SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF BUILDING A DRUG FREE FUTURE TOGETHER AT CHANDIGARH ON MAY 31, 2026.
- by Admin
- 2026-05-31 12:25
नशामुक्त भविष्य के निर्माण पर एक दिवसीय ‘राष्ट्रीय संगोष्ठी’ पर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधनदिनांकः 31.05.2026, रविवार समयः सुबह 10:30 बजे स्थानः चंडीगढ़
नमस्कार!
आज हम एक ऐसे ज्वलंत एवं महत्वपूर्ण विषय पर विचारविमर्श करने के लिए एकत्रित हुए हैं, जो केवल एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि हमारे भविष्य, हमारी पीढ़ियों और हमारे राष्ट्र की आत्मा से जुड़ा हुआ प्रश्न है, नशा मुक्त समाज का निर्माण जिसके लिए मैं इस सेमिनार के आयोजकों, विशेष तौर से जाट सभा चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. एम.एस. मलिक (डीजीपी रिटायर्ड) का हृदय से धन्यवाद करता हूं।
गर्व का विषय है कि चंडीगढ़ और हरियाणा के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में जाट समाज का योगदान सदैव से अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रहा है। ‘जाट सभा’ इस समूचे क्षेत्र में जाट समाज की एक सिरमौर और सबसे प्रमुख संस्था है। इस संस्था का मुख्य ध्येय केवल अपने समुदाय को एकजुट करना ही नहीं है, बल्कि समाज के सामने आने वाली सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के प्रति गहरी जागरूकता पैदा करना और उनका सशक्त समाधान खोजना भी है।
मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता होती है कि जाट सभा मूल रूप से एक पूर्णतः गैर-राजनीतिक और सामाजिक संस्था है। वर्ष 1993 से निरंतर कार्यरत यह सभा समाज के उत्थान, नव-निर्माण और सामाजिक सुधार के प्रति पूरी तरह से समर्पित है।
यह गौरव की बात है कि इस सभा से जुड़े पदाधिकारी और सदस्य सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में अत्यंत सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। उनकी यह सक्रियता समाज को एक मजबूत नेतृत्व प्रदान करती है और क्षेत्र के विकास को एक नई दिशा देती है।
पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से, जाट सभा ने अपने समुदाय की भलाई और महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकारों को जिस निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया है, वह वास्तव में वंदनीय है। यह संस्था इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब कोई समुदाय एकजुट होकर अपने सामाजिक नव-निर्माण का संकल्प लेता है, चाहे वह शिक्षा का प्रसार हो, कुरीतियों का उन्मूलन हो या युवाओं का मार्गदर्शन, तो वह न केवल अपने समाज को सशक्त करता है, बल्कि पूरे राष्ट्र की नींव को मजबूत बनाता है।
देवियो और सज्जनो,
मैं समझता हूं कि आज का यह सेमिनार राष्ट्र के भविष्य को सुरक्षित करने का एक सामूहिक संकल्प है। क्योंकि जब हम “ड्रग फ्री फ्यूचर” की बात करते हैं, तो वास्तव में हम भारत के युवाओं, परिवारों, सामाजिक मूल्यों और विकसित भारत के भविष्य की रक्षा की बात कर रहे होते हैं।
एक अच्छे नागरिक के नाते हम सबका यह कर्तव्य है कि जब हमारे समाज में नशे की प्रवृत्ति खास तौर से युवाओं में पिछले कुछ वर्षों से निरंतर बढ़ रही है जिसकी वजह से हमारा व्यक्तिगत जीवन, परिवार एवं समाज हर प्रकार से प्रभावित हो रहा है, ऐसे हालात में हम सब आगे आएं और इस बुराई की रोकथाम कैसे हो, उस पर विचार करें तथा प्रभावी कदम किस तरह से उठाएं ताकि व्यक्ति, परिवार और समाज को कैसे बचाया जा सके?
हम भली भांति जानते हैं कि मानव जीवन ईश्वर का अनुपम वरदान है। यह हमें केवल भौतिक सुखों के लिए नहीं, बल्कि आत्मविकास, समाज-निर्माण और उच्च आदर्शों की प्राप्ति के लिए मिला है। किन्तु जब मनुष्य नशे जैसी विनाशकारी प्रवृत्तियों में फंस जाता है तो वह इस अनमोल जीवन को स्वयं ही अंधकार में धकेल देता है। आज नशा केवल एक व्यक्तिगत कमजोरी नहीं बल्कि सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक पतन का संकेत बन चुका है।
हमें यह समझना आवश्यक है कि लोग नशे की ओर किन कारणों से आकर्षित होते हैं। गलत संगति और सामाजिक दबाव, तनाव और मानसिक परेशानी, बेरोजगारी से उत्पन्न निराशा तथा जिज्ञासा और दिखावे की प्रवृत्ति, ये सभी प्रमुख कारण हैं।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि नशा केवल आदत नहीं बल्कि मस्तिष्क की बीमारी है। नशा करने पर मस्तिष्क में ऐसे रसायन जैसे डोपामिन नामक रसायन अत्यधिक मात्रा में निकलता है, जिससे अस्थायी सुख का अनुभव होता है। धीरे-धीरे मस्तिष्क उसी सुख का आदी हो जाता है और व्यक्ति बार-बार नशा करने लगता है। शोध बताते हैं कि लगभग 70 फीसदी लोग तनाव या अवसाद से बचने के लिए नशे की शुरुआत करते हैं। किशोरावस्था में मस्तिष्क पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए 15 से 24 वर्ष के युवा अधिक संवेदनशील होते हैं। एक बार लत लगने पर निर्णय लेने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है।
नशे के पीछे केवल जिज्ञासा या संगति ही नहीं बल्कि मानसिक शून्यता, उद्देश्यहीनता और आत्मिक कमजोरी भी होती है। गौतम बुद्ध ने कहा था, ‘‘मन ही सब कुछ है, जैसा तुम सोचते हो, वैसे बन जाते हो।’’ यदि मन को सही दिशा न मिले, तो वह भटक जाता है।
साथियो,
नशे के परिणाम अत्यंत गंभीर और व्यापक होते हैं। यह शरीर के प्रमुख अंगों जैसे लीवर, फेफड़े, हृदय, मस्तिष्क आदि को क्षति पहुँचाकर स्वास्थ्य को कमजोर करता है। मानसिक रूप से व्यक्ति अवसाद, चिंता, आक्रामकता और आत्मघाती प्रवृत्तियों का शिकार हो जाता है। इसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार में तनाव, रिश्तों में दरार और आर्थिक संकट को जन्म देता है। साथ ही, समाज में चोरी, हिंसा और अन्य अपराधों की वृद्धि होकर सामाजिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है। हमारी युवा शक्ति यदि नशे की गिरफ्त में आ जाए तो यह हमारे विकास की गति को बाधित कर सकती है।
भारतीय संस्कृति के महान ग्रंथ हमें आत्मसंयम, विवेक और कर्तव्य का मार्ग दिखाते हैं। भगवद गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि विषयों के चिंतन से आसक्ति उत्पन्न होती है, आसक्ति से कामना और कामना से क्रोध उत्पन्न होता है। क्रोध से मनुष्य की बुद्धि भ्रमित हो जाती है और भ्रम से स्मृति (सही ज्ञान) का नाश हो जाता है, स्मृति के नष्ट होने पर बुद्धि (विवेक) समाप्त होता है और बुद्धि के नष्ट हो जाने पर मनुष्य का पतन होता है। नशा इसी आसक्ति का चरम रूप है, जहां व्यक्ति अपनी चेतना खो बैठता है और विवेक नष्ट हो जाता है।
महान विचारक स्वामी विवेकानंद ने कहा था, ‘‘जिस चीज से तुम्हारी शक्ति घटे, उसे विष समझकर त्याग दो।’’ नशा निश्चित रूप से वही विष है जो व्यक्ति की शक्ति, आत्मविश्वास और भविष्य को समाप्त कर देता है।
देवियो और सज्जनो,
भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘विकसित भारत 2047’ का एक महान और स्पष्ट विजन देश के सामने रखा है। आजादी के शताब्दी वर्ष तक भारत को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने का यह सपना तभी साकार हो सकता है, जब हमारी युवा पीढ़ी शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सुदृढ़ और वैचारिक रूप से स्पष्ट हो।
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ‘‘एक बीमार और नशे में डूबी हुई युवा पीढ़ी के कंधों पर एक सशक्त राष्ट्र की इमारत नहीं खड़ी की जा सकती।’’ नशे का व्यापार केवल हमारे युवाओं की नसों में जहर नहीं घोल रहा है, बल्कि यह हमारे देश की अर्थव्यवस्था को खोखला कर रहा है और ‘नार्को-टेररिज्म’ के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी सीधा खतरा पैदा कर रहा है।
स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, “युवा शक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है।” इसलिए यदि हमें राष्ट्र को मजबूत बनाना है, तो हमें युवाओं को नशे से दूर रखना होगा और उन्हें सकारात्मक दिशा देनी होगी।
मित्रो,
यदि हमें अपने महान राष्ट्र को नशा मुक्त बनाना है तो इसके लिए हमें सामूहिक प्रयास करने होंगे।
हमें स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलानी होगी तथा साथ-साथ युवाओं को जरूरी तौर पर किसी न किसी खेल के साथ जोड़ना होगा ताकि वे अपना शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर ढंग से कर सकें।
परिवारों की भूमिका की बात करें तो हर माता-पिता को अपने बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए और उनके व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। युवाओं को नैतिक मूल्यों और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करना होगा।
जो लोग नशे के शिकार हो चुके हैं, उनके लिए बेहतर उपचार और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध करानी होगी तथा उनकी लगातार निगरानी करनी होगी।
इसके अलावा, नशे के अवैध व्यापार पर कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई आवश्यक है। सभी सरकारों को, फिर चाहे केंद्र की सरकार हो या राज्य की, बेहतर तालमेल से नशे की सप्लाई एवं तस्करी पर रोक लगाने के लिए एक प्रभावी योजना पर निरंतर काम करना होगा।
साथ ही, युवाओं को रोजगार और कौशल विकास के अवसर प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी युवा बेरोजगार न रहे अर्थात् हर युवा को योग्यता अनुसार किसी न किसी रोजगार के साथ जोड़ना होगा।
साथियो,
नशे के खिलाफ इस लड़ाई में केंद्र और राज्य सरकारें पूरी ताकत से काम कर रही हैं। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 2020 से ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के रूप में जन-आंदोलन चलाया जा रहा है। इसके तहत देशभर में जन-जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षण संस्थानों में कार्यशालाएँ और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
इसके साथ ही, नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर के माध्यम से पुलिस, प्रशासन और अन्य एजेंसियाँ मिलकर मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई कर रही हैं।
नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को उपचार, परामर्श और पुनर्वास की सुविधाएँ प्रदान कर उन्हें पुनः समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देशभर में फिट इंडिया मूवमेंट, खेलो इंडिया, योग अभियान और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। महात्मा गांधी का कथन आज भी प्रासैंगिक है, ‘‘स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन और स्वस्थ समाज का निर्माण होता है।’’
मैंने स्वयं इस गंभीर सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने को केवल अपना संवैधानिक दायित्व ही नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत मिशन माना है। इसी संकल्प के साथ, मैंने पंजाब और चंडीगढ़ में जमीनी स्तर पर विभिन्न नशा-विरोधी अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लिया है।
चाहे सीमावर्ती जिलों का दौरा कर वहां की जमीनी चुनौतियों का सीधा समाधान करना हो, जनता के बीच जाकर जागरूकता जगाने के लिए ‘पदयात्राओं’ में कदम से कदम मिलाकर चलना हो, या समाज को एकजुट करने के लिए ‘सर्व धर्म सम्मेलनों’ का आयोजन करना हो, मैंने हर मोर्चे पर अपनी जिम्मेदारी निभाने का निरंतर प्रयास किया है।
इसके अतिरिक्त, हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रहे, इसके लिए मैंने समय-समय पर राज्य के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के मुखियों के साथ बैठकें भी की हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारे विद्या के मंदिर पूरी तरह से ‘नशामुक्त’ और सुरक्षित रहें।
साथियो,
चंडीगढ़ शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और संस्कृति के क्षेत्र में देश का अग्रणी शहर है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा यह “सिटी ब्यूटीफुल” केवल भौतिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक रूप से भी स्वस्थ और सुरक्षित बने।
मुझे प्रसन्नता है कि चंडीगढ़ प्रशासन नशा उन्मूलन, जनजागरूकता, स्कूल एवं कॉलेज आधारित कार्यक्रमों, खेल गतिविधियों तथा पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से निरंतर प्रयास कर रहा है। पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा संस्थान और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।
लेकिन यह लड़ाई केवल सरकार या प्रशासन की नहीं है। यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
यदि एक शिक्षक एक विद्यार्थी को बचा ले, एक परिवार अपने बच्चे को सही दिशा दे दे, एक मित्र अपने साथी को नशे से दूर कर दे, तो समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है।
मेरे युवा साथियो,
आप स्वामी विवेकानंद, भगत सिंह और कलाम साहब के देश के वासी हैं। आपके भीतर असीम संभावनाएं और ब्रह्मांड की ऊर्जा छिपी हुई है। किसी ने बहुत खूब कहा है, ‘‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’’
नशा कोई ‘स्टाइल स्टेटमेंट’ नहीं है; यह एक मानसिक कमजोरी है, जो आपके सपनों, आपके परिवार की उम्मीदों और आपके भविष्य को राख कर देती है। जीवन में चुनौतियां और असफलताएं आएंगी, लेकिन उनसे भागने के लिए नशे का सहारा लेना कायरता है। असली साहस समस्याओं का सामना करने में है।
अपनी ऊर्जा को खेल के मैदानों में झोंकें, कला और साहित्य में अपनी पहचान बनाएं, इनोवेशन करें और स्टार्टअप्स शुरू करें। याद रखें, ‘‘नशे को कहें ना, और जिंदगी को कहें हाँ’’।
आप ही इस देश का वर्तमान और भविष्य हैं। भारत की युवा शक्ति यदि संकल्प कर ले तो कोई भी परिवर्तन असंभव नहीं।
आइए, हम सब मिलकर आज यह संकल्प लें कि हम नशे से दूर रहेंगे, दूसरों को भी प्रेरित करेंगे और एक स्वस्थ, जागरूक तथा सशक्त समाज का निर्माण करेंगे। जब व्यक्ति बदलता है तो परिवार बदलता है। परिवार बदलता है, तो समाज बदलता है और समाज बदलता है, तो राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है।
अंत में मैं एक बार फिर सभी वक्ताओं, पैनेलिस्ट और आप सभी का जो इस सेमिनार में शामिल हुए, खास तौर से डॉ. एमएस मलिक और उनकी पूरी टीम का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने समाज के इस ज्वलंत मुद्दे पर चर्चा और समाधान के लिए विचार मंथन एवं जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन करवाया।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आज का यह संवाद समाज में सकारात्मक चेतना उत्पन्न करेगा और “ड्रग फ्री फ्यूचर” के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिंद!
जय भारत!