SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FELICITATION CEREMONY OF THE STUDENTS OF PPS, ISC-2026 AND OTHERS AT PUNJAB LOK BHAVAN ON MAY 30,2026.
- by Admin
- 2026-05-30 15:45
उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले विद्यार्थियों के सम्मान समारोह पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन दिनांकः 30.05.2026, शनिवार समयः सुबह 11:00 बजे स्थानः लोक भवन पंजाब
नमस्कार!
आज इस प्रतिष्ठित सभा के समक्ष उपस्थित होकर मुझे अत्यंत गर्व और प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है, जहाँ हम आई.एस.सी. (Indian School Certificate) और आई.सी.एस.ई. (Indian Certificate of Secondary Education) बैच के उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले लगभग 53 विद्यार्थियों को सम्मानित कर रहे हैं और पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा की गौरवशाली यात्रा के एक और स्वर्णिम अध्याय का उत्सव मना रहे हैं।
मैं आज यहाँ सम्मानित होने वाले सभी होनहार टॉपर्स को, उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी ओर से हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनाएँ देता हूँ। आज का दिन केवल परीक्षा परिणामों के बारे में नहीं है; यह दृढ़ता, अनुशासन, उत्कृष्टता और उस अडिग भावना के बारे में है जो हर नाभाइट की पहचान है।
हमें गर्व है कि काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्ज़ामिनेशन्स (CISCE), नई दिल्ली द्वारा घोषित परिणामों ने एक बार फिर हमारे संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा की पुष्टि की है। हमारे विद्यार्थियों ने आई.सी.एस.ई. और आई.एस.सी. दोनों परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन किया है, और ऐसे मानक स्थापित किए हैं जो सर्वोच्च प्रशंसा के योग्य हैं।
आईसीएसई में, तनमय सिंगल ने 97.4 प्रतिशत के उत्कृष्ट स्कोर के साथ स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त किया, उसके निकट जशनप्रीत कौर 97.2 प्रतिशत के साथ रहीं, जबकि तेजस्वीर बड्याल और हरवारिस सिंह ने 96.2 प्रतिशत के साथ संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त किया। 103 विद्यार्थियों में से 68 विद्यार्थियों ने डिस्टिंक्शन के साथ सफलता प्राप्त की, और बैच का औसत 80.3 प्रतिशत रहा। विशेष रूप से हृदयस्पर्शी बात यह है कि 22 विद्यार्थियों ने पंजाबी, जीवविज्ञान, कंप्यूटर एप्लीकेशन्स और भूगोल जैसे विषयों में 100 अंक प्राप्त किए।
आईएससी के परिणाम और भी असाधारण हैं और विशेष प्रशंसा के पात्र हैं। अनाहतजोत कौर हरी ने विज्ञान संकाय में 99.75 प्रतिशत (लगभग 99.8 प्रतिशत राउंड ऑफ) प्राप्त कर विद्यालय को अनुपम गौरव प्रदान किया। अन्या बाथ, आकाशवीर सिंह, इशमीत कौर और नमन गोयल ने 99 प्रतिशत के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जबकि मंतेश्वर सिंह रानू ने 98.5 प्रतिशत प्राप्त किए।
सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि आईएससी परीक्षा में शामिल हुए सभी 99 विद्यार्थी डिस्टिंक्शन के साथ उत्तीर्ण हुए। 91 प्रतिशत के प्रभावशाली बैच औसत के साथ विद्यालय ने उत्कृष्ट शैक्षणिक मानकों का परिचय दिया है। यह परिणाम पिछले वर्ष की तुलना में 7 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है, जो विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, शिक्षकों के समर्पित मार्गदर्शन तथा विद्यालय की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा का सशक्त प्रमाण है।
इसके अतिरिक्त, 60 प्रतिशत विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए और 34 विद्यार्थियों ने रसायन विज्ञान, राजनीति विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, पंजाबी और शारीरिक शिक्षा सहित विषयों में पूर्ण अंक प्राप्त किए। ये उपलब्धियाँ वास्तव में असाधारण हैं।
प्रिय विद्यार्थियों,
उत्कृष्टता कभी संयोग नहीं होती। यह कठिन परिश्रम, अनुशासन, निरंतरता और ऊँचा लक्ष्य रखने के साहस का परिणाम होती है। आपने पीपीएस नाभा की गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हैं।
हालाँकि, पीपीएस की सफलता केवल शैक्षणिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। विद्यालय खेलों, घुड़सवारी उत्कृष्टता, नेतृत्व और राष्ट्रीय सेवा के क्षेत्र में भी निरंतर चमक रहा है। हमारे बालकों ने ऑल इंडिया IPSC हॉकी बॉयज़ (अंडर-14) चैंपियनशिप 2026 में दून स्कूल को रोमांचक फाइनल में हराकर चैंपियन का खिताब जीता। हमने ऑल इंडिया IPSC हॉकी बॉयज़ (अंडर-19) चैंपियनशिप का खिताब भी जीता, जबकि हमारी बालिका हॉकी टीम ने राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक प्राप्त किया।
हमारे अश्वारोहण दल ने दिल्ली हॉर्स शो में असाधारण प्रदर्शन करते हुए 77 पदक जीते, जिनमें 27 स्वर्ण पदक शामिल हैं, और हम ऑल इंडिया IPSC एश्वारोहण चैंपियनशिप के विजेता बने। IPSC और CISCE प्रतियोगिताओं में पीपीएस के विद्यार्थियों ने कुल मिलाकर 350 से अधिक पदक प्राप्त किए हैं, जबकि 50 से अधिक विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्कूल खेलों में विद्यालय का प्रतिनिधित्व किया है। ये उपलब्धियाँ उस समग्र विकास को दर्शाती हैं जिसके लिए पीपीएस जाना जाता है।
हमें अपने पूर्व छात्रों पर भी अत्यंत गर्व है, जो निरंतर संस्थान का गौरव बढ़ा रहे हैं। सुश्री अनन्या शर्मा ने यू.पी.एस.सी. सिविल सेवा परीक्षा 2025 में अखिल भारतीय रैंक 13 प्राप्त की। सुखप्रीत सिंह एनडीए में शामिल हुए हैं, रजत शर्मा ओ.टी.ए. गया में कमीशन प्राप्त कर चुके हैं, और नैना जिंदल न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त हुई हैं। एक अन्य उत्कृष्ट उपलब्धि प्राप्तकर्ता, अनाहत कौर (‘ए’ लेवल, कैम्ब्रिज) ने ए.एस. लेवल बिज़नेस में भारत में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर प्रतिष्ठित “आउटस्टैंडिंग कैम्ब्रिज लर्नर अवॉर्ड” प्राप्त किया।
सृजना संधु ने 10 मीटर पिस्टल स्पर्धा की यूथ श्रेणी में टीम इंडिया ट्रायल्स के लिए क्वालीफाई किया था। अमनप्रीत कौर देओ ने गुरु नानक देव मेडिकल कॉलेज, अमृतसर में एमबीबीएस में प्रवेश प्राप्त किया है और सोहम सेन ने आईआईटी जोधपुर में प्रवेश हासिल कर विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है।
ये उपलब्धियाँ हमें याद दिलाती हैं कि पीपीएस नाभा केवल सफल विद्यार्थी ही नहीं बना रहा है; यह भविष्य के नेता, प्रशासक, खिलाड़ी, अधिकारी, विद्वान और चरित्रवान नागरिकों का निर्माण कर रहा है।
साथियो,
जब हम द पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा का नाम लेते हैं, तो हमारे मन में अनायास ही अनुशासन, नेतृत्व और अकादमिक उत्कृष्टता की एक भव्य तस्वीर उभर आती है। इस प्रतिष्ठित स्कूल की स्थापना 1960 में हुई थी, जिसका उद्देश्य सेवानिवृत्त सैनिकों, रक्षा बलों के कर्मियों और नागरिकों के योग्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना था। इसकी स्थापना में सरदार प्रताप सिंह कैरों की प्रेरणा थी, जो तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री थे। राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 11 अप्रैल, 1961 को औपचारिक रूप से इसका उद्घाटन किया।
मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि स्कूल का बुनियादी ढांचा 105 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
स्कूल का आदर्श वाक्य ‘‘आगे और ऊपर’’ (Onward and Upward) है, यह वाक्य हमें प्रेरित करता है कि हम निरंतर नई ऊँचाइयों को छूने का संकल्प लें, और हर कदम पर अपने मानकों को ऊँचा उठाते रहें। मुझे पूरा विश्वास है कि इस आदर्श वाक्य को अपनाते हुए यह स्कूल और छात्र नए शिखरों को छुएंगे और एक सशक्त, विकसित भारत की दिशा में योगदान देंगे।
यह गर्व का विषय है कि स्कूल के कई पूर्व छात्र सशस्त्र बलों में उच्च पदों पर पहुँचे हैं, जैसे जनरल बिक्रम सिंह, पूर्व थल सेनाध्यक्ष, और वाइस एडमिरल सतीश सोनी। इसके अलावा, कई पूर्व छात्र वर्तमान में लेफ्टिनेंट जनरल पद पर कार्यरत हैं। रोल ऑफ ऑनर प्राप्त प्रमुख पूर्व छात्रों में लेफ्टिनेंट जनरल ओ पी नंदराजोग, वाइस एडमिरल जे एस बेदी, और हीरो मोटोकॉर्प के अध्यक्ष एवं सीईओ डॉ. पवन कांत मुंजाल शामिल हैं। अन्य क्षेत्रों में भी स्कूल के पूर्व छात्र जैसे राजनीति, खेल, ज्यूडिशियल और सिविल सर्विसेज में उत्कृष्ट पदों पर रहे है।
प्रारंभ में इस संस्थान का नाम ‘सैनिक स्कूल’ था, क्योंकि इसका उद्देश्य खड़कवासला की राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के लिए एक प्रदायक विद्यालय बनना था। आज भी यहाँ एन.सी.सी के तीनों विंग्स - सेना, नौसेना और वायुसेना के साथ गर्ल्स एनसीसी भी उपलब्ध है, जो छात्रों को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है।
इस विद्यालय ने उत्तरी भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करके एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने सार्वजनिक जीवन के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट व्यक्तित्वों को तैयार किया है। विद्यालय ने बदलते समय के साथ शिक्षण पद्धतियों को अपनाया है और उत्कृष्टता का प्रतीक बन गया है।
पीपीएस पूरी तरह से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एकीकृत विद्यालय है, जो विद्यार्थियों को भविष्य के नेता के रूप में रूपांतरित कर रहा है, उन्हें ज्ञान, जीवन कौशल, मूल्य और दृष्टिकोण से सुसज्जित कर रहा है। शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन, आकलन और शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के परिवर्तन पर बहुत अधिक बल दिया जा रहा है।
देवियो और सज्जनो,
आज मेरे सामने बैठे विद्यार्थियों से मैं यह कहना चाहता हूँ कि आप अपनी उपलब्धियों का विनम्रता के साथ उत्सव मनाएँ, लेकिन कभी आत्मसंतुष्ट न हों। महानता का मूल गुण केवल किसी मानक तक पहुँचना नहीं, बल्कि उससे आगे निरंतर बढ़ते रहना है। मैं पीपीएस के वर्तमान और भावी बैचों से आग्रह करता हूँ कि बड़े सपने देखें, अधिक मेहनत करें और उत्कृष्टता के और भी ऊँचे मानक स्थापित करें। दुनिया उन्हीं की है जो आकांक्षा और परिश्रम करने का साहस रखते हैं।
आज का युग अत्यंत प्रतिस्पर्धी और तेजी से बदलती तकनीकों का युग है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, डेटा साइंस, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में असीम संभावनाएँ हैं। इसलिए आपको केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि निरंतर सीखने की आदत विकसित करनी चाहिए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने पर बल देती है। आज आवश्यकता केवल डिग्री की नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल और मानवीय मूल्यों की है।
मैं विद्यार्थियों से कहना चाहता हूँ, असफलता से कभी मत डरिए। यदि आप गिरते हैं, तो दोबारा उठिए। यदि रास्ता कठिन लगे, तो अपने संकल्प को और मजबूत कीजिए। याद रखिए, “कठिन परिश्रम वह चाबी है जो बंद किस्मत के दरवाजे भी खोल देती है।”
प्रिय विद्यार्थियों,
सोशल मीडिया और डिजिटल युग में ध्यान भटकने की संभावनाएँ बहुत अधिक हैं। इसलिए समय प्रबंधन, मानसिक संतुलन और आत्मअनुशासन अत्यंत आवश्यक हैं। अपने स्वास्थ्य, चरित्र और मूल्यों का सदैव ध्यान रखें।
सफलता केवल करियर बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जीवन में विनम्रता, संवेदनशीलता और मानवता भी उतनी ही आवश्यक हैं। जितना ऊँचा उठें, उतना ही अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े रहें।
श्री गुरु नानक देव जी ने कहा था, “विद्या वीचारी तां परउपकारी।” अर्थात् ज्ञान वही सार्थक है जो समाज और मानवता के कल्याण में उपयोग हो।
प्रिय विद्यार्थियों,
आप भारत के भविष्य हैं। विकसित भारत का सपना आपके ज्ञान, कौशल, नवाचार और चरित्र के माध्यम से ही साकार होगा। भारत आज विश्व मंच पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाला समय भारत का समय माना जा रहा है। ऐसे में आप सभी युवाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
मैं आपसे अपेक्षा करता हूँ कि आप अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए भी करेंगे। अपने जीवन का लक्ष्य केवल सफल व्यक्ति बनना नहीं, बल्कि ऐसा नागरिक बनना होना चाहिए जो देश, समाज और मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।
लेकिन याद रखिए, राष्ट्र निर्माण के इस महान लक्ष्य को तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब हमारी युवा पीढ़ी शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ हो। आज ‘नशा’ हमारे समाज और युवाओं के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। मेरी आपसे यह विशेष अपील है कि नशे जैसी जानलेवा बुराई से स्वयं को और अपने साथियों को हमेशा दूर रखें। नशा न केवल आपके सुनहरे सपनों को राख कर देता है, बल्कि यह आपके परिवार और देश की उम्मीदों को भी चकनाचूर कर देता है। अपनी इस असीम युवा ऊर्जा को खेलकूद, रचनात्मकता और राष्ट्र-निर्माण में लगाएँ। हमेशा दृढ़ संकल्प लें, ‘नशे को ना कहें, और जीवन को हाँ कहें’ (Say No to Drugs, Yes to Life)।
देवियो और सज्जनो,
आज के इस सम्मान समारोह में, मैं उन शिल्पकारों का विशेष रूप से वंदन करना चाहता हूँ जिन्होंने इन कच्ची मिट्टियों को तराश कर शानदार मूर्तियों में बदल दिया है, हमारे शिक्षक और अभिभावक।
आचार्य चाणक्य ने कहा था, ‘‘शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद में पलते हैं।’’
पी.पी.एस. नाभा के सभी शिक्षकों को मैं नमन करता हूँ। आपने इन बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया, बल्कि आपने इन्हें सोचना सिखाया है। आज के डिजिटल भटकाव के दौर में, बच्चों का ध्यान केंद्रित रखना और उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाना आपकी महान तपस्या का फल है।
मैं यहाँ उपस्थित सभी अभिभावकों को भी बधाई देता हूँ। आपके त्याग, आपके द्वारा किए गए संघर्ष और बच्चों पर आपके अटूट विश्वास ने ही आज इन्हें इस मुकाम पर पहुँचाया है। आज जब आपका बच्चा मंच पर सम्मानित हो रहा है, तो मैं जानता हूँ कि यह आपके जीवन के सबसे सुखद और भावुक क्षणों में से एक है।
मैं हमारे सम्मानित हेडमास्टर डॉ. डी. सी. शर्मा को भी हार्दिक बधाई देता हूँ, जिनके दूरदर्शी और प्रेरणादायक नेतृत्व ने इन उल्लेखनीय उपलब्धियों में मार्गदर्शक भूमिका निभाई है। उनके गतिशील नेतृत्व में द पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा ने न केवल अपनी शैक्षणिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि खेल, नेतृत्व और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
उनके नेतृत्व में स्कूल ने एजुकेशन वर्ल्ड स्कूल रैंकिंग में राष्ट्रीय स्तर पर रैंक 9 से बढ़कर अब राष्ट्रीय रैंक चार तथा राज्य रैंक 1 प्राप्त की है।
युवा मनों को बड़े सपने देखने और समर्पण के साथ उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने की उनकी क्षमता ने संस्थान में उपलब्धि और उद्देश्य की संस्कृति विकसित की है। द पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा भविष्य में और भी ऊँचाइयों को छुए और आने वाली पीढ़ियों के लिए उत्कृष्टता का प्रकाशस्तंभ बना रहे।
मैं एक बार फिर द पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा के प्रबंधन, प्रिंसिपल महोदय, सभी शिक्षकों और आज के इन सभी चमकते हुए सितारों को हार्दिक बधाई देता हूँ। आप इसी तरह आसमान की बुलंदियों को छूते रहें और देश का नाम रोशन करते रहें।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिंद!जय भारत!