त और स्थायी होता है।

हमें नशे के विरुद्ध एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा तंत्र भी विकसित करना होगा, जहाँ परिवार, शिक्षक, कोच और समाज के सभी जिम्मेदार नागरिक मिलकर युवाओं का मार्गदर्शन करें। उनकी भूमिका एक ‘अंपायर’ की तरह है, जो सही और गलत के बीच संतुलन बनाए रखते हुए युवाओं को सही दिशा दिखाता है।

मेरे युवा साथियों, 

आप इस देश के भविष्य के ‘ओपनिंग बैट्समैन’ हैं। आपका चरित्र आपकी तैयारी है, आपका अनुशासन आपकी मजबूती है और आपकी ईमानदारी आपकी असली पहचान है। जीवन में हार से कभी निराश न हों, क्योंकि खेल की तरह जीवन में भी हार अंत नहीं होती। वह सीखने और आगे बढ़ने का अवसर होती है। आज जो टीम विजेता बनी है, उसने अपनी मेहनत का फल पाया है, और जो उपविजेता रही है, उसने आने वाली जीत की मजबूत नींव रखी है।

मैं उपविजेता और अन्य सभी प्रतिभागी टीमों को कहना चाहता हूं कि आप अपना सिर ऊंचा रखें। खेल में कोई हारता नहीं है; या तो कोई जीतता है या सीखता है। महान बॉस्केट बॉल खिलाड़ी माइकल जॉर्डन ने एक बार कहा था, ‘‘मैं अपने जीवन में बार-बार विफल हुआ हूं, और इसीलिए मैं सफल हुआ हूं।’’ इस टूर्नामेंट से सबक लें, वापस नेट्स पर जाएं, और अधिक कड़ी मेहनत करें और अगले साल और मजबूत होकर वापस आएं। आपकी वापसी करने की क्षमता ही आपकी सबसे बड़ी ट्रॉफी है।

आइए, आज हम खुद से वादा करें कि हम अपने युवाओं का समर्थन करना, खेलों को बढ़ावा देना और अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जारी रखेंगे। हम एक ऐसे समाज का निर्माण करें जो शारीरिक रूप से मजबूत, मानसिक रूप से लचीला और सामाजिक रूप से एकजुट हो।

मैं इस सफल आयोजन के लिए सभी आयोजकों को हृदय से साधुवाद देता हूँ और आशा करता हूँ कि ऐसे कार्यक्रम हमारे युवाओं को स्वस्थ, सशक्त और नशामुक्त जीवन की ओर निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।

मैं एक बार फिर अखिल भारतीय खटीक पंचायत समिति के अध्यक्ष श्री सोमन सोनकर जी तथा समाज के सभी सदस्यों को इस सराहनीय पहल के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।

“स्वस्थ युवा, सशक्त भारत, नशामुक्त भारत।” यही हमारा संकल्प है।

खेलते रहें, मुस्कुराते रहें और चमकते रहें!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिंद!

जय भारत!