SPEECH OF PUNJAB GOVERNOR AND ADMINISTRATOR, UT CHANDIGARH, SHRI GULAB CHAND KATARIA ON THE OCCASION OF FOUNDATION STONE LAYING OF THE BALTANA RAILWAY UNDERPASS AT CHANDIGARH ON MAY 20, 2026.

‘बलटाना रेलवे अंडरपास’ के शिलान्यास के अवसर पर

राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी का संबोधन

दिनांकः 20.05.2026, बुधवारसमयः सुबह 10:30 बजेस्थानः बलटाना

    

नमस्कार!

आज का यह दिन बलटाना (अंबाला-चंडीगढ़ के मध्य) और पूरे जीरकपुर क्षेत्र के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। आज जिस बलटाना रेलवे अंडरपास का शिलान्यास हुआ है, यह केवल कंक्रीट और लोहे की एक संरचना मात्र नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र के हजारों नागरिकों को रोज-रोज के ट्रैफिक जाम, मानसिक तनाव और समय की बर्बादी से मुक्ति दिलाने वाला एक ‘समृद्धि का मार्ग’ है।

मैं इस बेहद महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित विकास कार्य की शुरुआत के लिए उत्तर रेलवे, स्थानीय प्रशासन और विशेष रूप से यहाँ की जनता को हृदय से बधाई देता हूँ, जिन्होंने लंबे समय तक धैर्य बनाए रखा। आज इस आधारशिला को रखकर मुझे अत्यंत आत्मिक संतोष और प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है।

मुझे ज्ञात हुआ है कि लगभग 12 करोड़ 81 लाख रूपये की लागत से बनने वाले इस अंडरपास के निर्माण कार्य को एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस अंडरपास के निर्माण से रायपुर कलां, विकास नगर, बलटाना, जीरकपुर, ढकोली, पंचकूला, मौलीजागरां सहित कई इलाकों को ट्रैफिक जाम से बहुत राहत मिलेगी।

देवियो और सज्जनो,

जब हम आज इस आधुनिक अंडरपास और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करते हैं, तो हमें मानव सभ्यता और सार्वजनिक परिवहन के इतिहास पर भी एक नज़र डालनी चाहिए।

सार्वजनिक परिवहन का इतिहास मानव विकास की कहानी है। पहिए के आविष्कार से शुरू हुआ यह सफर, बैलगाड़ियों और घोड़ागाड़ियों से होता हुआ जब 19वीं सदी में भाप के इंजन तक पहुँचा, तो उसने दुनिया की रफ्तार बदल दी।

भारत में 16 अप्रैल 1853 को जब बोरीबंदर से ठाणे के बीच (34 किलोमीटर) पहली यात्री ट्रेन चली, तो उसने एक बिखरते हुए राष्ट्र को भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में पिरोने का काम किया। सार्वजनिक परिवहन ने दुनिया भर में आर्थिक क्रांतियों को जन्म दिया है, और आज भारतीय रेल दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सुलभ सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क बनकर उभरी है।

देवियो और सज्जनो,

आज भारतीय रेल विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है। प्रतिदिन करोड़ों यात्री रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं। भारतीय रेल देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग, कृषि, पर्यटन और राष्ट्रीय एकता की धुरी है। यह केवल लोगों को नहीं जोड़ती, बल्कि दिलों को भी जोड़ती है।

प्रारंभिक भाप इंजनों से विकसित होकर भारतीय रेल ने मार्च 2026 तक अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण कर लिया है। आज भारतीय रेल प्रतिदिन लगभग 25,000 ट्रेनों का संचालन करते हुए देशभर में विश्वसनीय और सशक्त संपर्क सुनिश्चित कर रही है। अपने प्रारंभिक वर्षों में जहाँ रेल सेवाएँ केवल कुछ सौ यात्रियों तक सीमित थीं, वहीं वर्ष 2025-26 में भारतीय रेल ने लगभग 741 करोड़ यात्रियों को परिवहन सेवा प्रदान कर एक नई उपलब्धि स्थापित की है।

आज देश में माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारतीय रेल का कायाकल्प हो रहा है। रेलवे अब केवल ‘यातायात का साधन’ नहीं रही, बल्कि यह आधुनिक भारत की पहचान बन चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ने जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं, वे अद्वितीय हैं।

आज देश के हर कोने को सेमी-हाई स्पीड ‘वंदे भारत’ ट्रेनों से जोड़ा जा रहा है, जो विश्वस्तरीय गति और सुविधाएं प्रदान कर रही हैं।

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत ‘‘विरासत भी विकास भी’’ के सिद्धांत के साथ देश के लगभग 1300 से अधिक रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिसमें हमारे पंजाब के भी कई प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। इन्हें आधुनिक हवाई अड्डों की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पुनर्विकसित स्टेशन भवनों के डिज़ाइन स्थानीय संस्कृति, विरासत और वास्तुकला से प्रेरित हैं।

भारतीय रेल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाते हुए अपने पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य के बेहद करीब है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आई है।

ट्रेनों की टक्कर को रोकने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली को तेजी से लागू किया जा रहा है, जो यात्रियों की सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ पहल के तहत रेलवे स्टेशनों पर प्रदर्शन एवं बिक्री केंद्रों के माध्यम से भारत के स्थानीय, स्वदेशी और पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत जनजातीय कलाकृतियाँ, हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पाद, चिकनकारी, ज़री-ज़रदोज़ी, मसाले, चाय, कॉफी तथा स्थानीय खाद्य उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को सशक्त बनाते हुए स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को नया अवसर प्रदान कर रही है।

‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ भारतीय रेल की माल ढुलाई व्यवस्था में एक क्रांतिकारी पहल है। इस परियोजना के माध्यम से मालगाड़ियों की औसत गति को लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 70 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे उद्योग, व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को नई गति मिल रही है।

कश्मीर को वर्षभर शेष भारत से निर्बाध रूप से जोड़ने वाली उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और संकल्प का अद्भुत उदाहरण है। इस परियोजना के अंतर्गत निर्मित चिनाब ब्रिज आधुनिक भारत की तकनीकी दक्षता, साहस और नवाचार का प्रतीक बनकर उभरा है, जिसे विश्व के सबसे ऊँचे रेलवे पुलों में गिना जाता है।

भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर तीव्र गति से क्रियान्वित की जा रही है। जापान की अत्याधुनिक ‘शिंकानसेन’ तकनीक पर आधारित यह परियोजना देश में गति, सुरक्षा, समयबद्धता और आधुनिक रेल परिवहन का नया मानक स्थापित करेगी।

केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेल के लिए 2 लाख 78 हजार करोड़ का रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय प्रावधान किया गया है, जो रेलवे के इतिहास का सर्वाधिक आवंटन है। इसी दृष्टि के तहत सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोरों की घोषणा की गई है, जिनका उद्देश्य प्रमुख शहरों को तीव्र और आधुनिक रेल संपर्क से जोड़कर आर्थिक गतिविधियों एवं क्षेत्रीय विकास को नई गति देना है। प्रस्तावित मार्गों में मुंबई-पुणे, दिल्ली-वाराणसी तथा हैदराबाद-बेंगलुरु जैसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर शामिल हैं।

आज जब हम रेलवे के डिब्बों, इंजनों और पटरियों को देखते हैं, तो उन पर गर्व से लिखा होता है, ‘मेड इन इंडिया’।

साथियो, 

हम सभी जानते हैं कि बुनियादी ढांचा वह मजबूत नींव है, जिस पर आधुनिक राष्ट्रों का निर्माण होता है। हमारे रेलवे और राजमार्ग केवल परिवहन के साधन मात्र नहीं हैं, बल्कि ये आर्थिक विस्तार, सामाजिक समावेश और राष्ट्रीय अखंडता के सशक्त माध्यम हैं। जब कोई ट्रेन किसी सुदूर गांव तक पहुँचती है या कोई राजमार्ग किसी सुदूर क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ता है, तो वह उस क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए असीम संभावनाओं और अवसरों के द्वार खोल देता है।

आज मुझे यह कहते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है कि हाल के वर्षों में भारत के सड़क बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व और तीव्र विस्तार देखा गया है। हमारे नए राजमार्ग, एक्सप्रेस-वे और इकोनॉमिक कॉरिडोर्स आज देश में गतिशीलता और लॉजिस्टिक्स की परिभाषा को नए सिरे से तय कर रहे हैं। ये सभी प्रयास ‘विकसित भारत’ की हमारी यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य स्तंभ हैं।

एक मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करता है, बल्कि व्यापार को गति देता है, बड़े निवेश को आकर्षित करता है और देश की उत्पादकता को बढ़ाता है। यह अलग-अलग क्षेत्रों और लोगों को एक-दूसरे के करीब लाकर हमारी राष्ट्रीय एकता को और अधिक सुदृढ़ करता है। 

लेकिन मेरे इंजीनियर और प्रशासनिक साथियों, हमें हमेशा एक बात याद रखनी होगी कि केवल कागजों पर दर्ज आंकड़े कभी सफलता की असली परिभाषा नहीं तय कर सकते। आपके द्वारा किए गए कार्य की सच्ची सफलता इस बात में निहित है कि उससे हमारे आम नागरिकों और समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में कितना सकारात्मक सुधार आया है और उनका जीवन कितना सुगम बना है।

देवियो और सज्जनो,

भारतीय रेल आज ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का सबसे बड़ा रोल मॉडल है। हमारी वंदे भारत ट्रेनें पूरी तरह से भारत में, भारतीय इंजीनियरों द्वारा और भारत के पैसे से बनाई गई हैं। आज हमारा देश न केवल अपने लिए आधुनिक इंजनों का निर्माण कर रहा है, बल्कि हम दुनिया के अन्य देशों को भी रेलवे तकनीक और कोच निर्यात कर रहे हैं। यह नए भारत के बढ़ते सामर्थ्य का प्रतीक है।

माननीय प्रधानमंत्री जी ने देश के सामने वर्ष 2047 तक एक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का संकल्प रखा है। एक विकसित राष्ट्र बनने की पहली शर्त होती है, विश्वस्तरीय और निर्बाध इंफ्रास्ट्रक्चर।

जब हम बलटाना जैसे कस्बों और शहरों में रेलवे ओवरब्रिज या अंडरपास बनाते हैं, तो हम सीधे तौर पर ‘इज ऑफ लिविंग’ यानी जीवन को आसान बनाने का काम करते हैं। जब किसी क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधरती है, तो वहाँ व्यापार बढ़ता है, नए उद्योग आते हैं, रीयल एस्टेट को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। यह अंडरपास विकसित भारत की नींव में एक और मजबूत ईंट जोड़ने का काम करेगा।

आज जब हम इस परियोजना का शिलान्यास कर रहे हैं, तब हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विकास पर्यावरण-सम्मत हो। हमें स्वच्छता, हरित परिवहन और टिकाऊ विकास को प्राथमिकता देनी होगी। आधुनिक विकास वही है जो आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा करे।

महात्मा गांधी जी ने कहा था, “भारत का भविष्य उसके गांवों और आम जनजीवन में बसता है।”

आज मैं कहना चाहूँगा कि भारत का भविष्य उसके मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षित परिवहन और नागरिक सुविधाओं में भी निहित है।

मैं समझता हूं कि यह अंडरपास बन जाने से जीरकपुर और पंचकूला के बीच आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा। पर्यावरण को लाभ होगा, क्योंकि बंद फाटक पर गाड़ियों के खड़े रहने से होने वाला ईंधन का नुकसान और वायु प्रदूषण अब समाप्त हो जाएगा। स्थानीय व्यापार और बाजार को एक नई गति मिलेगी।

मैं रेलवे अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों से यह विशेष आग्रह करता हूँ कि इस परियोजना का काम तय समय सीमा के भीतर और उच्चतम गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि जनता को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

राष्ट्र निर्माण का यह महायज्ञ बिना किसी गतिरोध के चलता रहना चाहिए। विकास की इस यात्रा में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय जनता, सभी का सहयोग अनिवार्य है।

जाने-माने कवि की कुछ पंक्तियाँ आज के इस अवसर पर पूरी तरह सटीक बैठती हैं, 

‘‘रुके न जो, झुके न जो, वो राष्ट्र का जवान है,

विकास की डगर पर बढ़ता, ये मेरा हिन्दुस्तान है।’’

आइए, आज इस शिलान्यास समारोह के अवसर पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने सामूहिक प्रयासों से पंजाब को और हमारे पूरे देश को प्रगति के शिखर पर ले जाएंगे।

मैं एक बार फिर इस क्षेत्र के सभी नागरिकों को इस ऐतिहासिक सौगात के लिए बधाई देता हूँ और भारतीय रेल के सभी अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिंद!

जय भारत!